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अपने आप में बदलाव कर ज्यादा स्थिर होने की कोशिश कर रहा है कोरोनावायरस: रिसर्च
28-Oct-2020 9:18 AM 49
अपने आप में बदलाव कर ज्यादा स्थिर होने की कोशिश कर रहा है कोरोनावायरस: रिसर्च

शोध के अनुसार यह वायरस अपने आप में बदलाव कर अधिक स्थिर बनने की कोशिश कर रहा है, जिससे यह हर वातावरण में अपने आप को विकसित कर सके  

-  Lalit Maurya

कोरोनावायरस जो दिसंबर 2019 में पहली बार चीन के वुहान में सामने आया और देखते ही देखते पूरी दुनिया में फैल गया। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह वायरस फैलने के लिए अपनी कॉपी (प्रतिकृति) बनाता जाता है। जिसकी मदद से यह तेजी से एक इंसान से दूसरे में फैल जाता है। यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनोइस के शोधकर्ताओं ने इस बारे में एक और चौंकाने वाला खुलासा किया है। उनके अनुसार यह वायरस अपने आप में बदलाव कर अधिक स्थिर बनने की कोशिश कर रहा है, इसके लिए वह उन युक्तियों को अधिक बेहतर कर रहा है जिसकी मदद से वो नए क्षेत्रों के भी अनुकूल बन सके और वहां फैलने में सफल रहे। यह शोध जर्नल इवोल्यूशनरी बायोइनफॉरमैटिक्स में प्रकाशित हुआ है।

वायरस में आ रहे इन बदलावों को समझने के लिए शोधकर्ताओं ने वायरस के प्रोटीओम में आ रही म्युटेशन को ट्रैक किया है। गौरतलब है कि प्रोटीओम वायरस में जेनेटिक मैटेरियल से घिरा प्रोटीन का भंडार होता है। इस वायरस सार्स-कोव-2 का पहला जीनोम जनवरी में छपा था उसके बाद मई तक इसके करीब 15,300 से अधिक जीनोम की खोज हो चुकी है।

शोधकर्ताओं के अनुसार अभी भी कुछ क्षेत्रों में वायरस में नए म्युटेशन हो रहे हैं। जिसका मतलब है कि यह वायरस नए क्षेत्रों के अनुकूल बनने की कोशिश कर रहा है। जबकि इसके विपरीत कुछ क्षेत्रों में इसकी म्युटेशन की दर धीमी हो गई है और वो प्रमुख प्रोटीन के आसपास सिमट रही है। इस शोध से जुड़े वरिष्ठ शोधकर्ता गस्टावो कैटानो-एनोलेस के अनुसार सबसे बुरा यह है कि यह वायरस बदल रहा है और बदलता ही चला जा रहा है, लेकिन वह उन चीजों को अपना रहा है जो उसके फैलने और विकसित होने के लिए उपयोगी और मददगार हैं। हालांकि उनमें कुछ अन्य प्रोटीन स्थिर हो रहे हैं, जो उसके इलाज में मददगार हो सकते हैं।

रिसर्च टीम के अनुसार कोरोनावायरस में आए बदलाव (म्युटेशन) की दर शुरू में काफी तेज थी। पर अप्रैल के बाद उसकी रफ्तार में कमी आ गई है। इसमें कोरोनावायरस के स्पाइक में मौजूद प्रोटीन में आई स्थिरता भी शामिल है। यह स्पाइक  कोविड-19 के ऊपरी हिस्से में उभरे होते हैं जो उसे ताज का रूप देते हैं। शोधकर्ताओं को पता चला है कि स्पाइक की साइट 614 में मौजूद अमीनो एसिड, दूसरे (एस्परिक एसिड से ग्लाइसिन) में बदल गया था। यह बदलाव मार्च से अप्रैल के बीच ज्यादातर वायरसों में आया था। वैज्ञानिकों के अनुसार पहले की तुलना में स्पाइक में अब बिलकुल अलग तरीके का प्रोटीन है। 

स्पाइक में मौजूद प्रोटीन दो तरह से काम करता है, पहला वो मानव कोशिकाओं से वायरस को जुड़ने में मदद करता है। दूसरा यह वायरस में मौजूद जेनेटिक मैटेरियल 'आरएनए' को वायरस की नक़ल में पहुंचाता है। 614 में आया यह म्युटेशन स्पाइक में अलग-अलग डोमेन और प्रोटीन सब यूनिट्स के बीच के महत्वपूर्ण सम्बन्ध को खत्म कर देता है। कैटानो-एनोलेस के अनुसार कुछ कारणों से यह म्युटेशन वायरस को फैलने में मदद करता है।

इससे पहले भी किए गए शोध में 614 में आया म्युटेशन वायरस को फैलने और उसकी बढ़ती संक्रामकता के लिए जिम्मेवार पाया गया था। हालांकि इस म्युटेशन का बीमारी की गंभीरता पर कोई प्रभाव नहीं देखा गया था। हालांकि एक अन्य शोध में इससे वायरस से होने वाली मृत्यु की दर में बढ़ोतरी देखी गई थी। 

इस म्युटेशन से बीमारी का असर कितना बढ़ता है इस पर अभी और शोध होना बाकी है, लेकिन एक बात तो स्पष्ट है कि म्यूटेशन की वजह से वायरस मेजबान की कोशिकाओं में प्रवेश कर पाता है। इसलिए इस वायरस के संचरण और प्रसार को समझने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इसके अलावा प्रोटीन की दो जगहों में भी अप्रैल से म्युटेशन देखी गई थी। जिनमें एनएसपी12 पोलीमरेज़ प्रोटीन, जो आरएनए को डुप्लिकेट करता है, और एनएसपी13 हेलीकेस प्रोटीन शामिल हैं, जो डुप्लिकेट किए गए आरएनए स्ट्रैंड्स को ठीक करता है।

कैटानो-एनोलेस ने बताया कि “यह तीनों म्युटेशन एक दूसरे से जुड़ी हुई है। यह अलग-अलग अणुओं में होती हैं, लेकिन एक ही तरह से विकसित होती हैं।" शोधकर्ताओं ने वायरस प्रोटीओम के उन क्षेत्रों का भी पता लगाया है जिनमें समय के साथ बदलाव आने की सबसे ज्यादा सम्भावना है। जिससे यह समझा जा सकता है कि कोविड-19 के साथ आगे क्या होने की उम्मीद है।

शोध से पता चला है कि न्यूक्लियोकैप्सिड प्रोटीन में सबसे ज्यादा म्युटेशन हो रहा है। यह प्रोटीन मेजबान सेल में प्रवेश करने के बाद वायरस के आरएनए को इकठ्ठा करता है। दूसरा 3ए वायरोपोरिन प्रोटीन है जो होस्ट सेल में छेद बना देता है, जिसकी मदद से वायरस उसमें पहुंचकर, अपनी कॉपी बनाता है और उसे आक्रामक बना देता है।

ऐसे में शोधकर्ताओं का मानना है कि इस पर विशेष ध्यान देने की जरुरत है क्योंकि इन प्रोटीन में आ रहा बदलाव स्पष्ट रूप से दिखाता है कि यह वायरस तेजी से अपने प्रसार में सुधार करने के तरीके तलाश रहा है। यह दो प्रोटीन हमारे शरीर के वायरस से मुकाबला करने के तरीके में हस्तक्षेप करते हैं। जिस वजह से हमारा शरीर इन वायरस का मुकाबला नहीं कर पाता।

गौरतलब है कि दुनिया भर में 43 करोड़ से ज्यादा लोग इस वायरस की चपेट में आ चुके हैं। जबकि यह अब तक 11,66,174 लोगों की जान ले चुका है। भारत में भी इस वायरस के चलते अब तक 119,502 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि यह 79 लाख से भी ज्यादा लोगों को अपनी गिरफ्त में ले चुका है। यह वायरस कितना गंभीर रूप ले चुका है इस बात का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि यह दुनिया के 215 देशों में फैल चुका है और शायद ही इस धरती पर कोई ऐसा होगा जिसे इस वायरस ने प्रभावित न किया हो।(dwontoearth)

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