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विश्व एंटीमाइक्रोबियल जागरूकता सप्ताह: बेहतर से बेहतर दवाएं भी नहीं आएंगी काम
20-Nov-2020 7:46 PM 37
विश्व एंटीमाइक्रोबियल जागरूकता सप्ताह: बेहतर से बेहतर दवाएं भी नहीं आएंगी काम

एफएओ के मुताबिक एंटीबायोटिक सहित एंटीमाइक्रोबियल दवाओं का लम्बे समय से इस्तेमाल किया जा रहा है और उनका गलत इस्तेमाल भी हो रहा है

दुनिया में बेहतर से बेहतर दवाएं उपलब्ध होने के बावजूद विभिन्न संक्रमण से लोगों, पशुओं और पौधों की मौत हो रही है, क्योंकि सूक्ष्मजीवीरोधी प्रतिरोधक क्षमता (एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस) बढ़ती जा रही है। विश्व एंटीमाइक्रोबियल जागरूकता सप्ताह के मौके संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) की ओर से जारी एक बयान में यह बात कही है।

एफएओ के मुताबिक एंटीबायोटिक सहित एंटीमाइक्रोबियल दवाओं का लम्बे समय से इस्तेमाल किया जा रहा है और उनका गलत इस्तेमाल भी हो रहा है, जिससे सूक्ष्मजीवीरोधी प्रतिरोधक क्षमता का तेजी से फैलाव हो रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार बैक्टीरिया संक्रमणों की रोकथाम और उनका उपचार करने के लिए एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। इन्हें एंटीमाइक्रोबियल के तहत ही शामिल किया जाता है।

संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी का कहना है कि इंसान व जानवरों की बजाय बैक्टीरिया में सूक्ष्मजीवीरोधी प्रतिरोधक (एएमआर) क्षमता विकसित हुई है और वे बैक्टीरिया लोगों व जानवरों को संक्रमित कर सकते हैं। ऐसे बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण पर काबू पाना और उपचार करना अन्य बैक्टीरिया की तुलना में मुश्किल होता है।

एफएओ का कहना है कि अगर इस समस्या से नहीं निपटा गया तो एएमआर के कारण करोड़ों लोग चरम गरीबी, भुखमरी और कुपोषण का शिकार हो सकते हैं।

डब्ल्यूएचओ का कहना है कि एएमआर की वजह से सामान्य संक्रमण का इलाज भी मुश्किल हो जाता है और बीमारी के फैलने, उसके गंभीर रूप धारण करने या मौत होने का खतरा बढ़ जाता है।

बैक्टीरिया, वायरस, फफूंद या परजीवी में समय के साथ आने वाले बदलाव और दवाओं का उन पर असर न होने की वजह से सूक्ष्मजीवीरोधी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। यह वैश्विक स्वास्थ्य और विकास के लिए एक बड़ा बनता जा रहा है। इंसान, पशुओं और खेती में दवाओं का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल और स्वच्छ पानी व साफ-सफाई की कमी से दुनिया भर में एएमआर का जोखिम बढ़ा है।

एफएओ के मुताबिक एएमआर नियामकों और निरीक्षण की कमी के कारण एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल बढ़ रहा है और डॉक्टरी नुस्खे के बिना और ऑनलाइन बिक्री के कारण खराब गुणवत्ता व फर्जी उत्पादों का भी इस्तेमाल बढ़ रहा है।

यूएन की स्वास्थ्य एजेंसी ने एएमआर को उन 10 सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरों की सूची में शामिल किया है, जो मानवता के समक्ष चुनौती के रूप में मौजूद हैं। इससे वैश्विक स्वास्थ्य, विकास, सतत विकास लक्ष्यों और अर्थव्यवस्था पर खासा असर पड़ने की आशंका है।

संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि अगर एएमआर पर काबू नहीं किया गया तो अगली महामारी बैक्टीरिया के कारण हमारे सामने आ सकती है, जो ज्यादा घातक होगी और जिसके इलाज में दवाएं काम नहीं आएंगी। ‘विश्व एंटीमाइक्रोबियल जागरूकता सप्ताह’ के जरिये आम लोगों, स्वास्थ्यकर्मियों और नीतिनिर्धारकों में एएमआर की चुनौती और उसका मुकाबला करने के लिए सर्वश्रेष्ठ उपायों के प्रति जागरूकता फैलाई जा रही है।

क्या आप जानते हैं?
- दवा-प्रतिरोधक बीमारियों के कारण हर वर्ष कम से कम सात लाख लोगों की मौत होती है।

- अगले 10 सालों में बढ़ती जनसंख्या और इंसानी जरूरतों को पूरा करने के लिए पशुओं में एंटीमाइक्रोबियल का इस्तेमाल दोगुना होने के आसार हैं।

- इन 10 वर्षों में लगभग ढाई करोड़ लोग एएमआर के कारण चरम गरीबी का शिकार हो सकते हैं। (downtoearth.org.in)

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