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सिरपुर में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध धम्म संगीत व सांस्कृतिक महोत्सव का रंगारंग समापन

Posted Date : 11-Feb-2019

छत्तीसगढ़ संवाददाता

महासमुन्द, 11 फरवरी। महासमुन्द जिले के सिरपुर में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय बौद्ध धम्म संगीत एवं सांस्कृतिक महोत्सव का आयोजन हुआ। महोत्सव में श्रीलंका से भदंत सिवली, सारनाथ से भदंत चंदिमा, सिंगापुर से उपासक अजय रंगारी, बोधगया से भदंत अशोक शाक्य, थाइलैंड से भदंत पीसी सुपाथो, भिक्खूनी संचन, भंते बोधी प्रिया कोलकाता, उत्तर प्रदेश से भंते शीलप्रकाश कुशीनगर आदि सहित करीब पांच सौ से अधिक बौद्ध भिक्षु शामिल हुए।

पहले दिन शनिवार को महोत्सव का शुभारंभ सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के पूर्व अध्यक्ष केजी बालाकृष्णन ने किया। सुबह से देर शाम तक विविध आयोजन हुए। दूसरे दिन रविवार 10 फरवरी को महोत्सव की शुरूआत तीवर देव बुद्ध विहार परिसर में विपश्यना और स्थल भ्रमण से हुई। बाद भोजनदान और धम्महाल में बौद्ध धम्म का आधुनिकीकरण और विज्ञान के साथ संबंध और भगवान बुद्ध एवं उनके धम्म का भविष्य विषय पर व्याख्यान हुआ। मुंबई, पश्चिम बंगाल,  कर्नाटक, केरल, वियतनाम आदि स्थानों से पहुंचे 30 छात्र-छात्राओं ने सिरपुर पर अपने शोधपत्र का वाचन किया। इसके साथ ही सिरपुर को विश्व की सबसे बड़ी बौद्ध विरासत की खोज प्रतिपादित किया। अंतरराष्ट्रीय बौद्ध पर्यटन स्थल सिरपुर में इस तरह के आयोजन निरंतर होने और इसे विश्व धरोहर की सूची में शामिल करने हर स्तर पर प्रयास करने की बात देश-विदेश से पहुंचे हस्तियों और छात्र-छात्राओं ने कही।

             आयोजन से जुड़ी स्नेहा मेश्राम ने बताया कि देश विदेश से पहुंचे बौद्ध भिक्षुओं और स्कालर को यहां की संस्कृति ने खूब लुभाया। पंथी नृत्य, सुआ नृत्य, छत्तीसगढ़ी नृत्य संगीत से खूब समां बंधा। इसके साथ ही गौतम का ज्ञान प्राप्ति पश्चात सात सप्ताह का विवरण और धम्म चक्क प्रवर्तन के संबंध में नृत्य नाटिका की बेहतरीन प्रस्तुति हुई। जिसे देखकर बौद्ध भिक्षुक रोमांचित हो उठे। इन रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति के साथ देर शाम महोत्सव का समापन हो गया।

                गौरतलब हैकि सिरपुर को विश्व धरोहर की सूची में शामिल करने का प्रयास निरंतर जारी है। वर्ष 2013 से 2015 तक निरंतर तीन साल यहां राष्ट्रीय नृत्य एवं संगीत महोत्सव का आयोजन पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के संयोजन में हुआ। इसके बाद वर्ष 2016 और 2018 में दो साल तक सिरपुर में कोई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय आयोजन नहीं हुआ। तब बौद्ध संगठन ने इसका बीड़ा उठाया। वर्ष 2017 में पहला अंतरराष्ट्रीय आयोजन यहां हुआ। 23 से 25 दिसंबर 2017 को यहां पहली बार अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिषद एवं संस्कृति महोत्सव का आयोजन हुआ था।

यह भी बता दें कि सिरपुर के दस किमी की परिधि में बौद्ध स्तूप, सात सौ से अधिक टीले और करीब 100 बौद्ध विहारों में 79 बुद्ध प्रतिमाएं और अवशेष हैं। प्राचीन छत्तीसगढ़ दक्षिण कोशल की राजधानी थी श्रीपुर। महानदी के तट पर बसे इस नगरी में पुर अवशेष हैं। अब यह छोटा सा गांव है। श्रीपुर वर्तमान में सिरपुर का इतिहास ईसा पूर्व 650 से आरंभ होता है। यहां पर ईपू 639 में भारत यात्रा पर आए चीनी बौद्ध भिक्षु हवेनसांग की दक्षिण कोशल यात्रा का वर्णन इतिहास में है। बौद्ध संबंधी शिलालेख, शिलाखंडों की कृतियां, पाषाण प्रतिमाएं यहां पर पुरातत्व उत्खनन से मिली है। इसकी व्याख्या करते हुए पूर्व चीफ  जस्टिस केजी बालाकृष्णन ने कहा कि छत्तीसगढ़ तो वे इसके पहले भी कई बार आए हैं। लेकिन बौद्ध का संगम स्थल सिरपुर आने का यह पहला अवसर है। उन्होंने इस आयोजन की सराहना करते हुए सिरपुर को अंतरराष्ट्रीय धरोहरों की सूची में शामिल करने पर जोर दिया।




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