सरगुजा

दवाईयों का समय पर छिड़काव कर किसान बचा सकते हैं फसल हानि
20-Sep-2020 9:23 PM 13
 दवाईयों का समय पर छिड़काव कर किसान बचा सकते हैं फसल हानि

अम्बिकापुर, 20 सितम्बर। कृषि विज्ञान केंद्र अम्बिकापुर के वरिष्ठ कृषि वैज्ञनिक डॉ. रविन्द्र तिग्गा एवं कृषि विभाग के अधिकारियों के द्वारा वर्तमान में धान के फसलों में कीट-व्याधि को दृष्टिगत रखते हुए क्षेत्र भ्रमण किया गया। भ्रमण के दौरान देखा गया कि उस वर्ष धान का फसल अच्छा है। किसी किसी क्षेत्र में धान की फसल में कीड़े एवं रोग का प्रकोप है। डॉ. तिग्गा ने बताया कि यदि किसान समय पर अनुशंसित दवाइयों का उचित तरीके से उपयोग करें तो कीड़े एवं रोग से होने वाली फसल हानि को बचा सकते हैं। 

 

उन्होंने बताया कि वर्तमान में जिन खेतों में पानी रुक हुआ है वहां सफेद फुदका और भूरा माहूं कीटो का प्रकोप देखने को मिला और धान की बाली निकलने के पहले ही खेत पीला होते हुए जला दिखाई देने लगा। इस स्थिति में खेत से जल्दी पानी निकालकर अनुसंशित दवा जैसे एसिटामाप्रिट एवं एमिडाक्लोप्रिड 5 ग्राम प्रति 15 लीटर पानी मे घोल बनाकर अच्छी तरह छिड़काव करें। इसके साथ साथ धान की वर्तमान अवस्थाओं में शीथ ब्लाईट एवं शीथ रॉट की समस्या भी देखने को मिला। इसमे पानी के ऊपर पौधे के पत्तियो में भूरे रंग के धब्बे बन जाते है और धीरे-धीरे पौधा सूख जाता है। इसके लिए प्रोपिकोनाजोल या हेक्साकोनाजोल या कार्बेंडाजीम दवा 1.5 से 2 ग्राम प्रति लीटर 4 पानी या कासुगामाईसीन दवा 3 से 4 मिलीलीटर प्रतिलीटर पानी के हिसाब से घोल बनाकर अच्छी छिड़काव करें। डॉ. तिग्गा ने बताया कि जहां तना छेदक का प्रकोप है वहां यदि पौधों की ऊंचाई कम हो और आसानी से खेतों में प्रवेश किया जा सके तो किसान प्रोपेनोफास या लैम्डा साईहैलोथ्रिन दवा 1.5 से 2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी या क्लोररइंट्रानिलिप्रोल 5 ग्राम प्रति 15 लीटर पानी के हिसाब से घोल बनाकर छिड़काव करें। यदि पौधे ऊंचे हो और बाली निकलने की अवस्था मे हो तो कार्टेप हाइड्रोक्लोराइड 4 प्रतिशत दानेदार 10 किलोग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से उपयोग करें। दलहन फसलों मे फल्ली भेदक कीटो के प्रकोप से बचाव के लिए ईमामेक्टिन बेंजोएट 0.3 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से घोल बनाकर छिड़काव कर सकते हैं। डॉ. तिग्गा ने बताया कि वर्तमान मौसम में आर्दता और तापमान अधिक होने के कारण कीड़ों एवं रोगों के प्रकोप के लिए अनुकूल है। इसके रोकथाम के लिए किसान खेतों का निरीक्षण करते रहें एवं कीटनाशक का प्रयोग सुबह या शाम को ही करें। तकनीकी अधिकारियों से कीट एवं व्याधियों की पहचान कराकर ही सही कीटनाशक, रोगनाशक का उपयोग करें।

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