बेमेतरा

गर्भवती महिलाएं सीढ़ी चढऩे मजबूर, अस्पताल में 25 लाख से खरीदी लिफ्ट का उपयोग नहीं
20-Sep-2023 7:57 PM
गर्भवती महिलाएं सीढ़ी चढऩे मजबूर, अस्पताल में 25 लाख से खरीदी लिफ्ट का उपयोग नहीं

एमसीएच में लिफ्ट शुरू करने को लेकर डॉक्टर भी ध्यान नहीं दे रहे

 ‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बेमेतरा, 20 सितम्बर। मदर चाइल्ड हॉस्पिटल में 25 लाख लागत से लगा लिफ्ट शो पीस साबित हो रहा है । आलम यह है कि लिफ्ट लगने के बाद से मरीजों की सुविधा के लिए एक बार भी उपयोग नहीं हुआ है।

उल्लेखनीय है कि हॉस्पिटल बिल्डिंग का निर्माण करीब 15 करोड़ रुपए की लागत से हुआ है, वहीं सीजीएमएससी अंतर्गत 25 लाख की लागत से लिफ्ट लगाई गई है।

निर्माण एजेंसी से मिली जानकारी के अनुसार तत्कालीन सिविल सर्जन को ट्रायल रन दिखाकर लिफ्ट हैंडओवर की थी। इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन व निर्माण एजेंसी के अधिकारियों के बयान में विरोधाभास है। सुरक्षित प्रसव को लेकर सरकारों की ओर से बड़े पैमाने पर फंड मुहैया कराया जाता है बावजूद लिफ्ट की सुविधा शुरू करने को लेकर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ऐसी स्थिति में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।

5 साल बाद भी लिफ्ट का उपयोग नहीं

मदर चाइल्ड हॉस्पिटल में लगी लिफ्ट को तत्कालीन सिविल सर्जन को हैंडओवर किए करीब 5 साल बीत चुके हैं, बावजूद अब तक लिफ्ट का उपयोग शुरू नहीं हो पाया है। ऐसी स्थिति में गर्भवती महिलाओं को सीढ़ी से चढक़र वार्ड तक जाना पड़ रहा है। महिलाओं की परेशानी का अस्पताल प्रबंधन सुध लेने को तैयार नहीं है। नतीजतन 5 साल बाद भी लिफ्ट शुरू नहीं हो पाई है। लिफ्ट की सुविधा नहीं मिलने से मरीज व उनके परिजनों में खासी नाराजगी है। परिजनों के अनुसार सरकार की ओर से स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने का हर प्रयास किया जा रहा है, लेकिन स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की अकर्मण्यता का परिणाम आम जनों को भुगतना पड़ रहा है ।

अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के कारण आई खराबी 

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के कारण अब तक लिफ्ट का उपयोग शुरू नहीं हो पाया है, क्योंकि लिफ्ट के हैंडओवर करने के बाद अस्पताल प्रबंधन की ओर इसका उपयोग नहीं किया गया । जबकि उपयोग नहीं होने की स्थिति में भी हर 15 दिन में लिफ्ट को रन करना जरूरी है ताकि लिफ्ट मशीन में किसी तरह की खराबी ना आए। लंबे समय से उपयोग नहीं करने के कारण लिफ्ट मशीन में खराबी आई है।

लिफ्ट में तकनीकी खराबी, विभाग ने लिखा खत 

अस्पताल प्रबंधन के अनुसार मदर चाइल्ड हॉस्पिटल में लगे लिफ्ट का हैंडओवर नियमानुसार नहीं किया गया है। लिफ्ट का एक बार भी उपयोग हुए बिना तकनीकी खराबी आना बताया जा रहा है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से तकनीकी खराबी को सुधारने को लेकर करीब 15 दिनों पहले निर्माण एजेंसी सीजीएमएससी के कार्यपालन अभियंता को पत्र लिखा गया था। इसके बाद विभाग की ओर से इंजीनियर भेजे गए थे। जिन्होंने तकनीकी खराबी के कारण लिफ्ट नहीं चलने की बात कही है।

मेंटेनेंस पर आएगा डेढ़ लाख रुपए खर्च, फंड मिलने के बाद ही मरम्मत

निर्माण एजेंसी के एसडीओ इरशाद खान के अनुसार लिफ्ट का हर 6 महीने में मेंटेनेंस की जरूरत होती है। लिफ्ट कंपनी की ओर से अस्पताल में लिफ्ट लगाने के बाद 2 साल तक मेंटेनेंस की जिम्मेदारी थी। संबंधित कंपनी की ओर से 2 साल तक लिफ्ट का मेंटेनेंस किया गया। जिसकी सारी जानकारी अस्पताल प्रबंधन को दी गई। वहीं अस्पताल प्रबंधन को लिफ्ट की मेंटेनेंस के लिए कंपनी से अनुबंध करने कहा गया था, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। जिसका परिणाम है कि वर्तमान में लिफ्ट की सुविधा मरीजों को नहीं मिल पा रही है। लिफ्ट की तकनीकी खराबी की सुधार में करीब डेढ़ लाख रुपए खर्च आएगा इसकी जानकारी लिखित में अस्पताल प्रबंधन को दी गई है। फंड मिलने के बाद ही लिफ्ट की मरम्मत हो पाएगी।

निर्माण एजेंसी को पत्र लिखा गया

सिविल सर्जन डॉ. संतराम चुरेन्द्र ने कहा कि विधिवत हैंडओवर होने की जानकारी मुझे नहीं है। इस संबंध में निर्माण एजेंसी के अधिकारी बता पाएंगे।जानकारो को दिखाने पर लिफ्ट में तकनीकी खराबी आना बताया, जिसके कारण लिफ्ट रन नहीं कर रही है। लिफ्ट की सुविधा शुरू करने को लेकर निर्माण एजेंसी के कार्यपालन अभियंता को पत्र लिखा गया है। निर्माण एजेंसी के इंजीनियरों ने तकनीकी खराबी की मरम्मत जल्द कर लिफ्ट शुरू करने का आश्वासन दिया है।

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