राजनांदगांव

संगीत विवि की कुलपति मोक्षदा चंद्राकर को राज्यपाल ने हटाया
22-Jun-2024 2:40 PM
संगीत विवि की कुलपति मोक्षदा चंद्राकर को राज्यपाल ने हटाया

 दुर्ग आयुक्त राठौर को मिला प्रभार

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

खैरागढ़/राजनांदगांव, 22 जून। खैरागढ़ की इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की कुलपति ममता (मोक्षदा)चंद्राकर को राज्यपाल के आदेश पर पद से हटा दिया गया है। श्रीमती चंद्राकर को कुलाधिपति विश्वभूषण हरिचंदन ने तत्काल प्रभाव से हटाने आदेश जारी कर दुर्ग आयुक्त सत्यानारायण राठौर को विश्वविद्यालय का प्रभार सौंपा है। राठौर ने आदेश के फौरन बाद खैरागढ़ पहुंचकर प्रभार भी ग्रहण कर लिया है।

राजभवन ने शुक्रवार दोपहर को इस आशय के आदेश जारी  किए। श्रीमती चंद्राकर की नियुक्ति पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने की थी। कुलपति के तौर चंद्राकर का कार्यकाल विवादों में घिरा रहा। उनके खिलाफ खैरागढ़ के बांशिदों में काफी नाराजगी रही। कुलपति चंद्राकर के संगीत विवि का एक रायपुर में ऑफ कैंपस खोलने के निर्णय का पुरजोर विरोध हुआ था। इस निर्णय के विरोध में खैरागढ़ शहर में जगह-जगह प्रदर्शन भी हुए थे। वहीं एक सेवानिवृत्त शिक्षक बीआर यादव ने चंद्राकर की नियुक्ति को नियम से परे बताते हुए विरोध जारी रखा।

बताया जा रहा है कि सेवानिवृत्त शिक्षक ने पिछले दिनों राज्यपाल से भेंटकर श्रीमती चंद्राकर के कथित भ्रष्टाचार को लेकर विस्तृत जानकारी दी थी। साथ ही खैरागढ़ विश्वविद्यालय के संस्थापक  परिवार के सदस्यों ने राजभवन में पहुंचकर मौजूदा हालात से कुलाधिपति को अवगत कराया। राज्यपाल के सचिव यशवंत कुमार से भेंट कर विश्वविद्यालय संस्थापक के परिवार  के सदस्यों में भवानी बहादुर, सताक्षी सिंह, उज्जवला सिंह, आर्यव्रत सिंह समेत अन्य लोगों ने राजभवन को कुलपति की कार्यप्रणाली को लेकर बिंदूवार जानकारी दी। बताया जा रहा है कि रिटायर्ड शिक्षक बीआर यादव ने विश्वविद्यालय में श्रीमती चंद्राकर की मनमानी के खिलाफ अनशन भी किया था। इस बीच पद से हटाए जाने के बाद श्रीमती चंद्राकर के कार्यकाल में विश्वविद्यालय में हुए कार्यों की जांच की मांग की जा रही है।

बताया जा रहा है कि कुलपति की हैसियत से विश्वविद्यालय के साजो सजावट में फिजूलखर्ची करने, खैरागढ़ महोत्सव में भ्रष्टाचार और परीक्षा फंड से महोत्सव का कार्यक्रम करने के अलावा अन्य आर्थिक मामलो की जांच हो सकती है। ज्ञात हो कि चंद्राकर के कार्यकाल में संगीत विवि नेक ग्रेडिंग में ए से सी ग्रेड में आ गया था। विश्वविद्यालय की साख इस दौरान काफी नीचे गिर गई।

खैरागढ़ में फूटे पटाखे

विश्वविद्यालय के कुलपति पद से हटाए जाने के प्रशासनिक फैसले की खबर सुनकर खैरागढ़ में श्रीमती चंद्राकर की विदाई का जश्न मनाया गया।

शहर में निर्णय पर खुशी जाहिर करते पटाखों की गूंज सुनाई दी। वहीं विश्वविद्यालय के कर्मचारियों ने भी धमाल के साथ आतिशबाजी की। श्रीमती चंद्राकर के खिलाफ खैरागढ़ शहर की जनता के अलावा कर्मचारियों में भी गुस्सा था। चर्चा है कि कुलपति के तौर पर श्रीमती चंद्राकर ने अपने करीबियों के हित को दृष्टिगत रखकर फैसला किया। बताया जाता है कि विश्वविद्यालय के प्रशासनिक निर्णयों के पीछे परिवार के सदस्यों की अहम भूमिका होती थी। 

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