सरगुजा

किसानों के प्रमुख मुद्दों को लेकर भारतीय किसान संघ चला रहा हस्ताक्षर अभियान
28-Oct-2020 9:22 PM 26
  किसानों के प्रमुख मुद्दों को लेकर भारतीय किसान संघ चला रहा हस्ताक्षर अभियान

'छत्तीसगढ़' संवाददाता

अंबिकापुर, 28 अक्टूबर। किसानों के प्रमुख विषयों को लेकर भारतीय किसान संघ पूरे प्रदेश में 2 से 31 अक्टूबर तक हस्ताक्षर अभियान के माध्यम से किसानों के प्रमुख मुददों से सरकार को अवगत कराने का कार्यक्रम चला रहा है तथा हस्ताक्षर प्रपत्र मुख्यमंत्री को सीधे मेल द्वारा भेजे जा रहे है।

हस्ताक्षर अभियान में किसानों के ही मध्य से आई तीन मुख्य मांगों को रखा गया है। छत्तीसगढ़ की प्रमुख फसल धान है और यह प्रदेश की राजनीति का ज्वलंत मुद्दा भी है। तो सहत रुप से पहली मांग धान खरीदी को लेकर ही है और केंद्र सरकार ने भी छत्तीसगढ़ से चावल को कोटा बढ़ाया है, ऐसे में किसान भी बड़ी आशा भरी दृष्टि से सरकार की ओर देख रहे हैं।

प्रदेश के किसान मांग कर रहे हंै कि धान की खरीदी 15 नवंबर से की जाय। इसके साथ किसानों का कहना है कि कृषि में आए नवाचार के कारण किसान अब प्रति एकड़ 20 से 25 क्विंटल धान का उत्पादन ले रहा है। ऐसे में सरकार भी धान लिमिट बढ़ाकर समितियों के माध्यम से 20 क्विंटल की खरीदी करें। पिछली सरकार के समय मक्के की सरकारी खरीदी की जाती थी, इस सरकार ने आते ही उसे बंद कर दिया। मक्का की सरकारी खरीदी बंद पड़ी है। व्यापारियों एवं बिचौलियों को औने पौने दाम में बेचना पड़ रहा है।  किसान संघ की दूसरी मांग है कि मक्का खरीदी पुन: सरकार द्वारा प्रारंभ की जाए।

भारतीय किसान संघ एक अरसे से समर्थन मूल्य पर रबी फसलों की खरीदी की व्यवस्था सरकार द्वारा की जाय यह मांग करता आया है, क्योंकि रबी फसलों का सही मूल्य नहीं मिलने से किसानों ने इसे लगाना ही बंद कर दिया। कुछ वर्षों पूर्व असिंचित खेती वाले किसान उतेरा बोनी पद्धति से तोवरा बटरी आदि की बोआई करते थें। वह उसने पूरी तरह से बंद कर दिया। सिंचित खेती वाले जो किसान गेहू चना आदी फसलों की बोआई करते थे वे सभी रवी में भी धान की दूसरी फसल लेना प्रारंभ कर दिये है। अगर सरकार रबी फसल की खरीदी की व्यवस्था करती है तो किसान पुन: इस ओर लौटेगा तथा असिंचित खेती वाले किसानों की आय भी बढ़ेगी।

छत्तीसगढ़ सरकार पंजाब की तर्ज पर कृषि बिल ला रही है केन्द्र सरकार के कृषि बिल लाने के पूर्व ही भारतीय किसान संघ ने कुछ संशोधनों को लेकर सांसदों को ज्ञापन सौंपा था एवं समितियों के माध्यम से प्रस्ताव कराकर प्रधानमंत्री को मेल भी किया था। अब जब छत्तीतगढ़ सरकार अपना कृषि बिल ला रही है, तो किसान संघ राज्य सरकार से भी कृषि बिल में उनके संसोधनों को रखने मांग किया है, कहा है कि यह पूर्ण रूप से किसान हित में है।

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