सामान्य ज्ञान

किशनगंगा पन बिजली परियोजना
21-Feb-2021 8:20 AM 38
 किशनगंगा पन बिजली परियोजना

केंद्र सरकार  द्वारा कश्मीर में किशनगंगा नदी पर पनबिजली परियोजना का निर्माण कराया जा रहा है।  किशनगंगा पनबिजली परियोजना  उत्तरी कश्मीर के बांदीपुरा के निकट गुरेज घाटी में स्थित है। 330 मेगावॉट की किशनगंगा पनबिजली परियोजना की लागत 3 हजार 6 सौ करोड़ रुपए है। इस परियोजना के तहत किशनगंगा नदी का पानी झेलम नदी के पात्र में मोड़ा जाएगा। इस परियोजना की शुरुआत 2007 में हुई थी और 2016 तक काम पूरा होने का अनुमान है। किशनगंगा नदी झेलम की एक सहायक नदी है। पाकिस्तान में प्रवेश करने के बाद किशनगंगा नदी नीलम के नाम से जानी जाती है। 
पाकिस्तान ने भारत पर यह आरोप लगाया था कि भारत ने इस परियोजना के लिए किशनगंगा नदी के रुख में बदलाव किया है जो उसके लिए नुकसानदेह है। जिसके विरोध में पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय अदालत का दरवाजा खटखटाया था।  लेकिन हेग की अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत ने किशनगंगा पनबिजली परियोजना से पानी का मार्ग बदलने के भारत के अधिकार को बरकरार रखा है।
 अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायालय  ने निर्देश दिया कि उत्तरी कश्मीर में स्थित किशनगंगा पनबिजली परियोजना  के लिए किशनगंगा का जलमार्ग बदलने का भारत को अधिकार है। इसमें भारत ने सिन्धु जल समझौते के सभी प्रावधानों का पालन किया है। अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायालय ने पाकिस्तान की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें पाकिस्तान ने भारत पर किशनगंगा नदी के बहाव को मोडऩे और दोनों देशों के बीच हुई सिंधु जल संधि 1960 के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए इस परियोजना पर स्थगन की मांग की थी। ये दूसरा मामला है जब पाकिस्तान ने पानी के विवाद पर भारत को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में घसीटा है। इससे पहले भारत सिंधु जल समझौते के उल्लंघन करने का दावा करते हुए पाकिस्तान ने बागलीहार बांध मामले में  वल्र्ड बैंक को इस मामले में निर्णय देने का आग्रह किया था।

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 अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस
 अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 21 फरवरी को मनाया जाता है। 17 नवंबर, 1999 को यूनेस्को ने इसे स्वीकृति दी। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य है कि विश्व में भाषाई एवं सांस्कृतिक विविधता और बहुभाषिता को बढ़ावा मिले।
 यूनेस्को द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की घोषणा से बांग्लादेश के भाषा आंदोलन दिवस को  अंतर्राष्ट्रीय  स्वीकृति मिली, जो बांग्लादेश में सन 1952 से मनाया जाता रहा है। बांग्लादेश में इस दिन एक राष्ट्रीय अवकाश होता है। 2008 को  अंतर्राष्ट्रीय भाषा वर्ष घोषित करते हुए, संयुक्त राष्ट्र आम सभा ने  अंतर्राष्ट्रीय  मातृभाषा दिवस के महत्व को फिर महत्व दिया था।  
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भाषाई साम्राज्यवाद
भाषिक साम्राज्यवाद या भाषाई साम्राज्यवाद  उस स्थिति को कहते हैं जिसमें किसी सबल राष्ट्र की भाषा किसी निर्बल राष्ट्र की शिक्षा और शासन आदि विविध क्षेत्रों से देशी भाषा(ओं) का लोप कर देती है। इसके लिए घोषित या अघोषित रूप से एक ऐसी व्यवस्था उत्पन्न करके जड़ जमाने दी जाती है जिसमें उस विदेशी भाषा को ना बोलने और जानने वाले लोग दूसरे दर्जे के नागरिक के समान होने को विवश हो जाते हैं।

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