सामान्य ज्ञान

इंका सभ्यता
09-Jan-2021 1:06 PM 69
इंका सभ्यता

इंका दक्षिण अमेरीका के मूल निवासिओं (रेड इण्डियन जाति) की एक गौरवशाली उपजाति थी। इंका प्रशासन के संबंध में विद्वानों का ऐसा मत है कि उनके राज्य में वास्तविक राजकीय समाजवाद (स्टेट सोशियलिज्म) था तथा सरकारी कर्मचारियों का चरित्र अत्यंत उज्ज्वल था। इंका लोग कुशल कृषक थे। इन्होंने पहाडिय़ों पर सीढ़ीदार खेतों का प्रादुर्भाव करके भूमि के उपयोग का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया था। आदान-प्रदान का माध्यम द्रव्य नहीं था, इसलिए सरकारी करों का भुगतान शिल्पों की वस्तुओं तथा कृषीय उपजों में किया जाता था। ये लोग खानों से सोना निकालते थे, परंतु उसका मंदिरों आदि में सजावट के लिए ही प्रयोग करते थे। ये लोग सूर्य के उपासक थे और ईश्वर में विश्वास करते थे।
 सन् 1100 ई. तक इंका लोग अपने पूर्वजों की तरह अन्य पड़ोसियों के जैसा जीवन ही व्ययतीत करते थे, परंतु लगभग सन् 1100 ई. में कुछ परिवार कुसको घाटी में पहुंचे जहां उन्होंने आदिम निवासियों को परास्त करके कुज़्को नामक नगर का शिलान्यास किया। यहां उन्होंने लामा नामक पशु के पालन के साथ-साथ कृषि भी आरंभ की। कालांतर में उन्होंने टीटीकाका झील के दक्षिण पश्चिम में अपने राज्य को प्रशस्त किया। सन् 1528 ई. तक उन्होंने पेरू, ईक्वाडोर, चिली तथा पश्चिमी अर्जेंटीना पर भी अधिकार कर लिया। परन्तु यातायात के साधनों के अभाव में तथा गृहयुद्ध के कारण इंका साम्राज्य छिन्न-भिन्न हो गया।

खाली बरतन से अधिक ध्वनि क्यों उत्पन्न होती है?
बरतन की सतह पर आघात करने से कंपन आरंभ होता है, जिसके परिणाम में वातावरण की वायु और अंदर की वायु भी कंपन करने लगती है। ध्वनि की तीव्रता इस कंपन के आयाम के वर्ग के समानुपात होती है। खाली बरतन से आने वाला तेज स्वर एक उच्च तरंगदैध्र्य द्वारा उत्पन्न कंपने के कारण होता है। 
बरतन को भरतने से इसकी संहति में वृद्घि होती है। अब सामान्य बल एक भारी संहति के कंपन के लिए प्रयोग होता है। कंपन के परिणाम में उत्पन्न आयाम बहुत कम हो जाता है, जिसके कारण ध्वनि कम हो जाती है। कंपन आरंभ होने के पश्चात क्रमश: समाप्त हो जाता है, क्योंकि वायुमंडल में ऊर्जा का क्षय हो जाता है। इसे निरुत्साहित करना कहते हैं। एक खाली पात्र में कंपित वायु केवल ध्वनि में ही वृद्घि करने के लिए सहायक नहीं होती, अपितु पात्र को अधिक समय तक दोलन में रखती है, जिससे ध्वनि का बहुत कम निरुत्साहन होता है। यदि पात्र किसी द्रव जैसे भारी पदार्थ से भर दिया जाता है, तो निरुत्साहन अधिक होता है और पात्र शीघ्र ही कंपन करना बंद कर देता है, जिससे ध्वनि समाप्त हो जाती है।
 

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