राजनांदगांव

हड़ताल की भेंट चढ़ा राष्ट्रीय कृमि दिवस
23-Sep-2020 1:00 PM 8
हड़ताल की भेंट चढ़ा राष्ट्रीय कृमि दिवस

नांदगांव के पौने सात लाख बच्चों को नहीं मिली खुराक

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 23 सितंबर।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत कार्यरत संविदा कर्मियों के हड़ताल से राष्ट्रीय कृमि दिवस अव्यवस्था की भेंट चढ़ गई। जिले में एक से 19 वर्षीय बच्चों और युवकों को कृमि दिवस के अवसर पर एलबेंडाजोल की खुराक दी जानी थी, लेकिन एनएचएम कर्मियों के अनिश्चितकालीन हड़ताल और इस्तीफा दिए जाने के कारण इस अभियान का बंठाधार हो गया। 

मिली जानकारी के मुताबिक आंगनबाड़ी के बच्चों  से लेकर स्कूली बच्चों को भी कृमि दिवस के अवसर पर टेबलेट खिलाना था। बताया जा रहा है कि जिले में  6 लाख 60 हजार बच्चों और स्कूली विद्यार्थियों को एलबेंडाजोल की खुराक देने का लक्ष्य रखा गया था।  कोरोना वैश्विक महामारी के कारण स्कूलों में ताले लगे हुए हैं। जबकि आंगनबाडिय़ों में गिनती के बच्चे पहुंच रहे हैं। 

राष्ट्रीय कृमि दिवस में एनएचएम के संविदा कर्मियों की अहम भूमिका रही है। इस कारण स्वास्थ्य महकमे को आज इस विशेष दिन पर अभियान को सार्थक रूप देने में कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा।

मिली जानकारी के मुताबिक समूचे जिले में 1400 आंगनबाड़ी हैं। वहीं 306 उप स्वास्थ्य केंद्र, 54 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तथा 12 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं। 

बताया जा रहा है कि संविदाकर्मियों के हड़ताल का इस अभियान पर प्रतिकूल असर पड़ा है। राजनांदगांव शहर में भी 93 आंगनबाड़ी संचालित हो रही है। वहीं शहर में 3 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी हैं।  

हड़ताल के कारण सभी सीएचसी और पीएचसी में कृमि दिवस के अवसर पर मिलने वाली खुराक से लोग वंचित रह गए। इस अभियान में 400 एमजी की खुराक दिए जाने का प्रावधान है। बताया जा रहा है कि ज्यादातर राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियानों का जिम्मा एनएचएम कर्मियों के कंधे पर रहा है। हड़ताल में चले जाने से स्वास्थ्य विभाग इस अभियान के तहत लोगों तक पहुंचने में नाकाम रहा। 

इधर सीएमओ डॉ. मिथलेश चौधरी ने ‘छत्तीसगढ़’ से कहा कि हड़ताल से किसी भी तरह का इस अभियान का विपरीत असर नहीं पड़ा है। डोर-टू-डोर नौनिहालों और स्कूली बच्चों को खुराक उपलब्ध कराई गई है। इस बीच स्कूली बच्चों की सेहत से जुड़ा यह अभियान हड़ताल के चलते डगमगा गया। स्वास्थ्य विभाग पहले से ही अमले की कमी से जूझ रहा है।
 
एनएचएम कर्मियों की गैरमौजूदगी से यह साफ हो गया कि किसी भी राष्ट्रीयकृत स्वास्थ्य योजना का सफल होना चुनौतीपूर्ण है। स्वास्थ्य विभाग के नियमित अमले पर दूसरी योजनाओं का भार है। ऐसे में एनएचएम कर्मियों की अनुपस्थिति से यह अभियान आज ठंडा पड़ गया।

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