विचार / लेख

एक दूसरे की वैक्सीन की ऐसी पोल-पट्टी खोली कि...
07-Jan-2021 2:15 PM 73
एक दूसरे की वैक्सीन की ऐसी पोल-पट्टी खोली कि...

-गिरीश मालवीय

दो बिल्लियों की लड़ाई में बंदर का फायदा हो जाता है। देश में कोरोना वैक्सीन के इमरजेंसी यूज का अप्रूवल पाने वाली दोनों बड़ी फार्मा कंपनियां, भारत बायोटेक के CEO ओर सीरम इंस्टीट्यूट के CEO आपस में भिड़ गए, ओर हम जैसे तथाकथित ‘कांस्पिरेसी थ्योरिस्ट’ का फायदा हो गया

दोनों कम्पनियों ने एक-दूसरे की कोरोना वैक्सीन की ऐसी पोल पट्टी खोली कि लोग असलियत जानकर हैरान रह गए। हम जैसे लोग यह बात बताते तो लोग यकीन ही नहीं करते और बोलते कि आप तो वैक्सीन के बारे में भी भ्रम फैला रहे हो।

यह मामला तब शुरू हुआ जब सीरम इंस्टीट्यूट के अदार पूनावाला ने दावा किया कि हमारी वैक्सीन में दम है बाकी सबमें पानी कम है। अदार पूनावाला ने रविवार को फाइजर, मॉडर्ना और ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की कोवीशील्ड के अलावा बाकी सभी वैक्सीन को पानी की तरह बता दिया। उनके इस दावे से भारत बायोटेक के सीईओ कृष्णा इल्ला के तनबदन में आग लग गई। उन्होंने सीरम इंस्टीट्यूट समेत एम्स के निदेशक तक को निशाने पर ले लिया।

भारत बायोटेक के रूष्ठ कृष्णा एल्ला ने कहा कि एस्ट्राजेनेका ने वॉलंटियर्स को वैक्सीन के साथ पैरासिटामॉल दी थी, ताकि वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स (ड्डस्र1द्गह्म्ह्यद्ग ह्म्द्गड्डष्ह्लद्बशठ्ठ) को दबाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका और यूरोप ने यूके के एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफोर्ड वैक्सीन के परीक्षण डेटा को मंजूर करने से इनकार कर दिया था क्योंकि वह स्पष्ट नहीं था लेकिन कोई भी ऑक्सफोर्ड वैक्सीन के डेटा पर सवाल नहीं उठा रहा है

 यह बहुत बड़ा आरोप थे इसे सुनकर सीरम इंस्टीट्यूट वाले अदार पूनावाला की सिट्टी पिट्टी गुम हो गयी ओर कल शाम को मोदी सरकार द्वारा दोनों कंपनियों पर इस तकरार को खत्म करने का दबाव बनाया गया और दोनों कम्पनियो ने सुलह का ज्वाइंट स्टेटमेंट जारी कर दिया

दरअसल यह दो वैक्सीन निर्माता कंपनियों की आपसी प्रतिद्वंदिता से अधिक सरकार द्वारा की गई जल्दबाजी पर सवाल अधिक है जहाँ वेक्सीन केंडिडेट पर थर्ड ट्रायल के परिणामो का असर जाने बिना अनुमति प्रदान कर दी गयी है

भारत बायोटेक की वैक्सीन के थर्ड ट्रायल पूरे हुए ही नही है ओर सीरम के कोवीशील्ड के ट्रायल्स को दरअसल फेज-2/3 ट्रायल्स कहा जा रहा है। क्योकि इसमें वहीं सब है जो दुनियाभर में फेज-2 ट्रायल्स में होता है। इसमें सेफ्टी और इम्युनोजेनेसिटी देखी जा रही है, उसके असर का एनालिसिस नहीं हो रहा है।

दोनों ही वेक्सीन को इमरजेंसी अप्रूवल देना कितना गलत था यह इन दोनों कंपनियों के ष्टश्वह्र के बीच आरोप प्रत्यारोप से साफ हो गया है

अन्य पोस्ट

Comments