राजनांदगांव

9 घंटे की पुलिस-नक्सल लड़ाई के खून के छींटे नांदगांव के सरहदी गांव तक फैले
18-Nov-2021 12:54 PM
9 घंटे की पुलिस-नक्सल लड़ाई के खून के छींटे नांदगांव के सरहदी गांव तक फैले

  नक्सलियों के मिले हथियार और पिट्ठू दिखा रहे भयावह लड़ाई के नमूने  

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 18 नवंबर।
महाराष्ट्र के गढ़चिरौली पुलिस और नक्सलियों के बीच 13 नवंबर को हुए भीषण मुठभेड़ के बाद राजनांदगांव जिले के मोहला से सटे गांवों में घायल नक्सलियों के खून के छींटे पहुंचे हैं। परवीडीह, हिडक़ोटोला और मिस्प्री के जंगलों तक इस मुठभेड़ की भयावह तस्वीरें अब सामने आ रही है।

गढ़चिरौली पुलिस ने सीसी मेम्बर दीपक तिलतुमड़े और उसके 26 साथियों पर अस्थाई ठहराव के दौरान ढ़ेर कर दिया। शनिवार तडक़े घुसे सीसी-60 फोर्स ने राजनांदगांव की सरहद से सटे गांवों में भी जबर्दस्त अभियान चलाया। अब मोहला ब्लॉक के अंदरूनी गांवों में मुठभेड़ में घायल हुए नक्सलियों के खून के धब्बे जमीन पर गिरे हैं। माना जा रहा है कि इस मुठभेड़ में बड़ी तादाद में नक्सली जख्मी हुए हैं। खुफिया एजेंसियों के पास खबर है कि कई नक्सलियों के शव को अपने साथ खींचकर भी उसके साथी ले गए हैं। वहीं घायलों की भी संख्या काफी बताई जा रही है। मुठभेड़ के बाद सरहदी गांवों में खून के धब्बों के अलावा हथियार भी बिखरे पड़े हैं। नक्सलियों के मौजूदगी के प्रमाण उनकी भारी भरकम पिट्ठू से भी साबित हो रही है।

सूत्रों का कहना है कि परवीडीह और हिडक़ोटोला के जंगल में भागने के दौरान नक्सलियों के खून जमीन पर गिरे। वहीं लड़ाई में पुलिस से भिडऩे में नाकाम हुए नक्सलियों ने रॉकेट लॉचर भी जगह-जगह छोड़ दिया है। इस भयावह लड़ाई के साक्ष्य के रूप में जंगल में मौजूद पेड़ों पर लगी गोलियां भी है। कई पेड़ गोली से छिल गए हैं। नक्सलियों के साथी पिट्ठू लादकर यहां तक पहुंचे थे। पुलिस के फायरिंग के दौरान नक्सलियों को पिट्ठू छोडक़र भागना पड़ा।

गढ़चिरौली पुलिस अब भी सीमा पर घायल नक्सलियों की खोजबीन के लिए बड़ा ऑपरेशन चला रही है। राजनांदगांव के सरहद पर बसे गांवों ने पूरी लड़ाई को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर देखा-सुना है। परवीडीह-हिडक़ोटोला और मिस्प्री के जंगल से गढ़चिरौली का सीमा सटा हुआ है। करीब 9 घंटे तक की चली लंबी लड़ाई में घटनास्थल में पड़े हथियारों और खून के धब्बे प्रमाणित तौर पर जाहिर कर रहे हैं कि दोनों ओर गोलियां बरसाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है। हालांकि नक्सलियों को इस मुठभेड़ में बड़ा नुकसान हुआ है। गढ़चिरौली पुलिस के महज 4 जवान मामूली रूप से घायल हुए हैं। नक्सलियों को उम्मीद थी कि महफूज ठिकाने पर वह छिपे हुए हैं, पर पुलिस फोर्स ने उन पर  सटीक हमला कर एक बड़े कैडर का सफाया कर दिया।

राजनांदगांव जिले के गांवों तक फैले खून के दाग यह जाहिर कर रहे हैं कि नक्सली भी पुलिस के हमले का करारा जवाब देने के लिए घंटों लड़ते रहे। सूत्रों का कहना है कि नक्सलियों को पुलिस से भिडऩे के लिए समय नहीं मिला। राजनांदगांव के सीमावर्ती गांवों में मुठभेड़ के बाद दहशत की स्थिति है। सूत्रों का कहना है कि नक्सली भी मुठभेड़ को लेकर अपने स्तर पर पतासाजी कर ग्रामीणों को निशाना बना सकते हैं। पुलिस का भी ग्रामीणों पर दबाव है। यही कारण है कि सीमा के गांवों में पुलिस और नक्सलियों का खौफ ग्रामीणों के चेहरे पर देखा जा सकता है।

आईजी पहुंचे घोर नक्सल क्षेत्र औंधी
मुठभेड़ के करीब 5 दिन बाद दुर्ग रेंज आईजी ओपी पाल बुधवार को घोर नक्सल क्षेत्र औंधी इलाके में पहुंचे। आईजी का दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब सीमा पर नक्सलियों का एक बड़ा कैडर गढ़चिरौली पुलिस के हाथों मारा गया है। सूत्रों का कहना है कि आईजी ने सीमा पर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त करने के निर्देश दिए हैं। औंधी इलाके में पहुंचे आईजी ने एसपी डी. श्रवण के साथ नक्सल क्षेत्र मानपुर अनुभाग के मदनवाड़ा, सीतागांव, औंधी, कोहका, खडग़ांव, मोहला एवं बेस केम्प डोम्हीकला व बसेली का दौरा किया। औंधी क्षेत्र से सटे गढ़चिरौली के अंतरराज्यीय बार्डर का भी उन्होंने जायजा लिया। इसके बाद 12 जुलाई 2009 को कोरकोट्टी नक्सल हमले में शहीद हुए स्व. विनोद चौबे और 29 जवानों की शहादत की घटनास्थल का भी उन्होंने दौरा किया। आईजी ने नक्सल मुठभेड़ के बाद नक्सलियों द्वारा बौखलाहट में घटना करने की कोशिश के संबंध में भी सभी थाना प्रभारियों को अलर्ट रहने का निर्देश दिया। आईजी ने सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध शराब, अवैध धान परिवहन समेत नशीले पदार्थों की तस्करी पर भी लगाम कसने का निर्देश दिया।

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