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पहले ऐसा नहीं था गणतंत्र दिवस
25-Jan-2021 12:31 PM 45
पहले ऐसा नहीं था गणतंत्र दिवस

गणतंत्र दिवस भारत का एक राष्ट्रीय पर्व जो प्रति वर्ष 26 जनवरी को मनाया जाता है। इसी दिन सन 1950 को भारत का संविधान लागू किया गया था।
एक स्वतंत्र गणराज्य बनने और देश के संक्रमण को पूरा करने के लिए, 26 नवम्बर 1949 को भारतीय संविधान सभा द्वारा इस संविधान को अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को इसे एक लोकतांत्रिक सरकार प्रणाली के साथ लागू किया गया था। 26 जनवरी को इसलिए चुना गया था क्योंकि 1930 में इसी दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारत को पूर्ण स्वराज घोषित किया था। 26 जनवरी 1950 को डॉ.राजेन्द्र प्रसाद ने गवर्नमेंट हाउस के दरबार हाल में भारत के पहले राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। पहला गणतंत्र दिवस समारोह राजपथ पर नहीं मनाया गया  था , इस दिन इर्विन स्टेडियम (आज का नेशनल स्टेडियम) में झंडा फहराया गया था ।
पहला गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो थे । पहला समारोह सवेरे के बजाय दोपहर बाद मनाया गया था।  पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद गवर्नमेंट हाउस (आज के राष्ट्रपति भवन) से छह घोड़ों वाली बग्घी से समारोह स्थल तक पहुंचे।  पहले समारोह में राष्ट्रपति को 31 तोपों की सलामी दी गई।
राष्ट्रपति को 31 तोपों की सलामी देने की परंपरा 70 के दशक तक चली। बाद में 31 तोपों के बजाय 21 तोपों की सलामी दिए जाने की परंपरा चलाई गई जो आज तक जारी है। 1952 से बीटिंग रिट्रीट की परंपरा भी शुरू हुई। पहली बार राजपथ पर परेड का आयोजन वर्ष  1955 में हुआ । राजपथ पर पहली परेड के पहले मुख्य अतिथी पाकिस्तान के गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मोहम्मद थे।  वर्ष 1955 में गणतंत्र दिवस पर मुशायरे की परंपरा लाल किले के दीवान-ए-आम में शुरू हुई। मुशायरा रात दस बजे शुरू होता था। अगले वर्ष 14 भाषाओं का कवि सम्मेलन रेडियो से प्रसारित हुआ।
वर्ष 1957 के गणतंत्र दिवस से सरकार ने बच्चों के लिए राष्ट्रीय बहादुरी पुरस्कार शुरू किया । वर्ष 1958 से 26 जनवरी के मौके पर सरकारी इमारतों पर रोशनी करने की परंपरा शुरू हुई।
वर्ष 1960 के गणतंत्र दिवस समारोह को दिल्ली  में 20 लाख लोगों ने देखा, इनमें से पांच लाख लोग तो राजपथ पर ही जमा थे। बाकी लोग दिल्ली के जिन इलाकों से परेड गुजरी वहां से इसे देखा। 1961 के गणतंत्र दिवस समारोह की  मुख्य अतिथि ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ बनीं थी। वर्ष  1962 से परेड और बीटींग रिट्रीट समारोह के लिए टिकटों की बिक्री शुरू की गई। तब परेड की लंबाई छह मील हो गई थी यानी जब परेड की पहली टुकड़ी लाल किला पहुंच गई तब आखिरी टुकड़ी इंडिया गेट पर ही थी।
वर्ष 1962 में चीनी आक्रमण हुआ जिसके फलस्वरूप अगले वर्ष परेड का आकार कम कर दिया गया।  1965 के गणतंत्र दिवस के दिन हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित किया गया। 1968 के गणतंत्र दिवस समारोह में 136 विमानों ने फ्लाई पास्ट में भाग लिया। 1969 के गणतंत्र दिवस समारोह में 164 विमानों ने भाग लिया और  मिग-21 ने पहली बार राजपथ पर उड़ान भरी। 
1972 के गणतंत्र दिवस समारोह राज पथ के बजाय विजय चौक पर आयोजित किया गया। क्यों कि इस वर्ष पाकिस्तान के साथ 1971 के युद्ध शहीदों हुए वीर जवानो को नमन किया गया। 1972 के गणतंत्र दिवस समारोह में राष्ट्रपति को 31 तोपों की सलामी दी गई और बांग्लादेश की आजादी और भारत की विजय का जश्न मनाया गया।  1973 में पहली बार प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इंडिया गेट पर अमर जवान ज्योति पर श्रद्धांजलि अर्पित की। तब से यह परंपरा जारी है।
वर्ष 2001 के गणतंत्र दिवस समारोह से पहली बार बीटींग रिट्रीट कार्यक्रम रद्द किया गया। क्योंकि इस साल गणतंत्र दिवस के दिन ही गुजरात व देश के अन्य भागों में आए भयानक भूकंप आया था, जिसके फलस्वरूप जान-माल की हानि हुई थी।
 

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