विचार / लेख

वारिस पठान, ओवैसी, और टीवी चैनल
वारिस पठान, ओवैसी, और टीवी चैनल
Date : 23-Feb-2020

गिरीश मालवीय

वारिस पठान प्रकरण में एक बात पर हम गौर करना भूल गए हैं।  मीडिया चैनल दिन भर वारिस पठान का जहरीला भाषण दिखाते रहे लेकिन एक बार भी उन्होंने इसके लिए एआईएमआईएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओवेसी को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश नहीं की।  मीडिया इसे इस तरह से पेश कर रहा था जैसे ओवैसी ओर पठान दोनों अलग-अलग हो, जबकि इस वक्त वारिस पठान ओवैसी की पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता है और रिपब्लिक चैनल पर बतौर पैनलिस्ट नजर आते रहते हैं। 
एआईएमआईएम नेता और महाराष्ट्र से पूर्व विधायक वारिस पठान इस बार महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भायखला सीट से लड़े थे। लेकिन हार गए यह वही वारिस पठान है जो कुछ साल पहले भारत माता की जय नहीं बोलने के कारण चर्चा में आए थे। 
महाराष्ट्र में इस बार पार्टी ने धुले और मालेगांव की दो सीटें जीती हैं जबकि इस बार वह एक लोकसभा सीट भी जीतने में सफल हुई है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि 2016 में इस पार्टी की मान्यता स्थानीय स्तर पर रदद् कर दी गई थी और इसकी वजह भी दिलचस्प थी। इनकम और फंड डिटेल्स नहीं जमा करने की वजह से राज्य चुनाव आयोग द्वारा पार्टी का रजिस्ट्रेशन रद्द किया गया था।  राज्य चुनाव आयोग ने कहा था कि पार्टी को कई नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन पार्टी निर्धारित तिथि तक टैक्स रिटर्न या ऑडिट रिपोर्ट जमा नहीं करा पाई। पार्टी को 31 दिसंबर 2015 तक ऑडिट और आईटी रिटर्न जमा करने की मोहलत दी गई थी। मान्यता रद्द होने की वजह से ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम उस साल हुए महाराष्ट्र के निकाय चुनाव में भाग नहीं ले पाई थी। 
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन या एआईएमआईएम पर लगातार साम्प्रदायिकता के आरोप लगते रहे हैं 2018 में महाराष्ट्र के बीड में एक रैली के दौरान ओवैसी ने कहा था कि अगर तुम्हें (मुस्लिम) जिंदा रहना है तो अपने हक के लिए लड़ो और चुनाव में सिर्फ अपने लोगों को जिताओ।
यानी वारिस पठान कोई अनोखी बात नहीं कह रहे हैं। 2018 में इस पार्टी के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका प्रस्तुत की गई। याचिकाकर्ता तिरुपति नरसिम्हा मुरारी ने राजनीतिक दल के रूप में पार्टी की मान्यता खत्म करने का आग्रह करते हुए आरोप लगाया गया था कि ये पार्टी केवल मुसलमानों से संबंधित मुद्दे उठाती है और धर्म के नाम पर वोट मांगती है जो असंवैधानिक है। याचिकाकर्ता ने ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुसलिमीन यानि एआईएमआईएम को राज्य स्तर की पार्टी के रूप में मान्यता देने के निर्वाचन आयोग के 19 जून 2014 के फैसले को निरस्त करने का आग्रह किया था, लेकिन इस याचिका पर क्या फैसला हुआ कुछ पता नहीं है। 
आखिरकार इस पार्टी पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया जा रहा है। समझना ज्यादा मुश्किल नहीं है। बिहार के आने वाले विधानसभा इस पार्टी की महत्वपूर्ण भूमिका है। एमआईएमआईएम के उम्मीदवार किशनगंज विधानसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में जीत हासिल करने में सफल रहे हैं, वारिस पठान का यह बयान को इस तरह से राष्ट्रीय मीडिया पर महत्व दिए जाना एक तरह से बिहार चुनाव में पार्टी को रिलॉन्च करने की महत्वपूर्ण तैयारी का ही भाग है। नीतीश कुमार का जो वोट बैंक जो मोदी के साथ आने से छिटक गया है उस वह वोट बैंक युनाइट होकर एक तरफा वोटिंग न कर पाए। यह वारिस पठान के बयान का असली हासिल है अभी तो ऐसे और जहर बुझे बयान सामने आने वाले हैं।

 

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