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भोपालपटनम, धनगोल के ग्रामीण कीचड़ भरी सड़क पर चलने को मजबूर
भोपालपटनम, धनगोल के ग्रामीण कीचड़ भरी सड़क पर चलने को मजबूर
Date : 13-Aug-2019

धनगोल के ग्रामीण कीचड़ भरी सड़क पर चलने को मजबूर 

छत्तीसगढ़ संवाददाता
भोपालपटनम, 13 अगस्त।
सड़क निर्माण पर काली मिट्टी और पुलिया निर्माण की अपूर्ण खोदाई, सिंचाई तालाब में स्लूस गेट व केनाल नहीं होना, प्राथमिक शाला भवन और आंगनबाड़ी भवन जर्जर की स्थिति के चलते गांव के लोगों को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। मामला बीजापुर जिले के भोपालपटनम ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत अंगमपल्ली में आश्रित गांव धनगोल का है।

आवागमन का एक मात्र सड़क जिसमें कीचड़ के चलते दोपहिया वाहन व पैदल चलना मुश्किल हो गया है। सड़क निर्माण पीएमजीएसवाई के तहत गुप्ता कन्ट्रक्शन रायगढ़ द्वारा मोटलागुड़ा से कोत्तागुड़ा स्वीकृत राशि 160.36 लाख में लिया गया। गांव के निवासी कुडियम नागैया का कहना है कि सड़क का कार्य यहां के लोकल व्यक्ति के द्वारा ठेके में लेकर कराया जा रहा है, इसमें गुणवत्ताहीन सड़क निर्माण के कारण हम ग्रामीणों को तकलीफ  झेलना पड़ रहा है। जिस सड़क पर पैदल चलना मुश्किल है, वहां 108 या 102 के नहीं आने से उपचार हेतु मरीजों को खटिया में लादकर यह से 4 किमी दूर पेगड़ापल्ली ले जाकर उपचार करवा रहे हंै। पेटी ठेकेदार को गुणवत्ताहीन सड़क निर्माण के संबंध में पूछने पर कहा कि ठेकेदार पैसा नहीं दे रहा है। जब तक पैसा नहीं देगा आगे का कार्य नहीं होगा, मुरम नहीं डालेंगे जैसे गोलमोल जवाब दिया जा रहा है।

सिंचाई तालाब तो है मगर स्लूस गेट व केनाल नहीं। ग्राम धनगोल में 40 वर्ष पूर्व ग्राम पंचायत अंगमपल्ली द्वारा सिंचाई के उद्देश्य से तालाब का निर्माण कराया गया किन्तु निर्माण कार्य एजेंसी तालाब में स्लूस गेट व खेतों में पानी पहुंचने हेतु केनाल का निर्माण करना ही भूल गया।

वेस्ट वेयर का निर्माण भी ऐसी जगह पर बनाया गया जो कि तालाब में पानी भरकर घरों के सामने से होते हुए सड़क को धीरे-धीरे गायब कर रहा है। पिछले वर्ष बारिश के मौसम में तालाब का मेड़ टूट गया था, जिसे वन विभाग द्वारा मरम्मत किया गया। अब तालाब का आलम यहां है कि जितनी गहराई में तालाब की खुदाई की गई थी, वह मिट्टी से आधा भर चुका है।

प्राथमिक शाला व आंगनबाड़ी भवन जर्जर हालत में
प्राथमिक शाला और आंगनबाड़ी भवन अत्यंत जर्जर एवं खतरनाक स्थिति के हालात में है और एक लंबे अंतराल से पड़ा हुआ है। बारिश का पानी छत पर जमा होकर टपक रहा है। भवनों की स्थिति को देखते हुए ग्रामीण अपने बच्चों को 6-7 किमी दूर पढ़ाने को मजबूर है। भवनों को बने कई वर्ष हो रहे हैं किन्तु उन पर विभागों का ध्यान ही नहीं है। 
ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों, जन समस्या निवारण शिविरों, जनदर्शन में तालाब गहरीकरण, स्लूस गेट, केनाल, भवनों का मरम्मत, सड़क निर्माण जैसी समस्याओं पर कई बार आवेदन किया जा चुका है किन्तु आवेदनों पर आज तक कार्रवाई नहीं की गई है। ग्रामवासियों ने सभी समस्याओं के जल्द निराकरण की मांग की है।

 

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