राजनीति

सामने आए ओपिनियन पोल के आंकड़े, तमिलनाडु में BJP को झटका, जानिए अन्य राज्यों में किसकी बनेगी सरकार
24-Mar-2021 9:54 PM (183)

पांच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनाव के लिए मतदान कराए जाने में महज कुछ ही समय शेष बचा है. इसी के मद्देनजर चुनावी प्रचार अभियान जोरों पर हैं. इन सबके बीच, एबीपी न्यूज-सी वोटर ने वोटिंग शुरू होने से ठीक पहले एक ताजा सर्वे करवाया है, जिसे उसने फाइनल ओपिनियन पोल बताया है. ओपिनियन पोल के अनुसार, तमिलनाडु में कांग्रेस और एमके स्टालिन के गठबंधन वाली यूपीए की सरकार बनती दिख रही है. सर्वे के मुताबिक, यूपीए को यहां पर 173 से 181 सीटें मिलने का अनुमान है. जबकि, दिवंगत जे जयललिता की पार्टी और बीजेपी के गठबंधन को 45 से 53 सीटें मिल सकती हैं.

वहीं, पुदुचेरी में कांग्रेस की सरकार अपना कार्यकाल पूरा करने से पहले ही फरवरी महीने में गिर गई. सर्वे के आंकड़े में भी कांग्रेस के लिए चिंता की स्थिति बनी हुई है और पार्टी की सत्ता में वापसी होती नहीं दिख रही है. जबकि, एनडीए को 19 से 23 सीटें मिल सकती हैं और राज्य में उनकी सरकार बन सकती है. कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए को 7 से 11 सीटें मिलने का अनुमान है. वहीं अन्य को यहां पर 0-1 सीट मिल सकती है. जबकि, टाइम्स नॉउ-सी-वोटर ओपिनियन पोल के अनुसार पुडुचेरी में एनडीए को 30 में से 21 सीटें मिल सकती हैं, जबकि यूपीए, जिसमें कांग्रेस और डीएमके है, को 9 सीटें मिल सकती हैं.

केरल की बात करे तो यहां एक बार फिर एलडीएफ की सरकार बनती दिख रही है. एलडीएफ को 71 से 83 सीटें मिलने का अनुमान है. इस तरह से राज्य में एक बार फिर एलडीएफ की सरकार बन सकती है. जबकि, यूडीएफ के खाते में 56 से 68 सीटें मिल सकती हैं. बीजेपी को 0 से दो सीटें मिल सकती हैं. केरल में कुल 140 विधानसभा की सीटें हैं. वहीं, टाइम्स नॉउ-सी-वोटर ओपिनियन पोल के अनुसार, केरल में वाम लोकतांत्रिक मोर्चे को आने वाले चुनाव में जीत मिल सकती है. हालांकि, यहां बीजेपी के वोट शेयर में बढोतरी का अनुमान जताया गया है. इसमें वाम लोकतांत्रिक मोर्चे को केरल की 140 विधानसभा सीटों में से 77 सीटें मिलने का अनुमान है. पांच साल पहले के विधानसभा चुनाव में इसे 91 सीटें मिली थीं.

सर्वे के मुताबिक, असम में एक बार फिर एनडीए की सरकार बन सकती है. राज्य में सरकार बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा 63 है. एनडीए को 65 से 73 सीटें मिल सकती हैं. वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए को 52 से 60 सीटें मिलने का अनुमान है. असम में कुल 126 विधानसभा की सीटें हैं. सी वोटर सर्वे के मुताबिक, अन्य को 0-4 सीटें मिल सकती है. (prabhatkhabar.com)

आ गया बंगाल का 'फाइनल' ओपिनियन पोल, BJP को लगा करारा झटका; जानिए किसे कितनी सीटें
24-Mar-2021 9:50 PM (302)

कोलकाता | पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के पहले फेज की वोटिंग होने में महज कुछ दिनों का समय ही बचा हुआ है। इन राज्यों में जिस पर लोगों की सबसे ज्यादा नजरें हैं, वह पश्चिम बंगाल है। बंगाल में 27 मार्च से वोटिंग शुरू होने जा रही है, जोकि 29 अप्रैल तक चलेगी। बंगाल में ममता बनर्जी तीसरी बार सत्ता में वापसी की आस लगाए बैठी हैं, तो वहीं, बीजेपी राज्य में 200 से ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज करने का दावा कर रही है। हालांकि, ओपिनियन पोल्स की मानें तो इस बार बीजेपी राज्य में सत्ता हासिल करने से काफी दूर रह सकती है। एबीपी न्यूज-सी वोटर ने वोटिंग शुरू होने से ठीक पहले एक ताजा सर्वे करवाया है, जिसे उसने फाइनल ओपिनियन पोल बताया है। ओपिनियन पोल के अनुसार, राज्य में एक बार फिर से ममता बनर्जी हैट्रिक बनाने जा रही हैं। मालूम हो कि बीते दिन एबीपी न्यूज ने एक और सर्वे एजेंसी सीएनएक्स के साथ मिलकर सर्वे किया था, जिसमें ममता बनर्जी को तगड़ा झटका लगता दिखाई दे रहा था।

'फाइनल' आपेनियिन पोल में ममता बनर्जी की बल्ले-बल्ले
एबीपी न्यूज-सी वोटर के 'फाइनल' ओपिनियन पोल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) बंगाल में बहुमत का आंकड़ा आसानी से पार करते हुए दिखाई दे रही है। राज्य की विधानसभा में 294 सीटें हैं और बहुमत का आंकड़ा 148 का है। ओपिनियन पोल के अनुसार, टीएमसी को इस बार 152-168 सीटें तक मिल सकती है। इस लिहाज से आसानी से ममता बनर्जी राज्य में सरकार बनाने वाली हैं। वहीं, बीजेपी एक बार फिर से 100 का आंकड़ा ही पार करती हुई दिखाई दे रही है। सर्वे में बीजेपी को 104-120 सीटें जीतने का अनुमान लगाया गया है। उधर, कांग्रेस और लेफ्ट गठबंधन 18-26 सीटें जीत सकता है, जबकि अन्य को 0-2 सीटें मिल सकती हैं।

किसे कितने फीसदी वोट का अनुमान?
पिछले लोकसभा चुनाव में बंगाल में 18 सीटें जीतकर सभी को चौंका चुकी बीजेपी इस बार राज्य में बड़ी जीत दर्ज करने का दावा कर चुकी है। हालांकि, अब जब फाइनल ओपिनियन पोल में टीएमसी की तीसरी बार सरकार बनाने का अनुमान जताया जा रहा है, तो अब लोगों की नजरें वोट फीसदी पर टिक गई हैं। सी वोटर के इस सर्वे के अनुसार, टीएमसी वोट फीसदी में बाजी मार सकती है। टीएमसी को इस बार 42 फीसदी वोट मिल सकता है, जबकि बीजेपी 37 फीसदी मतों पर ठहर सकती है। कांग्रेस और लेफ्ट की बात करें तो 13 फीसदी वोट मिल सकते हैं, जबकि अन्य की झोली में 8 फीसदी वोट जाने का अनुमान है।

पिछले ओपिनियन पोल में बीजेपी-टीएमसी की थी टक्कर
पश्चिम बंगाल के लिए किया गया पिछला ओपिनियन पोल एबीपी न्यूज और सीएनएक्स का था, जोकि मंगलवार शाम को जारी हुआ था। इस ओपिनियन पोल में बताया गया था कि बंगाल में बीजेपी को 130 से 140 सीटें तक मिल सकती हैं। ओपिनियन पोल के अनुसार, टीएमसी को 136-146 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया था। वहीं, कांग्रेस और लेफ्ट गठबंधन को राज्य में 14-18 सीटें दी गई थीं। उधर, अन्य को एक से तीन सीटें तक दी गईं। हालांकि, सी वोटर के साथ किए गए फाइनल ओपिनियन पोल में न्यूज चैनल ने टीएमसी को तीसरी बार सरकार में वापसी का अनुमान जताया है। (livehindustan.com)

लालगुडी सीट का पूरा ब्यौरा
17-Mar-2021 10:29 PM (173)

लालगुडी. लालगुडी तमिलनाडु का एक विधानसभा क्षेत्र है. विधानसभा चुनाव 2016 में यह निर्वाचन क्षेत्र द्रविड़ मुनेत्र कड़गम द्वारा जीता गया था. तमिलनाडु राज्य के तिरुचिरापल्ली जिले के अंतर्गत लालगुडी निर्वाचन क्षेत्र आता है. 2016 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में लालगुडी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं का कुल प्रतिशत 88.59 प्रतिशत दर्ज किया गया था. विधानसभा चुनाव 2021 में यहां वोटिंग प्रतिशत बढ़ाने के लिए निर्वाचन आयोग द्वारा जागरुकता अभियान चलाया गया है. मतदाताओं को जागरूक करने के लिए बैनर पोस्ट का इस्तेमाल भी किया गया है. यहां 6 अप्रैल को मतदान और 2 मई को मतगणना होगी.

विधानसभा चुनाव 2016 में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के साउंडरापांडियन ए ने ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के विजयमूर्ति एम को 3837 वोटों के अंतर से हराकर सीट जीती थी. लालगुडी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र पेरम्बलुर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आता है. 2019 के लोकसभा चुनावों में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के उम्मीदवार डॉ शिवरिवेंद्र टी को हराकर जीत हासिल की.

तिरुचिरापल्ली पूर्व सीट का पूरा ब्यौरा
17-Mar-2021 10:10 PM (116)

तिरुचिरापल्ली. तिरुचिरापल्ली (पूर्व) तमिलनाडु का एक विधानसभा क्षेत्र है. विधानसभा चुनाव 2016 में यह निर्वाचन क्षेत्र ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम द्वारा जीता गया था. तमिलनाडु राज्य के तिरुचिरापल्ली जिले के अंतर्गत तिरुचिरापल्ली (पूर्व) निर्वाचन क्षेत्र आता है. 2016 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में तिरुचिरापल्ली (पूर्व) विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं का कुल प्रतिशत 74.05 प्रतिशत दर्ज किया गया था. विधानसभा चुनाव 2021 में यहां वोटिंग प्रतिशत बढ़ाने के लिए निर्वाचन आयोग द्वारा जागरुकता अभियान चलाया गया है. मतदाताओं को जागरूक करने के लिए बैनर पोस्ट का इस्तेमाल भी किया गया है. यहां 6 अप्रैल को मतदान और 2 मई को मतगणना होगी.

विधानसभा चुनाव 2016 में ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के नटराजन एन ने कांग्रेस के जे आर्किराज को 81894 मतों के अंतर से हराकर सीट जीती थी.  (hindi.news18.com)

टिकटों के मुद्दे पर पश्चिम बंगाल में असंतोष और बगावत से जूझती बीजेपी
16-Mar-2021 10:22 PM (248)

दिसंबर से अब तक टीएमसी के कम से कम डेढ़ दर्जन विधायक और नेता बीजेपी में शामिल हो चुके हैं. पश्चिम बंगाल में बीते दस वर्षों से सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस में असंतोष, बगावत और पलायन का दौरा काफी पहले ही शुरू हो गया था.

    डॉयचे वैले पर प्रभाकर मणि तिवारी की रिपोर्ट- 

पश्चिम बंगाल में बीते दस वर्षों से सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस में तो असंतोष, बगावत और पलायन का दौरा विधानसभा चुनाव के एलान के पहले ही शुरू हो गया था. लेकिन टीएमसी का घर तोड़ कर अपना घर बसाने की कोशिश और राज्य की 294 में से दो सौ सीटें जीतकर सरकार बनाने का दावा करने वाली बीजेपी भी अब इस आग से अछूती नहीं है. पार्टी में उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी होने के बाद से ही राजधानी कोलकाता समेत पूरे राज्य में पार्टी की अंदरूनी कलह सतह पर आ गई है. बाहरी उम्मीदवारों को थोपने से नाराज बीजेपी के पुराने नेताओं व कार्यकर्ताओं ने रविवार रात से ही तमाम इलाको में तोड़-फोड़ और विरोध प्रदर्शन का जो सिलसिला शुरू किया था वह जस का तस है. इस व्यापक असंतोष को ध्यान में रखते हुए ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने दौरे के कार्यक्रम में फेरबदल कर बीजेपी अध्यक्ष और प्रदेश नेताओं के साथ कोलकाता में सोमवार को पूरी रात आपात बैठक की और इस पर काबू पाने के उपायों पर विचार किया. इसबीच, मनोनीत राज्यसभा सदस्य रहते विधानसभा चुनावों में उम्मीदवारी पर विवाद के बाद स्वपन दासगुप्ता ने मंगलवार को राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया.

बीजेपी ने तीसरे और चौथे दौर के सीटों के लिए उम्मीदवारों की जो सूची जारी की है उनमें केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो के अलावा लॉकेट चटर्जी, स्वपन दासगुप्ता और निशीथ प्रामाणिक जैसे सांसदों के नाम शामिल थे. उसके बाद ही राजनीतिक हलकों में पूछा जाने लगा कि क्या बीजेपी के पास ढंग के उम्मीदवारों का टोटा हो गया है जो उसे सांसदों को उतारना पड़ रहा है?  उधर, टीएमसी की सूची में बस एक सांसद का नाम है. बीजेपी ने टीएमसी, कांग्रेस और सीपीएम से हाल में आए ज्यादातर दलबदलुओं के अलावा बांग्ला फिल्मोद्योग से जुड़े चार लोगों को भी उम्मीदवार बनाया है.

नाराजगी और विरोध प्रदर्शन

पार्टी की दूसरी सूची जारी होने के बाद रविवार रात से ही हुगली जिले में सिंगुर समेत विभिन्न इलाकों के अलावा कोलकाता स्थित पार्टी के दफ्तरों के सामने भी नाराज बीजेपी कार्यकर्ताओं ने जम कर हंगामा किया और नारेबाजी की. हुगली में सांसद लॉकेट चटर्जी की उम्मीदवारी के खिलाफ बीजेपी कार्यकर्ताओं ने पार्टी के दफ्तर में तोड-फोड़ की गई. हावड़ा जिले की पांचला सीट पर स्थानीय कार्यकर्ताओं ने उम्मीदवार के खिलाफ नाराजगी जताई और पार्टी के दफ्तर में तोड़-फोड़ की. इन लोगों की नाराजगी इस बात से है कि कहीं लाकेट चटर्जी जैसे सांसद को टिकट दे दिया गया है तो कहीं हाल में टीएमसी से आने वाले 89 साल के रबींद्रनाथ भट्टाचार्य समेत दूसरे दलबदलू नेताओं को. दूसरी सूची जारी होने के बाद टीएमसी ने आरोप लगाया था कि बीजेपी को ढंग के उम्मीदवार तक नहीं मिल रहे हैं.

हुगली के सिंगुर में रबींद्रनाथ भट्टाचार्य को टिकट देने के विरोध में बीजेपी के स्थानीय नेता संजय पांडे के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने पार्टी के पर्यवेक्षक और मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री का घेराव किया और उनको खरी-खोटी सुनाई. असंतुष्ट गुट भट्टाचार्य की उम्मीदवारी वापस लेने की मांग कर रहा है. हुगली के सप्तग्राम में तो एक बीजेपी कार्यकर्ता ने रेलवे की पटरी पर सिर रख कर जान देने की भी कोशिश की. हुगली जिले के चंदन नगर में नाराज बीजेपी कार्यकर्ताओं ने रैली निकाली और प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व के खिलाफ नारे भी लगाए. हुगली जिले के निरुपम भट्टाचार्य तो जान देने के लिए रेल की पटरी पर जाकर सो गए. किसी तरह मना कर उनको वापस लाया गया.

पार्टी दफ्तर में तोड़फोड़

इन लोगों की नाराजगी इस बात से है कि कहीं लॉकेट चटर्जी जैसे सांसद को टिकट दे दिया गया है तो कहीं हाल में टीएमसी से आने वाले 89 साल के रबींद्रनाथ भट्टाचार्य समेत कई दूसरे नेताओं को. हुगली में सांसद लॉकेट चटर्जी की उम्मीदवारी के खिलाफ बीजेपी कार्यकर्ताओं ने पार्टी के दफ्तर में तोड-फोड़ की है. वहां जिन सुबीर नाग का नाम उम्मीदवारी की होड़ में सबसे ऊपर था उन्होंने तो राजनीति से ही संन्यास ले लिया है. हावड़ा जिले की पांचला सीट पर स्थानीय कार्यकर्ताओं ने उम्मीदवार के खिलाफ नाराजगी जताई और पार्टी के दफ्तर में तोड़-फोड़ की.  सिंगुर में टीएमसी के निवर्तमान टीएमसी विधायक रबींद्रनाथ भट्टाचार्य की उम्मीदवारी के खिलाफ भी स्थानीय नेता लगातार विरोध जता रहे हैं.

बीजेपी की सिंगुर शाखा के उपाध्यक्ष संजय पांडे कहते हैं, “हम पार्टी नेतृत्व से उम्मीदवार को बदलने की मांग कर रहे हैं. आखिर कितने पैसों का लेन-देन हुआ है? सांसद लॉकेट चटर्जी और प्रदेश अध्यक्ष इसका जवाब दें. रबींद्रनाथ उर्फ मास्टर मोशाय ने सीधे केंद्रीय नेतृत्व से संपर्क कर पार्टी ज्वाइन की थी. हमने इसे भी स्वीकार कर लिया. लेकिन अब उनको उम्मीदवार बनाना हमें मंजूर नहीं है.” पांडे कहते हैं कि उनकी उम्र 89 साल है जबकि पार्टी अस्सी से ऊपर वालों को टिकट नहीं देने की बात कहती रही है. क्या वे लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी से भी बड़े कद के नेता हैं?”

टिकट न मिलने पर बगावत

हुगली जिले कोन्ननगर में बीजेपी के संभावित उम्मीदवार रहे बीजेपी नेता कृष्णा भट्टाचार्य ने तो निर्दलीय के तौर पर मैदान में उतरने का फैसला किया है. उस सीट पर टीएमसी से आए प्रबीर घोषाल को टिकट दिया गया है. कोलकाता में बीजेपी के सांसद अर्जुन सिंह को भी कार्यकर्ताओं की नाराजगी का शिकार होना पड़ा. बैरकुर के बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह को भी कार्यकर्ताओं की नाराजगी का शिकार होना पड़ा. अर्जुन सिंह कहते हैं, “हमने राज्य की सभी विधानसभा सीटों के बारे में स्थानीय नेताओं की शिकायतें सुनी हैं. हम अपनी रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को भेज रहे हैं. अगर शिकायत सही हुई तो इस पर विचार किया जाएगा.”

बीजेपी की एक पुरानी नेता तंद्रा भट्टाचार्य कहती हैं, “उम्मीदवारों के चयन के पीछे की दलील गले से नीचे नहीं उतर रही है.” दक्षिण 24-परगना जिले में भी उम्मीदवारों के चयन पर असंतोष पनप रहा है. लेकिन प्रदेश बीजेपी के प्रवक्ता शमीक भट्टाचार्य कहते हैं,  “पूरे राज्य में कोई विरोध नहीं है. कुछ जगहों पर लोगों ने असंतोष जाहिर किया है. पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी की नीतियों से आकर्षित होकर बहुत से लोगों ने पार्टी का दामन थामा है और यह पश्चिम बंगाल में असली बदलाव का संकेत है.”

सभी पार्टियों के दलबदलू बीजेपी में

बीजेपी ने अब तक कम से कम एक दर्जन दलबदलुओं को टिकट दिए हैं. इनमें टीएमसी के अलावा सीपीएम और गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के नेता शामिल हैं. वर्ष 2016 के विधानसभा चुनावों में पार्टी ने तीन सीटें जीती थीं. उनमें से एक खड़गपुर सदर सीट थी जहां प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष जीते थे. लेकिन उनके वर्ष 2019 में लोकसभा चुनाव में जीत के बाद खाली खड़गपुर सीट उपचुनाव में टीएमसी ने जीत ली थी. इसके अलावा बीजेपी को मालदा में दो सीटें मिली थीं. फिलहाल 2019 के बाद उसके दो विधायक ही थे. खड़गपुर सदर सीट पर इस बार बांग्ला अभिनेता हिरणमय चटर्जी को उम्मीदवार बनाया गया है. हिरणमय भी इसी साल फरवरी में टीएमसी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे.केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को उनके समर्थन में वहां एक रोड शो किया था.

दिलचस्प बात यह है कि टीएमसी समेत दूसरे दलों से बीजेपी में शामिल होने वाले ज्यादातर नेताओं के वाई, एक्स या जेड कटेगरी की सुरक्षा मुहैया कराई गई है. ऐसे लोगों में शुभेंदु अधिकारी के अलावा जितेंद्र तिवारी, हिरणमय चटर्जी, सीपीएम विधायक अशोक डिंडा, टीएमसी विधायक वनश्री माइती, कांग्रेस विधायक सुदीप मुखर्जी, गाजोल की टीएमसी विधायक दीपाली विश्वास, जगमोहन डालमिया की पुत्री वैशाली डालमिया, टीएमसी विधायक सैकत पांजा, विश्वजीत कुंडू और शीलभद्र दत्त के अलावा सीपीएम विधायक तापसी मंडल शामिल हैं.

तृणमूल में भी असंतोष

विधानसभा चुनावों का टिकट नहीं मिलने की वजह से टीएमसी के पूर्व विधायकों में भी नाराजगी है. उम्मीदवारों की सूची जारी होने के बाद कम से कम सात नेता बीजेपी में शामिल हो गए हैं. इनमें कभी ममता बनर्जी की करीबी रहीं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सोनाली गुहा भी शामिल हैं. अब सोमवार को दो बार विधायक रहीं अभिनेत्री देवश्री राय ने भी टीएमसी से इस्तीफा दे दिया है. इसके अलावा कुछ उम्मीदवार निर्दलीय के तौर पर मैदान में उतर गए हैं तो कुछ अब भी बीजेपी से टिकट की आस लगाए बैठे हैं.

बीते साल दिसंबर से अब तक टीएमसी के कम से कम डेढ़ दर्जन विधायक और नेता बीजेपी में शामिल हो चुके हैं. इनमें से शुभेंदु अधिकारी पर नारदा स्टिंग मामले में पैसे लेने के आरोप हैं. राजनीतिक पर्यवेक्षक प्रोफेसर सुकुमार पाल कहते हैं, “बीजेपी ने पहले टीएमसी के घर में सेंध लगाई. अब उसे इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है. असंतोष की आग उसके घर तक पहुंच गई है. इसका चुनावों पर थोड़ा-बहुत असर पड़ना लाजिमी है.” (dw.com)

West Bengal Opinion Poll: ममता लगाएंगी जीत की हैट्रिक या सत्ता पर विराजमान होगी BJP
15-Mar-2021 9:27 PM (240)

ABP News-C Voter Opinion Poll: पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, पुदुचेरी और केरल समेत पांच राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने हैं. इन पांच राज्यों में से सबसे ज्यादा चर्चा में पश्चिम बंगाल है. राज्य की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी एक बार फिर सत्ता में वापसी के दावे कर रही हैं तो वहीं पिछले लोकसभा चुनाव के नतीजों से उत्साहित बीजेपी चुनाव प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ रही. बीजेपी का भी दावा है कि वो तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर देगी.


राज्य में लेफ्ट के साथ गठबंधन करने वाली कांग्रेस भी चुनौती दे रही है. ऐसे में सभी के मन में एक ही सवाल है कि इस बार बंगाल की सत्ता पर कौन काबिज होगा. बंगाल चुनाव को लेकर एबीपी न्यूज़ के लिए सी वोटर ने ओपिनियन पोल (West Bengal Opinion Poll) किया है. जानिए राज्य में इस बार किसको कितनी सीटें मिल सकती हैं.

ओपिनियन पोल के मुताबिक-
तृणमूल कांग्रेस को 150 से 166 सीटें
बीजेपी को 98 से 114
कांग्रेस-लेफ्ट गठबंधन को 23 से 31
और अन्य को तीन से पांच सीटें मिल सकती हैं.
यानी पश्चिम बंगाल में तीसरी बार ममता बनर्जी की सरकार बन सकती है. वहीं बीजेपी को और इंतजार करना पड़ सकता है. हालांकि, पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले बीजेपी के प्रदर्शन में जबरदस्त इजाफा होता दिख रहा है. पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी तीन सीटें जीतने में ही कामयाब हो पाई थी.

पश्चिम बंगाल के वोट प्रतिशत
पश्चिम बंगाल में पिछली बार यानी 2016 में टीएमसी को 44.9 प्रतिशत वोट मिले थे. ऐसा अनुमान है कि इस बार ये वोट डेढ़ प्रतिशत कम होकर 43.4% रह सकते हैं. बीजेपी को बहुत अच्छा फायदा दिख रहा है. पिछली बार 10.2% वोट मिले थे, जो इस बार बढ़कर 38.4% होने का अनुमान है. यानी 28.2% का फायदा होता दिख रहा है.

कांग्रेस और लेफ्ट के गठबंधन को सबसे ज्यादा नुकसान दिख रहा है. पिछली बार इन्हें 37.9% वोट मिले थे, इस बार 12.7% ही मिलने का अनुमान है, यानी माइनस 25.2% का नुकसान है. जबकि अन्य को पिछली बार 7 प्रतिशत वोट मिले थे, इस बार साढ़े 5 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है.

बंगाल में किस चरण में कितनी सीटों पर चुनाव?
पहले चरण में पश्चिम बंगाल की 294 में से 30 सीटों पर 27 मार्च को वोट डाले जाएंगे. वहीं, दूसरे चरण में 30 सीटों पर एक अप्रैल को, तीसरे चरण में 31 सीटों पर 6 अप्रैल को, चौथे चरण में 44 सीटों पर 10 अप्रैल को, पांचवे चरण में 45 सीटों पर 17 अप्रैल को, छठे चरण में 43 सीटों पर 22 अप्रैल को, सातवें चरण में 36 सीटों पर 26 अप्रैल को और आठवें चरण में 35 सीटों पर 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. नतीजों की घोषणा दो मई को होगी.

बंगाल की वर्तमान स्थिति
बंगाल में वर्तमान में तृणमूल कांग्रेस की सरकार है और ममता बनर्जी मुख्यमंत्री हैं. पिछले चुनाव में ममता की टीएमसी ने सबसे ज्यादा 211 सीटें, कांग्रेस ने 44, लेफ्ट ने 26 और बीजेपी ने मात्र तीन सीटों पर जीत दर्ज की थी. जबकि अन्य ने दस सीटों पर जीत हासिल की थी. यहां बहुमत के लिए 148 सीटें चाहिए. (abplive.com/news)

ममता ने कोलकाता में व्हीलचेयर पर किया 5 किलोमीटर लंबा रोड शो
14-Mar-2021 7:22 PM (125)

कोलकाता, 14 मार्च| पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राजकीय एसएसकेएम अस्पताल से छुट्टी मिलने के एक दिन बाद, रविवार को अपने भतीजे और सांसद अभिषेक बनर्जी के साथ यहां पांच किलोमीटर लंबा रोड शो किया। रोड शो के दौरान ममता व्हीलचेयर से चलीं। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने 'नंदीग्राम दिवस' मनाने के लिए मेयो रोड से 5 किलोमीटर लंबा रोड शो का आयोजन किया।

रोड शो में ममता व्हीलचेयर पर सबसे आगे चलीं और उनके पीछे सैकड़ों लोगों और अन्य तृणमूल नेताओं का समूह चला। इस दौरान ममता ने कहा कि उन्हें बंगाल के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करने से कोई रोक नहीं पाएगा।

उन्होंने कहा, "हम निर्भीकता से लड़ते रहेंगे। मैं अभी भी बहुत दर्द में हूं, लेकिन मुझे अपने लोगों का दर्द और भी अधिक महसूस हो रहा है।"

ममता ने कहा कि श्रद्धेय भूमि की रक्षा के लिए इस लड़ाई में वह इस व्हीलचेयर पर ही बंगाल के चारों ओर घूमना जारी रखेंगी। उन्होंने कहा, "अगर मैं बिस्तर पर आराम करने चली जाऊं तो कौन लोगों तक पहुंच पाएगा .. हमें बहुत नुकसान हुआ है और हम और अधिक पीड़ित होंगे, लेकिन हम कायरता के आगे कभी नहीं झुकेंगे।" उन्होंने कहा, उनका लक्ष्य चोट और अस्वस्थ होने के बावजूद मजबूत है।

रोड शो के दौरान अभिषेक बनर्जी ने लोगों से वामपंथी-कांग्रेस-आईएसएफ महागठबंधन के लिए वोट न करने की अपील की। वहीं, ममता ने कहा, "बंगाल में बाहरी लोग सत्ता में नहीं आ पाएंगे। हम एक टूटे हुए पैर के सहारे चुनाव जीतेंगे और एक बार फिर नबान्नो लौटेंगे।"

ममता बनर्जी को बुधवार की शाम पूर्वी मिदनापुर के नंदीग्राम में चुनाव प्रचार के दौरान कार से निकलते ही पैर में चोट लग गई थी। उन्हें ग्रीन चैनल के माध्यम से उसी रात कोलकाता ले जाया गया और राजकीय एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया। ममता को शुक्रवार की शाम अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

अपने अभियान के कार्यक्रम के अनुसार, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री को सोमवार से तीन जिलों - पुरुलिया, बांकुरा और झारग्राम का दौरा करना है। सूत्रों ने कहा कि ममता इन सभी जिलों की यात्रा हेलीकॉप्टर से करेंगी, लेकिन यात्रा के दौरान व्हीलचेयर पर बैठी रहेंगी, क्योंकि उनके पैर की चोट अभी पूरी तरह से ठीक नहीं हुई है।  (आईएएनएस)

भाजपा को असम में हराने के लिए कांग्रेस ने फेंका 5 लाख जॉब का बड़ा दांव
14-Mar-2021 7:05 PM (78)

नई दिल्ली/गुवाहाटी, 14 मार्च | असम में सत्तारूढ़ भाजपा को सत्ता से बेदखल करने के आक्रामक अभियान में, कांग्रेस कई वादे कर रही है। इसमें से सबसे प्रमुख वादे -पांच लाख स्थानीय लोगों को नौकरी देना और नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को राज्य में लागू नहीं होने देना है। वादों को 'गारंटी' कहते हुए, कांग्रेस भाजपा को सत्ता से हटाने और सत्ता में वापस आने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही है।

असम में कांग्रेस के प्रभारी महासचिव जितेंद्र सिंह ने रविवार को कहा, "यह चुनाव असम को बचाने के लिए, असम की महिलाओं को बचाने के लिए, युवाओं को रोजगार देने के लिए और विशेष रूप से राज्य की संस्कृति को बचाने के लिए है।"

कांग्रेस ने सत्ता में आने पर असम के लिए पांच 'गारंटी' दी हैं।

पहला नागरिकता संशोधन अधिनियम है। कांग्रेस ने कहा कि वे सुनिश्चित करेंगे कि सीएए असम में लागू न हो।

अन्य गारंटियों में शामिल हैं - 200 यूनिट मुफ्त बिजली, गृहणियों को 2,000 रुपये प्रति माह, चाय बगान मजदूरों का न्यूनतम वेतन 365 रुपए प्रतिदिन और राज्य में पांच लाख नौकरियां पैदा करना।

कांग्रेस अपनी सार्वजनिक बैठकों में बता रही है कि पार्टी राज्य में कैसे 5 लाख सरकारी नौकरियों की गारंटी देगी, क्योंकि इससे राज्य में लोगों के लिए नए रास्ते खुलेंगे।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी असम में भी प्रचार कर रहे हैं।

वह गुजरात मॉडल का मुकाबला करने के लिए असम में अपने राज्य के मॉडल का वर्णन कर रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार पर रविवार को डिब्रूगढ़ में निशाना साधा। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि राज्य में आखिर सरकार कौन चला रहा है, सर्बानंद सोनोवाल या हेमंत बिस्वा सरमा।

बघेल ने आरोप लगाया कि 'सिंडीकेट असम में सरकार चला रहे हैं, कोयला-रेत-सुपारी- गौ तस्करी सिंडिकेट राज्य में हैं, और सरकार उनकी रक्षा कर रही है।

कांग्रेस ने अब तक तीन चरण के असम विधानसभा चुनावों के लिए प्रचारकों की लिस्ट जारी की है, जिसमें पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, व अन्य शामिल हैं।

प्रियंका गांधी वाड्रा ने पिछले सप्ताह दो दिनों के लिए राज्य का दौरा किया था, और असम के चाय बागानों के श्रमिकों से मिलने के अलावा कुछ सार्वजनिक रैलियों को संबोधित किया था।

आने वाले दिनों में वह फिर से राज्य का दौरा करने वाली हैं।

कांग्रेस ने असम में एआईयूडीएफ, बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ), सीपीआई, सीपीआई (एम), सीपीआई (एमएल), आंचलिक गण मोर्चा (एजीएम) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) को मिलाकर एक महागठबंधन बनाया है।

126 सदस्यीय सदन के लिए चुनाव 27 मार्च, 1 अप्रैल, 6 अप्रैल को होगा। मतगणना 2 मई को होगी। (आईएएनएस)

बंगाल चुनावी संग्राम- 3 : इस्लामपुर : तृणमूल को जीत का विश्वास, भाजपा को मोदी लहर की आस
14-Mar-2021 12:43 PM (139)

-उत्तर दिनाजपुर की प्रमुख सीट पर तृणमूल कांग्रेस ने निवर्तमान विधायक अब्दुल करीम चौधरी को दिया टिकट
   -लोकसभा चुनाव में रायगंज से मिली जीत से भाजपा समर्थक उत्साहित  
- वाममोर्चा-कांग्रेस में असमंजस बरक़रार 

बिकास के शर्मा
इस्लामपुर, 14 मार्च।
अलुवाबाड़ी रेलवे स्टेशन से बाहर निकलते ही बाबाई नामक टोटो चालक हमें मिल जाता है। लोहार पट्टी जाने के लिये निर्धारित किराया दस रुपये प्रति सवारी है। कुछ देर रुकने पर उसे चार और लोग मिल जाते हैं और इस प्रकार टोटो आगे बढ़ जाता है। कुल दो किलोमीटर के रास्ते को तय करने में सात-आठ मिनट लगते हैं और हम लोहापट्टी के श्री राम मंदिर के सामने उतर जाते हैं। उतरते वक्त वह कहता है- दादा मोने राखबेन तो, एबार पोरिबोर्तन (भईया, याद रखियेगा अबकी बार परिवर्तन होगा)। विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही इस्लामपुर में यूं तो राजनीतिक पारा बढ़ना शुरू हो गया था किंतु सत्ताशीन तृणमूल कांग्रेस द्वारा प्रार्थी घोषणा के साथ ही पार्टी कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह है। साथ ही भाजपा एवं वाम-कांग्रेस नेताओं को अभी पार्टी आलाकमान द्वारा प्रार्थी दिए जाने का इंतजार है। टीएमसी समर्थक एवं निजी बस अड्डे पर एजेंट के रुप में कार्य करने वाले सपन बैरागी ने कहा कि इस्लामपुर बस टर्मिनस का नवनिर्माण हो अथवा शहर में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की स्थापना, सभी काम तृणमूल कांग्रेस के शासन में ही हुए हैं।

इस सीट से निवर्तमान विधायक अब्दुल करीम चौधरी को ही तृणमूल कांग्रेस ने उम्मीदवार बनाया है। श्री चौधरी की पकड़ शहर के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में काफी है। श्री चौधरी ने कहा कि इस्लामपुर आज उत्तर दिनाजपुर सबसे चर्चित एवं विकसित शहर है, जिसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विजन का काफी योगदान है। भाजपा के बढ़ते वोट बैंक के बारे में उन्होंने प्रतिक्रिया दी कि लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव के समीकरण अलग-अलग होते हैं। इस्लामपुर की जनता तृणमूल कांग्रेस को ही वोट देकर भारी बहुमत से जिताएगी।

तृणमूल की एक चुनावी सभा

लोहार पट्टी की रहने वाली सोनू कुमारी ने बताया कि इस्लामपुर शहर में उनके मोहल्ले सहित कुछ ही इलाके होंगे जिनमें सड़क ख़राब है अन्यथा पूरे नगर में सडकों की हालत बेहतर है। उन्होंने कहा कि क्यों कि लोहारपट्टी एक बाजार मार्किट क्षेत्र है और रोजाना हजारों की तादात में दूर दराज से लोग यहाँ जरुरत का सामना खरीदने एवं बेचने आते हैं तो इसलिए भी इसका रखरखाव शायद नहीं हो पता होगा किंतु नेताओं को इस ओर ध्यान देना चाहिए।

पहले बिहार में था क्षेत्र
उत्तर दिनाजपुर जिले में पड़ने वाला इस्लामपुर विधानसभा क्षेत्र रायगंज लोकसभा क्षेत्र अंतर्गत आता है। साल 2016 के चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार इस विधानसभा में कुल एक लाख 90 हजार मतदाता हैं। 1951 के चुनाव में यह इलाका बिहार अंतर्गत आता था किंतु वर्ष 1977 में यह पश्चिम बंगाल विधानसभा के अंतर्गत शामिल हुआ। 1977 में अब्दुल करीम चौधरी ने निर्दलीय चुनाव जीता था। उसके बाद उन्होंने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी।

वर्तमान तृणमूल प्रार्थी का शुरू से दबदबा
तृणमूल कांग्रेस ने वयोवृद्ध नेता अब्दुल करीम चौधरी को इस्लामपुर से 2021 के चुनाव में टिकट दिया है। श्री चौधरी के वर्चस्व का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 1977 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद आज तक वे कुल सात बार विधायक चुने गए। वर्ष 1987 और 2006 के चुनावों में उन्हें माकपा के मो फ़ारुक़ ने पराजित किया था। वहीँ साल 2011 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल और कांग्रेस के बीच में गठबंधन प्रत्याशी के रूप में वे जब खड़े हुए तो कांग्रेस के बागी उम्मीदवार एवं वर्तमान तृणमूल के जिलाध्यक्ष कन्हैया लाल अग्रवाल ने उनके खिलाफ निर्दलीय से पर्चा भरा। वह चुनाव भी श्री चौधरी जीत गए किन्तु 2016 के चुनाव में कांग्रेस प्रार्थी श्री अग्रवाल ने श्री चौधरी को 7718 मतों से हराया था। श्री अग्रवाल ने 2019 में विधायक पद से इस्तीफा दिया और तृणमूल कांग्रेस का झंडा थामा। उन्होंने रायगंज सीट से चुनाव भी लड़ा किंतु हार गए। 2019 में विधानसभा उपचुनाव में तृणमूल ने पुनः श्री चौधरी को टिकट दिया और उन्होंने भाजपा उम्मीदवार डॉ सौम्यरूप मंडल को साढ़े 21 हजार मतों से पराजित किया। विशेषकर ग्रामीण इलाकों में श्री चौधरी की काफी पकड़ मानी जाती है। 

लोकसभा चुनाव में चली मोदी लहर, भाजपा के हौसले बुलंद
साल 2019 के संसदीय चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर का असर पूरे उत्तर बंगाल के साथ-साथ रायगंज सीट पर भी हुआ। भाजपा की देबश्री चौधरी ने यहाँ से तृणमूल कांग्रेस प्रार्थी कन्हैया लाल अग्रवाल को 60574 पराजित किया था। भाजपा को कुल 41 प्रतिशत मत प्राप्त हुए थे वहीँ तत्कालीन माकपा सांसद मो सलीम को केवल 14 प्रतिशत लोगों ने ही मत दिया था। सुश्री चौधरी को भाजपा को विस्तार देने के उद्देश्य से सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री भी बनाया गया था। लोकसभा चुनाव में हुई जीत के बाद से ही रायगंज सहित इस्लामपुर में भाजपा ने अपने संगठन को बढ़ाने में सक्रियता दिखाई, जिसका नतीजा 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रार्थी को इस्लामपुर से 56141 मतों के रूप में मिला। इसके बाद से ही भाजपा समर्थकों का हौसला काफी बुलंद है। पार्टी के जिलाध्यक्ष विश्वजीत लाहिड़ी ने कहा कि पिछले दस वर्षों में राज्य सरकार ने इस्लामपुर में कोई काम नहीं किया है, जिसके फलस्वरूप पिछले चुनाव में हमें 50 हजार से ज्यादा लोगों ने समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा निष्पक्ष चुनाव चाहती है जबकि तृणमूल कांग्रेस इलाके में मतदाताओं को डरा-धमकाकर वोट लेना चाहती है। इस्लामपुर सीट ही नहीं उत्तर दिनाजपुर की सभी सीटों पर भाजपा प्रार्थियों की जीत होगी। भाजपा की ओर से प्रार्थी की घोषणा 14 मार्च को दूसरी सूची में हो सकती है।

वामो-कांग्रेस खेमे में सक्रियता कम
इस्लामपुर सीट से अभी तक वाममोर्चा, कांग्रेस एवं आईएसएफ गठबंधन की ओर से प्रार्थी निर्धारित नहीं होने से इलाके के समर्थकों में मायूसी देखी जा रही है। सूत्रों की मानें तो आईएसएफ प्रमुख एवं फुरफुरा शरीफ अब्बास सिद्दीकी ने इस्लामपुर सीट में मुस्लिमों के संख्याबल को आधार बनाकर उनके दल की ओर से प्रार्थी देने की मांग की है, किंतु उत्तर दिनाजपुर के चाकुलिया सीट से फॉरवर्ड ब्लॉक विधायक अली इमरान रम्जा ने स्पष्ट कह दिया है कि फुरफुरा शरीफ का उत्तर बंगाल में कोई जनाधार नहीं है। गठबंधन में खींचतान को लेकर इस्लामपुर के एक स्थानीय माकपा नेता ने कहा कि जब तक प्रार्थी की घोषणा नहीं होती, तब तक चुनावी प्रचार शुरू करना संभव नहीं है। 2019 के विधानसभा उपचुनाव में माकपा ने शक्तिप्रकाश गुहा नियोगी को टिकट दिया था, उन्हें केवल 5128 मत प्राप्त हुए थे। आंकड़ों का अध्ययन करने पर ज्ञात होता है कि माकपा का वोट प्रतिशत कम होने से भाजपा के वोटों में वृद्धि हुई है।


इस्लामपुर बस टर्मिनस का एरियल व्यू

 

 

ममता सोमवार से व्हीलचेयर पर चुनाव अभियान शुरू करेंगी
13-Mar-2021 9:46 PM (175)

कोलकाता, 13 मार्च| पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सोमवार से व्हीलचेयर पर अपने चुनाव अभियान की शुरूआत करेंगी। इस सप्ताह के शुरू में पूर्वी मिदनापुर के नंदीग्राम में चुनाव प्रचार के दौरान लगी चोटों का इलाज कराने के बाद तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो को शुक्रवार शाम को राज्य के एसएसकेएम अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

वह पहली बार पुरुलिया जिले का दौरा करेंगी, जहां तृणमूल प्रमुख दो जनसभाओं को संबोधित करने वाली हैं - एक बाघमंडी के झालदा इलाके में और दूसरी बलरामपुर के रथतला मैदान में।

अपने पहले अभियान कार्यक्रम के अनुसार, वह दो अन्य जिलों-बांकुड़ा और झारग्राम का दौरा करेंगी। 

सूत्रों ने कहा कि सीएम हेलीकॉप्टर से इन सभी जिलों की यात्रा करेंगे, लेकिन वह व्हीलचेयर पर बैठे रहेंगी, क्योंकि उनके पैर में लगी चोट पूरी तरह से ठीक नहीं हुई है।

बनर्जी को बुधवार शाम नंदीग्राम में एक चुनाव प्रचार के दौरान पैर में चोट लग गई थी।  (आईएएनएस)

ममता की चोटों ने बढ़ाई तृणमूल और बीजेपी में कड़वाहट
12-Mar-2021 1:17 PM (94)

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक कथित हमले में चोट लगने के बाद बंगाल की राजनीति में तनाव बढ़ गया है. ममता की तृणमूल पार्टी के कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे हैं तो विपक्षी दल मामले की जांच की मांग कर रहे हैं.

      डॉयचे वैले पर प्रभाकर मणि तिवारी की रिपोर्ट- 

पश्चिम बंगाल में सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस और उसे चुनौती देने वाली बीजेपी के बीच कड़वाहट तो विधानसभा चुनावों के बहुत पहले से ही बढ़ने लगी थी. लेकिन अब बुधवार को अपना नामांकन पत्र दायर करने नंदीग्राम पहुंची मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर कथित हमले के बाद राज्य की राजनीति में अचानक उबाल आ गया है. इस घटना के खिलाफ तृणमूल के नेताओं ने बृहस्पतिवार को जहां चुनाव आयोग से मिल कर शिकायत की और जांच की मांग की, वहीं पार्टी के समर्थकों और कार्यकर्ताओं ने इस कथित हमले के विरोध में राज्य के विभिन्न हिस्सों में जुलूस निकाला, हाइवे पर रास्ता रोका और रेलवे की पटरियों पर धरना दिया.

दूसरी ओर, बीजेपी के एक प्रतिनिधमंडल ने भी चुनाव आयोग से मिल कर घटना की जांच कराने की मांग की है ताकि हकीकत सामने आ सके. ममता और उनकी पार्टी के तमाम नेताओं ने जहां इसे सुनियोजित साजिश के तहत किया गया हमला करार दिया है वहीं बीजेपी, सीपीएम और कांग्रेस ने इस नौटंकी और पाखंड बताया है. इस घटना से सिर्फ एक दिन पहले राज्य के पुलिस महानिदेशक को बदलने के आयोग के फैसले पर भी सवाल उठने लगे हैं.

बंगाल पर बीजेपी की निगाह
बीते लोकसभा चुनावों में कामयाबी के बाद ही बीजेपी की निगाहें विधानसभा चुनावों पर लगी थी. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत तमाम नेता इस बार दौ सौ से ज्यादा सीटें जीत कर सरकार बनाने के दावे करते रहे हैं. बीजेपी ने अपना चुनावी नारा भी यही दिया है कि अबकी बार दो सौ पार. लेकिन अपने इस सपने को पूरा करने के लिए पार्टी ममता बनर्जी की पार्टी के दलबदलुओं का ही सहारा ले रही है.

बीते दिसंबर में अमित शाह की बांकुड़ा रैली के दौरान शुभेंदु अधिकारी समेत करीब एक दर्जन विधायक बीजेपी में शामिल हो गए थे. शुभेंदु को हाल तक ममता बनर्जी का दाहिना हाथ माना जाता था. वर्ष 2016 में नंदीग्राम विधानसभा सीट से जीतने वाले शुभेंदु अधिकारी की वर्ष 2007 के उस नंदीग्राम आंदोलन में काफी अहम भूमिका रही है जहां से टीएमसी के सत्ता में पहुंचने का राह निकली थी. वैसे भी अधिकारी परिवार का पूर्व मेदिनीपुर और आसपास के जिलों में काफी रसूख है. शुभेंदु के पिता शिशिर अधिकारी और एक भाई दिब्येंदु अधिकारी अब भी टीएमसी के ही टिकट पर सांसद हैं. यही शुभेंदु ममता के खिलाफ नंदीग्राम सीट से चुनावी मैदान में हैं.

दलबदलुओं को टिकट देने पर नाराजगी
तृणमूल के नेताओं को तोड़ कर अपने पाले में शामिल करने की बीजेपी की रणनीति अब तक जारी है. पार्टी के उम्मीदवारों की सूची के एलान के बाद अब तक कम से कम सात ऐसे पूर्व विधायकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पार्टी का दामन थाम लिया है जिनको टिकट नहीं मिला है. इनके अलावा एक उम्मीदवार ने तो सीट पसंद नहीं आने की वजह से तृणमूल से नाता तोड़ लिया और बीजेपी खेमे में चली गईं. हालांकि ममता इन दलबदलुओं को तरजीह देने को तैयार नहीं हैं. उनका कहना था, "उम्मीदवारों की सूची तैयार करने में मंत्रियों और पूर्व विधायकों के कामकाज को ध्यान में रखा गया है. असंतुष्ट नेताओं के लिए बाहर जाने का दरवाजा खुला है.”

दलबदलुओं को थोक मात्रा में पार्टी में शामिल करने और उनको टिकट देने पर बीजेपी के स्थानीय नेताओं में भी भारी नाराजगी है. इसे देखते हुए बीच में दलबदलुओं को पार्टी में शामिल करने पर अंकुश लगा दिया गया था. लेकिन अब फिर कई नेताओं को पार्टी में लेने से साफ है कि बीजेपी नेतृत्व इस मामले में गंभीर नहीं था. तृणमूल प्रवक्ता सौगत राय कहते हैं, "बीजेपी उधार के नेताओं के सहारे सत्ता हासिल करने का सपना देख रही है. उसका यह सपना कभी पूरा नहीं होगा. लोग इस पार्टी को भी समझ चुके हैं और टीएमसी से उसमें जाने वाले नेताओं की असलियत भी जान गए हैं.”

वैक्सीन प्रमाणपत्र पर पीएम की तस्वीर
इन दोनों दलों में कोरोना की वैक्सीन के प्रमाणपत्र पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर के मुद्दे पर भी कड़वाहट पैदा हो गई. आखिर में टीएमसी के विरोध के बाद चुनाव आयोग को यह निर्देश देना पड़ा कि जिन राज्यों में चुनाव होने हैं वहां ऐसे प्रमाणपत्रों पर मोदी की तस्वीर नहीं होगी. चुनावों के एलान से पहले ही केंद्रीय बलों की सवा सौ कंपनियों को राज्य में भेजने के मुद्दे पर भी टीएमसी और केंद्र की बीजेपी सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज रहा. उसके बाद जब आठ चरणों में चुनाव कराने का ऐलान किया गया तो ममता ने साफ कहा था कि यह कार्यक्रम बीजेपी के स्थानीय दफ्तर में तैयार हुआ है और आयोग ने बीजेपी की उसी सूची पर मुहर लगा दी है.

बीजेपी बंगाल में तृणमूल को कड़ी चुनौती दे रही है
उसके बाद राज्य के कई पुलिस अधिकारियों का तबादला कर दिया गया. लेकिन मंगलावर रात को अचानक पुलिस महानिदेशक वीरेंद्र को हटा कर उनकी जगह नीरज नयन को इस पद पर नियुक्त किया गया. चुनाव आयोग ने अपने पत्र में कहा था कि वीरेंद्र को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से चुनाव की कोई जिम्मेदारी नहीं दी जानी चाहिए. ममता मंगलवार को सुबह ही नंदीग्राम चली गईं थी. वहां बुधवार को सुबह हल्दिया में नामांकन दाखिल करने के बाद शाम को एक मंदिर से लौटते समय कार के दरवाजे से उनको गंभीर चोटें आई हैं. उनके बाएं पांव पर प्लास्टर चढ़ा है और डाक्टरों ने कंधे और गर्दन में भी चोट की बात कही है. उनको 48 से 72 घंटे तक निगरानी में रखा गया है. कल शाम की घटना के बाद उनको ग्रीन कारीडोर के जरिए कोलकाता ले आकर महानगर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एसएसकेएम में दाखिल कराया गया था. वहां पांच डाक्टरों को लेकर बना मेडिकल बोर्ड उनका इलाज कर रहा है. मूल कार्यक्रम के मुताबिक ममता को आज नंदीग्राम से लौट कर तृणमूल का चुनाव घोषणापत्र जारी करना था. लेकिन फिलहाल उसे स्थगित कर दिया गया है.

ममता को चोट लगने के बाद प्रदर्शन
इस कथित हमले के बाद टीएमसी कार्यकर्ताओं और समर्थको ने जहां पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन किया और रैलियां निकाली है वहीं इस मुद्दे पर पार्टी और विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गया है. बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने सवाल किया है, "आखिर जेड प्लस सुरक्षा वाली ममता को चोट कैसे लगी? यह हैरत की बात है.” सीपीएम और कांग्रेस ने भी कहा है कि अगर यहां मुख्यमंत्री पर हमला हो सकता है तो कोई भी सुरक्षित नहीं है. इससे राज्य में कानून व व्यवस्था की स्थिति का अनुमान लगाना मुश्किल नहीं है. कल रात अस्पताल में मुख्यमंत्री से मुलाकात कर लौट रहे राज्यपाल जगदीप धनखड़ को भी टीएमसी समर्थकों की नाराजगी का सामना करना पड़ा और उनके खिलाफ गो बैक के नारे लगे.

राजनीतिक पर्यवेक्षक विश्वनाथ चक्रवर्ती कहते हैं, "यह हमला है या हादसा, इसका पता तो जांच से चलेगा. लेकिन अपनी तरह की इस पहली घटना पर अभी कुछ दिनों तक राजनीति गरामाई ही रहेगी. इससे ममता व उनकी पर्टी के चुनाव अभियान पर कितना असर होगा और क्या उनको सहानुभूति लहर का फायदा मिलेगा, इन सवालों का जवाब तो शायद दो मई को चुनाव नतीजे आने के बाद ही मिलेगा.” (dw.com)

बंगाल के भाग्य का फैसला 'बम, गोलियों' से नहीं हो सकता : गंभीर
07-Mar-2021 9:13 PM (141)

नई दिल्ली, 7 मार्च | पूर्व क्रिकेटर और भाजपा सांसद गौतम गंभीर ने पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि राज्य के साथ-साथ राज्य के लोगों के भाग्य का फैसला 'बम और गोलियों' से नहीं किया जा सकता। पश्चिम बंगाल के मतदाताओं के लिए एक खुले पत्र में, गंभीर ने बताया कि हाल के दिनों में बम बनाने के कारखानों की कई रिपोर्ट सामने आई हैं।

उन्होंने कहा, "दशकों से वामपंथियों और तृणमूल कांग्रेस द्वारा धमकी, हिंसा को सामान्य बनाया गया है और यह अब बंगाल की राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा बन गया है।"

पूर्वी दिल्ली के भाजपा सांसद गंभीर ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस राज्य में किसी भी विपक्ष को चुप कराने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।

"यह बंगाल का लोकाचार नहीं है और मतदाताओं को यह स्पष्ट करना चाहिए। उन्हें यह तय करना होगा कि वे सिंडिकेट का शासन चाहते हैं या 'सोनार बांग्ला'? वे भाई-भतीजावाद चाहते हैं या योग्यता? वे घुसपैठियों के साथ हैं या हमारे बहादुर जवानों के साथ? वे राज्य में अपराध और भ्रष्टाचार चाहते हैं या परिवर्तन।"

उन्होंने कहा कि उन्हें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की टिप्पणी पर दुख हुआ है कि भाजपा 'बाहरी लोगों' की पार्टी है और राज्य में इसका कोई स्थान नहीं है।

"एक पल के लिए भी मुझे यह महसूस नहीं हुआ कि मैं एक बाहरी व्यक्ति हूं और कोलकाता में या बंगाल में नहीं, कहीं और पैदा नहीं हुआ। मुझे यह कभी महसूस नहीं हुआ कि मैंने प्रेसीडेंसी कॉलेज या जादवपुर विश्वविद्यालय में नहीं पढ़ा या बड़ा होने पर कभी पार्कस्ट्रीट में एगरोल नहीं खाया।"

उन्होंने आगे कहा कि वह हमेशा खुद को इस विशाल और खुशहाल परिवार के एक हिस्से की तरह महसूस करते हैं। राज्य में आने पर हर बार मुझे प्यार और आशीर्वाद मिलता है।

गंभीर ने कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) को दो आईपीएल फाइनल में जीत दिलाई है। राज्य में विशेषकर युवाओं के बीच उनकी बड़ी 'फैन फोलोविंग' है। वह पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भाजपा के स्टार प्रचारकों में से एक हैं।

पश्चिम बंगाल की 294 सीटों के लिए 27 मार्च से 29 अप्रैल के बीच मतदान होगा। मतों की गिनती 2 मई को होगी।  (आईएएनएस)

 

पूर्व क्रिकेटर अशोक डिंडा लड़ेंगे बीजेपी से चुनाव, पार्टी की पहली सूची में कई दिलचस्प नाम
06-Mar-2021 9:44 PM (203)

नई दिल्ली, 6 मार्च : बीजेपी ने पहले दो चरणों की सीटों के लिए 57 उम्मीदवारों की सूची जारी की है. मोयना सीट से पूर्व तेज गेंदबाज अशोक डिंडा को टिकट दिया गया है. पहली सूची में नंदीग्राम से शुभेन्दु अधिकारी का नाम सबसे प्रमुख है, जो तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे. BJP की पहली सूची में कई महिला उम्मीदवारों के भी नाम हैं.

पुरुलिया से सुदीप मुखर्जी,गोसावा से चित्ता प्रमाणिक, पथप्रतिमा से आशीष हलदर, काकद्वीप से दीपांकर जना, छठना से सत्यनारायण मुखर्जी, रानीबांध (एसटी) सीट से खुदीराम टुडू, रायपुर (एसटी) से सुधांग्शू हंसदा, साल्टोरा (एससी) सीट से चंदना बाउरी, रघुनाथपुर (एससी) सीट से एडवोकेट विवेकानंदा बाउरी, मनबाजार (एसटी) गौरी सिंह सदार, बिनपुर (एसटी) से पालन सरीन, मेदिनीपुर से शमित दास, केशरी (एसटी) सोनाली मुर्मू, खड़गपुर से तपन भुइयां, गर्बेटा से मदद रुईदास, सालबोनी से राजीव कुंडू को टिकट दिया गया है.

सूची में कहा गया है कि बीजेपी की केंद्रीय चुनाव समिति की 4 मार्च को पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा की अगुवाई में बैठक हुई थी. बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और चुनाव समिति के अन्य सदस्य मौजूद थे. चुनाव समिति ने 57 नामों पर अपनी मुहर लगाई है. सोनामुखी से दिवाकर, हल्दिया से तापसी मंडल, सागर से विकास को टिकट दिया गया है. नंदकुमार से नीलांजन अधिकारी को प्रत्याशी बनाया गया है.  (ndtv.in)

प्रियंका 7 मार्च को मेरठ में किसान पंचायत को संबोधित करेंगी
05-Mar-2021 9:03 PM (160)

नई दिल्ली, 5 मार्च | कांग्रेस महासचिव प्रभारी प्रियंका गांधी सात मार्च को गत वर्ष सरकार द्वारा लागू किए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ मेरठ में एक किसान पंचायत को संबोधित करने वाली हैं। यह किसानों की दुर्दशा को उजागर करने के लिए पार्टी द्वारा आयोजित बैठकों की श्रृंखला का एक हिस्सा है। उन्होंने हाल ही में मथुरा जिले में एक किसान पंचायत को संबोधित किया था, जो तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 27 जिलों में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की एक श्रृंखला का हिस्सा है।

उसने पिछले महीने मथुरा में कहा था, "भगवान कृष्ण ने भगवान इंद्र के अहंकार को तोड़ दिया था और यहां के लोगों को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठा लिया था। यह सरकार भी अहंकारी हो गई है और जो देश को जिंदा रखते हैं, उन किसानों के क्रोध से यह सरकार बच नहीं पाएगी।"

पार्टी राज्य में मिलों द्वारा गन्ना के भुगतान के लिए प्रदर्शन और पंचायत का आयोजन करेगी, जिसमें कांग्रेस महासचिव भाग लेंगी।

किसानों द्वारा कृषि कानूनों को वापस लेने की उनकी मांग के लिए केएमपी एक्सप्रेसवे पर आंदोलन करने का फैसला करने के एक दिन बाद यह बैठक निर्धारित की गई है, क्योंकि किसान तीन महीने से अधिक समय से दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हैं और कोई सफलता नहीं मिली है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, गन्ना किसानों को 2019-20 का बकाया नहीं मिला है। 2020-21 के विपणन वर्ष में, सामान्य किस्म के लिए एसएपी 315 रुपये प्रति क्विंटल पर अपरिवर्तित रहा है, जबकि शुरूआती किस्म और गन्ने की अस्वीकृत किस्म के लिए कीमतें क्रमश: 325 रुपये और 310 रुपये प्रति क्विंटल बनी रहेगी।

यह तीसरा सीधा वर्ष है जब राज्य सरकार ने गन्ने के मूल्य में वृद्धि नहीं करने का निर्णय लिया है। 2017 में योगी आदित्यनाथ सरकार के सत्ता में आने के बाद एसएपी को 2017 में 10 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ा दिया गया था।

किसान नई एसएपी को 325 रुपये से बढ़ाकर 450 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग कर रहे हैं। (आईएएनएस)

 

असम की 70 सीटों के लिए बीजेपी ने तय किए प्रत्‍याशियों के नाम, माजुली से लड़ेंगे सीएम सर्बानंद सोनोवाल
05-Mar-2021 9:01 PM (129)

नई दिल्ली, 5 मार्च : असम में विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी और सहयोगी दलों के बीच सीटों का बंटवारा हो गया है. बीजेपी के राष्‍ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह ने बताया कि केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक गुरुवार को हुई‍, जिसमें पीएम नरेंद्र मोदी ,गृहमंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के अलावा असम प्रदेश अध्‍यक्ष रंजीत दास भी मौजूद थे. बीजेपी ने शुक्रवार को 70 सीटों के लिए प्रत्‍याशियों के नाम घोषित कर दिए हैं.बैठक में सहयोगी दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के बारे में फैसला लिया गया. सीएम सर्वानंद सोनोवाल मांजुली से चुनाव लड़ेंगे. बीजेपी ने असम में तीन चरणों में होने वाली जा रही वोटिंग के तहत पहले दो चरणों की सीटों के लिए प्रत्‍याशियों के नाम का ऐलान कर दिया है.

सीएम सोनोवाल चुनाव में माजुली सीट से प्रत्‍याशी होंगे जबकि पूर्वोत्‍तर में बीजेपी के रणनीतिकार के तौर पर पहचान रखने वाले और सोनोवाल सरकार में स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री हिमांता बिश्‍व सरमा जालुकबरी सीट से उम्‍मीदवार होंगे. हिमांता फिलहाल इसी सीट से विधायक हैं. सूत्रों के अनुसार, हिमांता बिश्‍व शर्मा चुनाव लड़ने के इच्‍छुक नहीं थे लेकिन पार्टी ने फैसला किया है कि इस बार सर्बानंद सोनोवाल को सीएम के तौर पर प्रोजेक्‍ट नहीं किया जाएगा. बीजेपी इस बार का असम विधानसभा चुनाव सोनोवाल और बिश्‍व सरमा के संयुक्‍त नेतृत्‍व में लड़ा जाएगा. 

127 सदस्‍यों वाली असम विधानसभा के लिए चुनाव के तहत पहले चरण में 27 मार्च को 47 सीटों पर वोटिंग होगी जबकि दूसरे चरण में 1 अप्रैल को 39 सीटों पर वोट डाले जाएंगे. तीसरे और अंतिम चरण के अंतर्गत 6 अप्रैल 40 सीटों पर वोट डाले जाएंगे. बीजेपी की ओर से घोषित उम्‍मीदवारों की सूची में 11 विधायकों के टिकट काटे गए हैं. क्षेत्रीय सहयोगी असम गण परिषद (AGP) ने पार्टी को बेरहामपुर सीट से लड़ने की इजाजत दी है, इस सीट से AGP के संस्‍थापक अध्‍यक्ष प्रफुल्‍ल कुमार महंता चुनाव लड़ते आए हैं. बीजेपी असम में AGP और यूनाइटेड पीपुल्‍स पार्टी लिबरल (UPPL) के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी. एजीपी 26 सीटों पर प्रत्‍याशी उतारेगी जबकि UPPL  आठ सीटों पर चुनाव लड़ेगी. कांग्रेस के सत्‍ता से बाहर होने के बाद यह राज्‍य में पहला चुनाव होगा. बीजेपी के सामने इस चुनाव में अपनी सत्‍ता को बरकरार रखने की चुनौती है. (ndtv.in/india-news)

नेपाल के प्रधानमंत्री को अपनी ही पार्टी की ओर से अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना होगा
05-Mar-2021 8:05 PM (112)

काठमांडू, 5 मार्च| सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के प्रतिद्वंद्वी गुट के अध्यक्ष पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली को चेतावनी देते हुए कहा कि या तो वह रविवार तक अपना पद छोड़ दें, नहीं तो संसद में अविश्वास प्रस्ताव का सामना करने के लिए तैयार रहें। प्रधानमंत्री ओली द्वारा 20 दिसंबर को सदन भंग करने और चुनाव कराए जाने की घोषणा के बाद, नेपाल की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी राजनीतिक रूप से दो गुटों में विभाजित हो गई थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने 24 फरवरी को ओली के फैसले को पलट दिया और सरकार को उसके फैसले के 13 दिनों के भीतर सदन को बुलाने का निर्देश दिया।

ओली और प्रचंड की अगुवाई वाले दो धड़े नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के लिए दावा ठोक रहे हैं और दोनों का कहना है कि उनके पास केंद्रीय समिति के साथ-साथ संसदीय दल में भी अधिकांश सदस्य हैं।

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के दो गुटों के बीच अनबन तब और भी बढ़ गई, जब दोनों पक्षों के शीर्ष नेताओं को एक-दूसरे के गुटों से निकाल दिया गया।

बाद में 24 जनवरी को प्रचंड गुट ने पार्टी के एक सामान्य सदस्य के रूप में ओली को बाहर कर दिया। प्रचंड गुट ने गुरुवार को संसद सचिवालय को पत्र लिखकर ओली को संसदीय दल के नेता के रूप में मान्यता नहीं देने का आग्रह किया।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार, सरकार ने रविवार के लिए सदन का सत्र बुलाया है।

प्रचंड के नेतृत्व वाले गुट की एक संसदीय दल की बैठक में शुक्रवार को ओली के इस्तीफे की मांग करने या अविश्वास प्रस्ताव का सामना करने का फैसला किया गया। प्रचंड ने बैठक के बाद इसकी जानकारी दी।

प्रचंड ने कहा, "अगर ओली ने पद से इस्तीफा नहीं दिया, तो आने वाले दिन उनके लिए मुश्किल होंगे। उन्होंने कहा कि जैसे ही सुप्रीम कोर्ट ने सदन को बहाल करने का फैसला किया, हमने उनके इस्तीफे की मांग की, लेकिन उन्होंने पद छोड़ने से इनकार कर दिया। आज, अधिकांश सांसदों ने संसदीय दल के नेता के रूप में मुझे चुना है।" 

उन्होंने कहा, "इसका मतलब है कि ओली पार्टी में अल्पमत में हैं। यदि वह इस्तीफा नहीं देते हैं, तो हम उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएंगे। हम ओली के व्यवहार के कारण अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए मजबूर हैं।"

लेकिन प्रचंड खेमे के पास अविश्वास प्रस्ताव के जरिए ओली को बाहर निकालने के लिए जरूरी संख्या 173 नहीं है। गुट को नेपाली कांग्रेस जैसे अन्य दलों के समर्थन की जरूरत है, जो सदन में प्राथमिक विपक्ष है।

नेपाली कांग्रेस को ओली और प्रचंड दोनों गुटों से प्रधानमंत्री पद के लिए प्रस्ताव मिला है, लेकिन पार्टी ने अभी तक तय नहीं किया है कि वह किसका समर्थन करेगी।

प्रचंड के नेतृत्व वाले गुट ने नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा को पहले ही प्रधानमंत्री पद की पेशकश कर दी है। लेकिन देउबा इस बात पर जोर देते रहे हैं कि उनकी पार्टी किसी भी गुट का समर्थन नहीं करेगी, जब तक कि सत्ताधारी पार्टी तकनीकी रूप से विभाजित नहीं होती है और दो अलग-अलग संगठनों में विभाजित नहीं हो जाती है। (आईएएनएस)

बंगाल चुनाव में शिवसेना नहीं उतारेगी अपने प्रत्याशी, देगी ममता को समर्थन
04-Mar-2021 8:09 PM (114)

काईद नाजमी 

मुंबई, 4 मार्च |
शिवसेना ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अपने प्रत्याशी न उतारने और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी का समर्थन करने फैसला किया है। 

शिवसेना सांसद और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि चूंकि पश्चिम बंगाल के चुनाव दीदी बनाम ऑल (ममता बनाम बाकी सभी) की तरह हो रहे हैं, ऐसे में शिवसेना ने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है, लेकिन पार्टी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ एकजुटता से खड़ी रहेगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि शिवसेना अध्यक्ष और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया है।

संजय राउत ने अपने बयान में कहा, "बहुत सारे लोगों को यह जानने की जिज्ञासा है कि क्या शिवसेना पश्चिम बंगाल में विधानसभा का चुनाव लड़ेगी या नहीं? पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के साथ बैठक में इस बारे में जो फैसला लिया गया है, वो मैं आपको बता देता हूं। इस समय पश्चिम बंगाल में जो सियासी हालात हैं, उसे देखकर लगता है कि चुनावी जंग में एक तरफ दीदी और दूसरी तरफ बाकी सब हैं।"

उन्होंने कहा, "सभी एम फैक्टर जैसे- मनी, मसल और मीडिया का इस्तेमाल ममता दीदी को हराने के लिए किया जा रहा है। इसलिए शिवसेना ने पश्चिम बंगाल चुनाव न लड़ने और ममता बनर्जी को समर्थन देने का फैसला लिया है। हमें विश्वास है कि ममता बनर्जी विधानसभा चुनाव में एक गर्जना भरी जीत हासिल करेंगी, क्योंकि दीदी रियल बंगाल टाइग्रेस (बंगाल की असली शेरनी) हैं।"

हालांकि, एमवीए के सूत्रों ने कहा कि ये कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि पश्चिम बंगाल चुनावों में मतों का विभाजन न हो और तृणमूल की संभावनाओं को भाजपा की वजह से कोई नुकसान न पहुंचे। हालांकि इससे पहले शिवसेना प्रदेश की लगभग 60 सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रही थी।

संपूर्ण भारतीय राजनीति में अपनी उपस्थिति हासिल करने की रणनीति के तहत, जनवरी में शिवसेना ने पश्चिम बंगाल में चुनावी बिगुल बजाने की योजना की घोषणा की थी, जहां उसने 2016 के विधानसभा और 2019 के लोकसभा चुनाव लड़े थे, लेकिन वह कोई भी सीट जीतने में सफल नहीं हो सकी थी।

इससे पहले शिवसेना ने पश्चिम बंगाल के अलावा दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, जम्मू एवं कश्मीर और गोवा सहित विभिन्न राज्यों में विभिन्न चुनाव लड़े हैं। फिलहाल शिवसेना राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और कांग्रेस के साथ गठबंधन में महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ पार्टी है।

संयोग से शिवसेना के सत्तारूढ़ सहयोगी राकांपा के अध्यक्ष शरद पवार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वह 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले ममता बनर्जी को समर्थन देने के लिए राष्ट्रीय और राज्य के विपक्षी दलों के साथ महागठबंधन बनाने की योजना के तहत कोलकाता का दौरा करेंगे।

इसी तरह, राजनीतिक स्रोत भी महाराष्ट्र में एमवीए जैसे प्रयोग की बंगाल में पुनरावृत्ति की संभावना से इनकार नहीं करते हैं। यानी यहां भी शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस जैसी अलग-अलग विचारधाराओं वाले दल हाथ मिला सकते हैं। पश्चिम बंगाल में अगर किसी को भी पूर्ण बहुमत नहीं मिलता है, तब ऐसी स्थिति में अन्य विपरीत विचारधारा वाले दलों की अहमियत भी बढ़ जाती है।

राज्य के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, "महाराष्ट्र में अकल्पनीय हुआ और यह सुचारु रूप से काम भी कर रहा है। कुछ भी संभव है। यह पश्चिम बंगाल में भी संभव है।" (आईएएनएस)

असम चुनाव को लेकर नड्डा के घर पहुंचे सोनोवाल, उम्मीदवारों पर चर्चा
04-Mar-2021 5:26 PM (66)

नई दिल्ली, 4 मार्च | पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने कमर कस ली है। गुरुवार को चुनावों के मद्देनजर भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के आवास पर महत्वपूर्ण बैठक चल रही है। बंगाल चुनाव पर बैठक करीब 4 घंटे चली, जिसके बाद बैठक में शामिल गृह मंत्री अमित शाह यहां से रवाना हो गए। असम चुनाव को लेकर उम्मीदवारों पर मंथन करने के लिए मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल जेपी नड्डा के घर पर मौजूद हैं। इस वक्त नड्डा के आवास पर अब तक असम के चुनाव पर चर्चा के लिए मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, असम प्रभारी बैजयन्त पांडा और सह प्रभारी पवन शर्मा के साथ साथ बीजेपी पार्टी के आला नेता मौजूद हैं।

बीजेपी केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक से पहले जेपी नड्डा के आवास पर हो रही बैठक में असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों की लिस्ट तैयार कर ली जाएगी।

असम में 27 मार्च से छह अप्रैल के बीच तीन चरणों में मतदान संपन्न होगा, पहले चरण के तहत राज्य की 47 विधानसभा सीटों पर 27 मार्च को, दूसरे चरण के तहत 39 विधानसभा सीटों पर एक अप्रैल और तीसरे व अंतिम चरण के तहत 40 विधानसभा सीटों पर छह अप्रैल को मतदान संपन्न होगा। 

गुरुवार शाम बीजेपी मुख्यालय में भाजपा केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक होगी, जिसमें प्रधानमंत्री भी शामिल हो सकते हैं। (आईएएनएस)

रामविलास के निधन के बाद बिहार की सियासत में तन्हा पड़े लोजपा के 'चिराग'!
04-Mar-2021 1:14 PM (93)

मनोज पाठक

पटना, 4 मार्च|
बिहार की राजनीति में अपनी खास पहचान बना चुके लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के संस्थापक रामविलास पासवान के निधन के बाद उनके पुत्र और जमुई के सांसद चिराग पासवान सियासत में तन्हा नजर आने लगे हैं। पिछले साल हुए बिहार विधानसभा में लोजपा के साथ गलबहियां करने वाले उनके अपने तो उनका साथ छोड़ ही रहे हैं, जो फिलहाल साथ हैं उनके भी बिछड़ने के कयास लगाए जा रहे हैं। 

बिहार विधान परिषद में लोजपा की एकमात्र प्रतिनिधित्व करने वाली नूतन सिंह ने अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का कमल थाम लिया है।

पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में चिराग खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'हनुमान' बताकर चुनावी मैदान में अपनी पार्टी को उतारा था। ऐसी स्थिति में भाजपा के नेताओं ने यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने बिहार दौरे में यह कहा था कि राजग में सिर्फ भाजपा, जदयू, विकासशील इंसान पार्टी और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा शामिल है। 

माना जाता है कि इसके बावजूद लोजपा मतदाताओं में भ्रम पैदा करने में सफल रही थी। यही कारण है कि चुनाव में लोजपा भले ही एक सीट पर विजयी हुई हो लेकिन जदयू को कई सीटों पर नुकसान पहुंचाया था। हालांकि चिराग के लिए यह दांव अब उल्टा पड़ गया लगता है। 

बिहार में एकसाथ सरकार चला रही भाजपा जदयू के दबाव में लोजपा के संस्थापक रामविलास पासवान के निधन के बाद खाली हुई राज्यसभा सीट पर लोजपा के किसी अन्य नेता को नहीं भेजकर भाजपा ने पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी को भेजकर लोजपा को यह स्पष्ट संदेश दे दिया था, कि राजग में लोजपा की स्थिति अब वैसी नहीं रही। 

विधानसभा चुनाव में जदयू राज्य में तीसरे नंबर की पार्टी बन गई है। जदयू के नेता इसके लिए सबसे बड़ा जिम्मेदार लोजपा को मानते हैं। ऐसे में हालांकि जदयू के नेता लोजपा को लेकर खुलकर तो कुछ नहीं बोलते हैं, लेकिन इतना जरूर कहते हैं कि लोजपा के विषय में भाजपा को सोचना है। 

वैसे, जदयू लोजपा से बदला लेने को लेकर कोई भी कोर कसर नहीं छोड़ रही है। जदयू ने लोजपा के 200 से अधिक नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल कर लिया। इधर, लोजपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके पूर्व विधायक रामेश्वर चौरसिया को भी लोजपा से मोहभंग हो गया और उन्होंने पार्टी छोड़ दी। लोजपा के एकमात्र विधायक राजकुमार सिंह के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलने के बाद भी अटकलों का दौर जारी है। 

इधर, मंगलवार को लोजपा के प्रदेश, जिला व प्रखंड के कई दिग्गज नेताओं सहित सैकड़ों कार्यकर्ता भाजपा में शामिल हो गए। बेतिया में आयोजित एक मिल समारोह में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने कहा कि भाजपा एक परिवार है और यहां भाई की तरह सम्मान मिलेगा। पूर्व में लोजपा-भाजपा का मजबूत गठबंधन रहा। चंपाारण भाजपा का गढ़ है, लोजपा नेताओं के भाजपा में शामिल होने के बाद अब अभेद्य किला बन गया है।

उघर, लोजपा के प्रवक्ता अशरफ अंसारी दावे के साथ कहते हैं कि जदयू में गए लोग ही भाजपा में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोजपा मजबूती के साथ अपने मुहिम में आगे बढ़ रही है। 

उन्होंने चिराग के अकेले पड़ जाने के संबंध में पूछे जाने पर कहा कि जदयू के नेता की सुबह और शाम चिराग के नाम से होती है। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि अगर चिराग अकेले पड़ गए हैं, लोजपा समाप्त हो गई है, तो उनके नेता प्रतिदिन चिराग का नाम क्यों ले रहे हैं। 

लोजपा के नेता का दावा है कि पार्टी बिहार फस्र्ट, बिहारी फस्र्ट मुहिम को लेकर आगे बढ़ रही है। 

बहरहाल, सभी पार्टी के नेताओं के अपने दावे हैं लेकिन इतना तय है कि बिहार विधानसभा चुनाव के बाद लोजपा में दिन प्रतिदिन दरार चौड़ी हो रही है और उनके साथ वाले नेता छिटक रहे हैं।  (आईएएनएस)

कांग्रेस पार्टी क्या आपसी टकराव की तरफ़ बढ़ रही है?
02-Mar-2021 10:10 PM (123)

- सलमान रावी
क्या कांग्रेस पार्टी और उसके अंदर के विक्षुब्ध वरिष्ठ नेताओं का संमूह यानी 'जी 23' टकराव की तरफ़ तेज़ी से बढ़ रहा है? दोनों तरफ़ से हो रही बयानबाज़ी को देखते हुए, राजनीतिक हलकों में ऐसे ही क़यास लगाए जा रहे हैं.

कांग्रेस हाई कमान की तरफ़ इसको लेकर कोई प्रतिक्रया नहीं दी गई है. चाहे सोनिया गाँधी हों या पार्टी में गाँधी परिवार के वफ़ादार माने जाने वाले नेता हों - किसी ने भी न तो जी-23 के नेताओं की पिछले साल लिखी गई चिठ्ठी को लेकर कोई प्रतिक्रिया दी है और न ही जम्मू में इन जी-23 के नेताओं के कार्यक्रम को लेकर ही कुछ कहा है.

लेकिन, विश्लेषकों को लगता है कि जम्मू में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जी-23 के नेताओं द्वारा प्रकट किए गए विचार और ट्विटर पर लोक सभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी और आनंद शर्मा के बीच छिड़े वाक् युद्ध से तो टकराव के संकेत अब स्पष्ट होकर सामने आने लगे हैं.

जम्मू में जी-23 के नेता जम्मू में राज्य सभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आज़ाद के रिटायर होने के मौके पर जमा हुए थे और उन्होंने इस दौरान कहा कि कांग्रेस का संगठन बहुत कमज़ोर होता चला जा रहा है.

वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कहा था कि, "हम यहाँ क्यूँ जमा हुए हैं ? सच ये है कि हम कांग्रेस को कमज़ोर होता हुआ देख रहे हैं. हम पहले भी जमा हुए हैं. हमें कांग्रेस को मज़बूत करना होगा."

जी-23 गुट के नेता
अगले दिन एक अन्य कार्यक्रम में बोलते हुए आज़ाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ़ करते हुए कहा कि "एक समय में मोदी ने चाय बेच कर गुज़ारा किया है. मगर वो अपने अतीत को छुपाते नहीं हैं."

कांग्रेस के खेमे में जी-23 गुट के नेताओं के जमा होने पर नाराज़गी दिख तो रही है, मगर कोई इन नेताओं के ख़िलाफ़ कुछ नहीं बोल रहा है.

अलबत्ता पत्रकारों द्वारा पूछे जाने पर अभिषेक मनु सिंघवी ने सिर्फ़ इतना कहा कि जी 23 के सभी नेता कांग्रेस के संगठन का अभिन्न अंग हैं.

अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्होंने सिर्फ इतना कहा, "हम उन सब की बहुत इज्ज़त करते हैं. लेकिन ये और भी ज़्यादा अच्छा होता अगर ये सब पांच राज्यों में हो रहे चुनावों में पार्टी की मदद कर रहे होते."

जी-23 में वैसे तो कांग्रेस पार्टी के वो 23 वरिष्ठ नेता शामिल हैं जिन्होंने पिछले साल पार्टी आलाकमान को नेतृत्व के सवाल पर चिठ्ठी लिखी थी. इन नेताओं में केरल से कांग्रेस सांसद शशि थरूर के अलावा कांग्रेस पार्टी के कई बड़े नाम भी शामिल थे जैसे जितिन प्रसाद, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चौहान, गुलाम नबी आज़ाद, कपिल सिब्बल, राज बब्बर, मनीष तिवारी, भूपिंदर सिंह हुड्डा और विवेक तनखा शामिल थे.

TWITTER@SHASHITHAROOR

आनंद शर्मा का बयान
लेकिन इनमें से जितिन प्रसाद को पश्चिम बंगाल में विधान सभा चुनावों के लिए पार्टी की 'स्क्रीनिंग कमिटी' में शामिल किया गया जबकि पृथ्वीराज चौहान को असम चुनावों के लिए बनाई गयी पार्टी की 'स्क्रीनिंग कमिटी' का अध्यक्ष बनाया गया है.

नई ज़िम्मेदारी मिलते ही नेताओं के रुख में बदलाव देखने को भी मिल रहा है. जम्मू में हुए जी-23 के कार्यक्रम में कई बड़े नता थे जो शामिल नहीं हुए.

जी-23 के प्रमुख नेता आनंद शर्मा न सोमवार को कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में हुई कांग्रेस, वाम दलों और इंडियन सेकुलर फ्रंट की रैली की आलोचना करते हुए ट्वीट किया और कहा कि इंडियन सेकुलर फ्रंट जैसे संगठनों से कांग्रेस को दूर रहना चाहिए.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस का चरित्र हमेशा से ही धर्म निरपेक्षता का रहा है इस लिए उसे हर तरह की साम्प्रदायिक शक्ति से खुद को दूर रखना चाहिए.

शर्मा ने अपने ट्वीट में कहा, "आईएसएफ और ऐसे अन्य दलों से साथ कांग्रेस का गठबंधन पार्टी की मूल विचारधारा, गांधीवाद और नेहरूवादी धर्म निरपेक्षता के खिलाफ है, जो कांग्रेस पार्टी की आत्मा है. इन मुद्दों को लेकर कांग्रेस कार्य समिति में चर्चा होनी चाहिए थी."

TWITTER@ANANDSHARMAINC

अधीर रंजन चौधरी बनाम आनंद शर्मा
शर्मा का ये भी कहना था कि सांप्रदायिकता के खिलाफ़ लड़ाई में 'कांग्रेस दोहरा मापदंड नहीं अपना सकती है.'

उनका कहना था कि फुरफुरा शरीफ़ के धर्म गुरु के नेतृत्व वाला संगठन - 'इंडियन सेकुलर फ्रंट' - जिस कार्यक्रम में शामिल था उसमे पश्चिम बंगाल के "प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की उपस्थिति और समर्थन शर्मनाक" है.

हालांकि शर्मा के ट्वीट के बाद अधीर रंजन चौधरी ने भी ट्विट्टर के ज़रिये ही जवाब दिया. उन्होंने शर्मा को संबोधित करते हुए कहा कि जो गठबंधन पश्चिम बंगाल में बना है उसका नेतृत्व वाम मोर्चे के पास है जिसका कांग्रेस भी एक हिस्सा है.

उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, "मैं इन चुनिन्दा कांग्रेस नेताओं से आग्रह करूंगा कि वो निजी फायदे से ऊपर उठें और प्रधानमंत्री की तारीफ़ करने में अपना समय ना बर्बाद करें. पार्टी को मज़बूत करना उनका कर्तव्य है न की उस पेड़ को काटना जिसने उन्हें इतने सालों तक फल और छाया दी है."

TWITTER@JITINPRASADA

जी-23 के लिए बड़ा झटका
कुछ दिनों पहले तक जी-23 में शामिल जितिन प्रसाद ने भी शर्मा को जवाब देते हुए कहा कि गठबंधन के फैसले संगठन और कार्यकर्ताओं के हित को देखते हुए ही लिए जाते हैं. उनका कहना था कि इस समय सबको एक साथ आकर कांग्रेस को चुनावी राज्यों मज़बूत करने का काम करना चाहिए.

ये जी-23 के लिए बड़ा झटका था और राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई ने बीबीसी से बात कर्ट हुए कहा कि उन्हें लगता है कि कांग्रेस का हाई कमान इन नेताओं को लेकर कोई प्रतिक्रया सिर्फ चुनावों को देखते हुए नहीं दे रहा है.

उनका कहना था कि सिर्फ एक केरल को छोड़ कर बाक़ी जिन राज्यों में चुनाव हो रहे हैं वहां कांग्रस की स्थिति कमज़ोर हुई है. ऐसे में असम और केरल में कांग्रेस चाहे तो बेहतर प्रदर्शन के लिए ज़ोर लगा सकती है.

वो कहते हैं, "मुझे नहीं लगता कि कांग्रेस हाई कमान, जी-23 के नेताओं के ख़िलाफ़ कोई कार्यवाही कर उन्हें मजबूती प्रदान करेगा. इसी लिए पार्टी की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रया नहीं दी जा रही है. पिछले साल जी-23 के नेताओं द्वारा लिखी गई चिठ्ठी पर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई."

TWITTER@RAHULGANDHI

प्रदेश इकाई का फ़ैसला
किदवई का कहना है कि अलबत्ता कांग्रेस हाई कमान ने ही जी-23 के नेताओं क बीच मतभेद पैदा करने की कोशिश की जब जितिन प्रसाद और पृथ्वीराज चौहान को चुनाव की कमिटियों का प्रभारी बना दिया गया. वो कहते हैं कि जम्मू की बैठक में भी जी-23 के सभी नेता शामिल नहीं हुए थे.

लेकिन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बीके हरी प्रसाद ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि राज्यों में विधानसभा के चुनावों के लिए किये जाने वाले गठबंधन के लिए प्रदेश की कांग्रेस इकाई को ही अधिकृत किया जाता है.

प्रसाद कहते हैं, "ये फैसले प्रदेश स्तर पर ही होते हैं जिसका आला कमान से कोई लेना देना नहीं है. प्रदेश इकाई को ही बेहतर पता रहता है कि क्षेत्रीय स्तर पर किसके साथ गठबंधन करना पार्टी के लिए सबसे अच्छा विकल्प साबित हो सकता है."

वैसे जी-23 के नेताओं के बयानों का ज़िक्र करते हुए वो कहते हैं कि राजनीतिक दलों में ऐसा चलता रहता है और नेता अपनी बात रखने के लिए स्वतंत्र होते हैं. लेकिन पिछले कुछ दिनों से जो कुछ हो रहा है उसपर उन्होंने कहा, "ये सबकुछ अच्छे टेस्ट में नहीं हो रहा है." (bbc.com/hindi)

मिस इंडिया दिल्ली मानसी सहगल आम आदमी पार्टी में शामिल, कहा- स्वच्छ राजनीति से होगा बदलाव
01-Mar-2021 8:53 PM (120)

नई दिल्ली, 1 मार्च। दिल्ली के राजेंद्र नगर के विधायक राघव चड्ढा की उपस्थिति में सोमवार को मिस इंडिया दिल्ली-2019 मानसी सहगल आम आदमी पार्टी में शामिल हो गईं. मनसी सहगल इंजीनियर, टेडएक्स स्पीकर और एक उद्यमी हैं. उनका अपना एक स्टार्टअप है. मिस इंडिया दिल्ली प्रतियोगिता में दिए गए अपने परिचय में उन्होंने खुद को परोपकारी और अंग दान में अपनी गहरी रुचि के बारे में बताया था. इस मौके पर राघव चड्ढा ने कहा कि "मुझे खुशी है कि आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल युवाओं में राजनीति से जुड़ने और लोगों की सेवा करने का विश्वास जगाते हैं. 'आप' परिवार दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है. मैं मानसी का आप परिवार में स्वागत करता हूं."

आम आदमी पार्टी में शामिल होने पर मानसी सहगल ने कहा कि ''मैं समाज के लिए बहुत कम उम्र से कुछ अच्छा करना चाहती थी. किसी भी राष्ट्र की समृद्धि के लिए स्वास्थ्य और शिक्षा दो मुख्य आधार हैं और मैंने पिछले कुछ वर्षों में सीएम केजरीवाल के नेतृत्व में इन क्षेत्रों में जबरदस्त बदलाव देखा है.''

मानसी सहगल ने कहा कि ''सीएम अरविंद केजरीवाल के शासन और विधायक राघव चड्ढा की मेहनत से प्रेरित होकर मैंने आम आदमी पार्टी में शामिल होने का फैसला किया और मुझे लगता है कि स्वच्छ राजनीति के माध्यम से हम दुनिया में एक बड़ा बदलाव ला सकते हैं.'' उन्होंने कहा कि ''मैं युवाओं और विशेष रूप से हमारी महिलाओं से आग्रह करूंगी कि वे हमारे साथ शामिल हों और राजनीति को बदलें.'' 

राघव चड्ढा ने कहा कि  सीएम अरविंद केजरीवाल के जन शासन मॉडल से प्रेरित होकर मेरे नारायणा क्षेत्र के कई प्रतिष्ठित लोग आज आप परिवार में शामिल हुए, जिसमें मिस इंडिया दिल्ली 2019 मानसी सहगल भी शामिल थीं. (khabar.ndtv.com)

केरल में किसकी सरकार ? एलडीएफ, यूडीएफ या बीजेपी, जानें क्या कहता है ओपिनियन पोल
27-Feb-2021 8:19 PM (181)

नई दिल्ली, 27 फरवरी। केरल में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए तारीखों का एलान हो गया है. चुनावों की तारीख सामने के बाद तमाम पार्टियां राज्य में सत्ता हासिल करने की कोशिशों में लग गई हैं. इस बीच एबीपी न्यूज़ ने सी वोटर के साथ मिलकर राज्य के वोटरों की नब्ज़ टटोलने की कोशिश की है. ओपिनियन पोल में ये जानने का प्रयास किया गया है कि क्या मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन एक बार फिर अपनी अगुवाई में एलडीएफ को सत्ता पर काबिज़ कराने में कामयाब होते हैं या केरल की जनता कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) को मौका देती है.

किसे कितने फीसदी वोट ?
एबीपी न्यूज़ सी-वोटर के ओपिनियन पोल में सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) को 40 फीसदी वोट मिलता नज़र आ रहा है, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के खाते में 33 फीसदी वोट जा रहा है. जबकि बीजेपी को 13 फीसदी और अन्य को 15 फीसदी वोट मिलने की संभावना है.

किसे कितनी सीटें ?
सीटों के लिहाज़ से देखें तो ओपिनियन पोल कहता है कि एलडीएफ के खाते में इस बार 83-91 सीटें जा सकती हैं और यूडीएफ को 47-55 सीटों पर संतोष करना पड़ सकता है. जबकि बीजेपी को महज़ 0-2 सीटें ही मिलती दिख रही हैं. अन्य को भी 0-2 सीटें ही मिलती नज़र आ रही हैं.

सीएम पद की पहली पसंद कौन?
ओपनियिन पोल में ये भी सवाल किया गया कि राज्य में लोग सीएम के तौर पर सबसे ज्यादा किसे पसंद करते हैं. इस सवाल पर 38.5 फीसदी लोगों ने सीएम के तौर पर पिनराई विजयन को अपनी पहली पसंद करार दिया. जबकि 27 फीसदी लोगों ने कांग्रेस के ओमान चांडी को अपनी पहली पसंद बताया.

पिछले चुनाव में कैसे थे नतीजे?
केरल की 140 विधानसभा सीटों पर 6 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होना है. चुनावी नतीजें 2 मई को आएंगे. इस वक्त केरल में सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) की सरकार है. पिनाराई विजयन राज्य के मुख्यमंत्री हैं. साल 2016 के चुनाव में एलडीएफ को 91 सीटों पर जीत मिली थी, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने 47 सीटें हासिल की थी. यहां बहुमत के लिए 71 सीटें चाहिए.

कैसे हुआ सर्वे? 
5 राज्यों में चुनाव का एलान हो चुका है. abp न्यूज के लिए सी वोटर ने ओपिनियन पोल किया है. इस ओपिनियन पोल में सभी पांच राज्यों की 824 विधानसभा सीटों पर 70 हजार 608 लोगों से बात की गई है. 21 फरवरी तक का ये सर्वे पिछले 6 हफ्तों में किया गया है. इस सर्वे में मार्जिन ऑफ एरर प्लस माइनस तीन से प्लस माइनस पांच फीसदी तक का है. (abplive.com)

बंगाल चुनावी संग्राम-1 : क्यों ममता के लिए सुरक्षित हो सकता है नंदीग्राम !
25-Feb-2021 12:59 PM (202)

पिछले चुनावों के आंकड़े बता रहे तृणमूल के पक्ष में रही है वहां परिस्थितियां

  तृणमूल से भाजपा में शामिल हुए कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा- 50 हजार से नहीं हराया तो राजनीति से लूंगा संन्यास  

बिकास के शर्मा

कोलकाता, 25 फ़रवरी। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पूर्व ममता बनर्जी बनर्जी के द्वारा दक्षिण बंगाल के नंदीग्राम से चुनाव लड़ने की घोषणा ने एक बार फिर आंदोलन की भूमि नंदीग्राम को राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है। भूमि आंदोलन के कारण वर्ष 2009 में नंदीग्राम पूरे देश में चर्चा का केंद्र बना और अब इसी सीट से विधायक रहे शुभेंदु अधिकारी ने तृणमूल से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल होने के बाद तृणमूल सुप्रीमो सुश्री बनर्जी को यहाँ से चुनाव में 50 हजार वोटों से पराजित करने की चुनौती प्रस्तुत की है। श्री अधिकारी के चैलेंज को मुख्यमंत्री सुश्री बनर्जी ने स्वीकार भी कर लिया है, जिससे चुनावी माहौल और भी गर्म हो गया है। पूरे पश्चिम बंगाल विशेषकर दक्षिण बंगाल के जिलों पूर्व मेदनीपुर, पश्चिम मेदनीपुर, आसनसोल, पुरुलिया एवं बांकुड़ा में लोगों एवं राजनीतिक पंडितों की निगाहें नंदीग्राम सीट पर गड़ी हैं।

पूर्व मेदिनीपुर जिले में स्थित नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र लोकसभा चुनाव में तमलुक संसदीय क्षेत्र अंतर्गत आता है और वर्ष 2019 के संसदीय चुनाव में तृणमूल कांग्रेस प्रत्याशी एवं शुभेंदु के भाई दिब्येंदु अधिकारी ने भाजपा के सिद्धार्थ नस्कर को दो लाख मतों के अंतर से पराजित किया था। नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र भौगोलिक रूप से तीन हिस्सों में बंटा है। दो ग्रामीण ब्लॉक इलाका तथा एक शहरी इलाका है।

नंदीग्राम क्षेत्र की 96.65 प्रतिशत आबादी ग्रामीण तथा 3.35 फीसदी शहरी है। वर्ष 2019 के संसदीय चुनाव के आंकड़ों के अनुसार कुल मतदाताओं की संख्या 2,46,434 थी और विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित जाति की आबादी 16.46 फीसदी तथा अनुसूचित जनजाति की आबादी मात्र 0.1 फीसदी है। नंदीग्राम प्रखंड एक में अल्पसंंख्यक 34 फीसदी, नंदीग्राम प्रखंड दो में अल्पसंख्यक 12.1 फीसदी तथा शहरी इलाकों में अल्पसंख्यक 40 फीसदी हैं। साथ ही प्रत्येक चुनाव में अल्पसंख्यक मतदाता निर्णायक भूमिका में रहते हैं और मतदान भी अच्छा होता है। पिछले संसदीय चुनाव में 84.18 फीसदी मतदान हुआ वहीँ वर्ष 2016 के विधानसभा चुनाव में 86.97 फीसदी मतदान हुआ था।

दो दशक से दक्षिण बंगाल में पत्रकारिता कर रहे डॉ प्रदीप सुमन की मानें तो अल्पसंख्यकों की भूमिका का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2006 के विधानसभा चुनाव में जब सीपीआई तथा तृणमूल कांग्रेस ने अल्पसंख्यक प्रत्याशी उतारे थे तो सीपीआई को मात्र 3.4 फीसदी मतों के अंतर से जीत मिली थी। डॉ सुमन ने आगे बताया कि वर्ष 2011 में जब तृणमूल ने अल्पसंख्यक और सीपीआई ने सामान्य प्रत्याशी मैदान में उतारा तो तृणमूल की जीत का अंतर बढ़ कर 26 फीसदी हो गया। इसी तरह वर्ष 2016 में खुद शुभेंदु तृणमूल के प्रत्याशी बनने से जीत के अंतर में उन्होंने 7 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी और की, यही कारण है कि शुभेंदु वहां से ममता जैसी नेत्री को चुनौती दे पा रहे हैं।

संसदीय आम चुनाव 2019  में विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल ने भाजपा को 68 हजार मतों के अंतर से हराया था। भाजपा के मतों में 30 फीसदी की बढ़त हुई थी। वृद्धि तृणमूल से न होकर सीपीएम के खाते से 25.79 फीसदी तथा कांग्रेस के खाते से 1.09 फीसदी हुई थी। यानी 27 फीसदी मत वाम और कांग्रेस के खाते से शिफ्ट हुए थे।

तृणमूल नेता सह कैबिनेट मंत्री मलय घटक ने कहा कि पिछले चुनाव की स्थिति एवं ममता बनर्जी द्वारा राज्य में किये गए विकास कार्यों के आधार पर नंदीग्राम पार्टी के लिए काफी सुरक्षित सीट है। यह पूछे जाने पर कि खुद शुभेंदु के चुनाव लड़ने से कोई फर्क तृणमूल को पड़ेगा, तो उन्होंने कहा कि पिछली विधानसभा चुनाव में 80 हजार मतों की बढ़त शुभेंदु की निजी बढ़त न होकर ममता दीदी एवं तृणमूल के नाम पर मिली थी, इसलिए चाहे शुभेंदु खड़े हों या फिर खुद अमित शाह, ममता बनर्जी जैसी जन प्रिय नेत्री को उससे रत्ती भर भी फर्क नहीं पड़ेगा।

गौरतलब हो कि नंदीग्राम विधानसभा सीट वर्ष 1952 में हुए पहले आम चुनाव से ही अस्तित्व में रही है। साल 1952, 1957 तथा 1962 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम नॉर्थ तथा नंदीग्राम साउथ विधानसभा क्षेत्र में पृथक रूप से चुनाव हुए, किन्तु 1967 के बाद नंदीग्राम में एक ही विधानसभा सीट बनी।
तीन दशकों के चुनावों का अध्ययन करने से पता चलता है कि साल 1991 में सीपीआई के शक्ति प्रसाद पाल ने लगातार दूसरी जीत दर्ज की। वर्ष 1996 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी देवी शंकर पांडा ने सीपीआई के निवर्त्तमान विधायक श्री पाल को हरा कर नई इबारत लिखी। वर्ष 2001 में सीपीआई ने शेख इलियास मोहम्मद को प्रत्याशी बनाया और तृणमूल प्रत्याशी को हरा कर जीत दर्ज की। वर्ष 2006 के भी चुनाव में निवर्त्तमान विधायक शेख इलियास मोहम्मद ने अपनी जीत दुहराई। नंदीग्राम आंदोलन के दौरान रिश्वत लेने के आरोप में जनवरी 2009 में उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया। वर्ष 2009 में उपचुनाव में तृणमूल की फिरोजा बीबी ने सीपीआई के परमानंद भारती को हराया। वर्ष 2011 में भी यही स्थिति बरकरार रही।  वर्ष 2016 में शुभेंदु अधिकारी तृणमूल प्रत्याशी बने तथा 81 हजार मतों से चुनाव जीते। साल 2009 के उपचुनाव में तृणमूल ने 40 हजार, वर्ष 2011 में तृणमूल ने 40 हजार तथा वर्ष 2016 में तृणमूल ने 80 हजार मतों के अंतर से इस सीट पर जीत दर्ज की।

(मूलतः पश्चिम बंगाल के निवासी लेखक युवा पत्रकार हैं और आईसीएफजे के फेलो रहे हैं)

मंत्री नीरज की पत्नी नूतन ने लोजपा छोड़कर भाजपा का थामा दामन
22-Feb-2021 9:13 PM (96)

पटना, 22 फरवरी| लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) को सोमवार को एक और झटका लगा, जब विधान परिषद में लोजपा की एकमात्र सदय नूतन सिंह भाजपा में शामिल हो गईं। 

भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित एक समारोह में नूतन सिंह और पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी उदय प्रताप सिंह भाजपा में शामिल हुए। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने दोनों को भाजपा की सदस्यता दिलाई। 

नूतन सिंह के पति और बिहार सरकार में मंत्री नीरज कुमार बबलू भी इस मौके पर मौजूद रहे। नूतन सिंह दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की भाभी हैं। 

इस मौके पर नूतन सिंह ने कहा कि मेरे पति भाजपा में हैं, इस कारण मैंने लोजपा को छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण की है, जिससे हम दोनों मिलकर साथ काम कर सकें।

उल्लेखनीय है कि पिछले साल नवंबर में संपन्न हुए बिहार विधानसभा चुनाव के बाद कई नेता लोजपा को छोड़कर अन्य दलों में शमिल हो चुके हैं। पिछले चुनाव में लोजपा केवल एक सीट जीत सकी थी। पूर्व विधायक रामेश्वर प्रसाद चौरसिया भी पिछले सप्ताह लोजपा से इस्तीफा दे दिया था। लोजपा के कई नेता कुछ दिन पूर्व ही जदयू में शामिल हो चुके हैं।  (आईएएनएस)

चुनाव से ऐन पहले बीजेपी को बड़ा झटका, इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा ने त्रिपुरा रॉयल से मिलाया हाथ, अलग राज्य की मांग
20-Feb-2021 12:55 PM (164)

अगरतला, 20 फ़रवरी : नागरिकता संशोधन अधिनियम और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के मुद्दे पर मतभेद के बाद दो साल पहले कांग्रेस से अलग हुए त्रिपुरा के शाही शख्स प्रद्योत माणिक्य देब बर्मन ने अब राज्य की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी को बड़ा झटका दिया है. उन्होंने सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल एक दल  के साथ नया गठबंधन बनाया है. यह तब हुआ है जब त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल  के चुनाव होने वाले हैं.

देब बर्मन ने पूर्वोत्तर राज्य में आदिवासी परिषद चुनावों से पहले बीजेपी के सहयोगी इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा  के साथ मिलकर त्रिपुरा इंडीजीनस पीपुल्स रीजनल अलायंस बनाया है. TTAADC के चुनाव मूल रूप से पिछले साल 17 मई को निर्धारित किए गए थे, लेकिन कोरोना  महामारी के कारण उसे रोक दिया गया था.

अब प्रद्योत माणिक्य देब बर्मन की अगुवाई में ये गठबंधन TTAADC चुनाव लड़े जाएंगे. शुक्रवार को 42 वर्षीय प्रद्योत ने  आधिकारिक तौर पर ऐलान किया कि टिपरलैंड राज्य पार्टी और आईपीएफटी का विलय  त्रिपुरा इंडीजीनस पीपुल्स रीजनल अलायंस में हुआ है.

राज्य की सतातरूढ़ पार्टी बीजेपी को तब और झटका लगा जब राज्य की लगभग सभी आदिवासी राजनीतिक पार्टियां TIPRA के साथ आने का फैसला किया. हालांकि, IPFT ने अभी तक राज्य की बिप्लब देब सरकार से अपना समर्थन वापस नहीं लिया है, जहां उनके दो मंत्री हैं.

प्रद्योत माणिक्य देब बर्मन, जो पहले कांग्रेस के त्रिपुरा प्रदेश अध्यक्ष थे, ने 2019 में पार्टी छोड़ दी थी. उनकी प्रमुख मांग त्रिपुरा में स्वदेशी आदिवासी समुदायों के लिए एक अलग राज्य "ग्रेटर टिपरलैंड" के लिए रही है. आईपीएफटी ने भी 2009 के बाद से अलग राज्य की मांग करके राजनीतिक प्रसिद्धि प्राप्त की है. (khabar.ndtv.com)