कोण्डागांव

काबिज वन भूमि का मालिकाना हक मिलने से उन्नत खेती-किसानी को बढ़ावा
03-Dec-2022 9:26 PM
काबिज वन भूमि का मालिकाना हक मिलने से उन्नत खेती-किसानी को बढ़ावा

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता 
कोण्डागांव, 3 दिसंबर।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने वन क्षेत्र में निवास करने वाले अनुसूचित जनजातियों और अन्य परम्परागत वन निवासियों को उनके काबिज वन भूमि का मालिकाना हक प्रदान करने के लिए उन्हें वन अधिकार अधिनियम के तहत उनके काबिज भूमि का पट्टा प्रदान किया है, ताकि वन अधिकार पट्टा धारकों को आजीविका का एक साधन प्रदान कर उनके जीवन को खुशहाल बनाया जा सके। काबिज भूमि पर मालिकाना हक मिल जाने से ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। अब वे बेफिक्र होकर उक्त भूमि में खेती कर आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं। जिससे इन ग्रामीणों का जीवन अब खुशहाल हो रहा है। 

वन अधिकार पट्टा प्राप्त कोण्डागांव जिले के फरसगांव विकासखंड के अंतर्गत ग्राम बानगांव के निवासी चंद्रलाल यादव पिता सम्पत यादव बताते हैं कि उन्हें वर्ष 2018 में 0.615 हेक्टेयर भूमि का वन अधिकार पट्टा प्राप्त हुआ था। पिछले कई पीढिय़ों से इस भूमि पर उनका परिवार काबिज रहा है और खेती किसानी करते आया है, जिसका उन्हें मुख्यमंत्री के घोषणा उपरांत पट्टा मिल सका। इस भूमि पर उनके परदादा, दादा से पिता तक सभी खेती करते आ रहे थे, जिससे उनका इस भूमि से बहुत अधिक भावात्मक जुड़ाव रहा है।

मनरेगा अंतर्गत एफआरए द्वारा प्राप्त भूमि की समतलीकरण से मिला दोहरा लाभ
पहले उन्हें भूमि के छीन जाने का भय रहता था परंतु अब जमीन का मालिकाना हक मिलने से उन्हें बेदखली का डर नहीं है। पहले वे इस भूमि पर कोदो कुटकी जैसे फसल का उत्पादन किया करते थे। जिससे उनको ज्यादा फायदा नहीं हो पा रहा था और उनकी आर्थिक स्थिति भी कमजोर थी, परंतु जब ग्राम के सरपंच द्वारा उन्हें वन अधिकार पट्टा प्राप्त हितग्राहियों हेतु मनरेगा अंतर्गत भूमि सुधार कराये जाने के संबंध में जानकारी दी गयी। तो उन्होंने तत्काल इसका प्रस्ताव बनाकर ग्राम पंचायत को तत्पश्चात जनपद पंचायत को प्रस्तुत किया। प्रशासन द्वारा मनरेगा के तहत भूमि सुधार कार्य हेतु 59 हजार रुपए की राशि स्वीकृत की गई। जिसमें से 48 हजार रुपये में ही भूमि सुधार कार्य पूर्ण हो गया था। जिसमें मनरेगा अंतर्गत उन्हे व उनके परिवार को कुल 146 मानव दिवस का रोजगार प्राप्त हुआ और 28 हजार 794 रुपयों की पारिश्रमिक राशि का भी भुगतान मिला। 

वर्ष 2022 में भूमि सुधार कार्य सम्पन्न होने के उपरांत उन्नत खेती-किसानी को बढ़ावा देने की सोच के साथ चंद्रलाल ने स्वयं के खर्च से ड्रिप सिंचाई की व्यवस्था की और मलचिंग विधि से साग-सब्जी उत्पादन की दिशा में पूरी मेहनत और लगन के साथ पहल किया। जिसके फलस्वरूप इस वर्ष उक्त भूमि पर गोभी की खेती से भरपूर उत्पादन प्राप्त हुआ और स्थानीय बाजार में 5 से 6 क्विंटल गोभी की बिक्री करने के कारण उसे 30 हजार रूपये की आमदनी हुई। गोभी के बाद अब उन्होंने आगामी फसल के रूप में टमाटर, करेला और मिर्ची की फसल की तैयारी पूर्ण कर ली है। 

चन्द्रलाल ने बताया कि अच्छी फसल होने और सब्जी की अच्छी कीमत मिल जाने से उन्हें ज्यादा मुनाफा होने की उम्मीद है। कि वन अधिकार पट्टा मिलने से उनका परिवार बहुत खुश है। सपरिवार इस भूमि पर अच्छे से खेती कर रहे हैं और इससे उनकी आमदनी में भी वृद्धि हो रही है। ग्राम पंचायत बानगांव की सरपंच श्यामा नेताम बताती हैं कि इस वर्ष एफआरए के तहत् 289 हितग्राहियों को वन अधिकार पट्टा प्रदान किया गया है तथा 13 हितग्राहियों के भूमि का भूमि समतलीकरण कार्य किया गया है। ग्राम के रोजगार सहायक रमेश नेताम ने बताया कि, इस वर्ष 10 नए वन अधिकार पट्टा धारकों को चिन्हांकित किया जा चुका है जिन्हे योजना अंतर्गत लाभान्वित किया जाएगा, जिससे उनकी आय संवृद्धि हो सकेगी।

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