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भानुप्रतापपुर में आप की दमदार मौजूदगी, अंतागढ़-कांकेर में सीधी टक्कर के आसार

Posted Date : 11-Oct-2018

सर्वआदिवासी समाज के समर्थन से कांग्रेस को फायदे की उम्मीद
छत्तीसगढ़ संवाददाता
रायपुर/कांकेर, 11 अक्टूबर। कांकेर जिले की विधानसभा सीटों में इस बार कांटे की टक्कर है। भानुप्रतापपुर को छोड़ दिया जाए, तो अंतागढ़ और कांकेर में भाजपा व कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला दिख रहा है। इन सबके बीच सर्व आदिवासी समाज के समर्थन से दोनों सीटों पर समीकरण फिलहाल कांग्रेस के पक्ष में दिख रहा है। इसकी तोड़ के लिए भाजपा मजबूत उम्मीदवार की खोज में जुटी है।  
कांकेर विधानसभा में पिछली बार भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा था। कांग्रेस के शंकर ध्रुवा ने भाजपा के संजय कोड़पी को हराया था। इस बार शंकर ध्रुवा फिर से चुनाव लडऩा चाहते हैं, लेकिन कांग्रेस से उनके नाम पर सहमति नहीं बन पा रही है। यहां से भानुप्रतापपुर के विधायक मनोज मण्डावी को लड़ाने पर विचार चल रहा है। इसके अलावा पूर्व आईएएस अफसर शिशुपाल सोरी, नितिन पोटाई और नरेश ठाकुर भी कांग्रेस से टिकट की दौड़ में है। 
शंकर ध्रुवा की छबि फिर भी सीधे सरल जन प्रतिनिधि की है, लेकिन यहां विकास के ठोस काम नहीं होने पर लोगों को शिकायत भी है। भाजपा से हीरा मरकाम और सुमित्रा मारकोले का नाम सामने आया है। सुमित्रा पहले विधायक रही हैं। हीरा मरकाम नरहरपुर ब्लॉक के रहने वाले हैं और वे जिला पंचायत के सदस्य हैं। पिछले चुनाव में भाजपा ने स्थानीय वरिष्ठ नेता महावीर सिंह राठौर की सिफारिश पर टिकट दी थी। इसका नुकसान उठाना पड़ा। यही वजह है कि राठौर को पार्टी ने किनारे लगा दिया है। 
पिछले चुनाव के ठीक पहले यहां से पिछड़ा वर्ग आंदोलन का उभार हुआ था। इसकी वजह से भी पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा, लेकिन इस बार भाजपा फूंक-फूंककर कदम रख रही है। प्रत्याशी चयन में अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है। इन सबके बावजूद बड़ी दिक्कत यह है कि सर्व आदिवासी समाज भाजपा की खिलाफत कर रहा है। ऐसे में भाजपा प्रत्याशी की जीत के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी, ऐसा दिख रहा है। राठौर से परे स्थानीय दिग्गज नेता बाल मुकुंद शर्मा भी हाशिए पर ढकेल दिए गए हैं। इन सब वजहों से भी संगठन कमजोर हुआ है। 
आम मतदाताओं की बात करें तो कांकेर शहर में मुस्लिम आबादी भी अच्छी खासी है। यह वर्ग कांग्रेस का परम्परागत वोटबैंक माना जाता है और अभी भी कांग्रेस से जुड़ाव दिखता है। हाल यह है कि नगर पालिका में पिछले 15 साल से कांग्रेस का ही कब्जा है और भाजपा जीत नहीं पाई है। एक बड़ी समस्या यहां खनन कारोबारियों को लेकर है। कांकेर और भानुप्रतापपुर में रेत-आयरन ओर के खनन के चलते गाडिय़ों की आवाजाही से सड़कें  खराब हो गई है और इसको लेकर लोगों में नाराजगी है। कहीं न कहीं इसके लिए लोग शासन-प्रशासन को जिम्मेदार मानते हैं। हालांकि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने यहां विकास यात्रा के दौरान तेंदूपत्ता बोनस का वितरण किया। इसके अलावा मुफ्त मोबाइल, पट्टा वितरण भी हुआ। दौरान पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी मौजूद थे। कुल मिलाकर सरकारी आयोजन से माहौल तो बना है, लेकिन फिर भी प्रत्याशी चयन के बाद ही चुनावी तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। यहां से आम आदमी पार्टी और अन्य दलों के प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं, लेकिन वे मुकाबले को त्रिकोणीय करने की स्थिति में फिलहाल नहीं दिख रहे हैं। 
भानुप्रतापपुर में आप की दमदार मौजूदगी, त्रिकोणीय मुकाबले के आसार
कांकेर से सटे भानुप्रतापपुर विधानसभा की चुनावी तस्वीर अभी साफ नहीं है। यहां कांग्रेस से मौजूदा विधायक व पूर्व मंत्री मनोज मंडावी की जगह वीरेश ठाकुर को टिकट देने पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। मंडावी के खिलाफ नाराजगी इस बात को लेकर है कि उन्होंने खनन माफियाओं पर लगाम कसने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की। जबकि वीरेश की छवि एक साफ-सुथरे नेता की है। वे दो बार जनपद अध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान में जिला पंचायत के सदस्य भी हैं। वीरेश के पिता भी विधायक रह चुके हैं। उनका परिवार पढ़ा लिखा और सम्मानित है। 
भाजपा में पूर्व विधायक ब्रम्हानंद नेताम और हेमेन्द्र ठाकुर का नाम प्रमुखता से उभरा है। पिछले चुनाव में भाजपा ने राठौर की पसंद पर नेताम की टिकट काटकर सतीश लाटिया को प्रत्याशी बनाया था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। भानुप्रतापपुर में गोड़ आदिवासियों की बाहुल्यता है, लेकिन पिछली बार भाजपा ने प्रयोग के तौर पर हलबा समाज के लाटिया को टिकट दी थी। इस बार भाजपा में प्रत्याशी को लेकर अलग-अलग स्तरों पर काफी चर्चा हो रही है। कांग्रेस और भाजपा से परे आम आदमी पार्टी ने पूर्व सहकारिता अफसर कोमल उपेंडी को प्रत्याशी बनाया है। उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार भी घोषित कर दिया है। उपेंडी गोंडवाना समाज के युवा विंग के अध्यक्ष भी हैं और वे इलाके में काफी प्रभाव भी रखते हैं। इसके अलावा कांग्रेस से ही एक प्रमुख नेता मानक दरपट्टी के जोगी पार्टी की टिकट से चुनाव मैदान में कुद गए हैं, इसकी वजह से मुकाबला रोचक हो गया है। भानुप्रतापपुर इलाके में चारामा और दुर्ग कोंडल ब्लॉक भी आते हैं। कांग्रेस और भाजपा से परे आम आदमी पार्टी के उपेंड़ी और मानक दरपट्टी काफी वोट बटोरने की ताकत रखते हैं। ऐसे में यहां का चुनावी माहौल दिलचस्प हो गया है। 

अंतागढ़ में कांग्रेस का पूर्व टीआई पर दांव, भाजपा में भोजराज की जगह अन्य नामों पर भी विचार  
उपचुनाव की वजह से अंतागढ़ सीट देशभर में चर्चित रही है। यहां कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार मंतूराम पवार ने नाम वापस ले लिया था। नाम वापसी के पीछे की कहानी को लेकर जारी टेप सुर्खियों में रहा है और पार्टी ने इस वजह से पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी और उनके बेटे अमित को बाहर का रास्ता दिखा दिया था। पिछले चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी की गैर मौजूदगी में भाजपा के भोजराज नाग को भारी मतों से जीत हासिल हुई थी, लेकिन इस बार कांग्रेस यहां से दमदार उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है। 
कांग्रेस की तरफ से रिटायर्ड टीआई अनूप नाग का नाम तकरीबन तय माना जा रहा है। इसके अलावा उनकी पत्नी कांति नाग के नाम की भी चर्चा है। अनूप की छवि अच्छी है और वे अंतागढ़ के रहने वाले हैं। जबकि भाजपा से सांसद विक्रम उसेंडी को चुनाव लड़ाने पर विचार हो रहा है। पार्टी के कुछ सूत्रों के मुताबिक उन्हें चुनाव तैयारियों में जुट जाने के लिए कह दिया गया है। विक्रम अंतागढ़ के निकट बोदानार कस्बे के  रहने वाले हैं और उनकी भी छवि अच्छी है। वे यहां से तीन बार विधायक रहे हैं। इसके अलावा सरकार में स्कूल शिक्षा और वन जैसे अहम महकमा संभाल चुके हैं। विक्रम उसेंडी किसी पहचान की मोहताज नहीं रह हैं। इसके अलावा भाजपा से राधेलाल नाग और मौजूदा विधायक भोजराज नाग का नाम भी लिया जा रहा है। साथ ही साथ कांग्रेस छोड़कर आए पूर्व विधायक मंतुराम पवार भी टिकट की दौड़ में बताए जा रहे हैं। कांग्रेस और भाजपा के अलावा माकपा को भी यहां से अच्छे खासे मत मिलते रहे हैं, लेकिन माकपा के मतों की संख्या में लगातार गिरावट आई है।  
अंतागढ़ सीट में गोड़ आदिवासियों के अलावा बंगाली समाज के मतदाताओं की संख्या अच्छी खासी है। बंगाली मतदाता एक तरह से निर्णायक भूमिका में हैं। बंगाली समाज के लोग पंखाजूर-कापसी इलाके में ज्यादा संख्या में रहते हैं और एक तरह से यहां की राजनीति को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। 
अंतागढ़ इलाके का बहुत बड़ा हिस्सा नक्सल प्रभावित है। हालांकि सुरक्षा बलों के दबाव के चलते नक्सलियों के हौसले कुछ हद तक पस्त भी हुए हैं। मतदाताओं की चर्चा करें तो यहां सर्वआदिवासी समाज काफी सक्रिय है और एक तरह से भाजपा की खिलाफत हो रही है। सर्व आदिवासी समाज की सक्रियता के चलते भाजपा को कुछ नुकसान उठाना पड़ सकता है, लेकिन पार्टी के नेता बंगाली मतदाताओं को साधने में जुटे हुए हैं। ताकि किसी तरह वोटों की भरपाई की जा सके। 
बंगाली समाज के नेताओं की भी अपनी-अपनी पसंद है। एक गुट विक्रम के पक्ष में है तो दूसरा मंतुराम को प्रत्याशी के रूप में देखना चाहते हैं। कई नेता भोजराज नाग को प्रत्याशी बनाने के पक्ष में हैं। जबकि कांग्रेस के बंगाली नेता तकरीबन अनुप नाग के पक्ष में एकजुट दिख रहे हैं। कुल मिलाकर प्रत्याशी की घोषणा के बाद ही चुनावी तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। फिर भी मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच में ही दिख रहा है। 




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