संपादकीय

दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय, 20 अक्टूबर :  फिट इंडिया के लिए कई  पहलुओं पर सोचना जरूरी
दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय, 20 अक्टूबर : फिट इंडिया के लिए कई पहलुओं पर सोचना जरूरी
Date : 20-Oct-2019

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में फिट इंडिया का एक नारा दिया है जिसमें लोगों की सेहत बेहतर बनाने के लिए अभियान छेडऩे की बात है। जब देश के लोगों की सेहत के बारे में सोचा जाता है, तो लोगों का रहन-सहन, शहरी आवाजाही, हवा का प्रदूषण, लोगों का खानपान, और जीवनशैली, ऐसी बहुत सी बातें सूझती हैं जिनमें बेहतरी की जरूरत है, और हिंदुस्तान को फिट बनाने के लिए ऐसी कई बिखरी-बिखरी बातों पर काम करने की जरूरत है।

आज हिंदुस्तान के एयरपोर्ट और रेल्वे स्टेशनों को देखें, तो वहां खाने-पीने की अधिक से अधिक चीजें ऐसी मिलती हैं जिनसे सेहत खराब होती है। कारखानों में बने हुए सामानों में घी-मक्खन या तेल भरा रहता है, शक्कर और नमक जरूरत से ज्यादा रहते हैं, और मैदा भरा रहता है। कुल मिलाकर सेहत के लिए खराब सामान ही अधिक मिलते हैं। कोई यह सोचे कि किसी एयरपोर्ट पर फल खरीदकर खाया जाए, या बहुत सादा खाना खाया जाए, तो वह न एयरपोर्ट पर मुमकिन है, और न ही प्लेन में। कमोबेश ऐसा ही हाल रेल्वे स्टेशनों और टे्रन के भीतर कर दिया गया है जहां खानपान का ठेका दे दिया जाता है, और कोई भी सादी चीज रखकर ठेकेदार अपना नुकसान करना नहीं चाहते।

लेकिन बात महज सफर तक सीमित नहीं है, घर के बाहर खाने जाएं तो रेस्त्रां में कोई भी सामान आधा प्लेट नहीं मिलता, और जब लोगों की मेज पर जरूरत से अधिक सामान आ जाता है, जिसका भुगतान भी करना है, तो लोग उसे खा-पीकर खत्म करते हैं, और बदन का नुकसान करते हैं। आज किसी भी रेस्त्रां में फलाहार जैसा कोई विकल्प नहीं रखा जाता क्योंकि पचीस-पचास रुपये के फल को आखिर कितने दाम पर बेचा जाएगा? और तो और साधारण कमाई वाले लोगों के लिए जो इंडियन कॉफी हाऊस चलते हैं, वहां पर भी एक दोसा इतना बड़ा ही मिलता है कि उसे खत्म करने के लिए एक हट्टे-कट्टे इंसान की जरूरत पड़ती है। कई बरसों से यह चर्चा चल रही है कि रेस्त्रां में आधा प्लेट खाना भी मिलना चाहिए ताकि लोग अपनी भूख जितना खाएं, अपने भुगतान जितना नहीं, लेकिन ऐसा कोई नियम आजतक बन नहीं पाया है।
अभी दुनिया की सेहत का एक अंतरराष्ट्रीय सर्वे सामने आया है जिसके शुरू के पचास से अधिक देशों को देखें, तो उसमें हिंदुस्तान का कहीं नाम भी नहीं है। पूरी लिस्ट दिखी नहीं, इसलिए पचास के बाद भी हिंदुस्तान कहां है यह पता नहीं। एक तरफ तो यह देश प्राकृतिक जीवनशैली, प्राकृतिक चिकित्सा, योग पर आधारित जीवन, और आयुर्वेद जैसी बातों पर गर्व करता है, लेकिन दूसरी तरफ इसकी सेहत का हाल बहुत खराब है। भारत में डायबिटीज के मरीज अंधाधुंध रफ्तार से बढ़ते जा रहे हैं, लोगों की मानसिक सेहत बहुत बुरी नफरत और हिंसा से भरती चली जा रही है, और शहरों का प्रदूषण लोगों की जान ले रहा है, चारों तरफ तंबाकू और गुटखा से मौतें बढ़ रहीं हैं। शारीरिक से लेकर मानसिक स्वास्थ्य तक गड़बड़ है और निजी सेहत से लेकर सामाजिक और सामुदायिक सेहत खतरे मेें है। इसके तमाम पहलुओं पर गंभीरता से सोचने-विचारने की जरूरत है।
-सुनील कुमार

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