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प्रदेश में 61 फीसदी लोग परिवार नियोजन साधनों का कर रहे उपयोग

Posted Date : 11-Jul-2018

रायपुर समेत कई जगहों पर रैली निकाली
छत्तीसगढ़ संवाददाता
रायपुर, 11 जुलाई। बिलासपुर नसबंदी कांड के बाद भी प्रदेश में परिवार नियोजन के स्थायी, अस्थायी साधन अपनाने वाले पहले से और बढ़ गए हैं। बताया गया कि अब 61 फीसदी से अधिक लोग परिवार नियोजन के साधनों का उपयोग करने लगे हैं। पहले यह आंकड़ा 53 फीसदी था। लोग नसबंदी के अलावा भी गर्भ निरोधक अन्य साधनों का उपयोग करने लगे हैं, जिससे प्रजनन दर में कमी आई है। 
प्रदेश में पहले एक महिला के प्रजनन काल में औसत बच्चों की संख्या ज्यादा थी। नसबंदी या गर्भ निरोधक अन्य साधन अपनाने के बाद उनकी संख्या में कमी आई है। एनएफ एचएस 4-2015 के सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में वर्ष 2003 में कुल प्रजनन दर 3.3 थी, जो घटकर अब 2.2 हो गई है। वहीं परिवार नियोजन की दंपति संरक्षण दर 53.2 से बढ़कर 61.7 हो गई है। प्रदेश में  परिवार नियोजन के साधन अपनाने वाले अब बढ़ गए हैं।  
स्वास्थ्य अफसरों ने बताया कि विश्व जनसंख्या दिवस पर 27 जून से 10 जुलाई तक घर-घर दंपत्ति संपर्क पखवाड़ा मनाया गया। दंपत्ति को परिवार नियोजन के स्थायी व अस्थायी साधनों की जानकारी दी गई। जिलों में स्कूली छात्र-छात्राओं की रैली निकाली गई। योग्य दंपत्तियों की सूची भी तैयार की गई। लक्ष्य दंपतियों को स्थायी व अस्थायी साधनों की जानकारी दी जा रही है। 24 जुलाई तक जिला अस्पताल व चिन्हांकित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में नसबंदी शिविर लगाए जाएंगे। 
जनसंख्या नियंत्रण पखवाड़े के दौरान जिला स्तर पर रैली, स्लोगन लेखन प्रतियोगिता व स्कूल-कॉलेजों में निबंध प्रतियोगिता रखी गई।  बिलासपुर, मुंगेली, कवर्धा, सुकमा, दंतेवाड़ा, सरगुजा, बलरामपुर, सूरजपुर, कोरिया, जशपुर व बस्तर में सास-बहू सम्मेलन रखा गया। स्वास्थ्य अफसरों का मानना है कि प्रचार-प्रसार से परिवार नियोजन की दिशा में लोग और ज्यादा जागरुक होंगे। उल्लेखनीय है कि नवंबर-2014 में बिलासपुर के पेंडारी, पेंड्रा में नसबंदी में गड़बड़ी का मामला सामने आया था और 13 महिलाओं की जान चली गई थी। 




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