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पिथौरा, अभ्यारण्य इलाके में पेड़ों की कटाई, वन अधिकार पट्टे का दावा, आरोपियों पर कार्रवाई नहीं
पिथौरा, अभ्यारण्य इलाके में पेड़ों की कटाई, वन अधिकार पट्टे का दावा, आरोपियों पर कार्रवाई नहीं
Date : 09-Nov-2019

अभ्यारण्य इलाके में पेड़ों की कटाई, वन अधिकार पट्टे का दावा, आरोपियों पर कार्रवाई नहीं

रजिंदर खनूजा 
पिथौरा, 9 नवंबर (छत्तीसगढ़)।
बारनयापारा अभ्यारण्य क्षेत्र के जंगल में अफसरों के बदलते ही हरे -भरे मोटे बेशकीमती पेड़ों को काट कर वन अधिकार पत्र पाने की कोशिशें होने लगी है। इस हेतु कोई 10 हेक्टयर जमीन पर लगे हजारो पेड़ों को जड़ से काट कर वहां कब्जा कर उसी जमीन पर अधिकार पत्र देने हेतु आवेदन भी कर दिया गया है। 
ज्ञात हो कि इसी ग्राम ढेबी में कोई तीन वर्ष पूर्व भी ग्रामीणों ने सैकड़ो पेड़ों को काट कर कब्जा कर डाला था। परन्तु ‘छत्तीसगढ़’  में प्रकाशन के बाद वन विभाग हरकत में आया था। जिस की जांच तो हुई परन्तु आरोपियों पर कार्रवाई नहीं की गई।

अभ्यारण्य क्षेत्र में जमीन और वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिए शासन-प्रशासन द्वारा कई कठोर नियम बनाये है। करोड़ों रूपये प्रतिवर्ष खर्च कर सरकार ये प्रयास मात्र जंगल को बचाने के लिए कर रही है। परन्तु विभागीय लापरवाही का नतीजा ये है कि वनों की बेहिसाब कटाई से वनों का रकबा घटने लगा है जिसका सीधा असर पर्यावरण पर पड़ रहा है।
कुछ ऐसा ही बार अभ्यारण्य के ग्राम पंचायत ढेबी में हो रहा है। इस सम्बंध में कुछ ग्रामीणों ने ‘छत्तीसगढ़’  से चर्चा करते हुए बताया कि ग्राम के निवासी पटेल परिवार के चार भाइयों ने मिलकर ग्राम ढेबी से लगे जंगल में बेशकीमती इमारती पेड़ों की अवैध कटाई कर करीबन 20 से 30 एकड़ जंगल जमीन पर कब्जा कर उसे जेसीबी मशीन की मदद से खेती लायक बना लिया है। ग्रामीणों के अनुसार इसकी शिकायत वे गोपनीय रूप से लगातार अधिकारियों से करते रहे हैं, परन्तु उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

अभ्यारण्य में पेड़ कटाई पूर्णत: निषेध
अभ्यारण्य के अलावा वन विभाग की किसी भी भूमि पर बिना इजाजत के किसी भी पेड़ की कटाई नहीं की जा सकती। ग्रामीणों के अनुसार ग्राम के पटेल परिवार के लोग दबंगई करते हुए जंगलों को काट कर उस पर अपना कब्जा भी जमा लिये। इस ग्राम में इन भाइयों का इतना ख़ौफ़ है कि इनके विरुद्ध शिकायत करने से भी ग्रामीण भय खाते हैं। लिहाजा इस ग्राम के किसी भी ग्रामीण ने खुल कर पत्रकारों का सहयोग करने से इंकार कर दिया। परन्तु यही ग्रामीण दबी जुबान से ग्राम दबंगों की हरकतों को बेनकाब कर रहे हैं।

उक्त अवैध कटाई, उस पर एक परिवार के कब्जा करने एवं वन विभाग से ही उसके लिए पट्टा की मांग की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस जमीन पर वे कब्जा कर रहे हैं। उस पर विभागीय कार्यवाही में यदि जुर्माना किया जाता है तब उस जुर्माने को जमा कर आरोपी पट्टे की मांग कर सकते हैं। क्यों कि अवैध कटाई प्रकरण जुर्माने के साथ ही समाप्त हो जाता है। विभाग द्वारा आरोपी को मात्र अवैध कटाई का आरोप मान कर उस पर जुर्माना किया और मामला समाप्त कर दिया। 


जुर्माना जमा करने के बाद ग्रामीण निश्चिंत हो कर अतिक्रमित भूमि पर कब्जा कर लेते हैं।अब इसी भूमि पर पट्टे की मांगग्राम ढेबी के इस घने जंगलों को काटकर खेती लायक बनाया गया है। एक आरोपी बनमाली पटेल ने डिप्टी रेंजर को बताया कि उसने इसी जमीन पर वन अधिकार पत्र(पट्टा) की मांग भी की है। बनमाली पटेल ने बताया कि हमने पट्टा की मांग की है। पटेल ने दावा भी किया कि उन्हें इसका पट्टा मिलना तय है।

40 हजार में कब्जा दे दिया
अज्ञात व्यक्ति द्वारा दी गई घटना की सूचना के बाद बारनयापारा के डिप्टी रेंजर सुरेंद्र सिदार एवं वनरक्षक डहरिया ने जाकर देखा तो कई पेड़ों को काटा जा चुका था। घटना को अवैध कटाई का मामला बता कर अपने अफसरों के निर्देश के बाद विभाग द्वारा मामला दर्ज कर कटे पेड़ों की लकड़ी को जब्ती बनाकर पिथौरा के वन काष्ठगार भेज दिया एवं आरोपियों से बतौर जुर्माना  40 हजार रुपया वसूल किया गया।

वन अफसरों का कहना है कि अब जंगली में हरे भरे पेड़ों को काटकर अतिक्रमण करने वालों पर जुर्माना नहीं किया जाता बल्कि अतिक्रमण कारी पर कठोर कार्यवाही के जेल भेजने का प्रावधान है। 

डिप्टी रेंजर सुरेंद्र सिदार ने बताया कि सेंचुरी क्षेत्र में वनसंपदा की छेडख़ानी, कटाई यहां तक कि पत्ता तोडऩे का अधिकार भी किसी को नहीं होता। परन्तु ग्राम डेबी के बनमाली पटेल एवं इनके तीन अन्य भाइयों ने मिलकर ढेबी से लगे जंगल को काटकर खेती करने के लायक बना दिया है और अभी वर्तमान में वनविभाग की जमीन में जहां पेड़ लगे थे वहां अब खेती लायक भूमि बन चुकी है। मुझसे पहले इस क्षेत्र में पदस्त डिप्टी रेंजर के समय का यह मामला है, इस वजह से मैं ज्यादा नहीं बता सकता। पुराने अफसरों का तबादला होने के कारण नए अफसरों को जानकारी दी गई जिनके मार्गदर्शन में कार्रवाई की गई है।

अभ्यारण के बाहर वालों को जेल
अभ्यारण्य के बाहर संरक्षित वन क्षेत्रों मे कटाई कर अतिक्रमण करने वालों को जेल भेजा जाता है जबकि अभ्यारण्य वन क्षेत्र में अवैध कटाई के बाद भी मात्र जुर्माना कर आरोपियों को छोडऩे के अलावा उन्हें अतिक्रमित भूमि पर पट्टा दिलाने की दिशा में कदम भी बढ़ाया जाता है। 

वन परिक्षेत्र अर्जुनी में इसी तरह के दो मामलो में अतिक्रमण कर रहे चार ग्रामीणों पर कठोर कार्यवाही कर उन्हें जेल भेज कर वन जमीन मुक्त करा ली जाती है। ये मामले अर्जुनी वन परिक्षेत्र के कौहा जुनवानी में कक्ष क्र 323 में अवैध कटाई कर वन भूमि पर कब्जा करने का प्रयास करने वाले दो ग्रामीण मदनलाल एवं भगत राम को वन अधनियम की धारा 33 एवं वन अधिनियम 198 4 की धारा 2 एवं 3 के तहत कार्यवाही कर जेल भेज दिया गया था। इसी तरह इसी परिक्षेत्र में ग्राम नागेड़ी के कक्ष क्र 320 में अवैध कटाई कर अतिक्रमण करने के प्रयास करते ग्रामीण बाबूलाल एवं संतलाल को भी उक्त अधिनियम के तहत गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।

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