विशेष रिपोर्ट

स्कूल में सफाईकर्मी बने इसलिए कुम्हार जात बाहर

Posted Date : 05-Apr-2018



शंभु यादव
कोण्डागांव, 5 अप्रैल (छत्तीसगढ़)। जिला मुख्यालय से लगे कुम्हारपारा में जातिवाद का अजीब मामला सामने आया है। रोजी-रोटी के लिए जातिगत कार्य के अलावा स्कूल में सफाईकर्मी बनने पर सामाजिक बहिष्कार का दंश झेलना पड़ रहा है।  पीडि़त परिवार का कोई भी सदस्य समाज के किसी भी व्यक्ति के घर आ-जा नहीं पा रहा है।   पीडि़त परिवार इतने गरीब हैं कि भरण-पोषण के लिए दोनों काम जरूरी हैं, एक से गुजारा संभव नहीं है।  पीडि़त परिवार ने मामले की शिकायत कोण्डागांव कलेक्टर जनदर्शन में की है।
कोण्डागांव कलेक्टर नीलकंठ टेकाम ने कहा  कि जांच दल गठित की गई है, यदि मामला सही पाया जाता है तो पहले समाजजनों को समझाया जाएगा।  इसके बाद भी मामले का निपटारा नहीं हुआ तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जिला मुख्यालय कोण्डागांव के सीमा से लगा कुम्हारपारा देश-विदेश में अपनी कलाकृतियों के लिए मशहूर है। यहां के कुम्हार मिट्टी से पारंपरिक तरीके से बर्तन व अन्य सामान बनाते है। इन्हीं कुम्हारों में से एक है सुरेंद्र चक्रधारी जो घर के ही पास नवीन प्राथमिक शाला कोपरापारा और उनके जीजा कमल सिंह चक्रधारी प्राथमिक शाला कुम्हारपारा में 2012 से अंशकालीन स्वच्छक पद पर मात्र 2000 रुपए के लिए अस्थाई तौर पर नियुक्त हुए हैं। दोनों का परिवार पेशे से कुम्हार है और मिट्टी के बर्तन बनाता है। लेकिन इससे परिवार का गुजारा-बसर नहीं हो रहा था। परिवार के लिए अंशकालीन स्वच्छक पद पर नियुक्त होने से समाज  प्रमुखों को इस तरह नागुजार हुआ कि दोनों के पूरे परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया। सामाजिक बहिष्कार हो जाने से सुरेंद्र चक्रधारी व कमल सिंह चक्रधारी के सामने कार्य छोडऩे के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचा है। 
दोनों परिवार में है 14 सदस्य
 नवीन प्राथमिक शाला कोपरापारा में सुरेंद्र चक्रधारी कार्यरत है और प्राथमिक शाला कुम्हारपारा में कमल सिंह चक्रधारी अंशकालीन स्वच्छक पद पर अस्थाई नियुक्त है।  सुरेन्द्र को छोड़ पिता दुर्गा प्रसाद चक्रधारी व भाईयों नकुल, रेकमल, महेश भाई, ओमकार भाई, मांॅ सभी मिट्टी का कार्य करते है। इनके परिवार में छोड़े बड़े मिलाकर 10 सदस्य शामिल है। इसी तरह कमल सिंह चक्रधारी इसी परिवार के दामाद है और इनका 4 सदस्यों का अलग परिवार है।  
शिकायत में गांव के प्रमुखों का नाम
कोण्डागांव कलेक्टर से किए गए शिकायत में पीडि़त परिवार ने कुम्हारपारा समाज कोण्डागांव जिलाअध्यक्ष सुरज प्रसाद चक्रधारी, संभागीय अध्यक्ष बनऊ राम नाग, तुलसीराम चक्रधारी, दयाराम चक्रधारी व मेहतर राम चक्रधारी के विरूद्ध लिखित शिकायत किया है। परिवार के अनुसार, समाज के प्रमुखों ने उन्हें अंशकालीन स्वच्छक पद कार्य करने के चलते सामाजिक बहिष्कार कर दिया है।
संभाग स्तरीय सम्मेलन में उठ चुका है मामला
पीडि़त परिवार ने बताया कि, यह मामला सबसे पहले लगभग साल भर पहले मिट्टी खदान की सामाजिक बैठक में पहली बार उठी थी। 

यहां दोनों परिवार के सदस्य को अंशकालीन स्वच्छक पद से हटाने के लिए दबाव बनाते हुए एक तरफा निर्णय सुनाया गया, जिसके चलते दोनों ने कार्य छोड़ दिया था। इसके इस बैठक के 15 दिन बाद समाज नाईक नरेन्द्र चक्रधारी के घर कुम्हारपारा में दोबारा बैठक हुआ, जहां माना गया कि मामले का निपटारा संभागीय बैठक में किया जाए। 
 संभागीय बैठक में सभी  पदाधिकारियों ने कहा कि कुम्हार कार्य से जीवन-यावन संभव नहीं है, छोटे-मोटे कार्य में संकोच ना करे, कोई भी व्यक्ति कोई भी कार्य कर सकता है। इसी निर्णय के चलते कमल सिंह चक्रधारी और सुरेंद्र चक्रधारी अपने कार्य पर लौट गए। अब अचानक इसी सप्ताह गांव  के समाज  प्रमुख  बैठक में  उन्हें दोबारा समाज से बाहर निकाल दिया। बैठक में इन दोनों परिवार के किसी सदस्य को भी नहीं बुलाया गया। समाज से निकाले जाने का फैसला गांव समाज के प्रमुखों ने मौखुक रूप से जारी किया है। 
 निर्णय संविधान के खिलाफ - अधिवक्ता संघ जिलाध्यक्ष आरके मेश्राम
 कोण्डागांव अधिवक्ता संघ जिलाध्यक्ष आरके मेश्राम ने कहा कि, भारत के संविधान में सभी को समानता का अधिकार है। संविधान के अनुसार किसी भी व्यक्ति का जाति अलग हो सकता है और कर्म या कार्य अलग हो सकता है। पर वह  किसी भी वक्त कोई भी  कार्य कर सकता है,  कोई बंधन नहीं है। कोई भी समाज ऐसा करता है तो वह कानून से खिलवाड़ करता है। इसके लिए कानून में अलग-अलग दंडात्मक प्रावधान भी  है। यदि ऐसा हुआ है तो पीडि़त अपने क्षेत्र के थाने में इसकी शिकायत कर सकता है, थाने में उसकी शिकायत नहीं सुनी जाती तो वह एसपी से मामले की शिकायत कर सकता है। यदि एसपी भी कोई सुनवाई ना करे तो वे न्यायालय में परिवाद दायर कर सकते हंै।




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