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पारंपरिक धुनों के बीच गौरी-गौरा की स्थापना, 8 को निकलेगी बारात

Posted Date : 06-Nov-2018

धमतरी, 6 नवंबर। जिलेभर में 5 दिवसीय दिवाली की धूम शुरु हो गई है। शहर समेत ग्रामीण अंचल में गौरा-गौरी जगाने की रस्म पारंपरिक धुनों के बीच चल रही है। यह आयोजन आदिवासी समाज कर रहा है, जिसमें अन्य समाज के लोगों की आस्था भी झलक रही है। 8 नवंबर को गौरा-गौरी की बारात (शोभायात्रा) निकाली जाएगी। गोवर्धन पूजा के दिन भगवान भोलेनाथ व माता पार्वती की प्रतिमा का कोष्टापारा स्थित नंदी चौक के कठौली तालाब में विसर्जन का सिलसिल देर-रात तक चलेगा।  
ऐसे निभाई जाती है पूजा अर्चना की रस्म
छत्तीसगढ़ में दिवाली के साथ गौरा उत्सव मनाने का भी रिवाज है। इस परंपरा का निर्वहन आदिवासी समाज के लोग करते आ रहे हैं। गौरा जगाने के पूर्व महिलाओं के साथ युवतियां जमा होती हैं। बैगा द्वारा विधि-विधान से पूजा-अर्चना करवाने के बाद पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन पर गौरा गीतों के साथ गौरा-गौरी जगाने की रस्म निभाती हैं। गोवर्धन पूजा के दिन दोपहर में यादवबंधु पारंपारिक धुनों के साथ दोहे गाते हुए राउत नाचा कर पर्व की बधाई देंगे और गाय, बछड़े को खिचड़ी खिलाकर गोवर्धन खुंदवाने की रस्म पूरी करेंगे। 
इन स्थानों में विराजेंगी गौरा-गौरी की प्रतिमा 
शहर के जालमपुर गौरा-चौरा, भागवत चौक, भगत चौक, बनियापारा, शिव चौक, रामबाग, आमापारा, सिहावा चौक संभाकर पारा, अधारी नवागांव, हटकेशर, सोरिद, दानीटोला, महिमासागरपारा, विंध्यवासिनी वार्ड, कुम्हारपारा समेत 35 से अधिक स्थान और ग्रामीण अंचल में गौरा-गौरी जगाने की रस्म चल रही है। बैगा द्वारा विधि-विधान के साथ भगवान शंकर व माता पार्वती की पूजा-अर्चना की जा रही है। लक्ष्मी पूजा की रात घर-घर पहुंचकर दीप के लिए तेल मांगने और कलश रस्म होगी। 
गलियों में सुआ नृत्य की टोली 
दिवाली पर्व में सुआ गीत और नृत्य का अलग ही आकर्षण होता है। पर्व के पखवाड़ेभर पूर्व से यह सिलसिला शुरू हो गया है। इन दिनों गली मोहल्लों में सुआ गीत गाकर नृत्य कर रही महिलाओं और बच्चों की टोली का उत्साह देखते ही बन रहा है। इसके अलावा गांव और शहर के गौरा-गौरी चौक में तैयारी को अंतिम रूप दिया जा रहा है। गलियों में शहनाई और ढपली बाजा की गूंज भी सुनाई देने लगी है।
 




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