संपादकीय

दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय, 07 फरवरी : दूसरों की मुसीबत देख  अपनी तैयारी टटोल लें
दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय, 07 फरवरी : दूसरों की मुसीबत देख अपनी तैयारी टटोल लें
Date : 07-Feb-2020

दूसरों की मुसीबत देख 
अपनी तैयारी टटोल लें

चीन में फैले, और वहां से बाकी कई देशों तक पहुंचे कोरोना वायरस के खतरे को सबसे पहले सामने रखने वाले चीनी डॉक्टर को पुलिस ने धमकी देकर चुप कराया था। लेकिन उसी की बात कुछ हफ्तों के भीतर सही निकली, और इस बीमारी का इलाज करते-करते वह डॉक्टर भी कल मर गया। अब तक की चीनी खबरों के मुताबिक सैकड़ों लोग इस वायरस से मारे जा चुके हैं, लेकिन चीन में खबरों में सरकार की जैसी फौलादी पकड़ रहती है, उससे लगता है कि यह गिनती कितनी भी हो सकती है। न भी हो तो भी चीन की अर्थव्यवस्था को इससे एक बड़ा झटका लगा है, और दुनिया के कई दूसरे देशों में जहां पर चीन से आए हुए पुर्जों और दूसरे सामानों से उद्योग-व्यापार चलते हैं, उन सबको भी एक झटका लगा है जो कि अभी तक तो थमा भी नहीं है। अभी कोई आसार नहीं दिख रहे कि चीन और बाकी देशों में इस वायरस का कहर कब तक थमेगा, कब तक सरकारों पर अचानक आया हुआ एक बड़ा आर्थिक बोझ हटेगा, और कब कारोबार पटरी पर लौटेगा। यह सब कुछ अभी बहुत अनिश्चित है, और यह अनिश्चितता बाकी दुनिया को ऐसे किसी बड़े खतरे की तरफ से आगाह करने वाली होनी चाहिए। 

हिन्दुस्तान आज ऐसी बुरी मंदी का शिकार है कि विश्व बैंक की प्रमुख अर्थशास्त्री का यह कहना है कि आज की वैश्विक मंदी के पीछे हिन्दुस्तान की मंदी एक बड़ा कारण है। यह बात हिन्दुस्तान के महत्व को बताने वाली तो है, लेकिन किसी खुशी की बात नहीं है। ऐसी मंदी के बीच चीन से कारोबार बहुत बुरी तरह खराब हुआ है क्योंकि लोगों की आवाजाही ही रूक गई है। हिन्दुस्तान से परे भी दुनिया का शायद ही कोई ऐसा देश होगा जहां पर चीन से कारोबार न हो, और शायद ही कोई ऐसा देश होगा जिससे हिन्दुस्तान का कारोबार न हो। इसलिए कोरोना वायरस का जितना असर इंसानी सेहत पर पड़ा है, उससे अधिक असर कारोबार की सेहत पर भी पड़ा है, और इन दोनों वजहों से दुनिया भर में एक बड़ा आर्थिक बोझ भी पड़ा है। अब बाकी देशों को भी, और हिन्दुस्तान को भी यह सोचना चाहिए कि इस किस्म की प्राकृतिक या मानव निर्मित आपदा के आने पर उसके खतरे, और उससे नुकसान, क्या इसके लिए देश तैयार है? 

लोगों को याद होगा कि 25 बरस पहले भोपाल में यूनियन कार्बाइड के कारखाने से गैस रिसी थी, हजारों लोग आनन-फानन मारे गए थे, और लाखों लोगों के बदन का इतना नुकसान हुआ था कि न सिर्फ वे अपनी पूरी जिंदगी इस जहर का शिकार रहे, बल्कि उस वक्त कोख में पल रहे बच्चों की जिंदगी भी बर्बाद हो गई। चौथाई सदी गुजर गई लेकिन दुनिया के इस सबसे बड़े औद्योगिक हादसे से भोपाल की जिंदगी अब तक उबर नहीं पाई, और उसका नुकसान कई पीढिय़ों तक जारी रहेगा। अब यह वायरस एक और चेतावनी है कि चीन जैसा विकसित देश भी इस वायरस से बचाव के लिए जरूरत के लायक मास्क नहीं बना पाया, और लोग तरह-तरह की चीजों से मुंह ढंककर काम कर रहे हैं। भारत जैसा देश तो किसी भी बड़ी त्रासदी या आपदा के लिए तैयार नहीं रहता, और यहां पर ऐसा कुछ हो जाए, तो गरीबी के बीच, अभाव और बेबसी के बीच यहां के लोग किस तरह मुसीबत से जूझ पाएंगे? चीन को लेकर तो आज अनगिनत तस्वीरें और वीडियो चारों तरफ फैल रहे हैं कि वहां की सरकार ने किस तरह दो-चार दिनों में ही बहुत बड़ा अस्पताल खड़ा कर लिया, लेकिन हिन्दुस्तान में तो राज्य सरकारों के अस्पतालों में जान बचाने वाली मशीनों में से तीन चौथाई से अधिक खराब रहती हैं, और उनकी खरीदी में भयानक भ्रष्टाचार के चलते नकली मशीनें खरीद ली जाती हैं, खराब दवाएं खरीदी जाती हैं। 

हिन्दुस्तान जैसे देश, और इसके प्रदेश को किसी भी मुसीबत से बचने के लिए पैसों की भी जरूरत होगी, तैयारियों की भी जरूरत होगी, सरकार में तेजी से काम करने की क्षमता भी लगेगी, और जनता के बीच जागरूकता का एक बेहतर हाल भी लगेगा। आज पूरी तरह से गंदा, लापरवाह, असंगठित, अनियोजित यह देश रोज की जिंदगी से भी जूझने के लायक नहीं है, किसी अकल्पनीय मुसीबत से जूझने का तो सवाल ही नहीं उठता। लेकिन आग लगने के पहले ही बुझाने की मशीनें लाकर रखनी होती हैं, आज कम से कम हिन्दुस्तानी प्रदेश की सरकारें अपने अस्पतालों का हाल तो टटोल लें। 
-सुनील कुमार

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