सोशल मीडिया

Posted Date : 26-Apr-2018
  • एक नाबालिग लड़की से बलात्कार के मामले में आसाराम को आज सजा सुनाई जानी थी और सोशल मीडिया में कल से ही इस पर चर्चा चल रही थी। वहीं जैसे ही आज जोधपुर की संबंधित अदालत ने आसाराम को उम्रकैद की सजा सुनाई, फेसबुक और ट्विटर की चर्चा में यह खबर और इससे जुड़ी प्रतिक्रियाएं भी शामिल हो गईं। ट्विटर पर ट्रेंडिंग टॉपिक आसारामकेसवर्दिक के साथ इस मामले पर सबसे ज्यादा प्रतिक्रियाएं आई हैं। अपने आपको धर्मगुरु कहने वाले आसाराम के अनुयायियों को अगर छोड़ दें तो यहां ज्यादातर लोगों ने अदालत के इस फैसले का स्वागत किया है। इस पर सायंतन घोष का ट्वीट है, क्या हम लोग कम से कम अब उसे आसाराम बापू कहना बंद कर सकते हैं? बापू तो एक ही हैं, जो तमाम आलोचनाओं के बावजूद इस देश में हमेशा प्रासंगिक रहे। इस तरह के (आसाराम जैसे) धोखेबाज कहीं से भी इस संबोधन के लायक नहीं हैं।
    बलात्कार का आरोप लगने से पहले आसाराम के कार्यक्रमों में तमाम दलों के नेता भी शामिल होते रहते थे। गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए कभी नरेंद्र मोदी भी ऐसे किसी कार्यक्रम में शामिल हुए होंगे और उनके विरोधियों ने आसाराम के साथ वाला ऐसा ही एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है। इसके बहाने कई लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। ऐसे लोगों को जवाब देते हुए फिल्म अभिनेता फरहान अख्तर ने एक ट्वीट किया है और इसकी भी यहां खूब चर्चा है। फरहान ने लिखा है, तो आसाराम बच्चों के साथ बलात्कार करने वाला इंसान है और उसे दोषी पाया गया है। लेकिन क्या लोग कृपया कर प्रधानमंत्री मोदी के साथ उसकी तस्वीर शेयर करना बंद करेंगे। क्योंकि जब तक उसके विकृत व्यक्ति होने की बात उजागर नहीं थी, तब तक उसे संरक्षण देना कोई अपराध नहीं है...
    सोशल मीडिया में एक बड़े वर्ग ने खूब तीखे और बेहद दिलचस्प अंदाज में आसाराम की आलोचना करते हुए उस पर टिप्पणियां की हैं। ये टिप्पणियां और अदालत के इस फैसले पर आई कुछ और प्रतिक्रियाएं-
    अशोक पंडित- वे सभी लोग जो आसाराम बापू और बाबा राम रहीम जैसे अपराधियों का समर्थन करते हैं, इनके हत्या और बलात्कार जैसे अपराधों के लिए बराबर के जिम्मेदार हैं।
    मिथिलेश प्रियदर्शी- अब यह कहकर आसाराम के मजे कौन ले रहा है कि नाबालिग से रेप की सजा तो मौत तय हुई है न!
    मार्गदर्शक शीतू- भक्तजनों, आशा राम से रखो, आसाराम से नहीं।
    जेट ली (वसूली भाई)- लोग आसाराम के साथ भाजपा और कांग्रेस नेताओं की पुरानी तस्वीरें शेयर कर रहे हैं। और गहराई से खोजिए, आपको अपने अभिभावक उसके सत्संग में नाचते हुए दिख जाएंगे। कुल मिलाकर जब तक किसी व्यक्ति के अपराधी होने के बारे में पता न चले, तब तक उसके साथ होना कोई अपराध नहीं है।
    गिरीश मालवीय- उम्रे दराज मांग के लाये थे चार दिन
    दो प्रवचनों में कट गये, दो उम्रकैद में - आसाराम (सत्याग्रह)
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Posted Date : 25-Apr-2018
  • पूर्व विदेश मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद  अपने एक बयान को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है। सलमान खुर्शीद ने यह बयान अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के एक कार्यक्रम में दिया है। यहां उनसे कांग्रेस के कार्यकाल में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हुए दंगों और हिंसक घटनाओं पर एक सवाल पूछा गया था। इसके जवाब में उनका कहना था, मैं कांग्रेस का हिस्सा हूं। लिहाजा मुझे यह मानना होगा कि हमारे (कांग्रेस के) हाथ खून से रंगे हैं। खुर्शीद की इस प्रतिक्रिया को शेयर करते हुए ट्विटर और फेसबुक कई लोगों ने कांग्रेस को घेरा है। साजिद हशमत की फेसबुक पोस्ट है, ....चलो कुबूल तो किया कि मुसलमानों की आज की स्थिति के सबसे बड़े जिम्मेदार कांग्रेसी हैं।
    सलमान खुर्शीद के इस बयान के हवाले से यहां भाजपा समर्थकों ने भी अपने ही अंदाज में कांग्रेस पर निशाना साधा है। एक यूजर की प्रतिक्रिया है, कांग्रेस के दामन पर लगे हैं मुसलमानों के खून के दाग- सलमान खुर्शीद। क्या खून सिर्फ मुसलमानों में होता है, हिंदुओं और सिखों का खून, खून नहीं है क्या? सोशल मीडिया पर कई भाजपा समर्थकों ने इस टिप्पणी को कॉपी-पेस्ट किया है।
    सोशल मीडिया में सलमान खुर्शीद के बयान पर आई कुछ और प्रतिक्रियाएं-
    राजदीप सरदेसाई- सलमान खुर्शीद यह कहते हुए ईमानदार हैं कि कांग्रेस की निगहबानी में दंगे होने की वजह से पार्टी के हाथ खून से रंगे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन इतनी ईमानदारी दिखाता है? खासकर उन लोगों में से जो खुद हिंसा में शामिल रहे हैं।
    द वायरल फीवर- शतक नहीं, आपका चरित्र आपको भगवान बनाता है। हैप्पी बर्थडे सचिन!
    बॉबी देओल (गंगा किनारे वाले)- सलमान खुर्शीद- कांग्रेस के दामन पर मुस्लिमों के खून के धब्बे हैं।
    कांग्रेस- हमें तो अपनों ने ही मारा गैरों में कहां दम था....
    हेमंत कुमार- भाजपा को कांग्रेस पार्टी ने चार स्टार प्रचारक दिए हैं- दिग्विजय सिंह, मणिशंकर अय्यर, कपिल सिब्बल और सलमान खुर्शीद। इसलिए 2019 में भाजपा को हराना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है।
    सुरेश गोयल- सलमान खुर्शीद को कांग्रेस से क्या खुन्नस हो गई है जो वे पार्टी के यशवंत सिन्हा बने फिर रहे हैं? (सत्याग्रह)

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Posted Date : 24-Apr-2018
  • विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के एक सदस्य और संगठन के सोशल मीडिया सलाहकार अभिषेक मिश्रा का एक ट्वीट कल से सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है। मिश्रा ने 20 अप्रैल को ट्वीट करके बताया था कि उसने एक ओला कैब की सेवाएं लेने से इसलिए मना कर दिया क्योंकि उसका ड्राइवर मुस्लिम था। सोशल मीडिया पर एक बड़े तबके ने इस ट्वीट के हवाले से अभिषेक मिश्रा की आलोचना की है और सांप्रदायिक विद्वेष बढऩे पर चिंता जताई है। वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई की टिप्पणी है, यह शर्मनाक है। अगर संवैधानिक नैतिकता का कोई अस्तित्व है तो इस आदमी को घृणा फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया जाना चाहिए।
    मिश्रा के इस ट्वीट के जवाब में ओला कैब की तरफ से भी प्रतिक्रिया आई है। इसमें कहा गया है, अपने देश की तरह ओला भी एक धर्मनिरपेक्ष प्लेटफॉर्म है। हम अपने चालक-साझीदारों या ग्राहकों के बीच धर्म, जाति, समुदाय या लिंग के आधार पर भेद नहीं करते। हम अपने सभी ग्राहकों और चालक-साझीदारों से अपील करते हैं कि वे हमेशा एक-दूसरे का सम्मान करें। सोशल मीडिया पर इन दोनों ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट कई लोगों ने शेयर किए हैं।
    मीडिया में आई खबरों के मुताबिक ट्विटर पर कई भाजपा नेता अभिषेक मिश्रा के फॉलोवर हैं। यही वजह है कि ट्विटर और फेसबुक पर इस घटनाक्रम के बहाने भाजपा और उसके नेताओं को बड़े ही दिलचस्प अंदाज में निशाना बनाया गया है। ट्विटर हैंडल विश्ज 05 पर चुटकी ली गई है, आज मैंने ओला कैब की बुकिंग कैंसल कर दी क्योंकि ड्राइवर का नाम मोदी था और वो बहुत देर से कैब गोल-गोल घुमा रहा था। जसप्रीत कपूर ने लिखा है, मैंने आज अपनी ओला बुकिंग कैंसल कर दी क्योंकि ड्राइवर का नाम जेटली था- पता नहीं वो बिल में कितना सरचार्ज और सेस जोड़ देता।
    इस मामले पर सोशल मीडिया में आई कुछ और दिलचस्प प्रतिक्रियाएं-
    अनऑफीशियल रोफल गांधी- योगी आदित्यनाथ जी, कट्टर हिंदू भाइयों के लिए स्पेशल भोला और कुबेर कैब चलाई जाएं।
    विवेक अग्निहोत्री- मैंने ओला कैब की बुकिंग कैंसल कर दी क्योंकि ड्राइवर का नाम 'अमर अकबर एंथनीÓ था और मुझे धर्मनिरपेक्षता बर्दाश्त नहीं होती।
    ट्रेंडुलकर- चूंकि मुझे इस सवारी के साथ बैठना पड़ता इसलिए मैंने अपनी ओला कैब कैंसल कर दी।
    डिसअपॉइंटमेंट- ओला कैब की बुकिंग कैंसल कर दी क्योंकि ड्राइवर का नाम तुलसीदास खान था। मैं उस आदमी के साथ सवारी नहीं कर सकता जिसका नाम आज के समय में इस तरह की एकता दिखाता हो।
    प्रेजिडेंट वल वर्डे- आज मैंने ओला कैब की बुकिंग रद्द कर दी क्योंकि ड्राइवर का नाम 'अच्छे दिनÓ था.... ये तो कभी नहीं आएगा। वैशाली सिंह- अभिषेक मिश्रा जैसे लोगों के लिए ओला कैब्स को अपना नया वर्जन, 'ओला रथ यात्राÓ लॉन्च करना चाहिए। (सत्याग्रह)

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Posted Date : 23-Apr-2018
  • जब मियां-बीवी राजी तो क्या करेगा काजी.... और कहावत को चरितार्थ करते हुए एक-दूसरे के हुए मिलिंद सोमन और अंकिता कोंवर। रविवार को पूरे मराठी रीति-रिवाज से मुंबई के अलीबाग में संपन्न हुए मिलिंद-अंकिता के विवाह समारोह में घरवालों के अलावा कुछ खास मेहमान ही आमंत्रित थे।
    इससे पहले शादी की दूसरी रस्मों की कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर आ ही चुकी थीं। उम्र के फासले की वजह से दोनों को कई बार आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा था। सोशल मीडिया पर उन्हें जमकर ट्रोल किया गया था।
    एक ओर जहां मिलिंद 52 साल के हैं वहीं अंकिता उनसे काफी छोटी हैं। हालांकि न तो मिलिंद ने कभी इन आलोचनाओं को गंभीरता से लिया और न ही अंकिता ने। दोनों ने कभी भी अपने रिश्ते को छुपाने की भी कोशिश नहीं की।
    अंकिता ने कुछ वक्त पहले अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा भी था कि मैं ये नहीं जानना चाहती हूं कि आपके बिना रहना कैसा होता है, मैं आपके बिना इस दुनिया को ही नहीं जानना चाहती।
    अंकिता एयर एशिया में केबिन क्रू एक्जीक्यूटिव रह चुकी हैं। मूल रूप से गुवाहाटी की अंकिता फिलहाल दिल्ली में रहती हैं। उनकी प्रोफाइल से पता चलता है कि उन्हें गाने और घूमने का काफी शौक है।
    वहीं मिलिंद ग्लैमर वल्र्ड के साथ-साथ फिटनेस की दुनिया में भी अच्छी दखल रखते हैं। 90 के दशक में अलीशा चेनॉय के वीडियो एलबम मेड इन इंडिया से धूम मचाने वाले मिलिंद 52 की उम्र में भी काफी पापुलर हैं। मिलिंद की यह दूसरी शादी है। इससे पहले उनकी शादी फ्रेंच मॉडल मायलिन जम्पानोई से हुई थी। जिससे उनका तलाक हो चुका है। (बीबीसी)

     

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Posted Date : 21-Apr-2018
  • गुजरात हाई कोर्ट ने 2002 के नरोदा पाटिया सामूहिक हत्याकांड मामले में गुजरात सरकार की पूर्व मंत्री माया कोडनानी को बरी कर दिया है। सोशल मीडिया में इस फैसले पर भाजपा समर्थकों और विरोधियों के बीच खूब बहस हुई है। यहां कई लोगों ने इस पर सवाल उठाए हैं। वरिष्ठ पत्रकार हरिंदर बावेजा का ट्वीट है, अविश्वसनीय। माया कोडनानी को चश्मदीद गवाहों द्वारा दिए इन बयानों के बाद भी बरी कर दिया गया कि वे भीड़ को उकसा रही थीं, तलवारें और कैरोसीन बांट रही थीं। हर भारतीय को इस (फैसले) पर शर्मिंदा होना चाहिए।
    हाई कोर्ट के इस फैसले का जिक्र करते हुए यहां विरोधियों और अन्य लोगों ने भाजपा को जमकर घेरा है। शैलेश खरे की तंजभरी टिप्पणी है, माया कोडनानी और असीमानंद से बेहतर 'अच्छे दिनÓ की परिभाषा कोई नहीं बता सकता... इसके साथ ही यहां कुछ लोगों ने देश की न्याय व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। ट्विटर हैंडल गुरु घंटाल पर प्रतिक्रिया है, जिसे ट्रायल कोर्ट ने मास्टरमाइंड बताते हुए दोषी ठहराया था, उसे हाई कोर्ट ने बरी कर दिया। इस तरह हमारी कथित 'काबिलेतारीफÓ न्याय व्यवस्था काम करती है...
    सोशल मीडिया में हाई कोर्ट के इस फैसले पर आई कुछ और प्रतिक्रियाएं-
    द ग्रेट डिक्टेटर- असल में माया कोडनानी को केंद्र सरकार की 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओÓ योजना के तहत छोड़ा गया है...
    अटर्ली-बटर्ली- मोदी के बाद प्रधानमंत्री बनने के योगी के सपने को माया कोडनानी ने तोड़ दिया.... अब उन्हें घर से ही बहुत तगड़ा कॉम्पिटीशन मिलने वाला है।
    ऋचा सिंह - माया कोडनानी को नरोदा पाटिया मामले में बरी कर दिया गया है। जो लोग धर्म आधारित अपराधों में आरोपित थे, उन पर आ रहे फैसले भाजपा के कार्यकाल में गंगा जल साबित हो रहे हैं। सबके पाप धुल गए।
    सुहासिनी हैदर- किसी ने किसी को नहीं मारा, फिर भी लोग मारे गए। उम्मीद की जाए कि शायद किसी को इसकी वजह पता हो।  (सत्याग्रह)

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Posted Date : 20-Apr-2018
  • लंदन के टाउन हॉल में आयोजित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यक्रम 'भारत की बात सबके साथÓ कल रात से ही सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोर रहा है। पाकिस्तान के खिलाफ भारत की सर्जिकल स्ट्राइक और बलात्कार के मामलों पर उनके बयान की यहां खूब चर्चा है। हालांकि इसके साथ ही उनके विरोधियों और अन्य लोगों ने इस कार्यक्रम को लेकर कई सवाल भी उठाए हैं और तंजभरी टिप्पणियां की हैं। वरिष्ठ पत्रकार अंबरीश कुमार की फेसबुक पोस्ट है,'(नरेंद्र मोदी) पहले पीएम हैं जिन्होंने लंदन से प्रचार शुरू किया हैÓ ट्विटर हैंडल अब्दुलाह पर चुटकी ली गई है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लंदन में जबर्दस्त प्रदर्शन करने वाले दूसरे भारतीय हैं। पहले अजित आगरकर थे, जिन्होंने लॉर्ड्स के मैदान पर सौ रन बनाए थे।
    इस कार्यक्रम की एक खासबात यह भी रही कि इसमें प्रधानमंत्री से सवाल करने की जिम्मेदारी चर्चित एडमैन, गीतकार और सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी निभा रहे थे। जोशी पत्रकार नहीं हैं इसलिए उनसे यह उम्मीद भी नहीं की जानी चाहिए थी कि वे प्रधानमंत्री से कोई कड़े सवाल पूछते। फिर भी सोशल मीडिया पर कई लोगों ने यह कहते हुए उनकी आलोचना की है कि उन्होंने मोदी से वही सवाल पूछे जिनके जवाब में सरकार का प्रचार होना था। कार्टूनिस्ट मंजुल ने इस पर चुटकी ली है, सेंसर बोर्ड चीफ ने सारे सवाल सेंसर कर दिए... केवल गाने ज्यों के त्यों पास हो गए।
    सोशल मीडिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लंदन में आयोजित इस कार्यक्रम पर आई कुछ और दिलचस्प प्रतिक्रियाएं-
    चंद्र भूषण- लंदन वाला इवेंट 2019 के चुनाव में 'एनआरआई मतोंÓ को आकर्षित करने के लिए था। फिलहाल अपने यहां तो गाय-गोबर और हिंदु-मुस्लिम ही चलेगा।
    अमन मलिक- मोदी ने लंदन लोक सभा उपचुनाव के लिए पूरी गंभीरता से अपना चुनाव अभियान शुरू कर दिया है। वेंबली (लंदन का इलाका) के सभी पटेल भाजपा को ही वोट देंगे।
    हप्पू क्रैट- विदेशी पिचों पर रन बनाने के लिए गेंदबाज अपने देश का ले जाओ- नरेंद्र मोदी
    गप्पिस्तान रेडियो- प्रसून जोशी की भी क्या गलती! उन्होंने बड़े-बड़े पत्रकारों को पसंदीदा भोजन पर प्रश्न पूछते देखा है तो सोच बैठे होंगे कि शायद साक्षात्कार ऐसे ही होते हैं।
    ओम थानवी- उसके उच्चारण में कसर रही या नाम ही बदल गया? कल जब-जब बोलता था प्रसून जोशी, सुनाई पड़ता था स्पून जोशी!
    आशीष प्रदीप- मोदीजी खुद से सवाल पूछने प्रसून जोशी को ले गए थे। एड एजेंसी वालों से सही काम लेना, इस आदमी से अच्छा किसी को नहीं आता।  (सत्याग्रह)

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Posted Date : 19-Apr-2018
  • त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब के एक बयान की वजह से आज सोशल मीडिया पर महाभारत ट्रेंडिंग टॉपिक में शामिल हुआ है। कल एक कार्यक्रम में विप्लब देब ने कहा था कि इंटरनेट का आविष्कार भारत में लाखों साल पहले हो चुका था। इस दौरान अपने इस दावे के समर्थन में उन्होंने कहा, यह देश वो देश है, जहां महाभारत में संजय धृतराष्ट्र को युद्ध में क्या हो रहा था, बता रहे थे। इसका मतलब क्या है? उस जमाने में टेक्नोलॉजी थी, इंटरनेट था, सैटेलाइट था... सोशल मीडिया पर कई लोगों ने ऐसा कहते हुए बिप्लब देब का वीडियो भी शेयर किया है।
    यहां ज्यादातर लोगों ने त्रिपुरा के मुख्यमंत्री के इस बयान का मजाक बनाते हुए बेहद दिलचस्प टिप्पणियां की हैं। जय कुमार का ट्वीट है, महाभारत में अगर पांडवों ने कौरवों के साथ वाई-फाई का पासवर्ड शेयर कर लिया होता तो कुरूक्षेत्र का युद्ध टाला जा सकता था। इस खबर के बहाने आशीष प्रदीप ने मीडिया पर तंज किया है, बिप्लब देब की बात पर आश्चर्य मत कीजिए, शाम तक न्यूज चैनल वाले साबित भी कर देंगे कि लाक्षागृह से जली हुई लैन (लोकल एरिया नेटवर्क) केबलें निकली थीं। बिप्लब देब के साथ-साथ उनके इस बयान के हवाले से भाजपा का भी खूब मजाक बनाया गया है। एक यूजर ने लिखा है, अगर इंटरनेट महाभारत के समय उपलब्ध था तो भाजपा को एक समिति बनाकर जांच करवाना चाहिए कि फिर वह बाद में गायब कैसे हुआ।
    सोशल मीडिया में मुख्यमंत्री बिप्लब देब के इस बयान पर आई कुछ और प्रतिक्रियाएं -
    ऋचा सिंह- अगर महाभारत के समय इंटरनेट रहता तो कुरुक्षेत्र में सभी इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी जातीं।
    शकुनि मामा- भाजपा की यही खूबी है कि वो महाभारत के समय इंटरनेट पैदा करवा सकती है और इंटरनेट के दौर में महाभारत।
    हिस्टरी ऑफ इंडिया- महाभारत के दौरान संजय दृष्टिहीन राजा धृतराष्ट्र को नकदी संकट और महिलाओं के खिलाफ हिंसा के बारे में बताते हुए (420 ईसा पूर्व)।
    क्रिएटिव- अगर महाभारत काल में इंटरनेट था तो भविष्य में जो भी आविष्कार होंगे, वे भी प्राचीन समय में रहे होंगे।
    विवेक शर्मा- महाभारत के समय का पेन ड्राइव जिसे घटोत्कच और भीम इस्तेमाल करते थे।
    निज मद्रासी- मेरे ख्याल से वे मुगल थे जिन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप में बिछे फाइबर ऑप्टिक्स को बर्बाद किया था....
    सोहेल अख्तर- महाभारत के टाइम पर इंटरनेट था, प्लास्टिक सर्जरी थी। बस टॉयलेट नहीं थीं जो मोदीजी अब बनवा रहे हैं।
    कांचा- महाभारत का 'ब्लू व्हेल गेमÓ जिसका आखिरी टास्क पूरा करने के लिए पांडव अज्ञातवास पर गए थे!  (सत्याग्रह)

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Posted Date : 18-Apr-2018
  • देश के कई राज्यों में नकदी के संकट की खबर आज सोशल मीडिया पर छाई हुई है। हालांकि रिजर्व बैंक ने आश्वस्त किया है कि बैंकिंग व्यवस्था में पर्याप्त नकदी है और लोगों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। वहीं वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी कुछ इसी तरह का बयान दिया है। नकदी यह ताजा संकट फेसबुक और ट्विटर के ट्रेंडिंग टॉपिक में भी शामिल हुआ है।
    इन ट्रेंडिंग टॉपिक के साथ-साथ सोशल मीडिया पर सामान्य प्रतिक्रियाओं में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय वित्त मंत्री और केंद्र सरकार को इस संकट के लिए घेरा जा रहा है। पत्रकार शिवम विज का तंजभरा ट्वीट है, आज अर्थव्यवस्था में नोटबंदी से पहले के मुकाबले ज्यादा नकदी है फिर भी एटीएम अचानक खाली हो गए हैं। यह मोदी सरकार का जबर्दस्त वित्तीय प्रबंधन है। इसके लिए 'वित्त मंत्रीÓ हसमुख अधिया (वित्त सचिव) को भारत रत्न दिया जाना चाहिए। पिछले दिनों एक खबर आई थी कि बीते साल भाजपा देश की सबसे अमीर पार्टी बन गई है। सोशल मीडिया पर नकदी के संकट का जिक्र करते हुए आज कई लोगों ने इस खबर का भी जिक्र किया है। सबा नकवी का तंज है, नोटबंदी के बाद भाजपा की आमदनी 81 प्रतिशत बढ़ी है। अब आपको या मुझे नकद मिले या नहीं, लेकिन पार्टी का खजाना नए रिकॉर्ड जरूर तोड़ता रहेगा।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी पांच दिवसीय विदेश यात्रा के सिलसिले में आज स्वीडन पहुंचे हैं। सोशल मीडिया पर उनकी इस यात्रा से जुड़ी कई तस्वीरें शेयर हुई हैं, लेकिन इसके साथ नकदी संकट पर उन्हें निशाना बनाते हुए कुछ मजेदार टिप्पणियां भी आई हैं। एक यूजर की चुटकी है, मोदीजी...नीरव मोदी से पैसे लेने गये हैं, तब तक आप लाइन में लगे रहो...
    सोशल मीडिया में नकदी के ताजा संकट पर आई कुछ और प्रतिक्रियाएं-
    आमोद यादव- अजब दादागीरी है। खाते में पैसा न होने पर बैंक हर महीने चार्ज वसूल लेते हैं। लेकिन एटीएम में नकदी न होने पर बैंकों की कोई जवाबदारी नहीं है। सारे नियम-कानून पूंजीपतियों और अमीर लोगों के हित में क्यों हैं?
    नाना पाटेकर- नेहरू की जगह सरदार पटेल प्रधानमंत्री होते तो आज एटीएम में कैश होता.... होता कि नहीं मित्रों!
    आइरनी ऑफ इंडिया- मित्रो, देश आगे बढ़ रहा है कि नहीं?
    ध्रुव राठी- 2014- जनधन योजना (बैंकों में खाते खोले गए) 
    2016- नोटबंदी (बैंकों में पैसे जमा करवाए गए) 
    2017- भाजपा सबसे अमीर राजनीतिक पार्टी बनी
    2018- बैंक घोटालेबाज जैसे नीरव मोदी पैसे लेकर देश से भागे और अब एटीएम में नकदी का संकट पैदा हो चुका है... घटनाओं का क्या संयोग है!
    नाइट वॉचमैन- ज्यादा परेशान मत होइए। नकदी की कमी तो बस एक अभ्यास है ताकि जनता नोटबंदी जैसी आपात स्थिति के लिए तैयार हो सके।
    मोस्टली ऑफलाइन- भारतीय अब भी नकद और एटीएम का इस्तेमाल कर रहे हैं??? एक मध्ययुगीन देश। (सत्याग्रह)

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Posted Date : 17-Apr-2018
  • राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की हैदराबाद स्थित विशेष अदालत ने मक्का मस्जिद धमाका मामले में सोमवार को असीमानंद सहित सभी पांचों आरोपितों को बरी कर दिया है। फेसबुक और ट्विटर पर आज इस खबर की खूब चर्चा है। भाजपा समर्थक और कई अन्य लोग आरोप लगाते रहे हैं कि कांग्रेस ने कथित 'हिंदू आतंकवादÓ का हौव्वा खड़ा करने के लिए यह झूठा मामला गढ़ा था और निर्दोष लोगों को फंसाया था। सोशल मीडिया में इस बात का जिक्र करते हुए आज भी कई लोगों ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। पत्रकार अभिजीत मजूमदार का ट्वीट है, मक्का मस्जिद बम धमाके में आरोपित स्वामी असीमानंद और चार आरोपितों को बरी कर दिया गया है। सुनवाई के दौरान 226 गवाह पेश किए गए और 411 दस्तावेजों की छानबीन की गई... क्या सोनिया गांधी का यूपीए इन लोगों के जीवन के 10-11 साल वापस लौटा सकता है? या क्या निर्दोष लोगों को 'हिंदू आतंकवादÓ की धारणा स्थापित करने के लिए फंसाया जाना ठीक है?Ó
    हालांकि यहां एक बड़े तबके और भाजपा विरोधियों का यह भी कहना है कि इन आरोपितों की रिहाई केंद्र सरकार के दबाव में हुई है। साथ ही इस मामले में एनआईए जांच पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। निशांत चतुर्वेदी ने पूछा है, मक्का मस्जिद मामले में पांच आरोपित बरीज् तो क्या ये केस गलत था? तो फिर इस मामले में गुनहगार कौन था?
    सोमवार को आए इस फैसले से उठी बहस की आग में आज एक और खबर ने घी डालने का काम किया है। खबर यह है कि इस मामले में फैसला सुनाने वाले विशेष एनआईए जज रविंदर रेड्डी ने इस्तीफा दे दिया है। सोशल मीडिया में रेड्डी के इस्तीफे पर हैरानी जताई जा रही है और कई लोगों ने इस पर भी सवाल खड़े किए हैं।
    सोशल मीडिया में मक्का मस्जिद धमाका मामले से जुड़े घटनाक्रम पर आईं कुछ और प्रतिक्रियाएं-
    राजदीप सरदेसाई- 11 साल के बाद मक्का मस्जिद बम धमाके के सभी आरोपित बरी हो गए हैं। कुल मिलाकर, वह बम धमाका जिसमें आठ लोग मारे गए थे और 58 घायल हुए थे, के लिए कोई जिम्मेदार नहीं हैं... ये है इंडिया।
    फिल्म हिस्टरी पिक्स- महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, और इंदिरा गांधी के साथ चार्ली चैप्लिन। आज इस अमरीकी अभिनेता का 129वां जन्मदिन है।
    हरिंदर बावेजा- मक्का मस्जिद केस के पांच आरोपित बरी हो गए हैं। एनआई.... यानी पिंजरे में बंद तोता, बहुत बढिय़ा। लोग और उम्मीद भी क्या करते। यहां तो बलात्कार के आरोपित को भी जनता के विरोध प्रदर्शन के बाद गिरफ्तार किया जाता है। फिलहाल हम अपने संस्थानों के खोखलेपन पर शोक ही जता सकते हैं...
    ऋषिका नेगी- मक्का मस्जिद ब्लास्ट वाला असीमानंद भी बरी हो गया... अच्छे ही अच्छे दिन चल रहे हैं जी!
    दास बोल्शेविक- सीबीआई और एनआईए में क्या अंतर है? सिर्फ स्पेलिंग का। (सत्याग्रह)

     

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Posted Date : 14-Apr-2018
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अक्सर हमलावर रहने वाले अभिनेता प्रकाश राज को असहज स्थितियों का सामना करना पड़ा। प्रकाश 12 अप्रैल को गुलबर्ग (कर्नाटक) गए हुए थे, जहां कुछ लोगों ने उनकी कार को घेर कर मोदी-मोदी के नारे लगाने लगे थे। अभिनेता ने ट्वीट किया, देखिए गुरुवार रात को भाजपा और मोदी भक्त गुलबर्ग में किस तरह उपद्रवियों की तरह व्यवहार कर रहे थे। जोकरों का पूरा समूह इक_ा था। क्या आपलोग बातचीत में विश्वास नहीं करते हैं आपलोग सोचते हैं कि आप मुझे आतंकित कर सकते हैं क्या आप जानते हैं कि इस तरह आप सही मायनों में मुझे और मजबूत कर रहे हैं। भीड़ में शामिल लोग 'भारत हिंदुओं का है, भारत हिंदुओं का हैÓ भी चिल्लाने लगे थे। 
    प्रकाश राज मोदी सरकार की योजनाओं और कार्यशैली की कड़ी आलोचना करते रहे हैं। दक्षिण के बाद बॉलीवुड में भी सफलता के झंडे गाडऩे वाले प्रकाश राज ने जनवरी में कहा था कि वह देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को हिंदू नहीं मानते हैं। उन्होंने एक टीवी कार्यक्रम में कहा था कि जो कोई भी हत्या और हिंसा की बात करता है, उन्हें वह हिंदू नहीं मानते हैं। वह भाजपा सांसद प्रताप सिम्हा को कानूनी नोटिस तक भिजवा चुके हैं।
    प्रकाश राज के साथ इस व्यवहार की लोगों ने कड़ी आलोचना की है। एक व्यक्ति ने ट्वीट किया, यह हमारे देश में बेरोजगारी की इंतहा को दिखाता है। संदीप मिश्रा ने लिखा, जैसी करनी वैसी भरनी। अभीजित ने ट्वीट किया, यह बेहद शर्मनाक है। अपने विचारों के लिए आपको जिन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है उसको लेकर मुझे बहुत दुख होता है। शम्मी भगत ने लिखा, विनाश काले विपरीत बुद्धि। पुष्पेंद्र शुक्ला ने लिखा, डरना नहीं है सर। हमलोग हमेशा आपको प्यार करते रहेंगे। संतोष ने ट्वीट किया, क्या आपको पता है कि आप वास्तव में भाजपा को मजबूत कर रहे हैं।
    पिछले कुछ महीनों में प्रकाश राज पीएम मोदी की नीतियों के मुखर विरोधी रहे हैं। पीएम मोदी का विरोध करने के लिए प्रकाश राज पर बीजेपी सांसदों ने हमले किये हैं। प्रकाश राज ने जब गौरी लंकेश मर्डर पर पीएम मोदी की चुप्पी को लेकर सवाल उठाया तो प्रताप सिम्हा ने कहा कि प्रकाश राज तब कहां थे जब हिन्दू संगठनों से जुड़े 12 लोगों की हत्या कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि वे कर्नाटक का हितैषी बनने का दावा करते हैं, क्या उन्होंने कावेरी विवाद पर एक भी शब्द कहा है। (जनसत्ता)

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Posted Date : 14-Apr-2018
  • सोशल मीडिया में उन्नाव और कठुआ बलात्कार मामलों की चर्चा के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनकी चुप्पी के लिए पिछले दो-तीन दिनों से लगातार घेरा जा रहा था। वहीं कल आधी रात को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस मुख्यालय से लेकर इंडिया गेट तक कैंडल लाइट मार्च निकाला गया था। इसके साथ गुरुवार को ही कांग्रेस अध्यक्ष ने भी इन मसलों पर चुप्पी के लिए प्रधानमंत्री को निशाना बनाया था। सोशल मीडिया पर इसकी भी खूब चर्चा रही और यहां शाम तक प्रधानमंत्री को घेरते हुए कई टिप्पणियां आई हैं। फेसबुक पर सतीश मुख्तलिफ ने लिखा है, क्या विडंबना है कि सबसे ज्यादा बोलने वाला पीएम संजीदा मसलों पर अपनी चुप्पी के लिए भी जाना जाएगा। ट्विटर पर स्पीकअप ट्रेंडिंग टॉपिक के साथ इस मुद्दे पर मोदी को घेरा गया है।
    हालांकि शुक्रवार को नई दिल्ली में हुए एक आयोजन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आखिरकार कठुआ और उन्नाव बलात्कार मामलों पर अपनी चुप्पी तोड़ दी है। यहां दिए भाषण में उन्होंने इन घटनाओं को शर्मनाक बताते हुए कहा है कि इन मामलों में पूरा न्याय होगा। शाम के बाद सोशल मीडिया पर इस खबर को कई लोगों ने शेयर किया है और इस पर भी कई प्रतिक्रियाएं आई हैं। पत्रकार बरखा दत्त ने प्रधानमंत्री के बयान का स्वागत करते हुए ट्वीट किया है, ....यह बयान पहले आ जाना चाहिए था...हालांकि यह जनता और हमारे आक्रोश की ताकत को रेखांकित करता है।
    केंद्र में यूपीए सरकार के समय भाजपा अक्सर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की इसलिए आलोचना करती थी कि वे कथिततौर पर ज्यादातर मौकों पर मौन रहते थे। सोशल मीडिया पर आज मोदी की मनमोहन सिंह से तुलना करते हुए भी कई प्रतिक्रियाएं आई हैं। ट्विटर हैंडल शकुनि अंकल पर एक टिप्पणी है, जैसे ही यह अहसास हुआ कि चुप्पी का मनमोहन सिंह का रिकॉर्ड टूट सकता है, मोदी जी बोल पड़े।
    इन दोनों मामलों को लेकर प्रधानमंत्री की चुप्पी और आज आए उनके बयान पर सोशल मीडिया में आई कुछ और प्रतिक्रियाएं-
    श्रीलता- प्रधानमंत्री मोदी आज बोले तो जरूर हैं, लेकिन इसे यूं ही लिया जा सकता है- बहुत देर कर दी मेहरबां आते-आते...
    जैनेन्द्र कुमार- यह अच्छा है कि दबाव में ही सही लेकिन प्रधानमंत्री मोदी रेप की घटनाओं से लेकर एससी-एसटी एक्ट पर 'बोलेÓ हैं, लेकिन क्या प्रधानमंत्री को सरकारी मंच से 'बीजेपी-कांग्रेसÓ करना चाहिए?
    शिवम विज- मोदी 24 घंटे देरी से बोले हैं या तीन महीने देरी से... जम्मू-कश्मीर सरकार में भाजपा के मंत्रियों को हटा दिया गया है (आज ही).... जो यूपीए-2 में हुआ था, कुछ वैसा ही हो रहा है...भरपाई की जा रही है लेकिन बहुत देर से और वो भी बहुत कम, और इसीलिए यहां और कमजोरी का दिख रही है।
    अमित तिवारी- मोदी जी की चुप्पी का मतलब ये नहीं कि वो दुखी नहीं हैं इन राज्यों में चुनाव न आने वाले हों तो उनकी क्या गलती!  (सत्याग्रह)

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Posted Date : 13-Apr-2018
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की अगुवाई में आज सत्ताधारी दल के नेताओं ने एक दिन का उपवास रखा है। भाजपा के मुताबिक यह उपवास विपक्ष द्वारा संसद में गतिरोध पैदा करने के विरोध में रखा गया है। सोशल मीडिया पर इसकी कल से ही चर्चा चल रही है। भाजपा समर्थकों ने यहां आम लोगों से इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री को समर्थन देने की अपील की है, लेकिन वहीं पार्टी विरोधियों और एक बड़े तबके ने इस पर सवाल खड़े किए हैं। कुसुम तोमर का ट्वीट है, ....संसद चलाना सरकार की जिम्मेदारी है, यानी अब मोदी जी खुद अपनी सरकार के खिलाफ अनशन करेंगे! सत्यानंद निरूपम ने तंज किया है, जिसके हाथ में सारी सत्ता वही करे उपवास, लाचारों की लाचारी का ऐसे उड़े उपहास...
    सोशल मीडिया पर उन्नाव और कठुआ बलात्कार मामलों की भी खूब चर्चा है और इनका जिक्र करते हुए यहां भाजपा की लानत-मलानत की जा रही है। फेसबुक और ट्विटर पर कई लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उपवास और इन घटनाओं को जोड़ते हुए टिप्पणियां की हैं। कार्टूनिस्ट कीर्तीश भट्ट ने ट्वीट किया है, संसद में काम ना होने पर उपवास, उन्नाव और कठुआ मामले पर चुपवास।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस एक दिन के उपवास पर सोशल मीडिया में आई कुछ और प्रतिक्रियाएं - 
    अमित तिवारी- मोदी जी अपने सारे चेलों के साथ उपवास रख रहे हैं कांग्रेसी का पैर गोबर में पड़ जाये तो हमारे प्रतियोगी नेचर वाले भाजपाई लोग पूरा सिर ही उसमें बोर देते हैं!
    विजय पांडे- नरेंद्र मोदी का बंटवारे की राजनीति के खिलाफ उपवास करना वैसा ही जैसे स्टीव स्मिथ का बॉल टेंपरिंग के खिलाफ उपवास करना...
    आजाद हिन्द सेना- जब केजरीवाल ने मुख्यमंत्री रहते उपवास किया था तो भाजपा ने उसका मजाक उड़ाया था। लेकिन आज मोदी ने पूर्ण बहुमत की सरकार रहते हुए उपवास करके केजरीवाल की बराबरी कर ली है।
    रिया कुलकर्णी- मोदीजी खुद भारत देश के प्रधान हैं। सत्ता भी भाजपा की है। फिर ये उपवास किसके खिलाफ कर रहे हैं? खुद के या फिर कोरिया या चाइना के? (सत्याग्रह)

     

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