विशेष रिपोर्ट

एमजीएम ने बैंक लोन के लिए 50,000 करोड़ के घोटाले वाली कंपनी को सहयोगी बताया था!
एमजीएम ने बैंक लोन के लिए 50,000 करोड़ के घोटाले वाली कंपनी को सहयोगी बताया था!
Date : 07-Sep-2019

एमजीएम ने बैंक लोन के लिए 50,000 करोड़ के घोटाले वाली कंपनी को सहयोगी बताया था!

रायपुर, 7 सितंबर (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ के डीजी स्तर के निलंबित अधिकारी मुकेश गुप्ता को उनके खिलाफ दर्ज तीन एफआईआर पर सुप्रीम कोर्ट से स्थगन की राहत तो मिल गई है, लेकिन उनके खिलाफ चल रही जांच में अब तक हासिल कागजात उनके लिए आगे चलकर दिक्कत खड़ी करने वाले हैं। सुप्रीम कोर्ट का स्थगन अब तक दर्ज तीन एफआईआर पर ही है, लेकिन कई और मामलों की जांच चल रही है जिसमें उनकी अगुवाई में रायपुर में बन रहे एक बहुत बड़े अस्पताल का मामला भी है।

मुकेश गुप्ता ने छत्तीसगढ़ राज्य बनने से लेकर कुछ महीने पहले तक इस अस्पताल के काम को बहुत आगे बढ़ाया था। उनकी दूसरी पत्नी मिक्की की मौत की जांच की मांग मिक्की की मां और भाई बरसों से करते आ रहे थे, और अब भूपेश सरकार ने यह जांच शुरू करवाई है। मिक्की की स्मृति में बने एक बहुत बड़े आंखों के अस्पताल एमजीएम को लेकर यह जांच चल रही है कि उसके लिए इतने बड़े-बड़े दान कैसे जुटाए गए, और ट्रस्ट का काम सरकारी नियमों के मुताबिक चल रहा है या नहीं। इसे लेकर ट्रस्ट नियंत्रित करने वाले प्रशासनिक अधिकारी और आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो, दोनों की ओर से कागजात जुटाए जा रहे हैं, और बैंकों से, ट्रस्टियों से तरह-तरह के कागज अधिकारियों को मिले हैं।

इन कागजों में एक कागज आज अचानक भारी सनसनीखेज साबित हो रहा है जिसमें एमजीएम ट्रस्ट ने अस्पताल के लिए बैंक लोन लेते हुए ट्रस्ट के महत्वपूर्ण सहयोगी संस्थानों के नाम की एक लंबी लिस्ट बैंक को दी थी। कई बरस पहले बैंक में जमा किए गए बहुत से लोन-कागजातों में ऐसी लिस्ट में प्रदेश की 66 बड़ी कंपनियों, फर्मों, और लोगों के नाम हैं जो कि जनता की जानकारी में अरबपति लोग हैं।

लेकिन इनमें प्रदेश के बाहर की एक ऐसी कंपनी को भी एमजीएम ने अपना महत्वपूर्ण एसोसिएट बताया है जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जांच चल रही है, और जिसके सारे डायरेक्टर आज जेल में हैं। पीएसीएल इंडिया लिमिटेड नाम की दिल्ली स्थित इस कंपनी ने निवेशकों से देश भर में लगभग 50 हजार करोड़ रूपए इक_े कर लिए थे और अब दीवाला निकाल देने के बाद सरकार इसकी संपत्तियों को जब्त करके पूंजीनिवेशकों को उनकी लगाई गई रकम का कुछ हिस्सा देने की कोशिश कर रही है। अभी कुछ महीने पहले छत्तीसगढ़ में भी सरकार ने अपने छोटे-छोटे दफ्तरों के स्तर पर भी ऐसे लुटे हुए निवेशकों के दावा फॉर्म भरवाने का काम किया है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट की बनाई हुई जस्टिस लोढा कमेटी की निगरानी में इस कंपनी की जब्त संपत्तियों से पूंजीनिवेशकों की रकम निकालने की कोशिश हो रही है। सुप्रीम कोर्ट ने पाया है कि पीएसीएल नाम की इस कंपनी ने निवेशकों के धन को लूटने के लिए ही ऐसी योजना बनाई थी।

अब छत्तीसगढ़ में एमजीएम ट्रस्ट के बैंक में जमा किए हुए कागजातों में इस कंपनी का नाम इम्पॉर्टेंट एसोसिएट के रूप में निकलने से मुकेश गुप्ता के लिए एक नई परेशानी खड़ी हो सकती है। इस ट्रस्ट में मुकेश गुप्ता खुद ट्रस्टी तो नहीं हैं, लेकिन सारे ट्रस्टी उनके एकदम करीबी लोग हैं, और इस अस्पताल को उन्हीं के नाम से जाना भी जाता है। इसके साथ-साथ बैंक कर्ज के कागजात में स्टेट बैंक ने अपने अंदरुनी कागजातों में इस कर्ज को भरोसेमंद बताने के तथ्यों और तर्कों में मुकेश गुप्ता को इसके पीछे की मुख्य ड्राइविंग फोर्स भी लिखा है। बैंक ने मुकेश गुप्ता से हुई बातचीत का जिक्र भी इस लोन के सिलसिले में किया है, और उनकी प्रभावशाली और महत्वपूर्ण भूमिका इस ट्रस्ट के पीछे बताई है।

जिन 66 कंपनियों, फर्मों, और लोगों को मिक्की मेमोरियल ट्रस्ट के इम्पॉर्टेंट एसोसिएट बताया गया है उनमें केन्द्र सरकार की एक सबसे बड़ी पब्लिक सेक्टर कंपनी एसईसीएल (साऊथ इस्टर्न कोल लिमिटेड), का नाम भी है। इस लिस्ट में आधा दर्जन दूसरे ट्रस्टों के नाम भी हैं।

 

इनके नामों का उपयोग ट्रस्ट के बंैक लोन के लिए किस तरह किया गया है इसकी जानकारी जांच एजेंसियां बैंकों से निकालने की कोशिश कर रही हैं। एक बड़े जांच अफसर ने ‘छत्तीसगढ़’ को मिले कुछ कागजातों को सही बताते हुए कहा है कि बैंक अफसर जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं, और इस ट्रस्ट के नाम से खोले और बंद किए गए दर्जनों बैंक खातों की जानकारी देने में आनाकानी कर रहे हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि इस जांच पर किसी अदालत की कोई रोक नहीं है, और अगर जरूरत पड़ी तो बैंक की संबंधित ब्रांच पर छापा मारकर वहां से कागजात जब्त किए जाएंगे।

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