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महामारी के बीच देह व्यापार में फंसती लड़कियां
18-Nov-2020 3:21 PM 49
महामारी के बीच देह व्यापार में फंसती लड़कियां

सेलम 11 साल की उम्र में अपने गांव से भागी थी क्योंकि बड़ी उम्र के एक आदमी से उसकी शादी हो रही थी. तब उसने सोचा था कि वह आजाद हो गई है. लेकिन बेहतर भविष्य की उसकी उम्मीदें जल्द ही टूट गईं.

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सेलम (बदला हुआ नाम) ने पिछले तीन साल अफ्रीकी देश इथियोपिया के उत्तरी शहर गोंडर में देह व्यापार में बिताए हैं. अधिकारियों और साामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस शहर में सैकड़ों लड़कियां इस धंधे में पिस रही हैं और कोरोना महामारी के चलते उनकी संख्या लगातार बढ़ रही है.

सेलम ने 11 साल की उम्र में स्कूल छोड़ दिया था. इसलिए वह अपने घर लौटने की स्थिति में नहीं थी. सेलम कहती है कि उसे देह व्यापार से निकलने का कोई रास्ता नहीं दिखा. इथियोपिया में देह व्यापार की अनुमति है इसलिए बड़े हिस्से में यह काम धड़ल्ले से होता है. कम उम्र लड़कियों के साथ शारीरिक संबंध बनाना दंडनीय अपराध है. लेकिन उम्र तय करना हमेशा मुश्किल होता है.

अब 14 साल की हो चुकी सेलम ने थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन को बताया, "ये काम गंदा है, लेकिन अगर ये करना छोड़ दूंगी तो फिर क्या खाऊंगी." सेलम अभी अपनी एक पड़ोसन के घर पर आराम कर रही है, जो व्यस्क है और वह भी सेक्स वर्कर है. सेलम कहती है, "मैं इससे बाहर निकलना चाहती हूं, लेकिन बाहर निकलकर करूंगी क्या."

12. इंडोनेशिया: 2.25 अरब डॉलर
इंडोनेशिया में देह व्यापार गैरकानूनी है. इसे नैतिक अपराध माना जाता है. लेकिन इसके बावजूद मुस्लिम बहुल इंडोनेशिया में देह व्यापार काफी फैला हुआ और संगठित है. यूनिसेफ के मुताबिक इंडोनेशिया में देह व्यापार से जुड़ी 30 फीसदी युवतियां नाबालिग है.

महामारी का चंगुल

जिन दर्जन भर सेक्स वर्कर्स से बात की गई, उनमें से पांच नाबालिग थीं. कार्यकर्ता और अधिकारी अमहारा इलाके में बच्चों के यौन शोषण को रोकने के लिए काम कर रहे हैं. लेकिन उनके सामने कई बाधाएं हैं जिनमें कोरोना महामारी भी शामिल है.

महिला, बाल और युवा मंत्रालय में बाल अधिकार विभाग के निदेशक किबरी हैलु अबे का कहना है कि सरकार स्थानीय अधिकारियों की मदद कर रही है. वह कहते हैं, "बच्चों की सुरक्षा के लिए कई अहम कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं." उनके मुताबिक 10 वर्षीय कार्यक्रम के तहत बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ताओं को नियुक्त किया जाएगा, हॉटलाइन बनाई जाएगी और यौन अपराधियों का रजिस्टर बनाया जाएगा.

सामाजिक कार्यकर्ता कहते हैं कि गांवों में कुछ परिवार अपनी लड़कियों को शहरों में नौकरियां करने भेजते हैं, जहां उनके लिए देह व्यापार ही पैसा कमाने का अकेला जरिया बचता है. कई लड़कियां तस्करों को पैसे देकर बेहतर जिंदगी की तलाश में सऊदी अरब या यूरोप जाना चाहती हैं.

गोंडर में फैमिली गाइडेंस एसोसिएशन ऑफ इथियोपिया नाम की संस्था की तरफ से चलाने जाने वाले एक क्लीनिक के प्रमुख गेटाशियू फेंटाहुन कहते हैं, "उनके पास जीवित रहने का बस यही जरिया है." यह संस्था गरीब लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराती है.

गेटाशियू कहते हैं कि वेटर और घरों में नौकरानी का काम करने वाली बहुत सी लड़कियां कोरोना महामारी के कारण बेरोजगार हुई हैं. वे खाली हाथ वापस अपने गांव जाने की बजाय देह व्यापार में ही लौट रही हैं. महामारी ने दुनिया भर में बहुत से परिवारों को गरीबी में धकेला है. ऐसे में, संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि खास तौर से बच्चों पर बाल श्रम और समय से पहले उनकी शादी करने का जोखिम मंडरा रहा है.

विश्व बैंक ने चेतावनी दी है कि 2021 के अंत तक कोविड-19 की वजह से 15 करोड़ लोग बेहद गरीबी में जा सकते हैं. इसके चलते पिछले तीन साल में गरीबी को खत्म करने के लिए जितनी प्रगति हुई है, उस पर पानी फिर सकता है.

इन देशों में कानूनी है देह व्यापार
नीदरलैंड्स और बेल्जियम
देह व्यापार में एम्सटर्डम का रेड लाइट एरिया शायद दुनिया का सबसे मशहूर हिस्सा है. अन्य देशों से विपरीत, जहां लोग छिप छिपा कर रेड लाइट एरिया में जाते हैं, एम्सटर्डम में टूरिस्ट खास तौर से इस इलाके को देखने पहुंचते हैं. बेल्जियम में भी देह व्यापार कानूनी है.

गोंडर और उसके पास मामेताम शहर में सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि नाबालिग लड़कियों के देह व्यापार को रोकना इतना आसान नहीं है क्योंकि लड़कियां अपनी उम्र के बारे में झूठ बोलती हैं. उन्हें अधिकारियों पर भरोसा नहीं है. इसलिए वे मदद मांगने से भी डरती हैं.

गोंडर में तैनात एक पुलिस कमांडर अलमाज लाकेयू कहते हैं कि देह व्यापार में लगी लड़कियां इसलिए पुलिस से छिपती हैं क्योंकि उन्होंने डर है कि कहीं उन्हें वापस उनके गांव ना भेज दिया जाए. वह कहते हैं, "इस तरह हमारे लिए उनकी मदद करना बहुत चुनौतीपूर्ण हो जाता है."

ईसाई बहुल आबादी वाले गेंडर में बहुत सी सेक्स वर्कर रात के समय बार और रेस्त्रां में मिलती हैं. वे खुद को वहां काम करने वाली वेट्रेस के तौर पर पेश करती हैं. लेकिन उनका असल काम अपने ग्राहक तलाशना होता है. रेस्त्रां और बार के मालिकों को भी उनकी कमाई से कमीशन मिलता है.

दूसरी तरफ, बहुत से सेक्स वर्कर गली के कोने पर खड़ी होकर ग्राहकों का इंतजार करती हैं. उन्हें एक बार किसी के साथ सोने के 100 बिर यानी (लगभग 200 रुपये से भी कम) मिलते हैं. जिन लड़कियों और महिलाओं को कोई ग्राहक नहीं मिलता, उन्हें अकसर खुले में ही रात गुजारनी पड़ती है.

कई सेक्स वर्कर्स का कहना है कि उनकी परवाह ना तो समाज करता है और ना ही अधिकारी. 19 साल की मेकदेस कहती है, "लोग हमें कूड़े की तरह देखते हैं. कुछ लोग हमारी मजबूरी और परेशानियों को समझते हैं जबकि बाकी लोग समझते हैं कि हम किसी काम की नहीं हैं."

एके/ओएसजे (थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन)

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