महासमुन्द

शिक्षकों समेत डेढ़ लाख बच्चों की उपस्थिति
04-Oct-2022 4:20 PM
शिक्षकों समेत डेढ़ लाख बच्चों की उपस्थिति

पढ़ाई,कमजोर बच्चों पर फोकस की निगरानी करेंगी 1945 प्रबंध समितियां
निजी स्कूलों की तर्ज पर जिले के सरकारी स्कूलों की भी मॉनिटरिंग की कवायद चल रही 


‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता 

महासमुंद, 4 अक्टूबर। निजी स्कूलों की तर्ज पर जिले के सरकारी स्कूलों की भी मॉनिटरिंग की कवायद चल रही है। सरकारी स्कूलों में गठित 1945 शाला प्रबंध समितियां अब स्कूलों और वहां पढऩे वाले करीब डेढ़ लाख बच्चों के शिक्षा स्तर की निगरानी करेंगी। यह समिति शाला में शिक्षक आ रहे हैं या नहीं, बच्चों की पढ़ाई हो रही है या नहीं, कहीं पर शिक्षकों की कमी है तो उसे कैसे दूर किया जाए, समय पर बच्चे व शिक्षक स्कूल पहुंच रहे हैं या नहीं, जो बच्चे पढ़ाई में कमजोर हैं उन पर शिक्षक किस प्रकार फोकस कर रहे हैं, शिक्षक क्लास ले रहे हंै या नहीं, परीक्षा हो रही है या नहीं, बच्चे यदि कम नंबर लाए हैं तो उसके लिए क्या किया जाए आदि पर नजर रहेगी। पालकों से हर महीने बैठक कर बच्चों के टेस्ट, तिमाही व अर्धवार्षिक परीक्षा में पाए गए अंकों पर विचार-विमर्श कर अच्छी तैयारी के लिए प्रेरित करने जैसी जानकारी दी जाएगी।

समिति के सदस्यों को इस हेतु नवंबर माह में 1 सप्ताह का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद समितियां न सिर्फ  शिक्षा स्तर की मॉनिटरिंग करेंगी, बल्कि अध्यापन, प्रबंधन सहित सांस्कृतिक कार्यक्रम, खेल व पढ़ाई का मूल्यांकन करके विभाग को रिपोर्ट सौंपेंगी। जिसके आधार पर सुधार के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। जिला समन्वयक समग्र शिक्षा प्रभारी अशोक शर्मा ने बताया कि जिले के सरकारी स्कूलों की क्वालिटी में सुधार लाने के लिए ये नई पहल शुरू की जा रही है। अब शाला प्रबंध समिति को स्कूलों की मॉनिटरिंग का जिम्मा दिया जा रहा है। इसके लिए उन्हें नवंबर में प्रशिक्षित भी किया जाएगा। यह प्रशिक्षण सप्ताहभर का रहेगा। एक सप्ताह के प्रशिक्षण में शिक्षकों पर ध्यान देने पर जोर पहले केवल औपचारिकता अब काम करना पड़ेगा।

गौरतलब है कि अभी भी सरकारी स्कूलों में गठित शाला प्रबंध समिति के सदस्य हैं, लेकिन ये औपचारिकता तक ही सीमित हैं। केवल 15 अगस्त व 26 जनवरी को ध्वजारोहण के लिए स्कूल पहुंचते हैं। वहीं साल में एक या दो बार बैठक में शामिल होते हैं लेकिन आगे अब ऐसा नहीं होगा। हर महीने व्यवस्था, पढ़ाई, सुविधा सहित विभिन्न कामों को लेकर बैठक होगी। इसके अलावा स्कूल की मॉनिटरिंग भी करेंगे। इससे स्कूलों में पढ़ाई की क्वालिटी के साथ-साथ कई कामों में निखार व बदलाव आएगा। समिति ये भी देखेगी कि बच्चे व टीचर नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं।

गांवों के स्कूलों की बात करें तो गांवों के स्कूलों में शाला प्रबंध समिति में पंच और ग्राम प्रमुखों को स्थान दिया जाता है। वहीं शहर में पार्षद, जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ नागरिक इसके सदस्य होते हैं। ट्रेनिंग में अध्यापन, प्रबंधन, सामुदायिक सहभागिता, दिव्यांजली योजना, शिक्षा दान, प्रति माह बैठक, विद्यालय नहीं आने वालों को प्रेरित करने, प्राप्त अनुदान राशि कहां-कहां खर्च करें, इस राशि का खर्च कैसे करना है, परीक्षा, बच्चों में सांस्कृतिक, खेल व पढ़ाई का मूल्यांकन करने जैसे बिंदुओं की जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही शिक्षा विभाग के द्वारा चलाए जाने वाले प्रोग्राम तथा योजनाओं के बारे में भी बताया जाएगा। 

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