विशेष रिपोर्ट

मनेन्द्रगढ़, आजादी के 70 वर्षों बाद भी बिजली आज तक नहीं, बिजली के अभाव में कोई भी अपनी बेटी देने के लिए तैयार नहीं
मनेन्द्रगढ़, आजादी के 70 वर्षों बाद भी बिजली आज तक नहीं, बिजली के अभाव में कोई भी अपनी बेटी देने के लिए तैयार नहीं
Date : 12-Jan-2020

आजादी के 70 वर्षों बाद भी बिजली आज तक नहीं, बिजली के अभाव में कोई भी अपनी बेटी देने के लिए तैयार नहीं 

मनेन्द्रगढ़, 12 जनवरी (छत्तीसगढ़)। कोरिया जिले के मनेन्द्रगढ़ विकासखंड में एक गांव ऐसा है जहां आजादी के 70 वर्षों बाद भी बिजली आज तक नहीं पहुंच सकी है। गांव अंधकार में डूबा हुआ है। सडक़ और पानी की भी व्यवस्था नहीं है जिसकी सजा अब यहां के विवाह योग्य युवकों को भुगतनी पड़ रही है, क्योंकि बिजली के अभाव में कोई भी यहां अपनी बेटी देने के लिए तैयार नहीं हो रहा है। 

सविप्रा उपाध्यक्ष गुलाब कमरो के संज्ञान में यह आते ही उन्होंने कहा कि गांव में शहनाई बजेगी। इसके लिए आचार संहिता समाप्त होते ही गांव में बिजली, पानी और सडक़ की समस्या शीघ्र दूर किए जाने कारगर प्रयास किए जाएंगे। 

मनेंद्रगढ़ तहसील से लगभग दस किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत खैरबना स्थित है। इस गांव के बांधपारा इलाके में लगभग 25 घर हैं जहां करीब डेढ़ सौ की आबादी है जिसमें ज्यादातर आदिवासी उरांव जाति के हैं। बांधपारा में आज तक बिजली नहीं पहुंची है। ग्रामीणों को केरोसिन भी नहीं मिलता है। बिजली के अभाव ने यहां के लोगों की दिनचर्या ही बदल कर रख दी है। शाम होने से पहले ही लोग भोजन-पानी की तैयारी शुरू कर देते हैं वहीं बच्चों की पढ़ाई पर भी इसका असर पड़ता रहा है, लेकिन अब जो परेशानी सामने आई है उससे गांव में रहने वाले कई माता-पिता की नींद उड़ चली है। गांव में सडक़, बिजली, पानी की सुविधा नहीं होने से कोई भी अपनी बेटी का विवाह इस गांव में नहीं करना चाह रहा। 

‘छत्तीसगढ़’ ने जब गांव का दौरा किया तो श्यामवती रामबाई, बिराजू, छोटेलाल, रामचरण, धनीराम, रामगोपाल, राजाराम, रमेश, रामप्रकाश, नीराबाई, पुष्पा सहित कई ग्रामीण जमा हो गए और गांव में बिजली, पानी, सडक़ की कमी से होने वाली परेशानियां बयां करने लगे। इस बीच सुशीला नामक एक महिला ने अपनी पीड़ा बयां करते हुए कहा कि वह अपने बेटे की शादी का रिश्ता लेकर सूरजपुर जिले के फूलपुर गांव गई हुई थी जहां लडक़ी वालों ने यह कहते हुए रिश्ता करने से इंकार कर दिया कि जिस गांव में सडक़, बिजली, पानी नहीं है वहां हम अपनी बेटी नहीं देंगे। उसने कहा कि यह सुनकर उसे गहरा सदमा पहुंचा है। तिजिया नामक महिला ने कहा कि वह भी इस बात से चिंतित है कि जरूरी सुविधाएं  नहीं होने की वजह से आखिर हमारे गांव में कौन अपनी बेटी देगा। वहीं अन्य ग्रामीणों ने कहा कि आदिवासियों का गांव है, हमारा विकास हो, इसकी चिंता किसे है। अक्सर चुनाव के समय बड़े नेता आते हैं और झूठे आश्वासन देकर यहां से चले जाते हैं। 

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