रायपुर

दीवाली को रोशन करने परिवार सहित दीए बनाने में जुटे कुम्हार
29-Oct-2020 7:50 PM 29
दीवाली को रोशन करने परिवार सहित दीए बनाने में जुटे कुम्हार

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 29 अक्टूबर।
मिट्टी से जुड़ी संस्कृति की बदौलत जीवन यापन करने वालेे कुम्हार दीपावली को लेकर आशावान हैं और इन दिनों तेजी से दीेए बनाने में जुटे हुए हैं। राजस्थान और कलकत्ता के डिजाइनर दीयों की चुनौती के बीच दीए से अपने हिस्से की रोशनी तलाशने वाले कुम्हारों को इस बात का अफसोस है कि सालों से प्रशासन से दीए की बिक्री के लिए शहर में जगह मांगने के बावजूद उन्हें अब तक दीए की बिक्री के लिए जगह नहीं मिली है। 

रायपुरा के कुम्हार राजू चक्रधारी ने बताया कि नवरात्रि में कलश की मांग न होने के कारण कुम्हारों को भारी नुकसान झेलना पड़ा। अब उनकी आस दीवाली पर टिकी है। घरों घर लक्ष्मी पूजन और दीयों से घरों को रोशन करने की परंपरा के कारण उन्हें उम्मीद है कि कोरोना के बावजूद लोग उत्साह पूर्वक दीवाली मनाएँगें और उनके बनाए दीयों की अच्छी मांग रहेगी। राजू चक्रधारी ने बताया कि इस बार वह 30 हजार दीए बना रहे हैं। पिछले एक महीने से इस काम में उनका पूरा का पूरा परिवार जुटा हुआ है।

रायपुरा में कुम्हार परिवार दीए के  साथ-साथ सजावटी चीजें बना रहे हैं। रायपुरा के  कुम्हारों ने बताया कि माटी कला बोर्ड की ओर से युवा कुम्हारों को टेराकोटा का प्रशिक्षण दिया गया था जिसके कारण वे इंटीरियर को ध्यान में रखते हुए झूमर और नई सजावटी चीजें भी बना लेते हैं लेकिन दीवाली के पहले ज्यादातर कुम्हार दीए ही बनाते हैं। 

नंद चक्र धारी ने बताया कि दीए बनाने का काम महीने भर पहले से शुरु हो चुका है। महिलाएं मिट्टी तैयार करती हैं तो पुरुष चाक पर दीए गढ़ते है। घर के बच्चे दीयों को सुखाने का काम करते हैं। भट्टी लगाने का काम पुरुषों का रहता है। भट्टी से दीए निकालने के काम में घर के सारे सदस्य लगे रहते हैं। दीयों की बिक्री  पुरुष और महिलाएं दोनों ही करते हैं। नंद चक्रधारी ने बताया कि हाल में राजस्थान के सजावटी दीयों की वजह से कुम्हारों द्वारा बनाए गए दियों की मांग कम हुई है लेकिन इसके बावजूद कुम्हार अपने परंपरागत काम से जुड़े हुए हैं। इस बार एक रु. की दर से वह दीए बेचेगें।
 

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