सोशल मीडिया

Posted Date : 23-May-2018
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने एक दिन के दौरे पर कल रूस के शहर सोची में थे. यहां उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक अनौपचारिक बैठक की है और कल ही वे वापस नई दिल्ली आ चुके हैं. आज सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस रूस दौरे से जुड़ी कई तस्वीरें शेयर हुई हैं और ट्विटर पर इंडिया रसिया ट्रेंडिंग टॉपिक में शामिल हुआ है.
    पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर फेसबुक और ट्विटर पर केंद्र सरकार को लगातार घेरा जा रहा है और आज लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रूस दौरे का जिक्र करते हुए इस मसले पर प्रतिक्रियाएं दी हैं. ध्रुव जोशी का तंजभरा ट्वीट है , ‘सरकार या फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तेल की कीमत बढ़ने पर निशाना न बनाया जाए. इसमें नरेंद्र मोदी जी की कोई गलती नहीं है क्योंकि जब पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ीं तब तो वे राष्ट्रपति पुतिन के साथ रूस में थे!’ एक यूज़र ने लिखा है, ‘क्या आपने (नरेंद्र मोदी) पुतिन से रूस में पेट्रोल की कीमत पूछी है?’
    रूस पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से उनके बोचारोव रुचेई स्थित आवास पर मुलाकात की थी. इसके बाद दोनों नेता एक बोट पर सवार होकर ब्लैक सी के किनारे पर बसे सोची पहुंचे थे. बोट पर सवार इन दोनों नेताओं की एक विशेष तस्वीर सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा शेयर की गई है और इस पर खूब मजेदार टिप्पणियां आई हैं.
    प्रधानमंत्री मोदी के इस एक दिवसीय रूस दौरे और व्लादिमीर पुतिन के साथ उनकी तस्वीरों पर सोशल मीडिया में आई कुछ दिलचस्प प्रतिक्रियाएं :
    पन्सटर- ‘भाई तेरा, असली नाम वराहमिहिर पुत्र सिंह है न?’
    रोमन डिसूजा- आम आदमी पेट्रोल-डीजल पर वसूले जाने वाले भारी-भरकम टैक्स से दबता जा रहा है और इस रकम पर ऐसी अनौपचारिक बैठकें (मोदी-पुतिन की बैठक) की जा रही हैं जिनका कोई मतलब नहीं है.
    इमरान- पुतिन : मैंने सुना है तुम कर्नाटक में चुनाव हार गए...
    संजना चौधरी- जब प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में हुए विकास की शेखी बघारी... तो पुतिन ने कहा – (घंटा)
    अभिषेक मिश्रा- पहली तस्वीर में मोदी – पेट्रोल के कीमत चुनाव के समय कम करूंगा और जब तक चुनाव पूरा नहीं हो जाता, बढ़ने नहीं दूंगा. पुतिन – आप तो खिलाड़ियों के खिलाड़ी हो. (सत्याग्रह)

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Posted Date : 22-May-2018
  • कर्नाटक चुनाव के बाद शुरू हुआ पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी का सिलसिला आज भी जारी रहा. यही वजह है कि सोशल मीडिया में कर्नाटक की राजनीतिक उठा-पटक के साथ एक बड़ा तबका अब पेट्रोल-डीजल की बढ़ रही कीमतों पर भी जमकर प्रतिक्रियाएं दे रहा है. जाहिर है कि इस मामले में ज्यादातर लोगों ने भाजपा और उसकी अगुवाई वाली केंद्र सरकार निशाना को बनाया है. अनुग्रह मिश्रा ने फेसबुक पर चुटकी ली है, ‘कर्नाटक में बीजेपी का ‘तेल’ निकल गया और अब पेट्रोल-डीजल के दाम सबसे उच्च स्तर पर हैं!’
    इसके अलावा यहां भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के एक बयान की भी खूब चर्चा है. सोमवार को कर्नाटक के राजनीतिक घटनाक्रम पर बातचीत करते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा है कि विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद कांग्रेस ने अपने विधायकों को फाइव स्टार होटल में बंधक बनाकर रखा था और ऐसा नहीं होता तो राज्य में भाजपा की सरकार होती. सोशल मीडिया में कांग्रेस समर्थकों और अन्य लोगों ने इस बयान के हवाले से एक बार फिर भाजपा पर विधायकों को खरीदने की कोशिश करने का आरोप लगाया है. पवन खेड़ा ने अमित शाह के इस बयान को रीट्वीट करते हुए टिप्पणी की है, ‘शर्मनाक अनुवाद (अमित शाह के बयान का) : अगर पड़ोसी के घर में ताला नहीं होता तो मैं करोड़पति होता!’
    पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी और अमित शाह के इस बयान पर सोशल मीडिया में आई कुछ और प्रतिक्रियाएं :
    सुयश सुप्रभ- ‘पर्यावरण की रक्षा के लिए पेट्रोल की कीमत 80 रुपये से ऊपर की गई है.’
    ‘फिर कांग्रेस के समय क्यों विरोध करते थे?’
    ‘भाग, देशद्रोही. खांग्रेसी कहीं का.’
    दिलीप खान- इस बार ये व्याख्या नहीं आई अब तक.
    ‘पेट्रोल का दाम मोदी जी इसलिए बढ़ा रहे हैं ताकि पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा मिले. नहीं तो लोग अपनी-अपनी गाड़ियों से चलते हैं.’
    कामरान राजा- बहनों और भाइयो, दीवाली पर पेट्रोल का दाम बढ़ा तो रमज़ान में भी बढ़ना चाहिए कि नहीं?
    भक्त – जी हां.
    मोदी जी – बढ़ा दिए हैं, परेशान न हों.
    अमित तिवारी- पेट्रोल की कीमतें बढ़ रही हैं, और इसको डिफेंड करने वाले ट्रोल भी.. अंततः सिर्फ़ बैलों को ही रोज़गार मिलेगा इस सरकार में..!
    हरिंदर बावेजा- अमित शाह किस चेहरे के साथ यह कह रहे हैं कि कर्नाटक में कांग्रेस ने जनादेश चुरा लिया? गोवा वाले चेहरे के साथ? मेघालय वाले चेहरे के साथ? क्या भाजपा कुछ बेचैन हो गई है ?
    पकोड़ा रिपब्लिक- अमित शाह ने यह सच कहने की हिम्मत की है कि अगर कांग्रेस और जेडीएस ने अपने विधायकों को बंधक बनाकर नहीं रखा होता तो भाजपा कर्नाटक में सरकार बना लेती... अमित शाह यह सिर्फ इसलिए कह पाए कि क्योंकि वे हम लोगों से ज्यादा बेहतर तरीके से इंसानों में मौजूद अनैतिकता को समझते हैं...(सत्याग्रह)

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Posted Date : 19-May-2018
  • कर्नाटक में बीएस येद्दियुरप्पा मुख्यमंत्री बने रहेंगे या नहीं, इसका फैसला शनिवार को हो जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस-जेडीएस की याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया है कि कल शाम चार बजे येद्दियुरप्पा को अपना बहुमत साबित करना होगा. इससे पहले कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला ने येद्दियुरप्पा को बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का वक्त दिया था. शीर्ष अदालत के इस निर्देश के हवाले से सोशल मीडिया पर कई लोगों ने वजुभाई वाला को निशाने पर लिया है. वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई का ट्वीट है, ‘...राज्यपाल वजूभाई वाला और उनके द्वारा बीएस येद्दियुरप्पा को बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का वक्त देने के फैसले को अब किस तरह देखा जाए? और क्या कम से कम अब हमें ‘राजनीतिक’ राज्यपालों के करदाताओं के खर्च पर आलीशान राजभवनों में रहने पर सवाल नहीं उठाना चाहिए?’

    सोशल मीडिया पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश से जुड़ी खबर शेयर करते हुए ये अटलबाजियां जारी हैं कि कल क्या होने जा रहा है. साथ ही लोग अपने-अपने अंदाज में मजेदार निष्कर्ष निकाल रहे हैं. एक यूजर ने लिखा है, ‘बहुमत के लिए 112 विधायकों की जरूरत है. भाजपा के पास 104 विधायक हैं. 104 पर अगर 12 प्रतिशत जीएसटी लगाया जाए तो यह होगा 12.5, इसे पूर्णांक में 13 मान लेते हैं. इस तरह 104+13 = 117. किसने कहा कि बीएस येद्दियुरप्पा के पास बहुमत नहीं है? जीएसटी युग में आपको सही से गिनती करनी चाहिए.’ इसी खबर के चलते ट्विटर पर फ्लोर टेस्ट लगातार ट्रेंड कर रहा है. इस पर रमेश श्रीवत्स की चुटकी है, ‘मेरे ख्याल से फ्लोर टेस्ट को यह नाम इसलिए दिया गया क्योंकि कोई भी इससे नीचे नहीं जा सकता!’ इसके अलावा भाजपा द्वारा कांग्रेस-जेडीएस के विधायकों को खरीदने की कोशिशों से जुड़ी चर्चा भी सोशल मीडिया में चल रही है. इस पर एक यूजर की प्रतिक्रिया है, ‘कल शादी है, लेकिन भाजपा अब तक पूरी शॉपिंग नहीं कर पाई.’
    सुप्रीम कोर्ट द्वारा बीएस येद्दियुरप्पा को कल बहुमत साबित करने का आदेश दिए जाने पर सोशल मीडिया में आई कुछ और दिलचस्प प्रतिक्रियाएं :
    महाराणा बाल वर्धन- यह पक्का है कि सुप्रीम कोर्ट के जज पूर्व जन्म में सेल्स मैनेजर रहे होंगे... (भाजपा को) अब 15 दिन का टार्गेट दो दिन में पूरा करना पड़ेगा!
    सानिया सईद- आखिरकार मैं महसूस कर सकती हूं कि देश में कोई विपक्ष भी है. न सिर्फ जगाने, बल्कि इस विपक्ष को एक-जुट करने का भी श्रेय वजुभाई वाला को जाता है.
    अमोल खोडके- अफवाहें हैं कि अब खुद भाजपा के विधायक पार्टी में रहने के लिए सौ करोड़ रुपये मांग रहे हैं.
    ख़बरबाज़ी- सुप्रीम कोर्ट : 15 दिन का वक्त नहीं मिलेगा, कल फ्लोर टेस्ट होगा. 
    भाजपा : मगर इतनी जल्दी हम कैसे इंतज़ाम करेंगे? 
    सुप्रीम कोर्ट : विधायकों का? 
    भाजपा : नहीं, पैसों का. (सत्याग्रह)

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Posted Date : 18-May-2018
  • कर्नाटक विधानसभा चुनाव को लेकर ‘कर्नाटक-नाटक’ का वर्ड प्ले सोशल मीडिया पर कई दिनों से चल रहा था, लेकिन नतीजे आने से पहले तक शायद ही किसी को एहसास होगा कि यह चुनाव सच में ऐतिहासिक रूप से नाटकीय होने जा रहा है. कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला द्वारा भाजपा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करना और इसके खिलाफ कल रात में एक बजे कांग्रेस के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने की खबर पर फेसबुक और ट्विटर पर अब तक प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. आशुतोष उज्ज्वल की फेसबुक पोस्ट है, ‘कर्नाटक की जनता कनफ्यूज है कि सरकार तो हमको चुननी थी, ये बीच में राज्यपाल और कोर्ट कहां से आ गए!’

    सुप्रीम कोर्ट द्वारा कर्नाटक के राज्यपाल के फैसले पर रोक न लगाए जाने के बाद आज सुबह नौ बजे बीएस येद्दियुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है. सोशल मीडिया में भाजपा विरोधियों सहित अन्य लोगों ने भी इसे असंवैधानिक बताते हुए टिप्पणियां की हैं और ट्विटर पर अनकंडिशनलसीएमयेड्डी ट्रेंडिंग टॉपिक में शामिल हुआ है. साथ ही यहां लोगों ने राज्यपाल वजुभाई वाला को भी जमकर निशाने पर लिया है. प्रशांत कदम का तंजभरा ट्वीट है, ‘गंगाधर ही शक्तिमान है, वजूभाई वाला ही अमित शाह हैं.’ आशीष प्रदीप की फेसबुक पोस्ट है, ‘अब बढ़िया है. कर्नाटक में राज्यपाल और मुख्यमंत्री दोनों भाजपा के हो गए!’

    कर्नाटक में भाजपा के पास बहुमत नहीं है, और दूसरी तरफ कांग्रेस-जेडीएस के कुल विधायकों का आंकड़ा बहुमत को पार कर रहा है. इस आधार पर सोशल मीडिया में सीधे-सीधे आरोप लगाया जा रहा है कि भाजपा विधायकों की खरीद फरोख्त करेगी या फिर बहुमत साबित करने के लिए करीब 15 विधायकों को सदन से अनुपस्थित करवाएगी. इसी हवाले से यहां कई लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरा है और उन पर सवाल उठाए हैं. इस पर कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला का एक दिलचस्प ट्वीट है, ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय – एकात्म मानववाद. फकीर नरेंद्र मोदी – एकात्म कुर्सीवाद.’

    सोशल मीडिया में कर्नाटक की राजनीति में जारी इस नाटकीय घटनाक्रम पर आई कुछ और प्रतिक्रियाएं :
    मस्तान- सालों पहले वजुभाई वाला ने मोदी जी के लिए अपनी सीट का बलिदान दिया था. कल उन्होंने मोदी जी के लिए लोकतंत्र और संविधान का भी बलिदान दे दिया.
    हिस्टरी ऑफ इंडिया- ‘शीशी भरी गुलाब की पत्थर से तोड़ दूं.
    104 को 111 बनाना हो तो करप्शन से भी नाता जोड़ लूं’ – रूमी (2018)
    मंजुल- लोग पूछ रहे हैं कि भाजपा कर्नाटक में सरेआम सीनाजोरी कर रही है और जनता विरोध तक नहीं कर रही. बात में दम है. जनता ही ये सब रोक सकती है. पर वो क्या करे! कांग्रेस ने पिछले कई दशकों से ये हथकंडे इतनी बार अपनाए हैं कि जनता को ये सब अब सामान्य लगने लगा है.
    रोफल गांधी- 104 (कर्नाटक में भाजपा विधायक) मन की बात से आए हैं और आठ (बहुमत के लिए जरूरी विधायक) धन की बात से आएंगे.
    पन्स्टर- जरूरी नहीं है कि भाजपा आठ विधायकों को खरीदे ही. वो अगर कांग्रेस और जेडीएस के 15 विधायकों को ‘संदिग्ध परिस्थितियों में गायब’ करवा देती है तो भी बहुमत हासिल कर लेगी. (सत्याग्रह)

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Posted Date : 17-May-2018
  • कर्नाटक के विधानसभा चुनाव में किसी भी एक दल को बहुमत न मिलने के बाद विधायकों की जोड़-तोड़ शुरू होने के संकेत मिलने लगे हैं. सोशल मीडिया पर भाजपा और कांग्रेस समर्थक एक दूसरे पर इस तरह के आरोप लगा रहे हैं. वहीं इस मुद्दे पर चर्चित लेखक चेतन भगत का एक ट्वीट आया है जिसको लेकर लोगों ने उनको जमकर निशाना है. इस ट्वीट में उन्होंने कहा है, ‘त्रिशंकु सदन की स्थिति से आगे बढ़ने का कोई नैतिक तरीका नहीं होता. तो ऐसे में किसी भी पक्ष पर नैतिकता थोपनी बंद की जाए, क्योंकि यह बेकार की कवायद है. वैसे ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ भी एक कला है. भाजपा और कांग्रेस, दोनों के लिए यह परीक्षा की घड़ी है. देखते हैं इसमें कौन बेहतर है.’ इस पर एक ट्विटर ‏ यूजर का जवाब है, ‘नहीं चेतन, चाहे हॉर्स ट्रेडिंग हो या तुम्हारे उपन्यास, बिकने वाली किसी चीज को कला नहीं माना जा सकता.’
    जेडीएस मंगलवार को ही कांग्रेस के समर्थन से कर्नाटक में सरकार बनाने का दावा पेश कर चुकी है. इसके बाद सबसे बड़ी पार्टी होने के आधार पर भाजपा ने भी सरकार बनाने का दावा पेश किया था. फेसबुक और ट्विटर पर इन सब खबरों की चर्चा तो है ही, लेकिन इसके बीच यहां जेडीएस के अध्यक्ष एचडी कुमारस्वामी के भाजपा पर लगाए एक आरोप पर खूब दिलचस्प प्रतिक्रियाएं आई हैं. कुमारस्वामी ने दावा किया है कि भाजपा जेडीएस के विधायकों को अपने पाले में करने के लिए सौ-सौ करोड़ रुपये के प्रस्ताव दे रही है. इस खबर के हवाले से आशुतोष उज्ज्वल ने फेसबुक पर तंज किया है, ‘विधायकों का रेट 100 करोड़ लगा है. कौड़ी के लोग करोड़ी हो रहे हैं और कितने अच्छे दिन चाहिए?’ कीर्तीश भट्ट ने चुटकी ली है, ‘भाजपा ने सौ करोड़ रुपये का ऑफर दिया, पर नोट पुराने पांच सौ और हजार-हजार के थे.’

    सोशल मीडिया में जेडीएस के अध्यक्ष एचडी कुमारस्वामी के भाजपा पर लगाए इस आरोप पर आई कुछ और प्रतिक्रियाएं :
    अलंकार रस्तोगी- विधायक : सौ करोड़ रुपये तो बहुत कम हैं...
    मोटा भाई : चुपचाप रख लो हम कोई पहली बार नहीं खरीद रहे हैं...
    मोहम्मद अनस- बनारस में फ्लाईओवर गिरा, मृतकों को पांच-पांच लाख. कर्नाटक में चुनाव हुए, सरकार बनाने के लिए एक-एक विधायक को सौ-सौ करोड़ रुपये का ऑफर. मर गई डेमोक्रेसी. संवेदनाओं का पुल गिर गया.
    प्रदीप सुरीन- 2008 में लेफ्ट नेता एबी बर्धन ने कहा था कि 100 करोड़ में नेता खरीदे जा रहे हैं. आज ठीक दस साल बाद भी इतनी ही कीमत? नाइंसाफी है ये तो.
    कपिल परमार- झूठ – भाजपा ने विधायक खरीदने के लिए सौ करोड़ का ऑफर दिया था.
    बड़ा झूठ – कांग्रेस/जेडीएस एमएलए ने सौ करोड़ रुपये लेने से मना किया था.
    डॉ डीवी- आज के ताजा भाव : 
    1. आलू - 25 रुपये किलो 
    2. टमाटर - 30 रुपये किलो 
    3. कर्नाटक के विधायक - 100 करोड़ प्रति और बिका हुआ माल वापस नहीं होगा. (सत्याग्रह)

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Posted Date : 16-May-2018
  • कर्नाटक चुनाव को लेकर सोशल मीडिया में बीते कई दिनों से अटकलबाजियां जारी थीं, और दिलचस्प बात ये है कि आज इसके नतीजे आने के बाद भी अटकलबाजियां खत्म नहीं हुई हैं. भाजपा 104 सीटें जीतकर भले ही यहां सबसे बड़ी पार्टी बन गई हो, लेकिन वह 112 सीट के बहुमत के आंकड़े से दूर है. वहीं कांग्रेस ने 78 सीटें जीतकर 35 सीटें जीतने वाले जनता दल – सेकुलर (जेडीएस) को सरकार बनाने के लिए समर्थन देने की घोषणा कर दी है. फेसबुक और ट्विटर पर कांग्रेस और भाजपा समर्थकों के साथ-साथ अन्य लोग अपने-अपने अनुमान लगा रहे हैं कि कौन-सी पार्टी या गठबंधन कर्नाटक में किस तरह सत्तासीन होगा.
    जैसा कि पहले से अंदाजा था, कर्नाटक में जेडीएस किंगमेकर बनकर उभरी है. सोशल मीडिया में शायद ही कभी इस पार्टी की चर्चा होती हो लेकिन आज यह ट्विटर के ट्रेंडिंग टॉपिक में शामिल रही है. यहां चर्चा चल रही है कि कांग्रेस और भाजपा दोनों ही साम-दाम-दंड-भेद की नीति पर चलते हुए जेडीएस के विधायकों को अपने साथ लाने की कोशिश कर रही हैं. इस पर एक यूज़र ने चुटकी ली है, ‘जेडीएस अब बेंगलुरु के एक स्टार्टअप की तरह है जिसका कोई बड़ी कंपनी अधिग्रहण करेगी और फिर उसके सभी कर्मचारी करोड़पति बन जाएंगे.’
    गोवा, मणिपुर और मेघालय के पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, इसके बावजूद यहां भाजपा गठबंधन करके सरकार बनाने में सफल रही. कर्नाटक में भी कुछ-कुछ यही स्थिति बनती दिख रही है बस फर्क यह है कि इस बार भाजपा और कांग्रेस की अदला-बदली हो गई है. सोशल मीडिया में कई लोगों ने इस बात का जिक्र करते हुए प्रतिक्रियाएं दी हैं. वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई का ट्वीट है, ‘आज का गाना – जैसे को तैसा... भाजपा ने गोवा में कांग्रेस से जीत छीन ली थी, अब कांग्रेस कर्नाटक में भाजपा के साथ वही कर रही है! एक अहम सबक – जब आप एक राज्य में सत्ता के लिए नैतिकता ताक पर रखते हैं तो फिर अगले में नैतिकता खो देते हैं!’
    कांग्रेस के कमतर प्रदर्शन पर यहां पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को घेरते हुए भी कई मजेदार टिप्पणियां आई हैं. ट्विटर हैंडल खुरापाती आरवी से चुटकी ली गई है, ‘ऐसे परिणाम देखने के बाद राहुल गांधी विश्वेश्वरैया तो छोड़िए, सिद्धारमैया तक नहीं बोल पा रहे हैं.’

    सोशल मीडिया में कर्नाटक चुनाव के नतीजों पर आई कुछ और दिलचस्प प्रतिक्रियाएं :
    मेघनाद- कर्नाटक में हर कोई हर किसी को रिझाने में लगा है. कल तक भाजपा कांग्रेस बन जाएगी, जेडीएस भाजपा और कांग्रेस जेडीएस बन जाएगी.
    कह के पहनो- उदय चोपड़ा का नाम गूगल में डाला तो नतीजा आ रहा था – ‘बॉलीवुड के राहुल गांधी.’
    राहुल गांधी का नाम गूगल में डाला तो नतीजा आ रहा था – ‘राजनीति के उदय चोपड़ा.’
    आशीष प्रदीप- अभी-अभी के रुझानों के अनुसार कांग्रेस फिर सरकार बनवाएगी और बीजेपी फिर राम मंदिर.
    इंडिया एक्सप्लेन्ड- अगर इस बार भाजपा कर्नाटक में सरकार बनाने में सफल हो गई तो रेड्डी बंधु यहां इतनी खुदाई करेंगे कि 2019 तक कर्नाटक का अस्तित्व ही नहीं बचेगा. (सत्याग्रह)

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Posted Date : 15-May-2018
  • करीब तीन हफ्ते बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतें फिर बढ़ गई हैं. तेल कंपनियों ने प्रति लीटर पेट्रोल की कीमत में 17 पैसे, जबकि डीजल की कीमत में 21 पैसे की बढ़ोतरी की है. इस समय भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमत रोजाना तय करने की व्यवस्था लागू है, लेकिन तेल कंपनियों ने बीते 20 दिनों से इसकी समीक्षा नहीं की थी. सोशल मीडिया पर आज इस बढ़ोत्तरी की खूब चर्चा है और ट्विटर पर पेट्रोल ट्रेंडिंग टॉपिक में शामिल रहा. यहां कई लोगों ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी के लिए केंद्र सरकार की आलोचना की है. रिद्धि जैन का तंजभरा ट्वीट है, ‘रावण के देश (श्रीलंका) में पेट्रोल 58 रुपये प्रति लीटर है, सीता मैया के देश (नेपाल) में 64 रुपये प्रति लीटर. लेकिन राम जी के देश में 83 रुपये लीटर हो गया है. ये कैसा राम राज्य है?’
    बीते कुछ दिनों से सोशल मीडिया में चर्चा चलती रही है कि केंद्र सरकार के दबाव के चलते तेल कंपनियां कर्नाटक चुनाव के पहले पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाएंगी. हालांकि औपचारिक रूप से सरकार ने ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं किया था, लेकिन आज सोशल मीडिया पर लोगों ने इस बात का जिक्र करते हुए सरकार को जमकर घेरा है. पत्रकार अभिसार शर्मा का ट्वीट है, ‘जय हो. पेट्रोल के दाम बढ़ गए, कर्नाटक चुनाव जो खत्म हो गए! लेकिन आपको सरकार यह बता रही थी कि बढ़ते दामों में उसका कोई योगदान नहीं है.’
    पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोत्तरी पर सोशल मीडिया में आई कुछ और दिलचस्प प्रतिक्रियाएं :
    नाइट वॉचमैन- मोदी जी का फर्स्ट लॉ ऑफ इलेक्शन : पेट्रोल की कीमतें एक समान रूप से तब तक बढ़ेंगी जब तक कि बाहरी ताकतों जैसे कि राज्य चुनाव वगैरह की वजह से थामी न जाएं.
    जेटली (वसूली भाई)- पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोत्तरी चुनाव के दौरान थम गई थी. ठीक वैसे ही जैसे चुनाव के दौरान मोदी का काम करना थम जाता है.
    अश्विन - चुनाव खत्म हो चुके हैं और सरकार अपने पसंदीदा खेल – टैक्स बढ़ाओ, सेस लगाओ, पर वापस आ चुकी है.
    संजय श्रीवास्तव- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल बहुत सस्ता है फिर भी मनमोहन सिंह की सरकार जनता की जेब काट रही है. काश, मोदी जी आज प्रधानमंत्री होते तो पेट्रोल 30 और डीजल 25 रुपये प्रति लीटर होता!
    खुर्रल सिद्दीकी- पेट्रोल के दाम बढ़े और जिन्ना की तस्वीर का विवाद ख़त्म. इसका मतलब है कि कर्नाटक का चुनाव ख़त्म हो गया! (सत्याग्रह)

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Posted Date : 12-May-2018
  • सोशल मीडिया पर त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब का एक और बयान इस समय चर्चा का विषय बना हुआ है. उनका यह बयान रबींद्रनाथ टैगोर पर आया है. बुधवार को उदयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बिप्लब देब ने कहा था, ‘एक विश्व प्रसिद्ध कवि होने के अलावा रबींद्रनाथ टैगोर एक ऐसे व्यक्ति के रूप में भी जाने जाते हैं जिन्होंने ब्रिटिश सरकार के विरोध में नोबेल पुरस्कार को अस्वीकार कर दिया था.’ चूंकि यह बहुत ही आम सी जानकारी है कि रबींद्रनाथ टैगोर ने नोबेल नहीं बल्कि ब्रिटिश सरकार द्वारा दी गई नाइटहुड या सर की उपाधि लौटाई थी और यही वजह है कि फेसबुक और ट्विटर पर कई लोगों ने बिप्लब देब को संबोधित करते हुए उन्हें यह जानकारी दी है. इसके साथ यहां उन पर खूब चुटकियां भी ली गई हैं. सुमन मैत्रा का ट्वीट है, ‘हो सकता है कि बिप्लब देब को यह जानकारी वैदिक युग के इंटरनेट से मिली हो.’
    परसों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इतिहास का जिक्र करते हुए एक ऐसा ही त्रुटिपूर्ण बयान दिया था. कर्नाटक के बीदर में आयोजित एक रैली में मोदी ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा था कि जब भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त जेल में बंद थे, तब किसी कांग्रेसी नेता ने उनसे मुलाकात नहीं की थी. सोशल मीडिया पर आज भी इसकी चर्चा चल रही है और यहां कई लोगों ने इस बयान के जिक्र के साथ बिप्लब देब पर तंज कसे हैं. ट्विटर पर एक यूजर की प्रतिक्रिया है, ‘यह साफ है कि ये व्यक्ति (बिप्लब देब) प्रधानमंत्री बनने की इच्छा पाले हुए है. ’ कविता कृष्णन ने पूछा है, ‘...क्या आपने भी मोदी जी की तर्ज पर ही पूरा इतिहास पढ़ा है?’

    सोशल मीडिया में बिप्लब कुमार देब के इस बयान पर आई कुछ और दिलचस्प प्रतिक्रियाएं :

    स्टीरियोटाइपराइटर- अगर आपको लगता है कि जीवन ने आपके साथ अन्याय किया है तो बिप्लब देब के शिक्षकों के बारे में सोचिए कि उन्हें हर दिन किस तकलीफ से गुजरना पड़ा होगा.
    टॉक सेंस- भगत सिंह की जेल से रिहाई पर चर्चा करने के लिए मोदी जी बापू जी के साथ मौजूद थे, लेकिन नेहरू हमेशा की तरह अनुपस्थित थे (1929)
    सरल पटेल- टाइम्स नॉउ पर हैशटैग ‘प्लॉट टू किल पीएम’ देखकर बिप्लब देब ने चैनल को यह पूछते हुए मैसेज भेजा – ‘कितने स्क्वॉयर फीट का प्लॉट है?’ |
    अफवाह- बिप्लब देब – टैगोर को नोबेल प्राइज अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने के लिए दिया गया था.
    रिपोर्टर – सर, तो फिर गीतांजलि क्या है?
    बिप्लब देब – गीतांजलि ज्वेलर्स है. एड नहीं देखते हो क्या!

    प्रिया यादव- कर्नाटक के मतदाताओं, कल पूरी समझदारी से वोट कीजिएगा. हमें अपने आपसे पूछने की जरूरत है कि मुख्यमंत्री के रूप में क्या हमें एक और बिप्लब देब या अजय सिंह बिष्ट (योगी आदित्यनाथ) की जरूरत है? हो सकता है हमें कोई इनसे भी गया गुजरा मिल जाए...
    रामा लक्ष्मी- जब-जब बिप्लब देब मुंह खोलते हैं, इतिहासकार और वैज्ञानिक दोनों हाथों से अपना चेहरा ढंक लेते हैं!....(सत्याग्रह)

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Posted Date : 11-May-2018
  • आज कर्नाटक में चुनाव प्रचार का आखिरी दिन था और सोशल मीडिया पर इससे जुड़ी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की रैलियों और बयानों की काफी चर्चा हुई है. लेकिन इसके साथ ही यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कल दिए एक बयान की भी खूब चर्चा है. बीदर में आयोजित एक रैली में मोदी ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा था कि जब भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त जेल में बंद थे, तब किसी कांग्रेसी नेता ने उनसे मुलाकात नहीं की थी.
    प्रधानमंत्री मोदी कांग्रेस को लेकर ऐसे कई दावे अतीत में कर चुके हैं और इनमें से कई गलत साबित हुए हैं. दिलचस्प बात है कि प्रधानमंत्री का यह दावा भी गलत है और मीडिया में इसको उजागर करते हुए आज कई रिपोर्टें प्रकाशित हुई हैं. इनके मुताबिक अगस्त, 1929 में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लाहौर की बोर्स्टल जेल में इन क्रांतिकारियों से मुलाकात की थी. सोशल मीडिया पर कई लोगों ने मोदी को यह तथ्य याद दिलाया है. इतिहासकार इरफान हबीब का ट्वीट है, ‘राजनीति में गलत तरीके से इस्तेमाल करने से पहले जाइए और इतिहास को पढ़िए. नेहरू ने न सिर्फ इन लोगों से जेल में मुलाकात की थी, बल्कि इस बारे में लिखा भी था. कांग्रेस के कई नेताओं ने भी गांधी के विरुद्ध जाकर इनका (जेल में बंद क्रांतिकारियों का) समर्थन किया था.’
    सोशल मीडिया में इस बयान को लेकर नरेंद्र मोदी का मजाक उड़ाते हुए कुछ बड़ी ही मजेदार प्रतिक्रियाएं भी आई हैं. ट्विटर पर एक यूजर ने चुटकी ली है, ‘मोदी सही कह रहे हैं, लेकिन उन्हें यह पूछना चाहिए कि राहुल गांधी ने जेल में भगत सिंह से मुलाकात क्यों नहीं की थी.’ एक फेसबुक पोस्ट है, ‘ये तो भला हुआ कि मोदी ने यह दावा नहीं किया कि वे अकेले व्यक्ति थे जिसने जेल में बंद शहीदे आजम भगत सिंह से मुलाकात की थी.’
    सोशल मीडिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस दावे पर आई कुछ और प्रतिक्रियाएं :
    सोनाली रानाडे- यह कांग्रेसी नेहरू की एक घिसीपिटी और घटिया चाल थी कि वे बिना मोदी जी को बताए गुपचुप तरीके से लाहौर की ब्रोस्टल जेल में भगत सिंह से मिलने पहुंचे. यह जरूर ही मोदी जी को कर्नाटक में हराने की पाकिस्तान की साजिश है.
    इंडियन हिस्टरी पिक्स- अगस्त 1929 : जवाहरलाल नेहरू लाहौर की बोर्स्टल जेल भगत सिंह, जतिंद्रनाथ दास और बटुकेश्वर दत्त की मुलाकात के बारे में (फोटो – सिलेक्टिड वर्क्स ऑफ जवाहरलाल नेहरू, खंड-4/पृष्ठ 13)
    प्रियंका गांधी- यही होता है जब आप राजनीति विज्ञान की डिग्री लेने के लिए स्कूल के बजाय शाखाओं में जाते हैं.
    एथीइस्ट- ‘नेहरू ने भगत सिंह से मुलाकात नहीं की थी... तो इसलिए आप मुझे कर्नाटक चुनाव में वोट दीजिए.’
    उमाकांत- चुनाव के लिए ‘समसामयिक’ मुद्दों जैसे जिन्ना, भगत सिंह, स्वतंत्रता आंदोलन आदि को उठाया जाए...वाह! लेकिन हम बेरोजगारी, नोटबंदी की असफलता, बैंकों का डूबा हुआ ऋण जैसे मुद्दों पर कब बात करेंगे? अगली शताब्दी में? (सत्याग्रह)

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Posted Date : 10-May-2018
  • महाराणा प्रताप की जयंती पर सोशल मीडिया पर खासकर राजनीति से जुड़े लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए प्रतिक्रियाएं दर्ज की हैं। वहीं दूसरी तरफ महाराणा प्रताप का नाम एक और घटना की वजह से यहां सुर्खियां बटोर रहा है। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक नई दिल्ली में स्थित अकबर रोड के साइन बोर्ड पर आज कुछ अज्ञात लोगों ने 'महाराणा प्रताप रोडÓ लिखे पोस्टर चिपका दिए थे। सोशल मीडिया में इन साइन-बोर्डों की तस्वीरें कई लोगों ने शेयर की हैं।
    कुछ खबरों के मुताबिक यह हरकत बजरंग दल के सदस्यों की है। वहीं बीते वर्षों में केंद्रीय मंत्री वीके सिंह सहित भाजपा के कई बड़े नेता भी इस रोड का नाम बदलकर महाराणा प्रताप रोड करने की मांग कर चुके हैं। आज सोशल मीडिया में भाजपा समर्थकों ने साइन बोर्ड पर लगे इस पोस्टर की तस्वीर शेयर करते हुए इस मांग के पक्ष में खूब टिप्पणियां की हैं। फेसबुक पर एक ऐसी ही मजेदार पोस्ट है, अकबर रोड को महाराणा प्रताप रोड कर दिया गया है... मोदीजी ने साथ दिया तो जल्दी ही पाकिस्तान को प्रतापनगर कर देंगे....
    फेसबुक और ट्विटर पर एक बड़े तबके ने इस घटना की आलोचना भी की है। राहुल राज का ट्वीट है, हम 2018 में जी रहे हैं...लेकिन आधा देश अब तक महाराणा प्रताप, अकबर, शिवाजी, बाबर में ही अटका हुआ है। इस मामले का एक मजेदार पक्ष यह है कि पोस्टर में रोड की जगह 'रोड़Ó लिखा हुआ था। सोशल मीडिया में इस पर भी लोगों ने तंजभरी टिप्पणियां की हैं। अंकित राज की फेसबुक पोस्ट है, जिन्हें रोड लिखना नहीं आता, वो रोड का नाम बदलने चले हैं।
    सोशल मीडिया में इस घटना पर आईं कुछ और प्रतिक्रियाएं-
    एफवाईआई- अगर महाराणा प्रताप का सम्मान करना चाहते हैं तो एक सबसे अच्छी (नई) रोड बनाएं और फिर उसका नाम महाराणा प्रताप रोड रखें। नाम बदलने की यह नौटंकी तो बेकार की कवायद है।।।
    अक्षय कुमार- अकबर रोड पर सिर्फ हिंदुओं को दचके महसूस होंगे...महाराणा प्रताप रोड पर सिर्फ मुसलमानों को दचके महसूस होंगे।
    किरण कुमार- महाराणा प्रताप रोड लिखा पोस्टर अकबर रोड के साइन बोर्ड पर चिपकाया गया है। मोदी के लोग सिर्फ इसी तरह का बदलाव कर सकते हैं... इसी तरह का 'विकासÓ (सत्याग्रह)

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