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बिलासपुर, 11 साल से जबड़ा नहीं खुलता था, अपोलो में सफल ऑपरेशन के बाद मरीज स्वस्थ, जबड़ा नहीं खुलने की बीमारी छत्तीसगढ़ में बढ़ती जा रही, कैंसर का खतरा-डॉ. सेन
बिलासपुर, 11 साल से जबड़ा नहीं खुलता था, अपोलो में सफल ऑपरेशन के बाद मरीज स्वस्थ, जबड़ा नहीं खुलने की बीमारी छत्तीसगढ़ में बढ़ती जा रही, कैंसर का खतरा-डॉ. सेन
Date : 13-Aug-2019

11 साल से जबड़ा नहीं खुलता था, अपोलो में सफल ऑपरेशन के बाद मरीज स्वस्थ 

जबड़ा नहीं खुलने की बीमारी छत्तीसगढ़ में बढ़ती जा रही, कैंसर का खतरा-डॉ. सेन

बिलासपुर, 13 अगस्त। अपोलो अस्पताल के चिकित्सकों ने एक ऐसे मरीज के जबड़ों को अलग कर मुंह खोलने में सफलता पाई है, जिसे 11 साल तक पाइप के सहारे भोजन लेना पड़ रहा था। यह मामला दुर्घटना के बाद किये गए गलत उपचार का है लेकिन गुटखा, तम्बाकू दबाकर रखने वाले लोगों को अक्सर इस व्याधि का सामना करना पड़ता है, जो अंतत: कैंसर का कारण बनता है। 

अपोलो अस्पताल में इसे लेकर एक पत्रकार वार्ता रखी गई। इसमें मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. सजल सेन ने छत्तीसगढ़ में जबड़ा बंद होने की गंभीर समस्या की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि पब्लिक हेल्थ फाउन्डेशन की ओर किये गए एक सर्वेक्षण से बताया गया है कि गुटखा, तम्बाकू आदि के चलते 36  प्रतिशत पुरुष और 42 प्रतिशत महिलाओं के जबड़े पूरी तरह नहीं खुल पाते। इससे न केवल आहार लेने में समस्या होती है बल्कि यह आगे चलकर कैंसर का रूप ले लेता है। ऐसे मामले छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ रहे हैं। समस्या लगातार बढ़ती जा रही है जिसे देखते हुए अपोलो अस्पताल में माह में एक दिन विशेष रूप से इसकी जांच के लिए शिविर लगाये जा रहे हैं। 

प्रेस वार्ता में उपस्थित डेंटल एवं फेशियल सर्जन डॉ. विनय खरसन ने बताया कि सोढ़ी (सीपत) के मन्नूलाल कोसले को तीन माह पहले अपोलो हास्पिटल लाया गया था। उसके दोनों जबड़े आपस में इस तरह से जुड़े हुए थे कि मुंह खुलना ही मुश्किल था। यह स्थिति 11 साल से थी। दरअसल तब एक सडक़ दुर्घटना में उसका जबड़ा टूट गया था। जैसा कि मरीज ने बताया कि रायपुर के एक सरकारी अस्पताल में उसका इलाज किया गया। तब डॉक्टर ने ध्यान नहीं दिया और उसके सहायक ने ऊपर नीचे दोनों जबड़ों को एक साथ तार बांधकर सील दिया। इससे उसका मुंह ही बंद हो गया। तीन माह बाद उसके जबड़े नहीं खुले तो वह वहां दुबारा गया और मुंह नहीं खुलने की अपनी परेशानी के बारे में बताया। वहां डॉक्टरों ने कहा कि अब उसका उपचार नहीं हो सकता, क्योंकि इस दौरान ऊपर नीचे दोनों जबड़े एक दूसरे से चिपक गये हैं। इस वजह से मरीज कोसले को पाइप के सहारे भोजन दिया जा रहा था। कई अस्पतालों में भटकने के बाद उसने तीन माह पहले अपोलो अस्पताल में जांच कराई। डॉ. खरसन ने बताया कि यह केस उन्हें चुनौतीपूर्ण लगा। मरीज के दोनों ओर जबड़ों का एक साथ ऑपरेशन करना था। कान के सामने सिर की तरफ कुछ संवेदनशील नसें गुजरती हैं, जिसको नुकसान पहुंचने की आशंका थी। इससे मरीज को पक्षाघात भी हो सकता था। हालांकि सतर्कतापूर्वक यह ऑपरेशन सफलता के साथ पूरा कर लिया गया। 

उपचार के बाद स्वस्थ हुए मन्नूलाल ने बताया कि वह कई अस्पतालों का जवाब सुनकर निराश हो चुका था लेकिन अपोलो ने उसे अब पूरी तरह ठीक कर दिया जिससे वे अपने हाथों से खुद खाना खा रहे हैं और पूरी तरह मुंह खुल रहा है। डॉ. सरखन ने बताया कि एक व्यक्ति का मुंह 30 मिलीमीटर या तीन फिंगर के घुसने लायक खुलना चाहिए। यदि इससे कम खुल रहा है तो इसका मतलब है जबड़े जाम हो रहे हैं, जिससे आगे चलकर मुंह का कैंसर हो सकता है। पान-गुटखा-तम्बाकू खाने से ज्यादा खतरनाक है उसे मुंह के भीतर दबाकर रखना। कई लोग इसी हालत में सो भी जाते हैं, जो कैंसर का कारण बनता है। दरअसल मुंह के भीतर का हिस्सा बहुत मुलायम होता है। पान गुटखा, यहां तक कि लौंग इलायची भी यदि रात भर दबाकर सोएं तो इसका असर जबड़ों पर और भीतर की त्वचा पर पड़ता है। जो पहले अल्सर और बाद में कैंसर का कारण बनता है। 

 

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