दन्तेवाड़ा

टाउनशिप सिक्योरटी में होने वाली नवीन व्यवस्था का विरोध मजदूर संघ का प्रदर्शन, सीजीएम को सौंपा ज्ञापन
23-Sep-2021 9:35 PM (61)
 टाउनशिप सिक्योरटी में होने वाली नवीन व्यवस्था का विरोध  मजदूर संघ का प्रदर्शन, सीजीएम को सौंपा ज्ञापन

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बचेली, 23 सितंबर। एनएमडीसी बचेली के आवासीय कॉलोनी टाउनशिप क्षेत्रों की सुरक्षा में नवीन व्यवस्था किये जाने का विरोध किया जा रहा है। गुरूवार को मजदूर यूनियन संयुक्त खदान मजदूर संघ के द्वारा सीआईएसएफ चेक पोस्ट से रैली निकालते हुए बचेली परियोजना के प्रशासनिक भवन पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। श्रमिक संघ के सदस्यों द्वारा जमकर नारेबाजी की गई। इस संबंध में सिक्योरिटी गार्ड के रोजगार को लेकर परियोजना के मुख्य महाप्रबंधक पीके मजुमदार को ज्ञापन सौंपा गया।

यूनियन के सचिव टीजे शंकर राव ने कहा कि टाउनशिप सिक्योरिटी की व्यवस्था को निजी एजेंसी को सौंपा हुआ है। जिसके तहत विगत कुछ वर्षों से निजी सुरक्षा एजेंसी अपने गार्डों के माध्यम से टाउनशिप व्यवस्था सुचारू रूप से विगत लगभग 15 वर्षों से संभाल रही है। विश्वस्त सूत्रों से संघ के संज्ञान में यह लाया गया है कि वर्तमान में उक्त व्यस्था को संभाल रही मेसर्स एलर्ट सर्विस ब्यूरो का उक्त ठेका डीजीआर रेट पर भूतपूर्व सैनिकों के माध्यम से निष्पादित किये जाने का निर्णय न्यायालय द्वारा जारी किया जा चुका है। जिसमें उक्त एजेंसी भूतपूर्व सैनिको के माध्यम से उक्त कार्यादेश निष्पादित करेगी। आज तक टाउनशिप सिक्योरिटी में इस प्रकार की व्यवस्था नहीं थी।

आज देश में कोविड-19 महामारी के कारण लागू किये गये लॉकडाउन के फलस्वरूप रोजगार के साधनों पर गंभीर कुठारघात लगा है जिसके फलस्वरूप लाखों लोग बेरोजगार हो चुके हैं। प्रबंधन के उक्त नवीन व्यवस्था के फलस्वरूप इस कार्य में विगत 10-15 वर्षों से कार्यरत मजदूर बेरोजगार हो जाएंगे। इनमें ऐसे कर्मचारी है जो 45-50 वर्ष की आयु प्राप्त कर चुके हैं। इस नवीन व्यवस्था के फलस्वरूप इन वर्षों से कार्यरत व्यक्तियो के समक्ष अपनी रोजी रोटी एवं जीवन यापन की गंभीर समस्या अचानक उत्पन्न होगी।

 प्रबंधन से की गई मांग

टीजे शंकरराव ने बताया कि वर्षों से कार्यरत इन ठेका श्रमिकों, सुरक्षा गार्डों के समक्ष कई समस्याएं आयेगी, जिस तारतम्य में प्रबंधन से मांग की गई है। जिसमें टाउनशिप सुरक्षा की व्यवस्था प्रबंधन एवं श्रमिक संघ के मध्य हुए समझौते के तहत लागू की गयी थी। जिसके तहत कर्मचारियों से 40 रूपये प्रतिमाह का अंशदान लिया जाता है। इस व्यवस्था में किसी भी प्रकार का परिवर्तन बिना श्रमिक संघ की सहमित के सर्वथा अमान्य होगा। सर्वप्रथम यथास्थिति को कायम रखते हुए इस नवीन व्यवस्था को अगले कार्यादेश जारी किये जाने तक रखा जाये। ताकि विगत 10-15 वर्षों से कार्यरत कर्मचारी, जिन्होंने अपनी 45-50 वर्ष की आयु प्राप्त कर चुके है श्रमिकों के रोजगार पर विपरित असर न पड़े। न्यायालय के निर्णय को लागू करने की परिस्थिति में जितने भूतपूर्व सैनिकों की तैनाती की जाती है तो उनके स्थान पर निकाले जाने वाले मजदरों के वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था की जाये।

 श्रमिक संघ का कहना है कि इस उपरोक्त मांग के प्रति संघ अत्यंत गंभीर है। प्रबंधन यदि मांगों के प्रति सकारात्मकता प्रदर्शित नहीं करता है तो संघ अपनी मांगों के प्रति किसी भी सीमा को लांघ सकता है। जिससे उत्पन्न होने वाले व्यवधान हेतु प्रबंधन स्वयं जिम्मेदार होगा। ज्ञापन सौंपने के दौरान यूनियन के अध्यक्ष बलबंत कौशल, अन्य पदाधिकारी व सदस्यों की मौजूदगी रही। 

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