महासमुन्द

यदि जंगल को किसी ने बचाकर रखा है तो वे आदिवासी ही हैं-उइके
19-Oct-2021 5:23 PM (42)
यदि जंगल को किसी ने बचाकर रखा है तो वे आदिवासी ही हैं-उइके

स्वतंत्रता सेनानी बुढ़ान शाह की पुण्यतिथि पर अरंड गांव पहुंचीं राज्यपाल

आदिवासी समाज को किया जागरूक

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद,19 अक्टूबर।
स्वतंत्रता सेनानी स्व. बुढ़ान शाह की पुण्यतिथि पर अरंड गांव पहुंचीं राज्यपाल अनुसुईया उइके ने आदिवासी समाज को जागरूक किया। उन्होंने कहा कि आदिवािसयों को प्रकृति ने जन्मजात हुनर दिया है। जल, जंगल और जमीन को बचाने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। यदि जंगल को किसी ने बचाकर रखा है तो वे आदिवासी ही हैं। पर्यावरण की सुरक्षा भी इन्हीं के हाथों में है।

सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने आगे कहा कि आदिवासी संस्कृति कहीं पर जिंदा है तो छत्तीसगढ़ में है। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी स्व.बुढ़ान शाह ने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेते हुए शिक्षा एवं समाज को संगठित करने का कार्य किया है। यह हम सभी लोगों के लिए गर्व की बात है।

राज्यपाल ने कहा कि बुढ़ान शाह संत विनोबा भावे के भू-आंदोलन से भी प्रभावित थे और उन्होंने भू-आन्दोलन से प्रभावित होकर लोगों को प्रेरित किया। 4190 एकड़ भूमि कास्तकारों को दान कर भूमि स्वामी बनाकर गोपालपुर गांव बसाया। बूढ़ान शाह जीवन भर समाज के निचले तबकों के हक के लिए संघर्ष करते रहे। आज अरण्ड ग्राम के जिस जमीन पर यह कार्यक्रम आयोजित हो रहा है, यह वीरों की भूमि रही है। यहां श्री जहान सिंह और चन्द्रपाल डडसेना जैसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने जन्म लिया है। हम यह कल्पना कर सकते हैं कि इस गांव की आबादी अपेक्षाकृत कम रही होगी और विकास की धारा से दूर भी रहा होगा, परन्तु उस समय यहां के लोगों में इतनी जागरूकता होना अपने आप में एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसका श्रेय कहीं न कहीं यहां की मिट्टी और ऐसे महापुरूषों को जन्म देने वाली माताओं को जाता है। मुझे बताया गया है कि इस गांव में पूर्ण शराबबंदी है। इस गांव की महिलाओं और पुरूषों के समूह इस अभियान को थामे हुए हैं। लगता है कि जो हमारे पूर्वज थे, जिन्होंने गांधी जी के आदर्शों को अपनाया था, उनका आशीर्वाद अभी भी इस गांव में है।

गौरतलब है कि इस वर्ष देश की आजादी की 75वीं वर्षगांठ को आजादी का अमृत महोत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। बुढ़ान शाह गांधीजी द्वारा चलाए जा रहे स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन से प्रेरित थे। गांधीजी ने जब नमक सत्याग्रह किया तो बुढ़ान शाह भी रायपुर में इस आंदोलन में शामिल हुए और नमक कानून तोडक़र गिरफ्तार हुए। उन्होंने शंकर राव, यति यतन लाल के साथ मिलकर ग्राम तमोरा में जंगल सत्याग्रह किया। उन्हें 3 माह 15 दिन की सजा हुई।

कार्यक्रम में सांसद चुन्नीलाल साहू, पूर्व केंद्रीय मंत्री व सर्व आदिवासी समाज के संरक्षक अरविंद नेताम, संसदीय सचिव द्वारिकाधीश यादव, तुलाराम सोरी, जिलाध्यक्ष भीखम सिंह ठाकुर, बुढ़ान शाह के परिवार से योगेश ठाकुर, जिलाध्यक्ष गोड़ समाज मनराखन ठाकुर, राजकुमार ध्रुव सहित बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग उपस्थित थे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम ने कहा कि अब सरकार से उम्मीद छोडि़ए और जो लड़ाई लडऩी है खुद से लडि़ए। मैं पिछले 30 साल से कहता आ रहा हूं कि आदिवासियों को खुद की जमीन को बचाकर रखना होगा। आदिवासी समाज का गुजारा जमीन से ही होगा, क्योंकि सरकारी नौकरी के दरवाजे बंद हैं। अब कोई दूसरा आपकी लड़ाई लडऩे के लिए नहीं आएगा। अब जमीन से ही गुजारा होगा।

आदिवासी समाज की ओर से राज्यपाल के समक्ष विभिन्न मांगें रखी गई। जिसमें समाज की ओर से कहा गया कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बुढ़ान शाह की जीवनी को पाठ्यक्रम में शामिल करने, महासमुंद नगर के बरोंडा चौक में उनकी प्रतिमा स्थापित करने, ग्राम दुरुगपाली में अपने स्वामित्व वाली 25 एकड़ जमीन सेनानी बुढ़ान शाह ने जनकल्याण के लिए दान किया था,जिसका सर्वाकारा समाज को ही बनाया जाने, पिथौरा के बार चौक में शहीद वीरनारायण सिंह की प्रतिमा स्थापित करने, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पिथौरा को दानदात्री रानी विष्णु प्रिया देवी के नाम पर विधिवत व वैधानिक रूप से करने, रणजीत कृषि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पिथौरा को दानदाता राजा रणजीत सिंह के नाम पर यथावत रखने(वर्तमान में स्वामी आत्मानंद के नाम पर कर दिया गया है), नया रायपुर में एक सडक़ मार्ग को बुढ़ान शाह के नाम पर नामकरण करने, गरीब आदिवासी जगबंधु कौंध ठाकुरदिया खुर्द की जमीन को बेईमानी पूर्वक हड़पने वालों के खिलाफ  कार्रवाई कर जमीन वापस दिलाई जाने की मांगें शामिल हैं।
 

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