संपादकीय

दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय, 27 अगस्त : मारक शक्ति के रहते भारत को क्या जरूरत परमाणु शक्ति की?
दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय, 27 अगस्त : मारक शक्ति के रहते भारत को क्या जरूरत परमाणु शक्ति की?
Date : 27-Aug-2019

देश के पहले योगीराज में जुर्म उसी रफ्तार से रिकॉर्ड तोड़ रहा है जिस रफ्तार से विराट कोहली। अब तक किसी और राज्य में कोई योगी मुख्यमंत्री हुआ नहीं था, और उत्तरप्रदेश से तो सीएम ने केरल को नसीहत दी थी कि वह राज चलाने का तरीका यहां सीखकर जाए। ऐसे उत्तरप्रदेश में ताजा भीड़-हिंसा बच्चा चुराने की अफवाह को लेकर है जो कि जगह-जगह हो रही है। यह अफवाह झारखंड और बिहार से होते हुए अब उत्तरप्रदेश में पूरी रफ्तार से पहुंची है। पिछले राज्यों में इस अफवाह के चलते गरीबों और अल्पसंख्यकों को, विक्षिप्त या मानसिक विचलित लोगों को, कमजोर और बेसहारा लोगों को मारा गया था। भीड़-हिंसा अकसर कमजोर लोगों के साथ ही होती है और अमूमन भीड़ के हत्यारे अदालतों से बच निकलते हैं। ऐसे में जाहिर है कि देश की सोच अगर अंधविश्वास पर टिकी हुई हो, तो भीड़ का विश्वास जुटाना बड़ा आसान हो जाता है। 

दो घटनाओं का अगर जाहिर तौर पर एक-दूसरे से रिश्ता दिखता नहीं, तो उनका रिश्ता न हो ऐेसा भी नहीं रहता। अब हिंदुस्तान में इंसानों की जातियों के पीछे की बुनियाद में कौन सा देशी या विदेशी डीएनए है इसकी बात अगर खुलासे से की जाए, तो देश में दंगा होने से रोका नहीं जा सकेगा। जब लोग झूठ और अंधविश्वास पर भरोसा करने को देशप्रेम और देशभक्ति से जोड़ लेते हैं, और जब तर्कसंगत या न्यायपूर्ण बात देश के साथ गद्दारी मान ली जाए, तो ऐसी उपजाऊ जमीन पर अंधविश्वास-आधारित हिंसा की फसल लहलहाने लगती है। आज देश में सोचे-समझे तरीके से एक साजिश के तहत जनता की वैज्ञानिक सोच को खत्म किया जा रहा है ताकि वे कई सदी पहले के, या कई हजार बरस पहले के एक नामौजूद इतिहास पर भरोसा कर सकें, उस पर गर्व कर सकें। ऐसे माहौल में गोबर और गोमूत्र को लेकर अंधविश्वास फैलाया जा रहा है, और दुनिया के हर विज्ञान की खोज हिंदुस्तान के पौराणिक काल में होने का भरोसा लोगों को दिलाया जा रहा है। जब वैज्ञानिक सोच की इस अंदाज में भीड़त्या की जा रही है, तो उसके मालिक लहूलुहान इंसान भला क्या खाकर, कब तक अंधविश्वासों और अफवाहों के गुलाम होने से बच सकेंगे? नतीजा यह है कि हजारों बरस पहले हिंदुस्तानी समाज में जो गरीब, विकलांग, महिलाएं, बूढ़े और बीमार, विक्षिप्त और विचलित तिरस्कार के लायक माने जाते थे, वे आज मारे जा रहे हैं। भीड़ ने इनमें आज के माहौल में कमजोर हो चुके अल्पसंख्यकों को भी जोड़ लिया है, और दलित-आदिवासी तो हमेशा से ही कमजोर रहे ही हैं। ऐसे में चाहे बच्चा चोरी की अफवाह हो, चाहे किसी धर्म में पवित्र या अपवित्र माने जाने वाले जानवर को मारकर किसी जगह पर फेंकने की बात हो, या गाय को कसाईखाने ले जाने की बात हो, गोमांस रखने की बात हो, इनमें से किसी भी किस्म की अफवाह को छांटकर या गढ़कर, उसे वॉट्सऐप जैसे नए भोंपुओं से चारों तरफ फैलाकर किसी भी किस्म की हिंसा फैलाई जा सकती है, फैलाई जा रही है।

जब देश की सबसे बड़ी और सबसे ताकतवर सत्तारूढ़ पार्टी की सांसद साध्वी प्रज्ञा अपनी पार्टी के लंबे समय से बीमार चल रहे नेताओं के गुजरने पर उन मौतों की तोहमत विपक्ष पर लगाती हैं कि मारक शक्ति का प्रयोग करके भाजपा नेताओं को मारा जा रहा है, तो जाहिर है कि देश में अंधविश्वास तो बढ़ेगा ही। लोगों को याद होगा कि इन्हीं साध्वी प्रज्ञा ने पाकिस्तानी आतंकी हमलावरों का मुकाबला करते हुए शहीद होने वाले पुलिस अफसर के लिए कहा था- ''मैंने हेमंत करकरे से कहा था कि तुमने मुझे इतनी यातनाएं दीं कि तेरा सर्वनाश होगा। गिरफ्तारी के ठीक सवा महीने बाद आतंकियों ने उनका अंत कर दिया। मैंने कहा तेरा सर्वनाश होगा। ठीक सवा महीने में सूतक लगता है। जब किसी के यहां मृत्यु होती है या जन्म होता है। जिस दिन मैं गई थी उस दिन इसके सूतक लग गया था। ठीक सवा महीने में जिस दिन इसको आतंकवादियों ने मारा उस दिन सूतक का अंत हो गया।''

इस देश में इसके बाद ज्ञान और विज्ञान की क्या जरूरत है? हिंदुस्तानी फौजों को भी मारक मंत्र सीखना चाहिए ताकि चीन-पाकिस्तान को उसी से मार सकें, और हथियारों पर मोटा खर्च बंद हो। ऐसा हो जाने पर अभी हिंदुस्तानी सरकारी हथियार कारखानों में चली हड़ताल तुड़वाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी, और सरकार का खासा खर्च बचेगा।
-सुनील कुमार

Related Post

Comments