राजनांदगांव

बाल संस्कार केंद्र में विद्यार्थी सीख रहे सफलता के रहस्य
29-Nov-2022 4:24 PM
बाल संस्कार केंद्र में विद्यार्थी  सीख रहे सफलता के रहस्य

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 29 नवंबर।
बाल्यकाल के संस्कार एवं चरित्र निर्माण मनुष्य के भावी जीवन की आधारशिला है। बालक देश का असली धन है। भारत का भविष्य विश्व का गौरव और अपने माता-पिता की शान है। बच्चे देश के भावी नागरिक हैं और आगे चलकर उन्हीं के कंधों पर देश की स्वतंत्रता, संस्कृति की रक्षा तथा उसकी परिपुष्टि का भार पडऩे वाला है।

बाल संस्कार विभाग के प्रभारी संजय साहू ने बताया कि बाल्यकाल में बच्चों को जैसा संस्कार देते हैं, वहीं से उसका भविष्य का निर्माण होता है। अच्छे संस्कार बच्चों को महान बना देती है। वहीं बुरे संस्कार पतन की ओर ले जा लेती है। विद्यार्थियों में अच्छे का बीजारोपण हो इस हेतु पूज्य संत श्री आशारामजी बापू की पावन सत्प्रेरणा से बाल संस्कार केंद्र चलाए जा रहे हैं। जिसमें बच्चों को जप-ध्यान, प्राणायाम, योगासन, माता-पिता का आदर, जीवन में सफलता के रहस्य, परीक्षा में अच्छे परिणाम, महापुरुषों के जीवन चरित्र, आध्यात्मिक खेल, बौद्धिक शक्ति बढ़ाने के प्रयोग इत्यादि बातें सिखाई जाती है। साथ ही समय-समय पर विभिन्न खेलों, स्पर्धाओं, भजन प्रतियोगिता, दिव्य प्रेरणा प्रकाश परीक्षा भी ली जाती है । इन गतिविधियों में भाग लेने वाले विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कार दिया जाता है। बाल संस्कार की इस सेवा में क्षेत्रीय प्रमुख डोंगरगढ से नम्मू साहू, गंडई से दिलीप साहू, खैरागढ़  से ओमराम साहू, छुरिया से पुसउ उइके, डोंगरगांव से उमाशंकर कुंवर, मोहला से मार्गे सर आदि लगे हुए हैं।

 

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