विचार / लेख

कांवर यात्रा की महिमा
कांवर यात्रा की महिमा
Date : 10-Aug-2019

राजेंद्र चतुर्वेदी

गुरु, अपन कांवर यात्रा के घनघोर समर्थक हैं। अगर अपन की चले तो कांवर यात्रा केवल सावन के महीने में न हो, हमेशा चलती रहे। इसके बहुत फायदे हैं। किसी कार में आग लगाना, ट्रक को उलट-पलट देना, यातायात को बाधित करना कोई बड़ी समस्या नहीं है। इतने छोटे अपराध तो भारत जैसे बड़े देशों में होते रहते हैं। असल बात यह है कि किसी युवक को यह अहसास नहीं होना चाहिए कि वह बेरोजगार है। इस अहसास के बाद वह विद्रोही हो सकता है। हो सकता है कि वह वोट न देने का मन बना ले। 
कांवर यात्रा की बड़ी खूबसूरती यह है कि वह युवकों को उनकी समस्याओं का अहसास नहीं होने देती। न कपड़ों की चिंता, न भोजन की, न माता-पिता के ताने सुनने पड़ते हैं कि जाकर कोई काम-धाम क्यों नहीं ढूंढते। गुरु, अपन को लगता  है कि जिस महापुरुष ने कांवर यात्रा का आविष्कार किया होगा, वह बहुत दूरदर्शी होगा। उसे पता होगा कि भारत जब विकास करेगा, तो उसके सामने कौन कौन सी समस्याएं होंगी। प_ा चला गया समस्याओं का समाधान सुझाकर। उसी के बताये मार्ग पर चलकर युवकों ने धारण कर लिए पीले या भगवा रंग के कपड़े, कंधे पर लाद ली कांवर और कर लिया अपनी समस्याओं का समाधान। आत्मनिर्भरता का इससे बड़ा उदाहरण दुनिया के किसी भी देश के युवा पेश नहीं कर सकते। काम-धाम, पढऩा-लिखना, अपने अधिकारों के लिए सडक़ पर उतरना कांवड़ यात्रा के सामने दो कौड़ी की चीज है।
 अपन का सीना उस समय फूलकर 56 इंच से भी ज्यादा का हो जाता है, जब गांजे का सुट्टा लगाते, दारू की अद्दी पीते और भंग की तरंग में डूबे कांवरियों के किसी झुंड को देखते हैं। नाक से गांजे का धुआं निकल रहा हो और मुंह से बम-बम भोले का नाद तो अपन यूं फील करते हैं, जैसे साक्षात भोले हमारे सामने प्रकट हो गए हैं, इसीलिए अपन दिल से यही चाहते हैं कि कांवर यात्रा हमेशा चलती रहे। नेता कुछ और तो कर नहीं सकते, क्या वे कांवर यात्रा को भी बारहमासी नहीं बना सकते?

 

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