कारोबार

Posted Date : 10-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 10 अप्रैल। विवादों में फंसीं आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ चंदा कोचर को अब बोर्ड के सदस्यों का भी समर्थन नहीं मिल रहा है। खबर के मुताबिक बोर्ड के एक सदस्य का कहना है कि इस मामले में बोर्ड का ध्यान संस्थान को मजबूत करने पर होना चाहिए न कि किसी आरोपित व्यक्ति (चंदा कोचर) का बचाव करने पर। सोमवार को न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग ने खबर दी कि इसके चलते चंदा कोचर की जगह किसी और अंतरिम सीईओ बनाया जा सकता है।
    उधर, इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक बैंक के कुछ बड़े निवेशकों ने चेयरमैन एमके शर्मा से बात की है। बोर्ड ने पहले मजबूती से चंदा कोचर का समर्थन किया था। अब कहा जा रहा है कि बोर्ड के रुख में बदलाव हो सकता है। इस कवायद में शामिल दो सूत्रों के मुताबिक निवेशकों से कहा गया है कि बोर्ड इस मामले में उनकी चिंताओं को समझता है। आईसीआईसीआई बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, पहले बोर्ड चंदा कोचर के साथ खड़ा था लेकिन हालिया बैठकों में कहा गया कि संस्थान किसी व्यक्ति से बड़ा है और बैंक निवेशकों की चिंताओं पर ध्यान दे रहा है। उधर, सीबीआई के सूत्रों ने बताया कि चंदा कोचर के पति दीपक कोचर और वीडियोकॉन समूह के अधिकारियों और अन्य के खिलाफ शुरुआती जांच का मामला दर्ज किया गया है।
    यह मामला आईसीआईसीआई बैंक द्वारा वीडियोकॉन ग्रुप को विवादित तरीके से 3,250 करोड़ का कर्ज देने से जुड़ा है। आरोप है कि वीडियोकॉन के मुखिया वेणुगोपाल धूत ने इस रकम का 10 फीसदी हिस्सा उन कंपनियों में निवेश किया जिन्हें दीपक कोचर चला रहे थे। इसमें से 2,810 करोड़ रुपये की रकम गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) घोषित हो चुकी है। इसके अलावा सरकारी बॉन्डों को बेचने में भी नियमों का पालन नहीं करने के मामले में आईसीआईसीआई बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की आलोचना का सामना कर रहा है। इसके लिए पिछले महीने आरबीआई ने बैंक पर 58 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया था।  (टाईम्स आफ इंडिया)

    चंदा कोचर के कार्यकाल पर फैसला लेना रिजर्व बैंक का अधिकार- वित्त मंत्रालय
    नई दिल्ली, 10 अप्रैल। बैंक संचालन में भाई-भतीजावाद के आरोपों का सामना कर रही निजी क्षेत्र के अग्रणी बैंक आईसीआईसीआई बैंक की प्रबंध निदेशक और सीईओ चंदा कोचर के कार्यकाल को लेकर कोई भी फैसला लेना बैंक क्षेत्र के नियामक रिजर्व बैंक या फिर आईसीआईसीआई बैंक के निदेशक मंडल के अधिकार क्षेत्र में आता है। आधिकारिक सूत्रों का यह कहना है।
    वित्त मंत्रालय का मानना है कि निजी क्षेत्र के बैंक अईसीआईसीआई बैंक के मामलों को देखना और उसके बारे में कोई फैसला लेना उसका काम नहीं है। हालांकि, एक नियामक के तौर पर रिजर्व बैंक इस मामले पर गौर कर सकता है।
    वित्त मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि यह देखना रिजर्वबैंक का काम है कि चंदा कोचर को आईसीआईसीआई बैंक की प्रबंध निदेशक और सीईओ के पद पर बने रहना चाहिये अथवा नहीं। मंत्रालय ने कहा है कि नियामक और आईसीआईसीआई बैंक का निदेशक मंडल इस बारे में निर्णय लेने में सक्षम है।
    कोचर के खिलाफ अपने कामकाज में भाई भतीजावाद चलाने का आरोप है। इससे बैंकों के कार्य संचालन को लेकर सवालिया निशान लग गया है।  (एजेंसी)

    ...
  •  


Posted Date : 10-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 10 अप्रैल। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र, दिल्ली सरकार और दूसरे प्राधिकरणों से राज्य में अनधिकृत निर्माण और अवैध ढांचों की सीलिंग को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाने को कहा है। खबर के मुताबिक न्यायाधीश एमबी लोकुर और न्यायाधीश दीपक गुप्ता की पीठ ने यह बात कही है। इससे पहले बीती चार अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने अवैध निर्माण रोकने में विफल रहने पर केंद्र, दिल्ली सरकार और स्थानीय निकायों को फटकार लगाई थी। शीर्ष अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 18 अप्रैल को तय की है। (बिजनेस स्टैंडर्ड)

    ...
  •  


Posted Date : 09-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 9 अप्रैल। आईसीआईसीआई बैंक के मामलों के जानकारों कहना है कि बैंक का पूरा बोर्ड अब इस बात से इत्तेफाक नहीं रखता कि बैंक की सीईओ चंदा कोचर को पद पर रहने दिया जाए या नहीं। दो हफ्ते पहले बोर्ट ने कोचर पर पूरा विश्वास जताया था। लेकिन अब कहा जा रहा है कि कुछ निदेशकों ने आपत्ति के स्वर उठाए हैं। बताया जा रहा है कि ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार कुछ बाहरी निदेशकों ने कोचर के रोल को जारी रखने का विरोध किया है। नाम न जाहिर करने इन लोगों ने यह बात कही है। कोचर का वर्तमान कार्यकाल 31 मार्च 2019 को समाप्त हो रहा है। 
    28 मार्च को फाइल किए गए क्रेडिट अपू्रवल प्रोसेस को बोर्ड के 12 सदस्यों ने सही पाया था। फाइलिंग में बोर्ड की अध्यक्षता चेयरमैन एमके शर्मा की थी और कहा था कि किसी प्रकार की कोई तरफदारी नहीं की गई है और कोचर पर पूरा भरोसा है। 
    आईसीआईसीआई के बोर्ड में 9 स्वतंत्र निदेशक हैं, इनमें बैंक के चेयरमैन, एलआईसी के प्रमुख (एलआईसी के पास 9।4 प्रतिशत शेयर हैं) भी शामिल हैं। बता दें कि चंदा कोचर के पति दीपक कोचर और वीडियोकॉन समूह में बिजनेस डील हुई थी। इस डील के बाद बैंक से वीडियोकॉन ग्रुप को लोन दिया गया है। इस केस में सीबीआई की प्राथमिक जांच जारी है।
    जब बोर्ड में ऐसे मतविभाजन पर आईसीआईसीआई के प्रवक्ता से पूछा गया तो उनका कहना था कि आपकी जानकारी पूरी तरह से निराधार और गलत है। आज सुबह शेयर बाजार में आईसीआईसीआई के शेयर 1.8 प्रतिशत नीचे थे। इससे पहले भी बैंक के शेयर 2.2 प्रतिशत गिर चुके हैं। 
    सीबीआई इस मामले को लेकर के चंदा कोचर के देवर को भी हिरासत में ले चुकी है। बोर्ड कुछ दिन पहले साफ कर चुका था कि वो इस मामले में पूरी तरह से कोचर के साथ है और यह उन पर निर्भर करेगा कि वो इस पद पर बनी रहेंगी या नहीं। 
    सीबीआई ने रविवार को आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ चंदा कोचर के पति दीपक कोचर की कंपनी न्यूपॉवर रिन्यूएबल्स के निदेशक उमानाथ वैकुंठ नायक से पूछताछ की थी। नायक से सीबीआई ने यह पूछताछ आईसीआईसीआई बैंक की तरफ से 2012 में वीडियोकॉन ग्रुप को दिए गए 3250 करोड़ रुपये के सिलसिले में थी। 
    सीबीआई इस मामले में पहले ही चंदा कोचर के देवर राजीव कोचर और वीडियोकॉन ग्रुप के प्रमोटर वेणुगोपाल धूत के करीबी महेश चंद्र पुंगलिया से पूछताछ कर चुकी है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने वीडियोकॉन के मालिक वेणुगोपाल धूत और चंदा कोचर के पति खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी कर दिया। (एनडीटीवी)

    ...
  •  


Posted Date : 09-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 9 अप्रैल । तेरह हजार 600 करोड़ रुपए के पीएनबी बैंक घोटाले के आरोपी नीरव मोदी और मेहुल चौकसी की कारगुजारी सामने आने से एक साल पहले ही केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने जूलरी सेक्टर में अनियमितता को लेकर खतरा जाहिर किया था। पीएनबी के साथ एजेंसियों ने अगर सतर्कता बरती होती तो आरोपियों पर समय रहते ही शिकंजा कसा जा सकता था।
    सीवीसी की वार्षिक रिपोर्ट 2017 के अनुसार आयोग ने 5 जनवरी 2017 को सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय के सीनियर अधिकारियों और पीएनबी सहित 10 बैंकों के मुख्य सतर्कता अधिकारियों के साथ बैठक की थी। उस बैठक में कुछ जूलरी फर्मों के अकाउंट्स में गंभीर अनियमितता की चर्चा की गई थी। 
    सीवीसी के वी चौधरी ने बताया, वह मीटिंग विनसम ग्रुप के जतिन मेहता द्वारा बैंको के साथ किए गए फ्रॉड को लेकर थी। इसके साथ ही जूलरी फर्म में फ्रॉड, बैंकिंग सिस्टम में गड़बड़ी, सीवीओ की पूछताछ प्रक्रिया, खरीददारों के अकाउंट्स और सोने के आयात पर भी चर्चा की गई थी।
    उन्होंने कहा कि उस वक्त नीरव मोदी और चौकसी का घोटाला सामने नहीं आ सका था। हालांकि खतरे की आहट मिलने के बाद अगर जांच एजेंसियां समय रहते सतर्क हो गई होतीं और पीएनबी भी इस सेक्टर से जुड़े खातों की सही से जांच करता तो इस घोटाले को रोका जा सकता था। पीएनबी मैनेजमेंट की तरफ से चूक हुई, नहीं तो नीरव और मेहुल पर काफी पहले ही शिकंजा कसा जा सकता था। 
    सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने देश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटाले के आरोपी अरबपति जूलर नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के खिलाफ गैरजमानती वॉरंट जारी कर दिया है। पंजाब नैशनल बैंक में 13 हजार करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी को अंजाम देकर दोनों मामा-भांजे देश छोड़कर भाग चुके हैं। पिछले महीने स्पेशल प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट कोर्ट ने भी पिछले महीने इनके खिलाफ मुख्य गैरजमानती वॉरंट जारी किया था। अदालत द्वारा गैरजमानती वॉरंट जारी होने के साथ ही दोनों के खिलाफ इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की मांग करने का रास्ता खुल जाएगा। 
    नीरव मोदी और मेहुल चौकसी ने पीएनबी की मुंबई स्थित ब्रैडी हाउस ब्रान्च के कुछ कर्मचारियों के साथ मिलकर इस घोटाले को अंजाम दिया था। फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग के जरिए पैसों की निकासी की गई। इस मामले की जांच ईडी और सीबीआई और जैसी एजेंसियां कर रही हैं। पीएनबी के पूर्व डेप्युटी मैनेजर गोकुलनाथ शेट्टी के अलावा नीरव मोदी और चौकसी की कंपनियों के कई अधिकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। 
    नीरव और चौकसी ने सीबीआई के नोटिस के जवाब में पेश होने से इनकार कर दिया था। धोखाधड़ी के आरोपी नीरव मोदी के हॉन्ग कॉन्ग में होने की खबर है। विदेश मंत्रालय ने हॉन्ग कॉन्ग प्रशासन से नीरव मोदी की प्रविजनल गिरफ्तारी के लिए अनुरोध किया है। पिछले दिनों विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह ने राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी थी। (टाईम्स न्यूज)

    ...
  •  


Posted Date : 08-Apr-2018
  • मुंबई, 8 अप्रैल । पति के दोस्त की कंपनी को लोन देने को लेकर सवालों में घिरीं आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ चंदा कोचर को क्लीन चिट देने में बैंक बोर्ड ने जल्दबाजी दिखाई। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह जाने बिना कि जांच एजेंसियां की जांच किस ओर है, आईसीआईसीआई बैंक बोर्ड ने सीईओ चंदा कोचर पूरा विश्वास जता दिया। सीबीआई चंदा कोचर के पति दीपक कोचर के दोस्त और वीडियोकॉन के वेणुगोपाल धूत को दिए गए लोन में कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंट्रेस्ट की संभावनाओं की जांच कर रहा है। यही नहीं बैंक बोर्ड में सरकार द्वारा मनोनीत सदस्य अमित अग्रवाल और एलआईसी के वीके शर्मा बोर्ड की पिछली हफ्ते हुई मीटिंग में मौजूद नहीं थे।यह साफ नहीं है कि बोर्ड के निर्णय में इन दोनों की सहमति ली गई थी या नहीं। बैंक बोर्ड में केंद्र सरकार ने अमित अग्रवाल की जगह लोक रंजन को मनोनीत किया था। दोनों ही वित्तीय सेवा विभाग में जॉइंट सेक्रटरीज हैं। 
    सरकारी खेमे में आईसीआईसीआई बोर्ड द्वारा चंदा कोचर के बचाव में दिखाई गई तेजी को लेकर आंशकाएं हैं। 28 मार्च को बैंक बोर्ड ने एक बयान जारी करते हुए कहा था कि उन्हें एमडी और सीईओ पर पूरा विश्वास है और पक्षपात, भाई-भतीजावाद या ऐसी किसी काम का सवाल ही नहीं उठता। 
    बैंक बोर्ड के बयान के बाद सेबी के एक रजिस्टर्ड ऐनालिस्ट हिमेंद्र हजारी ने कहा था कि बोर्ड डायरेक्टर्स ने विसलब्लोअर द्वारा उठाए गए कुछ आरोपों का जवाब ही नहीं दिया है। एक नोट में उन्होंने कहा, बोर्ड ने न ही तो कुछ खास आरोपों पर कोई जवाब दिया और न ही उस पर कोई जानकारी दी। क्या बोर्ड ने न्यूपावर और वीडियोकॉन के बीच हुई डीलिंग्स पर सफाई मांगी थी? 
    हजारी ने टीओआई से बात करते हुए कहा, मेरे विचार से बोर्ड को कम से कम एक बाहरी एजेंसी अपॉइंट करके आरोपों की जांच करवानी चाहिए थी और उसकी रिपोर्ट सीधे चेयरमैन के पास आनी चाहिए थी। सरकार द्वारा मनोनीत सदस्य ने भी बोर्ड के बयान के बाद कोई स्टेटमेंट जारी किया जिससे पता चलता है कोई मतभेद नहीं था। इससे सरकार के लिए जरूर असहज स्थिति पैदा हो गई है क्योंकि उनका प्रतिनिधि बोर्ड के साथ है वहीं दूसरी ओर सरकारी एजेंसी बैंक की जांच कर रही है। 
    भले ही आईसीआईसीआई बैंक निजी क्षेत्र का बैंक है लेकिन यह पहले जॉइंट सेक्टर का बैंक रहा है जिसमें देश के वित्तीय संस्थानों की शेयरहोल्डिंग रही है। शेयरहोल्डिंग विदेशी इन्वेस्टर्स की अधिक है लेकिन सरकार और एलआईसी के नॉमिनी बोर्ड में जगह पाते रहे हैं।  (टाइम्स न्यूज)

    ...
  •