राजनांदगांव

हरित क्रांति से भी ज्यादा क्रांतिकारी साबित होगा किसानों का विधेयक-यादव
22-Sep-2020 9:23 PM 7
 हरित क्रांति से भी ज्यादा क्रांतिकारी साबित होगा किसानों का विधेयक-यादव

विपक्ष भ्रमित कर रहा है किसानों को

'छत्तीसगढ़' संवाददाता

राजनांदगांव, 22 सितंबर। किसान के कल्याण के लिए लोकसभा और राज्यसभा से पारित विधेयक को जिला भाजपा अध्यक्ष मधुसूदन ने किसानों के लिए द्वितीय क्रांति और पहली क्रांति से भी ज्यादा बड़ी कल्याणकारी क्रांति बताया है।

भाजपा जिलाध्यक्ष मधुसूदन यादव ने जारी विज्ञप्ति में कहा कि विपक्ष और कुछ दल व्यक्तिगत कारणों से इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं। जबकि प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कह दिया है कि किसानों के न्यूनतम समर्थन मूल्य यथावत रहेगा। उसे किसी भी तरह से नहीं छेड़ा जा रहा है। प्रधानमंत्री जब इस बात का आश्वासन दे रहे तो विपक्ष का हाय तौबा केवल राजनीति से ही प्रेरित और किसानों को दिग्भ्रमित करने के अतिरिक्त कुछ नहीं है।

श्री यादव ने बताया कि हरित क्रांति के जनक नार्मन बोरलॉग और सुब्रमण्यम के बाद अब सही मायने में किसानों के लिए सबसे बड़ा लाभ और सुविधा की कार्ययोजना किसी ने बनाया है तो नरेंद्र मोदी ने बनाया है, अब तक कृषक अपने फसलों को मंडी में ही बेचने को मजबूर था, किन्तु अब किसान को खुले मार्केट में एमएसपी से अधिक दर पर कीमत मिलेगी तो अब वह कहीं भी बेचने को स्वतंत्र है। किसान को अब उसके उत्पाद का लाभ प्रत्यक्ष प्राप्त होगा, जो बिचौलिये, किसानों के श्रम का लाभ खुद उठा लेते थे। अब नहीं उठा पाएंगे, इसीलिए बिचौलिए के समर्थक अपनी व्यक्तिगत नुकसान को देखकर किसानों को भ्रमित कर रहे हैं।

श्री यादव ने कहा कि कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग से भी किसानों को लाभ ही होगा, क्योंकि उसे अब उसके फसल के खराब होने पर भी उसको अपना तय किया गया कीमत प्राप्त हो जाएगा। अब वह निश्चिंतता से खेती कर सकेगा। फसल के खराब होने से नुकसान की उसको चिंता नहीं होगी। मोदी ने इस विधेयक के माध्यम से किसानों को कुल मिलाकर रक्षा कवच प्रदान किया है।

श्री यादव ने जानकारी दी कि उन्होंने सांसद रहते हुए किसान कल्याण विधेयक को प्राइवेट मेंबर बिल के रूप में प्रस्तुत भी किया था। जिसमें किसानों को अपनी उपज कहीं भी बेच सके, इसकी व्यवस्था का प्रावधान का प्रस्ताव भी दिया था, जो आज साकार भी हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद है, जिन्होंने इस ऐतिहासिक विधेयक को प्रस्तुत करने की इच्छाशक्ति दिखाई है।

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