सामान्य ज्ञान

केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल
21-Feb-2021 8:22 AM 33
केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल

केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल विश्व का सबसे बड़ा अर्ध-सैनिक बल है।  इस बल की स्थापना अपराधियों और डकैतों से निपटने के लिए वर्ष 1939 में क्राउन रिप्रेजेंटेटिव पुलिस के रूप में हुई थी। लेकिन इस बल से अपेक्षाएं निरंतर बढ़ती रही हैं। 

 सीआरपीएफ को जिस तरह से तरह-तरह के कार्य करने पड़ते हैं, उसे देखते हुए इसके प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में सुधार किया गया है। इसके लिए जवानों को कई तरह के अभ्यास (ड्रिल) कराये जाते हैं, जैसे यूनिफॉर्म ड्रिल, हथियार ड्रिल, वाहन ड्रिल, रात्रि ड्रिल, खेल ड्रिल आदि। हेली-स्लिदरिंग का कठिन अभ्यास आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए किया जाता है। जंगल में रहने के लिए एक सप्ताह का प्रशिक्षण दिया जाता है। इन सबका उद्देश्य वास्तविक परिस्थितियों में संघर्ष के लिए प्रशिक्षण देना है। 

 सीआरपीएफ के जवानों को बेहतर प्रशिक्षण देने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।  कादरपुर, गुडगांव के गुप्तचर स्कूल में खुफिया सूचनाएं इक्_ी करने के बारे में प्रशिक्षण दिया जाता है। हिमाचल-प्रदेश में धर्मपुर में प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए स्कूल खोला गया है, ताकि उच्च स्तर के प्रशिक्षक तैयार हो सकें। स्थानीय किस्म के विस्फोटकों के खतरे से निपटने के लिए पुणे में भारतीय आईईडी प्रबंधन संस्थान स्थापित किया गया है। क्योंकि आजकल सीआरपीएफ को नक्सलियों के प्रभाव वाले इलाकों में ज्यादा काम करना पड़ रहा है, इसलिए कर्नाटक में बेलगाम में जंगल युद्ध के बारे में प्रशिक्षण देने के लिए एक राष्ट्रीय संस्थान स्थापित किया जा रहा है। जवानों को अबाध रूप से बढिय़ा खाना मिलता रहे, इसके लिए कर्नाटक में तरालू में कॉलेज ऑफ कुकिंग एंड केटरिंग मैनेजमेंट स्थापित किया गया है। सांप्रदायिक सद्भाव को कायम रखने में सहायता के लिए जल्दी ही मेरठ में एक त्वरित कार्यवाही बल (आरएएफ) प्रशिक्षण स्कूल की स्थापना की जाएगी। इन सबके अलावा बंगलौर में तरालू में कुत्तों की नस्ल तैयार करने और उन्हें प्रशिक्षण देने के लिए भी एक स्कूल स्थापित किया गया है। 

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 संयुक्त अरब गणराज्य
 21 फऱवरी सन 1958 ईसवी को मिस्र और सीरिया की जनता ने एक जनमत संग्रह में इन दोनों देशों को मिलाकर संयुक्त अरब गणराज्य बनाने के पक्ष में वोट डाले। दोनों देशों की जनता ने इसी प्रकार मिस्र के तत्कालीन राष्ट्रपति जमाल अब्दुन्नासिर को इस नव स्थापित गणराज्य के पहले राष्ट्रपति के रूप में चुना। 
कुछ ही समय बाद यमन भी इस गणराज्य से जुड़ गया। इस गणराज्य की स्थापना का उद्देश्य अरब देशों में एकता उत्पन्न करना विशेष कर ज़ायोनी शासन के मुक़ाबले में अरब देशों की स्थिति को मज़बूत करना था। संयुक्त अरब गणराज्य में अलग-अलग देश शामिल थे जिनकी नीतियों को एक उच्च परिषद समन्वित करती थी। किंतु इस गणराज्य की आयु तीन वर्ष से अधिक न रह सकी और इस गणराज्य का नेतृत्व मिस्र के पास होने से सीरिया अप्रसन्न होकर इससे निकल गया और अंतत: सन 1961 में यह संघ टूट गया।  
 

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