बस्तर

किसान मूल्य आश्वासन विधेयक भाजपा के किसान विरोधी चरित्र की ऊपज- दुबे
21-Sep-2020 10:25 PM 4
किसान मूल्य आश्वासन विधेयक भाजपा के किसान विरोधी चरित्र की ऊपज- दुबे

जगदलपुर, 21 सितम्बर। केंद्र सरकार द्वारा कृषि सुधार के नाम पर लाये गए तीन विधेयक और पूरे देश में इनके विरोध के बावजूद विधेयक को पारित करने की अकुलाहट से एक बार फिर से भाजपा का किसान विरोधी चेहरा सामने आया है। छग प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता आलोक दुबे ने कहा है कि देश के किसान, सदन के अंदर विपक्षी दल इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं, राज्य सभा में विधेयक की प्रतियां फाड़ी जा रही है, फिर भी मोदी सरकार इस कानून को बनाने की जिद पर क्यों अड़ी है।

आलोक दुबे ने जारी बयान में कहा है कि सारा देश मान रहा है कि  किसान मूल्य आश्वासन और खेत पर समझौता सेवाएं विधेयक मूलत: किसान विरोधी है। यह बिचौलियों और मुनाफाखोरों को प्रोत्साहन देने वाला है। इस विधेयक के कानून बनने से मंडी व्यवस्था नष्ट हो जाएगी। मंडी में किसानों को उनकी उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलने को सुनिश्चित करने का प्रावधान है। नए विधेयक में कोई भी पेनकार्डधारी व्यक्ति किसान से खरीदी कर सकता है। इस परिस्थिति में किसान शोषण का शिकार होंगे। यह किसानों को बाजार के जोखिम के अधीन सौंपने की साजिश है। इस विधेयक को पारित करवा कर मोदी सरकार,किसानों के प्रति केंद्र सरकार के परम्परा गत कर्तव्य से भागने के प्रयास में है।राज्य सरकारों के माध्यम से समर्थन मूल्य पर कृषि उत्पादों की खरीदी की प्रक्रिया अपनाई जाती है, यह काम राज्य और केंद्र सरकारें मुनाफा कमाने नहीं बल्कि किसानों की मदद के उद्देश्य से करती रही हैं। इस विधेयक के पारित होने पर समर्थन मूल्य पर खरीदी प्रक्रिया भी बंद होने का खतरा है।

    कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि इस विधेयक के साथ ही लाए गये दूसरे विधेयक में तो छोटे,मंझोले किसानों को बर्बाद कर, बड़े कारपोरेट सेक्टर को खेत ठेके में सौंपने का षड्यंत्र है। नए कानून में कम्पनियां, किसानों से उनके खेत ठेके पर लेकर खेती कर सकेंगी। किसानों से ठेके पर खेत लेने वाली कम्पनियाँ किसानों को बराबर का पार्टनर रखेगी तथा उनको मुनाफे का बराबर हिस्सा देगी, इस भागीदारी पर यह विधेयक मौन है। इस कानून के माध्यम से किसानों को उनकी ही ज़मीनों पर मज़दूर बनाने की तैयारी की जा रही है। भाजपा और मोदी जी ने वायदा तो 2022 तक किसानों की आय दुगुनी करने का किया था, लेकिन हकीकत में किसानों को उनकी खेती, किसानी से बेदखल करने का निंदनीय प्रयास केन्द्र सरकार द्वारा किया जा रहा  है।

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