सामान्य ज्ञान

अर्मीनिया
23-Sep-2020 2:26 PM 14
अर्मीनिया

23 सितम्बर सन 1991 ईसवी कई अर्मीनिया ने पूर्व सोवियत संघ से अपनी स्वाधीनता की धोषणा की । यह देश 6 सौ वर्ष ईसा पूर्व से ईरान के अधिकार में हो गया था इसका इतिहास उतार चढ़ाव से भरा हुआ है। 
कभी यह देश स्वतंत्र रहा तो कभी दूसरे देशों के कब्ज़े में ईरान और उसमानी शासनी शासन के बीच युद्ध के दौरान अर्मीनिया का अधिकांश भाग ईरान के नियंत्रण से निकल कर उसमानी शासन के क़ब्ज़े में चला गया बाद में 19वीं ईसवी शताब्दी में ईरान और उसमानी शासन के साथ रुस के युद्ध के दौरान इसका अधिकांश भाग रुस के नियंत्रण में चला गया। वर्ष 1918 में रुस में कम्युस्टि क्रांति के बाद अर्मीनिया ने अपनी स्वाधीनता की घोषणा की किंतु दो वर्ष बाद फिर से सोवियत संघ से जुड़ गया। 1980 के दशक में रुस के राजनैतिक परिवर्तनों तक यह देश रुस द्वारा नियंत्रित गणराज्यों में से एक था किंतु 1990 के दशक के आरंभ में एक जनमत संग्रह में इस देश की 90 प्रतिशत जनता ने अर्मीनिया की स्वाधीनता का समर्थन किया इस प्रकार से यह देश रुस से अलग हो गया। यह एशिया के पश्चिम में और कफ़क़़ाज़ क्षेत्र में स्थित है। 30 हज़ार वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले इस देश की सीमाएं ईरान, अजरबेजान और तुर्की से मिलती हैं।

राज्यसभा  
भारत में राज्यसभा एक स्थायी सदन है जिसे कभी भंग नहीं किया जा सकता है। हर दो साल के बाद इसके एक- तिहाई सदस्य अवकाश ग्रहण कर लेते हैं और उतने ही निर्वाचित हो जाते हैं।  राज्यसभा की सदस्य संख्या 250 है। इसमें सभी राज्यों को समान प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है। जनसंख्या के आधार पर सदस्य चुने जाते हैं। इसके 12 ऐसे सदस्यों को, जिनका किसी क्षेत्र विशेष में विशिष्टï योगदान रहा है, राष्टï्रपति द्वारा नामित किया जाता है राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव संबंधित राज्यों की विधानसभाएं आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर करती हैं।  राज्यसभा का सभापति इस सदन का सदस्य नहीं होता है। भारत का उपराष्टï्रपति ही राज्यसभा का पदेन सभापति कहलाता है। लेकिन राज्यसभा का उपसभापति जरुर इसका सदस्य होता है  और राज्यसभा के सदस्य ही इसका निर्वाचन करते हैं।
राज्यसभा में धन विधेयक प्रस्तुत या पुनस्र्थापित नहीं किया जा सकता है।  धन विधेयक के संबंध में राज्यसभा को केवल सिफारिशें करने का अधिकार है। मंत्रिपरिषद राज्यसभा के प्रति उत्तरदायी नहीं होती है।  राज्यसभा को राज्य सूची के किसी विषय को सदन में उपस्थित तथा मतदान देने वाले सदस्यों के कम से कम दो- तिहाई सदस्यों द्वारा समर्थित संकल्प द्वारा राष्टï्रीय महत्व का घोषित करने का अधिकार है।  इसके साथ ही राज्यसभा को सदन में उपस्थित तथा मतदान देने वाले सदस्यों के दो- तिहाई बहुमत से अखिल भारतीय सेवाओं से सृजन का भी अधिकार है। 
जब लोकसभा भंग हो तथा आपात स्थिति लागू कर दी जाए तो उसका अनुमोदन राज्यसभा करती है। इसके साथ ही उपराष्टï्रपति को हटाने के लिए राज्यसभा में ही प्रस्ताव प्रारंभ किया जाता  है।
 

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