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पवन देव पर कार्रवाई क्यों नहीं शासन जवाब दे-हाईकोर्ट

Posted Date : 11-Jul-2018

पीडि़ता की याचिका पर हाईकोर्ट की नोटिस 
छत्तीसगढ़ संवाददाता
बिलासपुर, 11 जुलाई। महिला कांस्टेबल से यौन प्रताडऩा के आरोप में फंसे एडीजी पवन देव की मुसीबतें बढ़ गई हंै। आज हाईकोर्ट ने पीडि़ता की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए शासन को एक सप्ताह के भीतर जवाब देने के लिए कहा है। 
बिलासपुर में आईजी रहने के दौरान आईजी पवन देव पर संभाग की एक महिला कांस्टेबल ने यौन दुव्र्यवहार का आरोप लगाया था। इस मामले की जांच गृह विभाग द्वारा गठित आंतरिक जांच समिति ने विशाखा गाइडलाइन के प्रावधानों के अनुरूप की थी। आईएएस रेणु पिल्ले की अध्यक्षता वाली इस समिति ने इसे गंभीर किस्म का अपराध बताते हुए अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी थी। इसके बावजूद पवन देव के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। 
डेढ़ साल बाद तक कार्रवाई नहीं होने पर पीडि़ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। पीडि़ता का कहना था कि शासन को विशाखा गाइडलाइन के अंतर्गत की गई जांच रिपोर्ट के आधार पर ही कार्रवाई करनी है, लेकिन उन्हें एक और शो-कॉज नोटिस जारी कर बचाया गया है। यही नहीं बल्कि उन्हें पदोन्नति भी दे दी गई।
मालूम हो कि इस शो-कॉज नोटिस पर पवन देव ने कैट से स्थगन हासिल कर लिया था, जिसे लेकर हाईकोर्ट में एक अन्य याचिका दायर की गई है। कैट के स्थगन पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। आज चीफ जस्टिस अजय कुमार त्रिपाठी और जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर की डबल बेंच ने राज्य सरकार और गृह विभाग को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने कहा है। 




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