राजनीति

चिट्ठी लिखने वाले नौ नेताओं की बैठक, कहा- सार्वजनिक करें हमारा पत्र
25-Aug-2020 3:10 PM 8
चिट्ठी लिखने वाले नौ नेताओं की बैठक, कहा- सार्वजनिक करें हमारा पत्र

नई दिल्ली, 25 अगस्त। कांग्रेस वर्किंग कमेटी की घंटों चली बैठक में तीखे हमलों का जवाब देते हुए गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा, मुकुल वासनिक और जितिन प्रसाद ने जोरदार तर्क दिया। सोमवार (24 अगस्त) को हुई मीटिंग में इन्होंने बताया कि उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों पर चर्चा और निवारण की आवश्यकता क्यों है। चारों नेता सीडब्ल्यूसी सदस्य हैं और उन 23 कांग्रेसी नेताओं में भी शामिल हैं जिन्होंने पत्र लिखा था।

द इंडियन एक्सप्रेस ने बताया कि मीटिंग के तुरंत बाद पत्र में हस्ताक्षर करने वालों में आनंद शर्मा, कपिल सिब्बल, मनीष तिवारी और शशि थरूर सहित कम से कम नौ नेता गुलाम नबी आजाद के आवास पर मिले। शर्मा ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि पत्र के सह-हस्ताक्षरकर्ता मीटिंग में हुए विचार-विमर्श के बारे में जानने के इच्छुक थे और हर कोई इससे संतुष्ट है। 

उन्होंने कहा कि सीडब्ल्यूसी की मीटिंग में स्वतंत्र और स्पष्ट रूप से चर्चा हुई। दस्तावेज (पत्र) सभी सीडब्ल्यूसी सदस्यों के लिए उपलब्ध नहीं थे। बहुत सी अशुद्धियां और गलत व्याख्या थीं, जिसके कारण हमारे खिलाफ कुछ अभद्र टिप्पणियां की गईं। मैंने मांग की कि पत्र को सभी के लिए उपलब्ध कराया जाए और जनता के लिए भी जारी किया जाए, ताकि लोगों को पता चले की मुद्दे क्या हैं।
 
वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हुए सीडब्ल्यूसी मीटिंग का हवाला देते हुए आनंद शर्मा ने कहा कि आजाद, वासनिक और मैंने अपने विचार रखे। कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष का निष्कर्ष बहुत शालीन था। उन्होंने सुलह का स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि जो कुछ हुआ उसे पीछे छोड़ो और एकजुट होकर आगे बढ़ो। उन्होंने (सोनिया गांधी) कहा कि भले ही मैं पत्र का कुछ हिस्सा लीक होने से आहत हूं, मगर ये मेरे मूल्यवान सहयोगी हैं। हम (शर्मा) उनका सम्मान करते हैं और उनके बयान में हमें बहुत अधिक सौहार्दपूर्ण स्थिति में ला दिया है। पत्र में हस्ताक्षर करने वाले एक अन्य नेता ने कहा, हमें इंतजार करना होगा और देखना होगा कि ये सब कैसे खत्म होता है। बता दें कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में हस्ताक्षरकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि वो सोनिया या राहुल गांधी के खिलाफ नहीं थे। बताया गया कि पांच पन्नों के पत्र में दोनों नेताओं के खिलाफ कुछ भी नहीं कहा गया था। (jansatta)

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