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नान जनहित याचिकाओं की सुनवाई के लिए हाईकोर्ट ने बनाई नई बेंच, सुनवाई तय
नान जनहित याचिकाओं की सुनवाई के लिए हाईकोर्ट ने बनाई नई बेंच, सुनवाई तय
Date : 10-Sep-2019

नान जनहित याचिकाओं की सुनवाई के लिए हाईकोर्ट ने बनाई नई बेंच, सुनवाई तय 

रायपुर/बिलासपुर, 10 सितंबर (छत्तीसगढ़ )। बहुचर्चित नागरिक आपूर्ति निगम घोटाला मामले की सुनवाई के लिए हाईकोर्ट में नई बैंच बनाई गई है। कोर्ट आधा दर्जन जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। बताया गया कि याचिकाओं में पांच घोटाले की जांच की मांग को लेकर दायर की गई थी। जबकि एक याचिका नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक की है, जिसमें एसआईटी जांच रोकने की मांग की गई है। सुनवाई के लिए गुरूवार और शुक्रवार का दिन नियत किया गया है। 

जस्टिस पी सैमकोशी और जस्टिस आरपी शर्मा की पीठ नागरिक आपूर्ति निगम घोटाला प्रकरण की सुनवाई करेगी। एक बार में एक याचिकाकर्ता की याचिका पर सुनवाई होगी। 12 तारीख को सबसे पहले हमर संगवारी संस्था की याचिका पर सुनवाई होगी। बाकी अन्य याचिका  सुदीप श्रीवास्तव, राज्य वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष वीरेन्द्र पाण्डेय, मिड डे मिरर व अनिल टुटेजा और नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक की है। 

याचिकाकर्ताओं में से श्री कौशिक को छोडक़र बाकी ने ईओडब्ल्यू की पिछली सरकार के कार्यकाल में जांच पर सवाल खड़े किए थे और इस घोटाले की सीबीआई अथवा एसआईटी जांच की मांग की गई थी। सरकार बदलने के बाद घोटाले की जांच के लिए एसआईटी बनाई गई है। मामले की जांच चल रही है। प्रकरण में कई नए खुलासे भी हुए हैं। इससे परे नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने नान घोटाले की जांच के लिए एसआईटी के गठन पर सवाल उठाए हैं और उन्होंने इसके गठन को ही चुनौती दी है। 

मिड डे मिरर संस्था ने फर्जी राशन कार्ड के जरिए घोटाले का आरोप लगाया था। इस मामले में भी सुनवाई होगी। बताया गया कि कोर्ट ने पहले डे-टू-डे 26 अगस्त से 2 सितंबर तक सीजे के डिवीजन बैंच में इस मामले की सुनवाई निर्धारित की थी।

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने कहा था कि मामले से संबंधित याचिकाकर्ता जो भी दस्तावेज सबमिट करना चाहे 14 अगस्त तक कर दें। मगर, प्रकरण से जुड़े दस्तावेज ट्रांसलेट करके कोर्ट को उपलब्ध नहीं कराया जा सका। इसको लेकर याचिकाकर्ताओं ने माफी मांगी। इसके बाद नई बैंच को सुनवाई का जिम्मा सौंपा गया है। 

आरोप है कि छत्तीसगढ़ में राइस मिलरों से लाखों क्विंटल घटिया चावल लिया गया और इसके बदले करोड़ों रुपये की रिश्वतखोरी की गई। इसी तरह नागरिक आपूर्ति निगम के ट्रांसपोर्टेशन में भी भारी घोटाला किया गया। इस मामले में 27 लोगों के खिलाफ मामला दर्र्ज किया गया था। जिनमें से 16 के खिलाफ 15 जून 2015 को अभियोग पत्र पेश किया गया था। फिलहाल सभी आरोपी जमानत पर हैं। 

 

 

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