संपादकीय

दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय, 8 अगस्त : कश्मीर पर नफरतजीवियों का फैलाया जा रहा लावा
दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय, 8 अगस्त : कश्मीर पर नफरतजीवियों का फैलाया जा रहा लावा
Date : 08-Aug-2019

कश्मीर में मोदी सरकार ने जिस रफ्तार से जो कुछ किया है, वह सबके सामने है। अब उसके हो जाने के बाद अलग-अलग तबके अपने-अपने हिसाब से उसे देख रहे हैं। देश की दूसरी सबसे प्रमुख पार्टी, कांग्रेस में नेताओं में मतभेद दिख रहा है कि मोदी सरकार के 370 पर फैसले का कितना विरोध किया जाए, और कितना नहीं। दूसरी तरफ कश्मीर के भीतर आज संगीनों के साए में एक सन्नाटा दिख रहा है, और जाहिर है कि वहां के लोगों को अभी तो घरों के भीतर रखा गया है, बिना फोन और इंटरनेट के रखा गया है, इसलिए उनकी तुरंत कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आ रही है। सरकार ने अपनी तरफ से जनधारणा बदलने और बनाने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को कश्मीर भेजा है जो वहां आधा दर्जन चुनिंदा लोगों के साथ खड़े होकर कुछ खाते-पीते दिख रहे हैं, जिससे सरकार लोगों के बीच भरोसा कायम करते दिख रही है।

लेकिन इस बीच लिखने की एक वजह आज यह आन पड़ी है कि देश के तमाम कट्टर हिंदूवादी, आक्रामक राष्ट्रवादी, मुस्लिम-विरोधी, और पाकिस्तान-विरोधी जैसी ताकतें मोदी सरकार के फैसले पर खुशियां मनाने के साथ-साथ सोशल मीडिया पर जिस जुबान में कश्मीरियों के बारे में लिख रही हैं, उससे नफरत की खाई गहरी और चौड़ी होने के सिवाय और कुछ नहीं हो रहा है। जो धर्मांध और साम्प्रदायिक लोग मुस्लिम डिलीवरी बॉय के हाथ से आया हुआ डिब्बाबंद खाना भी लेने से मना करें, वे लोग भी आज कश्मीरी मुस्लिम लड़कियों से शादी की हसरतें निकाल रहे हैं, और कश्मीर में जमीन खरीदकर मकान बनाकर बसने की बातें कर रहे हैं। यह पूरा सिलसिला इस कदर हिंसक और अश्लील है कि मानो मोदी की फौज ने कोई दुश्मन देश जीत लिया हो, और फौज के हर सिपाही का अब यह हक है कि वह जीते हुए देश की लड़कियों पर कब्जा कर लें। आदमी की एक हिंसक सोच खुलकर सामने आ रही है कि कैसे दूसरे की जमीन और उनकी लड़कियों पर कब्जा किया जाए। यह लग ही नहीं रहा है कि ये लोग इसी कश्मीर को पाकिस्तान को देने के बजाय उसे चीर देने की बातें कर रहे थे। ऐसा लगता है कि इनके लिए कश्मीर महज जमीन का एक टुकड़ा है, और वहां के इंसानों में से उन्हें महज जवान लड़कियों की देह पसंद है।

ऐसी हमलावर सोच, और ऐसी हिंसक जुबान की नुमाइश इस देश को एक घटिया समाज से भरा हुआ साबित कर रही हैं, और इसके बारे में देश के बड़े-बड़े नेता, खासकर वे नेता जो कि कश्मीर का यह फैसला लेकर उस पर अमल कर रहे हैं, वे तमाम लोग चुप हैं। वे जब तक कुछ बोलते नहीं, तब तक इस देश में दंगाई सोच रखने वाले नफरतजीवी लोग हवा में इतना जहर घोल चुके रहेंगे कि बाद में उस कश्मीर में जाकर बसने वाले कश्मीरी पंडितों को उसका हिसाब चुकता करना होगा। आज कश्मीरी पंडितों में से जो लोग कश्मीर लौटकर वहां बसने की संभावना देखते हैं, वे लोग शांत हैं। लेकिन जिन लोगों को वहां कभी नहीं जाना है, वे कश्मीर को एक जमीन और एक देह की तरह देखकर अपनी हिंसा का लावा चारों तरफ फैला रहे हैं। यह वक्त है कि देश के बड़े नेता मुंह खोले, और ऐसे बकवासी मुंहों को बंद रखने की चेतावनी दें।
-सुनील कुमार

Related Post

Comments