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जब भारत के दो राज्यों के पुलिस बल ऐसे  भिड़े कि 100 लोगों की जानें चली गईं
जब भारत के दो राज्यों के पुलिस बल ऐसे भिड़े कि 100 लोगों की जानें चली गईं
Date : 09-Sep-2019

पवन वर्मा

असम देश का अकेला ऐसा राज्य है जिसका अपने ज्यादातर पड़ोसी राज्यों से सीमा विवाद है। इन विवादों का एक बुनियादी पहलू यह है कि ये सभी असम से काटकर ही बनाए गए हैं। 1972 में मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश को असम से अलग कर केंद्र-शासित राज्यों का दर्जा दिया गया था। इसी साल मेघालय को भी पूर्ण राज्य बनाया गया था। इस कड़ी में नागालैंड पहला राज्य था जिसे असम से अलग किया गया। यही वह राज्य भी है जिसके साथ असम का सीमा विवाद कई बार हिंसक संघर्षों के कारण चर्चा में रहा है।
नागालैंड का गठन 1963 में हुआ था। तत्कालीन नागालैंड सरकार का दावा था कि असम जिन नगा पहाडिय़ों के क्षेत्रों को मिलाकर बना है, उसका एक बड़ा हिस्सा उसे नहीं दिया। इस दावे के पीछे तर्क यह था कि अंग्रेजों के असम पर शासन से पहले नागा आबादी एक विस्तृत भू-भाग में रहा करती थी और वह सारा इलाका नए राज्य - नागालैंड  में शामिल होना चाहिए।
उधर असम सरकार का कहना था कि संवैधानिक रूप से जो सीमा तय की गई है, दोनों राज्यों को उसका सम्मान करना चाहिए। हालांकि ऐसा हुआ नहीं। नागालैंड के गठन के साथ ही असम के सीमावर्ती जिलों (जिनके कुछ इलाकों पर नागालैंड अपना अधिकार जताता है) में नगा विद्रोहियों द्वारा छिटपुट हमलों की घटनाएं होने लगीं।
इस दौरान केंद्र सरकार ने कई बार दोनों राज्यों को बातचीत से सीमा विवाद हल करने के लिए कहा। लेकिन जब इसका कोई समाधान नहीं निकला तो 1971 में इस मसले को सुलझाने की जिम्मेदारी केवीके सुंदरम को दे दी गई। सुंदरम तब विधि आयोग के अध्यक्ष थे। इसके बाद दोनों राज्यों के बीच चार अतंरिम समझौते हुए जिनके चलते कुछ समय तक सीमा पर शांति रही। लेकिन 1979 की एक घटना ने इस समझौतों को पूरी तरह महत्वहीन बना दिया। 
उस साल नगा विद्रोहियों ने असम के गोलाघाट जिले के कुछ गांवों में हमला कर 60 लोगों की हत्या कर दी थी। इसकी वजह से बिगड़े माहौल के चलते उस इलाके के पच्चीस हजार लोगों को वहां से पलायन करना पड़ा। केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बाद यहां मुश्किल से शांति स्थापित हुई ही थी कि 1985 में ठीक ऐसी ही एक और घटना हो गई।
इस बार गोलाघाट के मेरापानी में असम पुलिस की एक चौकी पर हमला किया गया था। कहा जाता है कि यह हमला नागालैंड पुलिस के सिपाहियों ने किया था। उधर नागालैंड पुलिस का कहना था कि उनके सिपाहियों पर असम के पुलिसकर्मियों ने फायरिंग की थी। भारत के इतिहास में शायद यह पहली घटना थी जहां दो राज्यों के पुलिस बलों के बीच मुठभेड़ हुई थी। इसमें तकरीबन 100 लोग मारे गए थे जिनमें से 28 असम के पुलिसकर्मी थे।
इस घटना के बाद 1988 में असम सरकार ने सीमा विवाद के निपटारे के लिए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की थी। इसके 18 साल बाद 2006 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद दोनों राज्यों की सीमा निर्धारित करने के लिए एक तीन सदस्यीय आयोग बनाया गया। इसके अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के एक रिटायर्ड जज थे। यह आयोग अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप चुका है। लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने आज तक इस मामले में कोई आखिरी फैसला नहीं सुनाया है। (सत्याग्रह)

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