धमतरी

सेवानिवृत्त होकर घर पहुंचे फौजी का ग्रामीणों ने किया अभिनंदन
05-Oct-2021 4:36 PM (53)
सेवानिवृत्त होकर घर पहुंचे फौजी का ग्रामीणों ने किया अभिनंदन

बसंत कुमार ने 17 साल की देश सेवा 

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
नगरी, 5 अक्टूबर। दु
गली वनांचल क्षेत्र के दिनकरपुर के भारतीय सुरक्षा बल के जवान बसंत कुमार सोरी 2 अक्टूबर को सेवानिवृत्त होकर जब गांव पहुंचे तो पूरा गांव के साथ क्षेत्र के आदिवासी समाज, जनप्रतिनिधि और मित्र सलामी के साथ अभिनंदन करने पहुंचे। 
जवान बसंत कुमार सोरी किसान पुत्र हैं। उनके परिवार में एक बड़ा भाई देवचंद सोरी किसान हैं और छोटा भाई आर्मी के जवान थे। बसंत सोरी कि प्राथमिक शिक्षा गृहग्राम दिनकरपुर में हुई है और हाई और हाईयर सेकेंडरी स्कूल की शिक्षा राजीव नगर दुगली में पूरी हुई है। बारहवीं पास होते ही इंडियन आर्मी में सन 2004 में सलेक्शन हुए थे। और नासिक में प्रारंभिक सेना की ट्रेनिंग पूरी किया। बसंत सोरी बचपन से ही देश सेवा करने की संकल्प लिए थे।

उन्होंने अपनी सेवाकाल में हिंदुस्तान के गुजरात, राजिस्थान असम, नासिक, जम्मू काश्मीर, पंजाब, देहरादून में सेवा दिया और सिक्किम से 17 साल की देश सेवा उपरांत सेवानिवृत्त हुए। जब दुगली क्षेत्र में गांव में करीबियों को पता चला कि हमारे आर्मी के जवान सेवाकाल पूरा कर वापस आ रहे हैं, ग्रामवासियों ने 2 अक्टूबर के दिन सुबह से ही अभिनंदन की तैयारी में जुटे थे और आदिवासी परंपरा अनुसार मांदरी की थाप में ग्रामीणों ने अभिनंदन किया।

उनके मित्र शहीद निर्मल सिंह नेताम की स्मारक पहुंचकर फौजी जवान ने श्रद्धांजलि अर्पित कर शहीद को भावभीनी सलामी भी दी। इस दौरान उनकी पत्नी और बच्चों के साथ परिवार जनों ने आरती उतारकर स्वागत किया।
इस अवसर पर आदिवासी समाज के सामाजिकजनों के साथ दुगली थाना के थाना प्रभारी डी.के.कुर्रे एस.आई.घनश्याम वर्मा के साथ ड्यूटी पर रहे सिपाहियों ने भी जवान को सलामी देकर अभिनंदन किया। बसंत सोरी ने क्षेत्र के कुल देवी माता अंगारमोती और ग्राम की देवी शितला मंदिर पहुंचकर सह परिवार सेवा अर्जी किया।

वहीं ग्रामवासियों ने दुगली कौव्हाबाहरा से लेकर दिनकरपुर तक रैली की माध्यम से बाजा गाजा के साथ स्वागत किया गया। गांव में अभिनंदन सभा भी रखा गया। इस दौरान फौजी जवान ने ग्राम वासियों के साथ अपने दोस्तों को संबोधन के दौरान जीवन की कठिन दौर का बखान किया। देश सेवा से छोडक़र आना खुशी और दुख भी बताया। अपनों को छोडक़र आना दुख बताया, तो अपनों के बीच आना खुशी बताया। साथ ही यह संदेश दिया जब देश सेवा की बात आती है, तो ऊंच नीच भेदभाव, जाति, धर्म को परे रहकर हर एक जाति, समुदाय के साथ देश की सुरक्षा करना वास्तव में अपनी जीवन की सबसे बड़ी सीख और देश प्रेम को हमेशा दिल में रखने की प्रेरणा बताए।

सम्मान कार्यक्रम के दौरान, आदिवासी समाज के  मुखिया मयाराम नागवंशी, मकसूदन धु्रव, मानसाय मरकाम, दिनेश्वरी नेताम, बंशीलाल सोरी,  महेंद्र नेताम मनईकेरा, शिवप्रसाद नेताम कौव्हाबाहरा, उपसरपंच कबिलास नेताम, बुधराम नेताम, मोहन मरकाम आदि ने अभिनंदन किया। 
 

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