सोशल मीडिया

Posted Date : 21-Jul-2018
  • लोक सभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा थी और सोशल मीडिया पर सुबह से ही इसको लेकर टिप्पणियां आ रही थीं. इसके चलते ट्विटर पर शुरुआत में नोकॉन्फिडेंसमोशन टॉप ट्रेंडिंग टॉपिक बना रहा. लेकिन फिर जब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का लोक सभा में भाषण शुरू हुआ तो सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा शुरू हो गई. राहुल गांधी ने अपने भाषण में खासकर राफेल विमान सौदे को लेकर सरकार को जमकर घेरा था और फेसबुक-ट्विटर पर इस हवाले से कांग्रेस विरोधियों और अन्य लोगों ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा को निशाना बनाया है. फेसबुक पर एक यूज़र ने की पोस्ट है, ‘राफेल डील पर चोरी पकड़ी गई तो सबकी नींद उड़ गई. जो लड़ाकू विमान कांग्रेस पांच सौ करोड़ में खरीद रही थी वही भाजपा सोलह सौ करोड़ में खरीद रही है...’
    हालांकि आज लोक सभा में चली कार्रवाई का सबसे दिलचस्प हिस्सा वह रहा जब अपना भाषण खत्म होने के बाद राहुल गांधी प्रधानमंत्री के पास पहुंचे और उनसे गले लगे. कांग्रेस अध्यक्ष की इस हरकत पर सोशल मीडिया में खूब चर्चा हुई है और यहां एक से बढ़कर एक दिलचस्प प्रतिक्रियाएं आई हैं. इसके चलते ट्विटर पर राहुलहगमोदी काफी देर तक ट्रेंड करता रहा. चूंकि मोदी खुद विदेशी नेताओं से गले मिलने के कारण चर्चा में आते रहे हैं सो इस हवाले से उन पर खूब चुटकियां ली गई हैं. ट्विटर हैंडल रॉफीगांधी पर टिप्पणी है, ‘आज प्रधानजी दुनिया के सभी नेताओं को फोन करके माफी मांगेंगे और कहेंगे कि आज मुझे एहसास हो गया जब कोई जबरदस्ती गले पड़ता है तो कितनी तकलीफ होती है.’

    लोक सभा में राहुल गांधी के नरेंद्र मोदी से गले लगने पर सोशल मीडिया में आई कुछ और दिलचस्प प्रतिक्रियाएं :
    ताहिर अमीन-यूनेस्को ने अभी-अभी घोषणा की है कि 20 जुलाई को अब हर साल अंतरराष्ट्रीय गले मिलो दिवस मनाया जाएगा. सभी भारतीयों के लिए यह गौरव का क्षण है.
    हरतोष सिंह बल-मुझे बाकी भाषण का तो पता नहीं, लेकिन राहुल गांधी का मोदी तक जाकर उनके गले लगना बहुत साहस की बात थी क्योंकि दुनिया के ज्यादातर नेता तो मोदी के गले लगने से दूर भागते हैं.
    हिस्टरी ऑफ इंडिया-नरेंद्र मोदी 1960 के दशक की खुदाई करके नेहरू को निकालते हुए ताकि 2018 में राहुल गांधी का जवाब दिया जा सके.
    सुनंदा पांडे-एक आदमी द्वारा दूसरे के साथ मारपीट करने जैसी घटनाओं के बजाय भाजपा समर्थक एक आदमी के दूसरे से गले लगने पर ज्यादा आक्रोश दिखा रहे हैं.
    वैशाली-राहुल गांधी का नरेंद्र मोदी से गले लगना साल का सबसे महत्वपूर्ण क्षण बनने जा रहा है. इस सदन में ऐसा कुछ देखना बहुत ही दुर्लभ है. मोदी को इसका अंदाजा भी नहीं था.
    आशुतोष उज्ज्वल- हेडफोन निकलवाएगा के?
    नितिन ठाकुर-डायलॉग बोलना सीख लिया पर डिलीवरी में थोड़ी कमज़ोरी है.
    क्रिकेट की भाषा में इसे पेस ठीक है, लेंग्थ में गड़बड़ है बोलते हैं.
    मीडिया में इसे स्क्रिप्ट ठीक है लेकिन व्याकरण खराब है कहते हैं. 
    इंटरनेट लैंग्वेज में डाटा बहुत है मगर स्पीड स्लो कहा जाता है. (राहुल गांधी का भाषण)
    मैथुन-केजरीवाल सही कहता है – सब मिले हुए हैं.
    सोमल ठाकुर-चिपका दिया : मोदी के जैकेट के पीछे लिखा- कांग्रेस इज ग्रेट....(सत्याग्रह)

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Posted Date : 20-Jul-2018
  • भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) जल्दी ही सौ रुपये का नया नोट जारी करने जा रहा है. इसकी घोषणा करते हुए आज रिजर्व बैंक ने नए नोट की तस्वीर जारी की है और इसे सोशल मीडिया पर कई लोगों ने शेयर किया है. बाकी नोटों की तरह इस पर एक तरफ तो महात्मा गांधी की तस्वीर है लेकिन दूसरी तरफ गुजरात के पाटन जिले में स्थिति ऐतिहासिक धरोहर ‘रानी की वाव’ (बावड़ी) का चित्र है. इस वजह से फेसबुक और ट्विटर पर ‘रानी की वाव’ की भी चर्चा है और कई लोगों ने इस स्थल को नोट पर जगह देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया है.
    हालांकि यहां सबसे ज्यादा चर्चा इस नए नोट के रंग को लेकर हो रही है. यह हल्के-बैंगनी रंग (लैवेंडर कलर) का नोट है और इस हवाले से यहां खूब मजेदार टिप्पणियां देखने को मिली हैं. एक फेसबुक यूज़र की पोस्ट है, ‘अगर नीली जींस भीगने पर इसके पॉकेट में रखा आपका कोई नोट नीले रंग का हो जाता है तो अब आप टेंशन मत लीजिए... सौ रुपये का नोट इसी रंग में आ रहा है.’ मोदी सरकार के कार्यकाल में दस रुपये से लेकर 2000 रुपये तक के नए नोट जारी हुए हैं और इनके रंगों को लेकर सोशल मीडिया पर खूब हंसी-मजाक चलता रहता है. आज भी ऐसी ही कुछ दिलचस्प टिप्पणियां आई हैं. ट्विटर हैंडल रॉफी गांधी पर सौ रुपये के नए नोट के बहाने से चुटकी ली गई है, ‘सरकार भी एचआर (एचआर डिपार्टमेंट) की तरह बर्ताव कर रही है. यहां लोग मदद मांग रहे हैं, वो वहां रंगोली बना रही है...’
    चूंकि सोशल मीडिया पर हर खबर के हवाले से राजनीतिक टीका-टिप्पणियां की जाती हैं तो आज सौ रुपये के नए नोट को लेकर भी ऐसा हुआ है. ट्विटर पर एक यूज़र की प्रतिक्रिया है, ‘इस सौ रुपये के नोट के साथ ही मोदी ने हर नोट को इंद्रधनुष के अलग-अलग रंगों से रंग दिया है. लेकिन दूसरी तरफ उन्होंने हमारे देश को गोबर के गहरे रंग से भी रंगा है.’
    सौ रुपये के इस नए नोट पर सोशल मीडिया में आई कुछ और दिलचस्प प्रतिक्रियाएं :
    महेश लंगा-सौ रुपये के नए नोटों पर गुजरात के पाटन में स्थित सीढ़ीदार कुआं – रानी की वाव की तस्वीर भी होगी :
    निशा-गुलाबी और आसमानी के बाद अब भारतीय मुद्रा का नोट हल्के बैंगनी रंग में भी उपलब्ध! संपर्क कीजिए अपनी किसी भी नजदीकी बैंक से...
    हुसैन हैदरी-दो सौ रुपये और सौ रुपये के नोट के पीछे की प्रेरणा :
    गौरव सिंह-कांग्रेस ने काला धन बनाया था जबकि मोदी पहले ही गुलाबी, नारंगी, नीला, हरा और हल्का बैंगनी (सौ रुपये का नया नोट) धन बना चुके हैं. मोदी - 1 कांग्रेस - 0
    अरविंदन वेंकटचलपति- रंगों को लेकर नरेंद्र मोदी की एक और सनक पूरी हो गई... सौ रुपये का नया नोट आने ही जा रहा है... (सत्याग्रह)

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Posted Date : 19-Jul-2018
  • यूरोपीय संघ के रेग्युलेटरों ने गूगल पर 4.34 अरब डॉलर का जुर्माना ठोंका. यूरोपीय आयोग ने गूगल को निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के उल्लंघन का दोषी करार दिया. 
    यूरोपीय आयोग का दावा है कि अमेरिकी कंपनी गूगल ने एनड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम के जरिए खुद को सर्च इंजन के रूप में और ताकतवर बनाया. गूगल पर जुर्माना ठोंकते हुए यूरोपीय संघ की प्रतिस्पर्धा कमिश्नर यूरोपीय संघ के मारग्रेथ वेस्टागेर ने कहा, "गूगल ने एनड्रॉएड का इस्तेमाल कर सर्च इंजन क्षेत्र में अपने प्रभाव को और मजबूत किया. इन कदमों के जरिए प्रतिस्पर्धियों को नई खोज करने या योग्यता के आधार पर प्रतिस्पर्धा करने का मौका नहीं दिया. उन्होंने यूरोपीय ग्राहकों को अहम मोबाइल फोन बाजार की असरदार प्रतिस्पर्धा का लाभ नहीं पहुंचाया."
    जुर्माने की रकम गूगल की पेरेंट कंपनी अल्फाबेट की दो हफ्ते के राजस्व के बराबर है. दिग्गज टेक कंपनी गूगल ने यूरोपीय रेग्युलेटरों के फैसले के खिलाफ अपील करने का एलान किया है.

    यूरोपीय आयोग के इस फैसले से अमेरिका और यूरोप के बीच कारोबारी संबंध और ज्यादा खट्टे हो सकते हैं. यूरोपीय आयोग के प्रमुख ज्यां क्लोद युंकर को जुलाई आखिर में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप से मिलना है. युंकर अमेरिका जाकर यूरोपीय संघ की कारों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की कोशिश करेंगे. व्यापार घाटे का हवाला दे रहे ट्रंप ने यूरोपीय संघ से अमेरिका निर्यात की जाने वाली कारों पर ज्यादा शुल्क लगाने की धमकी दी है.
    मारग्रेथ वेस्टागेर इससे पहले भी गूगल पर 2.4 अरब यूरो का जुर्माना लगा चुकी हैं. वह जुर्माना ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्मों के कीमतों की तुलना करने वाली सर्विस के चलते लगा था. गूगल ने इसके खिलाफ अपील की है.
    यूरोपीय आयोग ने अप्रैल 2015 में एनड्रॉयड की जांच शुरू की. माइक्रोसॉफ्ट, नोकिया और ऑरेकल जैसी दिग्गज कंपनी के ट्रेड ग्रुप फेयरसर्च ने आयोग से गूगल की शिकायत की थी. शिकायत के मुताबिक गूगल एनड्रॉयड के जरिए अपने सर्च इंजन को बढ़ावा दे रहा है. उस वक्त यूरोप के 64 फीसदी स्मार्टफोन एनड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम से चल रहे थे. अब यह संख्या 74 फीसदी है.
    जांच के दौरान आयोग को पता चला कि वाकई गूगल ने एनड्रॉयड के दबदबे का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए किया. प्रतिस्पर्धी कंपनियों को एनड्रॉयड से नुकसान हुआ. आयोग ने कहा, गूगल ने एनड्रॉयड बेस्ड स्मार्टफोन और टेबलेट बनाने वाले निर्माताओं से गूगल सर्च इंजन को डिफॉल्ट पर रखने को कहा. एनड्रॉयड डिवाइसों में पहले से इंस्टॉल क्रोम ब्राउजर भी मिला. गूगल ने फोन और टेबलेट निर्माताओं पर ऐसा दबाव डालने से इनकार किया है.
    स्मार्टफोन और टेबलेट उद्योग पर नजर रखने वाली कंपनी गार्टनर के मुताबिक दुनिया भर में इस वक्त 85.9 फीसदी डिवाइस एनड्रॉयड बेस्ट हैं. एप्पल के आईओएस ऑपरेटिंग सिस्टम की हिस्सेदारी करीब 14 फीसदी है. 2017 में दुनिया भर में 1.3 अरब एनड्रॉयड स्मार्टफोन बिके.(एएफपी)

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Posted Date : 19-Jul-2018
  • कर्नाटक के चिकमंगलूर में किसानों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह सहित कई दूसरे नेताओं के कटआउटों का कागभगोड़ा (बिजूका) की तरह इस्तेमाल किए जाने की खबर पर आज सोशल मीडिया में बड़ी ही मजेदार प्रतिक्रियाएं आई हैं. चूंकि इस खबर के साथ खेतों में लगे मोदी और शाह के कटआउटों की तस्वीर ही प्रकाशित हुई है सो फेसबुक और ट्विटर पर इसी तस्वीर को सबसे ज्यादा लोगों ने शेयर किया है और इसके बहाने इन दोनों नेताओं और भाजपा पर चुटीली टिप्पणियां की हैं. एक यूज़र का ट्वीट है, ‘... यह घर-घर मोदी का बिलकुल अक्षरश: संस्करण है.’ फेसबुक पर निरमेश आडवाणी की पोस्ट है, ‘कर्नाटक के किसान पक्षियों को डराने के लिए अपने खेतों में मोदी और अमित शाह के कटआउटों का बिजूके की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं... इसका मतलब है कि कर्नाटक के सारे पक्षी मुस्लिम हैं.’
    आज विपक्ष को सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की मंजूरी मिल गई है और यह खबर सोशल मीडिया पर ट्रेंडिंग टॉपिक में शामिल हुई है. इस मसले पर यहां भाजपा और कांग्रेस समर्थकों के बीच खूब आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं. वरिष्ठ पत्रकार श्रीनिवासन जैन ने अविश्वास प्रस्ताव लाने की इस कवायद की आलोचना करते हुए ट्वीट किया है, ‘अविश्वास प्रस्ताव समय की बर्बादी है. इसके जरिए ऐसा समझा जा रहा है जैसे हम सब बेकार का कोई राजनीतिक तमाशा देखना चाहते हैं.’
    सोशल मीडिया में इन दोनों खबरों पर आई कुछ और दिलचस्प प्रतिक्रियाएं :
    रोफल गांधी-नरेंद्र मोदी जी को भारत का ऐसा पहला प्रधानमंत्री बनने की बधाई जिसके कटआउट खुद प्रधानमंत्री से ज्यादा उपयोगी हैं.
    सत्यमेव जयते-अरविंद केजरीवाल जी, देखिए कि मोदी जी किस तरह एक अलहदा तरीके से किसानों की मदद कर रहे हैं. पहली बात तो यह है कि मोदी और शाह कभी किसानों के इलाके में नहीं जाते, लेकिन (कटआउटों) के कारण किसान हमेशा यह महसूस कर सकते हैं कि मोदी जी उनके साथ हैं. दूसरी बात यह है कि इनके कटआउट कागभगोड़ा की तरह भी इस्तेमाल हो रहे हैं.
    नवायना-चिकमंगलूर के किसान मोदी और शाह के कटआउट को रीसायकल करके बिजूके की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं. यहां के कौए और दूसरे पक्षियों के लिए बड़ा ही दुख होता है... यह तय है कि इन्होंने भाजपा को वोट नहीं दिया होगा.
    प्रवीण मिश्रा-कर्नाटक के किसान मोदी और शाह के कटआउट कागभगोड़ा की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं. यहां के कौए इतने डरे हुए हैं कि वे अब भाजपा शासित राज्यों महाराष्ट्र और गोवा की ओर पलायन कर रहे हैं.
    रोशव राय-गौमाता भाजपा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करती हुईं :
    प्रद्युमन मिश्रा-अविश्वास प्रस्ताव सांकेतिक है. हम सबको पता है कि क्या इसका क्या होना है. आखिरकार यह भाजपा के लिए फायदेमंद साबित होगा.(सत्याग्रह)

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Posted Date : 18-Jul-2018
  • भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के महासचिव सीताराम येचुरी की एक तस्वीर कल से सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है. इस तस्वीर में वे कुछ लोगों के साथ सिर पर कलश उठाए हुए दिख रहे हैं. चूंकि वामपंथ बुनियादी तौर पर धर्म को खारिज करता है सो इस तस्वीर के हवाले से ट्विटर और फेसबुक पर कई लोगों ने सीताराम येचुरी और सीपीएम पर सवाल उठाते हुए टिप्पणियां की हैं. फेसबुक पर तन्मय रॉय की पोस्ट है, ‘क्या ये वही सीताराम येचुरी हैं जो नास्तिक हैं और जो मानते हैं कि उनकी पार्टी के लिए वैज्ञानिक विचारधारा ही दिशा-निर्देशक है?...’ इसके साथ ही यहां कई तंजभरी टिप्पणियां भी आई हैं. एक यूज़र ने चुटकी ली है, ‘सीताराम येचुरी सीपीएम की अंत्येष्टि कर रहे हैं...’

    यहां एक बड़े तबके, जिसका वामपंथी रुझान माना जाता है, ने दावा किया है कि इस तस्वीर के साथ छेड़छाड़ की गई है और सीताराम येचुरी अपने सिर पर कलश नहीं बल्कि एक बर्तन में फूल लिए हुए थे. सीताराम येचुरी 15 जुलाई को हैदराबाद में एक कार्यक्रम में भाग लेने गए थे. इस दिन यहां बोनालू (फूलों का त्योहार) नाम का त्योहार मनाया गया था और जिस संगठन के कार्यक्रम में सीताराम येचुरी शामिल हुए, उसने भी ऐसा ही आयोजन किया था. मूल रूप से यह तस्वीर इसी आयोजन की थी. वामपंथी समर्थकों की दलील है कि यह एक सांस्कृतिक आयोजन था, न कि धार्मिक आयोजन. इस दावे पर सवाल खड़ा करते हुए दीपांकर पटेल ने फेसबुक पर कहा है कि ये दोनों तस्वीरें सही हैं और बोनालू त्योहार महाकाली की पूजा का त्योहार होता है.
    सोशल मीडिया में सीताराम येचुरी की इस तस्वीर को लेकर आई कुछ और दिलचस्प प्रतिक्रियाएं :
    रियल हिस्टरी पिक्स-सीताराम येचुरी अपने सिर पर सीपीएम की अस्थियां ले जाते हुए.
    शांतनु गुप्ता-सीताराम येचुरी जनता के लिए अपने सिर पर अफीम ढोते हुए.
    आशुतोष उज्ज्वल-राम के चक्कर में हिंदू बंटे सीताराम के चक्कर में कम्युनिस्ट.
    जे सुशील-आप उठाएं कलश तो संस्कृति
    हम उठाएं तो अफ़ीम

    तुम पियो तो ओल्ड मॉन्क
    हम पिएं तो दारू

    तुम कहो तो ज्ञान
    हम कहें तो गोबर

    तुम पढ़ो तो पर्चा
    हम पढ़ें तो पैम्फ़्लेट

    तुम फैब इंडिया पहनो तो इंटेल
    हम भागलपुरी पहने तो गंवार

    अब ये बताते जाओ कि 
    तुम्हारी पॉलिटिक्स क्या है कॉमरेड

    योयो फनी सिंह-सीपीएम : सीताराम ये क्यूं रे?
    सीताराम : कॉमरेड, अब से सीपीएम में एम का मतलब होगा मटकी!(सत्याग्रह)

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Posted Date : 17-Jul-2018
  • बंगाल के मिदनापुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक रैली के दौरान पंडाल का एक हिस्सा गिरने की खबर आज सोशल मीडिया में कई लोगों की प्रतिक्रियाओं का हिस्सा बनी है. इस दुर्घटना में करीब 90 लोग घायल हुए हैं. बताया जा रहा है कि जब पंडाल का यह हिस्सा गिरा तब प्रधानमंत्री ने तुरंत भाषण रोककर अपने स्टाफ से घायलों की मदद करने को कहा. इसके बाद वे घायलों को देखने अस्पताल भी पहुंचे. इस हवाले से भाजपा समर्थकों के साथ अन्य लोगों ने यहां मोदी की खूब तारीफ की है.
    अस्पताल में इन घायलों के साथ प्रधानमंत्री की कई तस्वीरें भी फेसबुक और ट्विटर पर शेयर हुई हैं. यहां खासकर उस तस्वीर की खूब चर्चा है जिसमें एक महिला बेड पर लेटी हुई दिखाई दे रही है और मोदी उसके पास खड़े एक कागज पर कुछ लिख रहे हैं. मीडिया में आई खबरों के मुताबिक इस महिला के आग्रह पर मोदी उसे ऑटोग्राफ दे रहे थे. इस तस्वीर पर कुछ ऊट-पटांग, तो कुछ बड़ी ही मजेदार प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिली हैं. फेसबुक पर आशुतोष उज्ज्वल की ऐसी ही टिप्पणी है, ‘बंगाल की बात ही निराली है. वहां पहुंचते ही आदमी बंगाली डॉक्टर बन जाता है.’
    हालांकि इस हादसे के बहाने विरोधियों और दूसरे लोगों ने मोदी को घेरा भी है. दरअसल पश्चिम बंगाल में 2016 के विधानसभा चुनाव के पहले कोलकाता में एक फ्लाईओवर ढह गया था. इस हादसे के बाद राज्य में एक रैली के दौरान मोदी ने ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा था कि यह घटना राज्य के लोगों को ‘ईश्वर की ओर से दिया गया संदेश है’ कि वे सत्ताधारी पार्टी से राज्य को बचाएं. समर अनार्य की फेसबुक पोस्ट है, ‘मोदी की मिदनापुर रैली में टेंट गिरने से 67 घायल…मोदी ऐसे हादसों को राजनीति में अनैतिक लोगों से छुटकारा पाने के लिये ईश्वर का संदेश बताते रहे हैं.’
    सोशल मीडिया में इस खबर पर आई कुछ और प्रतिक्रियाएं :
    राजिब पाइक-मोदी जी के सामने विपक्ष तो क्या अब पंडाल भी खड़ा नहीं रह पा रहा है.
    शांतनु भट्टाचार्य-पश्चिम बंगाल के मिदनापुर जिले में ‘गो बैक मोदी’ के नारों के साथ काले झंडे दिखाते हुए प्रधानमंत्री का स्वागत हुआ है.
    राजिब पाइक-मोदी जी के सामने विपक्ष तो क्या अब पंडाल भी खड़ा नहीं रह पा रहा है.
    सैलीना-क्या पंडाल इसलिए गिरा कि वह मोदी की झूठी बातों का वजन नहीं सह पाया?
    करण- अगर कोलकाता में फ्लाईओवर का हादसा बंगाल को तृणमूल से बचाने के लिए ‘ईश्वरीय संदेश’ था तो क्या मिदनापुर में मोदी की रैली के दौरान पंडाल गिरना भी बंगाल को भाजपा से बचाने का कोई ‘ईश्वरीय संदेश’ है?....
    बट्टी-नरेंद्र मोदी की मिदनापुर की रैली में लगे टेंट का एक हिस्सा गिर गया... खबरें हैं कि टेंट ‘रुपया’ टेंट हाऊस से किराए पर लिया गया था.(सत्याग्रह)

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Posted Date : 14-Jul-2018
  • भारतीय एथलीट हिमा दास द्वारा फिनलैंड में आयोजित आईएएएफ विश्व अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप की 400 मीटर की दौड़ में स्वर्ण पदक जीतने की खबर आज सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में रही. असम की रहने वाली 18 साल की हिमा दास यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट हैं और इस उपलब्धि पर उन्हें चहुंओर से बधाई संदेश मिल रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिमा को बधाई देते हुए ट्वीट में लिखा है कि आने वाले सालों में यह उपलब्धि कई नए एथलीटों को प्रेरित करती रहेगी. वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने हिमा दास की इस दौड़ का वीडियो ट्विटर पर पोस्ट करते हुए उन्हें बधाई दी है.


    सोशल मीडिया पर राजनीतिक छींटाकसी हर मुद्दे पर चलती रहती है सो यहां इस खबर की आड़ में भी नेताओं और राजनीतिक पार्टियों पर तंजभरी प्रतिक्रियाएं आई हैं. गोपाल कृष्ण‏ ने लिखा है, ‘काश मोदी जी 10 साल पहले प्रधानमंत्री बने होते तो ओलंपिक रेस में भी मेडल ही मेडल मिलते.... मनमोहन सिंह जी ने तो रफ्तार ही कम कर डाली थी.’ भारत को मिली इस उपलब्धि के हवाले से यहां कई लोगों ने कन्याभ्रूण हत्या के खिलाफ और महिला सशक्तिकरण के पक्ष में प्रतिक्रियाएं दी हैं. ट्विटर पर एक यूज़र ने लिखा है, ‘आज अगर आपको उत्तर-पूर्व की लड़की हिमा दास पर गर्व है तो प्लीज कल से उनके साथ भेदभाव न करें.’
    शौनक रॉय-...मैं इस बात को लेकर बहुत खुश हूं इंटरनेट पहले वनडे मैच में इंग्लैंड पर भारत को मिली जीत के बजाय गोल्ड मेडलिस्ट हिमा दास को लेकर खुशियां जता रहा है.
    सतीश आचार्य-असम के धान के खेतों से...
    अरुण नाइक-यह जरूरी नहीं कि देश को गौरवान्वित करने के लिए रूस (फुटबॉल विश्वकप) ही जाया जाए, फिनलैंड में दौड़ लगाकर भी यह काम किया जा सकता है.
    आनंद महिंद्रा-कुछ दिन पहले मुझे यह मेरे इनबॉक्स में मिला था. किसी वजह से मैंने इसे बचाए रखा... अब इसे इस्तेमाल कर रहा हूं, यह बताने के लिए कि हिमा दास के दौड़ जीतने के बाद मैंने कैसा महसूस किया...(सत्याग्रह)

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Posted Date : 13-Jul-2018
  • कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर के ‘हिंदू पाकिस्तान’ वाले बयान पर आज सोशल मीडिया में जमकर बहसबाजी हुई है. कल शशि थरूर ने तिरुवनंतपुरम में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा था कि अगर भाजपा अगला आम चुनाव जीत गई तो भारत को ‘हिंदू पाकिस्तान’ में तब्दील कर देगी. भाजपा समर्थकों और अन्य लोगों ने इस बयान के आधार पर शशि थरूर की खूब आलोचना की है. ट्विटर पर माणक गुप्ता ने उनसे सवाल पूछा है, ‘चार साल में भारत कितना हिंदू पाकिस्तान बन गया जो मोदी सरकार दोबारा आने पर पूरा बन जाएगा?’ इसके साथ ही यहां कांग्रेस को भी घेरा जा रहा है. ट्विटर हैंडल आई सृजना पर तंजभरी टिप्पणी है, अगर भाजपा 2019 का चुनाव जीती तो भारत हिंदू पाकिस्तान बन जाएगा, लेकिन अगर कांग्रेस जीती तो भारत पाकिस्तान (2) बन जाएगा.
    सोशल मीडिया पर थरूर के इस बयान के हवाले से भाजपा विरोधियों ने उसकी कथित सांप्रदायिक राजनीति को भी निशाना बनाया है और पार्टी की आलोचना की है. आलोक वर्मा का ट्वीट है, जब मोदी के कार्यकाल में एक मंत्री मॉब लिंचिंग करने वालों को माला पहनाकर और मिठाई खिलाकर स्वागत कर रहा है तो इसका मतलब है कि भारत पहले ही हिंदू पाकिस्तान बन चुका है.
    सोशल मीडिया में शशि थरूर के इस बयान पर आई कुछ और टिप्पणियां :
    बट्टी-शशि थरूर का कहना है कि भाजपा भारत को हिंदू पाकिस्तान में तब्दील कर देगी. कोई भी इस बात से सहमत दिखेगा तो उसकी पीट-पीटकर हत्या कर दी जाएगी.
    सेंट सिनर-मैं शशि थरूर के इस बयान से सहमत नहीं हूं कि अगर भाजपा 2019 का चुनाव जीती तो भारत हिंदू पाकिस्तान बन जाएगा. वह उससे भी बदतर बनेगा. वह सीरिया बन जाएगा.
    शशि थरूर-पूंथुरा शिवक्षेत्रम (त्रिवेंद्रम का एक शिव मंदिर) में, हिंदू विरोधी घोषित किए जाने से ठीक पहले! 
    आरती टिकू-अगर भाजपा सत्ता में वापस आती है तो भारत हिंदू पाकिस्तान बन जाएगा, और कांग्रेस या ‘धर्मनिरपेक्ष गठबंधन’ सत्ता में आता है तो भारत गैर-हिंदू पाकिस्तान बन जाएगा. चाहे जो हो, भारत का पाकिस्तान बनना तय है. सो ज्यादा तनाव मत लीजिए...
    शमसिदा तायब- मैं शशि थरूर के इस बयान से सहमत नहीं हूं कि अगर भाजपा 2019 का चुनाव जीतती है तो भारत हिंदू पाकिस्तान बन जाएगा... दरअसल तब यह उससे भी बुरा...नागपुरिस्तान बनेगा. (सत्याग्रह)

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Posted Date : 12-Jul-2018
  • मुंबई में बीते दस दिनों के दौरान करीब 865 मिलीमीटर बारिश हुई है. मौसम विभाग के अनुसार मुंबई में औसतन एक महीने में जितनी बारिश होती है, यह उतनी ही मात्रा है. जाहिर है कि इसके चलते देश की आर्थिक राजधानी अस्त-व्यस्त नजर आ रही है और सोशल मीडिया में इस पर लगातार चर्चा हो रही है. बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) पर अक्सर आरोप लगता है कि वह शहर में साफ-सफाई और जल-निकासी के प्रबंधन में कोताही बरतती है और इसी वजह से जरा सी बारिश में ही मुंबई का जन-जीवन थम जाता है. इसी हवाले से सोशल मीडिया पर आज भी बीएमसी को निशाना बनाया गया है. पूर्व पत्रकार विनोद कापड़ी का ट्वीट है, ‘देश के सबसे संपन्न, समृद्ध शहर मुंबई में सिर्फ बारिश होने पर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन बल (एनडीआरएफ) को तैनात करना पड़ता है. यह तथ्य ये बताने के लिए काफी है कि मुंबई में बीएमसी और राज्य सरकार दशकों से क्या कर रही हैं.’
    इस बीच फेसबुक और ट्विटर पर भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा और महाराष्ट्र भाजपा के प्रवक्ता केशव उपाध्याय की एक तस्वीर कई लोगों ने शेयर की है. इस तस्वीर में मुंबई की बारिश के बीच ये दोनों छाता लिए घुटने-घुटने तक पानी में कहीं जाते हुए दिख रहे हैं. इस तस्वीर के साथ सोशल मीडिया पर खूब मजेदार टिप्पणियां आई हैं. फेसबुक पर आशीष प्रदीप ने लिखा है, ‘रावण से युद्ध के लिए समुद्र पार कर जाती वानर सेना…’ श्रीकांत ढाकने का तंज है, ‘संबित पात्रा विकास को ढूंढ़ते हुए जो पानी में डूब गया है...’
    मुंबई में हो रही भारी बारिश पर सोशल मीडिया में आई कुछ और प्रतिक्रियाएं
    गब्बर- इस समय सभी मुंबईकर फुटबाल की टीम हैं और मुंबई थाईलैंड की गुफा बना हुआ है.
    भैरवी गोस्वामी-मुंबई की बारिश में तो सुपरमैन को भी मुश्किल हो जाती है :
    डीएसके-मुंबई में रियल एस्टेट के दाम अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं क्योंकि अब हर बिल्डिंग सी-फेसिंग है.
    इंडियन-पहली तस्वीर - आम दिनों में मुंबई
    दूसरी तस्वीर – बारिश के दिनों में मुंबई....
    कुदरत के पास अनुशासन सिखाने का बड़ा सख्त तरीका है.
    माधवन नारायणन-मुंबई को लगता था कि वो न्यूयॉर्क जैसा था और फिर उसे लगा कि वो शंघाई बनेगा. लेकिन असल में वो वेनिस में बदल गया है.
    कीर्तीश भट्ट-आज लिख रहे हैं (मीडिया वाले) ‘बारिश से थमी मुंबई’ कल बारिश में एक रेहड़ी वाले की फोटो लगाकर लिखेंगे ‘बारिश में भी नहीं थमी मुंबई’
    मोहित यादव-मुंबई में बारिश रोकने का अब एक ही उपाय बचा है… (बारिश के लिए मध्य प्रदेश में) जिन मेंढक-मेंढकी का ब्याह करवाया गया था, अब उनका तलाक करवा दिया जाए. (सत्याग्रह)

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Posted Date : 11-Jul-2018
  • केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा रिलायंस समूह के प्रस्तावित जियो इंस्टिट्यूट को उत्कृष्ट संस्थानों की सूची में शामिल किए जाने की खबर कल से ही सोशल मीडिया पर चर्चा में है. जियो इंस्टिट्यूट अभी कागजों में ही है, फिर भी सरकार द्वारा इसे उत्कृष्ट संस्थानों की सूची में शामिल करने पर यहां कई लोगों ने सवाल उठाए हैं. प्रतिष्ठित इतिहासकार रामचंद्र गुहा का ट्वीट है, ‘अंबानी की वह यूनिवर्सिटी जिसका अभी अस्तित्व ही नहीं है, उसको इस तरह प्राथमिकता देना काफी चौंकाने वाली बात है. खासकर इसलिए भी क्योंकि (सूची में) कई प्रथम श्रेणी के निजी विश्वविद्यालयों की अनदेखी की गई है. क्या इन्हें बेहतरीन होने की और इस बात की सजा दी जा रही है कि यहां के लोग स्वतंत्र सोच-विचार के होते हैं.’
    इस खबर के चलते फेसबुक और ट्विटर पर चुटकुलों की भी बाढ़ आई हुई है. यहां एक बड़े तबके ने अलग-अलग नेताओं पर तंज कसते हुए सुझाव दिए हैं कि उन्हें जियो इंस्टिट्यूट के किस विभाग का प्रमुख होना चाहिए. आशुतोष उज्ज्वल ने भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा है, ‘जियो यूनिवर्सिटी के प्रिंसिपल इन वेटिंग.’ वहीं राजस्थान एक भाजपा विधायक ज्ञानदेव आहूजा, जो जेएनयू में कंडोम के इस्तेमाल से जुड़ा बयान देकर चर्चा में आए थे, को लेकर दिलीप खान ने सुझाव दिया है कि उन्हें जियो इंस्टिट्यूट के सांख्यिकीय विभाग का प्रमुख बनाया जाना चाहिए.
    सोशल मीडिया में इस खबर पर आई कुछ और दिलचस्प प्रतिक्रियाएं :
    गब्बर-हर दिन सुबह सैकड़ो छात्र अहमदाबाद से बुलेट ट्रेन पकड़ते हैं और बॉम्बे के जियो इंस्टिट्यूट में पढ़ने जाते हैं. इन छात्रों को एजूकेशन लोन लेने की जरूरत नहीं पड़ी क्योंकि यहां लगने वाली भारी-भरकम ट्यूशन फीस उस 15 लाख रुपये से चुका दी गई है जो उन्हें पिछले साल मिले थे.
    जेट ली (वसूली भाई)- जियो इंस्टिट्यूट के बाहर अपनी डिग्री पाने के लिए लाइन लगाए छात्र-छात्राएं.
    अमित तिवारी-जियो यूनिवर्सिटी के टीचर - ‘सिलेबस पूरा न होगा तो क्या? हम तो फ़कीर हैं, झोला उठाकर चल पड़ेंगे जी.’
    डिटेक्टिव- पहले दीक्षांत समारोह में जियो इंस्टिट्यूट के टॉपर का भाषण.
    जियो इंस्टिट्यूट-जियो इंस्टिट्यूट के लिए कोई कागज इस्तेमाल नहीं किया जाएगा और पेड़ों को बचाने के लिए पाठ्य-सामग्री वॉट्सएप पर उपलब्ध कराई जाएगी.
    उपाध्यक्ष, रामपाल युवा पार्टी- जियो इंस्टिट्यूट में हेडमास्टर हाजिरी लेते हुए.
    नितिन ठाकुर-जियो इंस्टिट्यूट पर चुटकुले बनाकर हंसना-हंसाना एक बात है… कुछ वक्त निकालकर इस सरकार का दुस्साहस भी महसूस कीजिए कि ये अब आपको किस लेवल का मूर्ख समझने लगी है.
    आयरनी ऑफ इंडिया-जियो इंस्टिट्यूट (2019 बैच) के बीस सर्वश्रेष्ठ छात्र. (सत्याग्रह)

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Posted Date : 10-Jul-2018
  • उत्तर प्रदेश के कुख्यात अपराधी प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी की बागपत जिला जेल में गोली मारकर की गई हत्या की खबर सोशल मीडिया पर आज सुबह से ही चर्चा में है. इस खबर के चलते मुन्नाबजरंगी ट्विटर के ट्रेंडिंग टॉपिक में भी शामिल हुआ है. यहां कई लोगों ने इस हत्या को राजनीतिक साजिश बताया है. ट्विटर हैंडल ‏ राजीव शालीमार पर टिप्पणी है, ‘यह एक सोची-समझी हत्या है क्योंकि वो (मुन्ना बजरंगी) कई लोगों की असलियत उजागर कर सकता था. इसके (हत्या के) पीछे सरकार है.’
    मुन्ना बजरंगी की हत्या के हवाले से सोशल मीडिया में उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर कई लोगों ने सवाल खड़े किए हैं और योगी आदित्यनाथ सरकार की आलोचना की है. फेसबुक पर मोहम्मद अनस की पोस्ट है, ‘जेल के भीतर प्रेम प्रकाश सिंह ऊर्फ मुन्ना बजरंगी की हत्या यूपी में जंगलराज के चरम की निशानी है… बाहर इनकाउंटर हो रहे हैं और जेल के भीतर हत्या. कानून फिर रह ही कहां गया?’ रंजन रवि ने तंजभरी टिप्पणी की है, ‘यूपी में गजब का राम राज्य है. जेल में मुन्ना बजरंगी को दस गोली मारी गईं... ऐसे ही कारनामों के कारण योगी और मोदी विश्व में प्रसिद्ध हैं.’
    सोशल मीडिया में इस खबर पर आईं कुछ और प्रतिक्रियाएं :
    अमित तिवारी-मुन्ना बजरंगी को जेल में गोली मार दी गयी… यूपी में अब क्रिमिनल्स के लिये सबसे सेफ केवल विधानसभा है.
    अभिषेक द्विवेदी-11 सितम्बर, 1998 : जब मुन्ना बजरंगी एनकाउंटर के बाद पंत हॉस्पिटल में चमत्कारिक ढंग से जीवित हो उठा था.
    द्विवेदी344- 11 सितम्बर 1998- जब #मुन्नाबजरंगी #एनकाउंटर बाद चमत्कारिक ढंग से पंत हॉस्पिटल में जीवित हो उठा था.... मुन्ना_बजरंगी
    आशुतोष उज्ज्वल-बागपत जेल हाई सिक्योरिटी है, लेकिन जहां मुन्ना बजरंगी को गोली मारी गई वहां कोई सीसीटीवी नहीं है. इससे ज्यादा हाई सिक्योरिटी अग्रवाल स्वीट्स में होती है.
    नीलोत्पल शुक्ला-बागपत के हाई सिक्योरिटी जेल में गैंगस्टर मुन्ना बजरंगी की हत्या... न सड़कों पर महिलाएं सुरक्षित न जेल में अपराधी… यूपी का बीजेपी राज.
    चंचल बीएचयू-जेल में कैदी की सामान्य मृत्यु भी शक के दायरे में होती है, बाकायदे उसकी आधिकारिक जांच होती है, क्योंकि कोई भी विचाराधीन कैदी हो या सजायाफ्ता, उसकी सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी सरकार पर होती है. यहां तो मुन्ना बजरंगी की हत्या खुलेआम जेल में और गोली मार कर की गई... देश के जो मौजूदा हालात हैं, उसमें अब तक जेल सबसे महफूज जगह थी आज वह भी सुरक्षित नहीं रही.(सत्याग्रह)

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