बस्तर

इमारती लकड़ी काटकर वन भूमि पर धान खरीदी केंद्र बनाने का आरोप,
29-Nov-2020 8:19 PM 36
इमारती लकड़ी काटकर वन भूमि पर धान खरीदी केंद्र बनाने का आरोप,

डीएफओ ने जांच कर कार्रवाई के दिए निर्देश

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

जगदलपुर, 29 नवम्बर। बकावंड ब्लाक के अंतर्गत ग्राम पंचायत मालगांव की शासकीय वन भूमि पर करीतगांव के सरपंच व ग्रामीणों द्वारा मिलकर इमारती लकड़ी काटकर धान खरीदी केंद्र बनाने का आरोप मालगांव के ग्रामीणों द्वारा लगाया जा रहा है।

इस संबंध में वनमण्डलाधिकारी बस्तर स्टाइलो मंडावी से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया आपके माध्यम से जो जानकारी हमें मिली थी कि फॉरेस्ट के जमीन पर धान खरीदी केंद्र बनाया जा रहा, जिसे मैंने तुरंत बंद करवाने का आदेश दिया था लेकिन उसके बावजूद भी अगर वहां पर काम चल रहा है, तो यह गलत है। समझाइश देने के बाद भी अगर इस तरह की स्थिति बनी है,तो उन पर कार्रवाई भी की जाएगी।

जानकारी के मुताबिक ग्राम पंचायत मालगांव के ग्रामीणों का आरोप है कि मालगांव के शासकीय वन भूमि पर करीतगांव के सरपंच की शह पर ग्रामीणों द्वारा इमारती पेड़ काटकर उक्त भूमि पर धान खरीदी केंद्र बनाया जा रहा है जिसकी वन विभाग से कोई अनुमति नहीं ली गई है। उसके बाद भी वन अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।

मालगांव के ग्रामीणों द्वारा जब इसका विरोध कर पूछा गया कि आप किस आदेश के तहत पेड़ काटकर यहां खरीदी केंद्र बना रहे हैं तो करीतगांव के सरपंच व ग्रामीण लड़ाई-झगड़ा पर उतर आए और कहा कि हमने फॉरेस्ट के अधिकारियों को जानकारी दे दी है और हमें अनुमति भी दिया गया है।

अपना नाम नहीं छापने की शर्त में मालगांव के कुछ ग्रामीणों ने बताया कि हमने शुरू में ही जब यहां पेड़ काट रहे थे, तब फॉरेस्ट के अधिकारी को बताया था लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।

इस विषय में ‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता ने जब मौके पर जाकर देखा तो निर्माण कार्य के लिए गड्ढे खोदे गए थे। इसको लेकर जब डीएफओ से जानकारी ली गई तो उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं थी। डीएफओ ने तत्काल उस एरिया के संबंधित अधिकारी से फोन पर इस विषय को ले कर जांच कर कार्रवाई के लिए कहा। अधिकारी के कहने पर आनन-फानन में अवैध रूप से किए गए निर्माण कार्य के लिए गड्ढे को तत्काल मिट्टी से भर दिया गया।

मालगांव जनपद सदस्य भोलानाथ नाग ने बताया कि यह जमीन मालगांव के क्षेत्र में आती है, हमसे बिना पूछे ही पेड़ काटकर यहां धान खरीदी केंद्र बनाया जा रहा है, इसका हम सब मिलकर विरोध करते हैं। हम अपने जमीन में धान खरीदी केंद्र बनने नहीं देंगे, इसको लेकर हमने कलेक्टर को भी सीमा सीमांकन के लिए आवेदन दिया है। कलेक्टर साहब से भी अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है हमारे पूर्वज इस जमीन, इस जंगल की देखरेख व रक्षा हमेशा करते आए हैं।

मालगांव ग्रामीण रामेश्वर कश्यप ने बताया कि करीतगांव पंचायत वाले मालगांव की शासकीय जमीन फॉरेस्ट भूमि पर जंगल काटकर लेम्स का निर्माण कर रहे हैं और फॉरेस्ट अधिकारी भी आते नहीं है इसकी शिकायत यहां के नाकेदार को भी की गई है लेकिन अभी तक वह आए नहीं. न जाने कहां ड्यूटी करते हैं और उनकी ड्यूटी क्या है, कभी भी बुलाने से आते ही नहीं है। हम लोग विरोध करते हैं और इस जमीन में हम धान खरीदी केंद्र बनने नहीं देंगे क्योंकि हमारे पूर्वज इस जंगल के रक्षा पीढ़ी दर पीढ़ी करते आ रहे हैं।

मालगांव ग्रामीण हेमराज कश्यप ने बताया कि यह जमीन हमारे पंचायत में आती है। पंचायत से बिना पूछे ही यहां के सरगी के पेड़ काटकर धान खरीदी केंद्र बनाया जा रहा है जिसकी जानकारी हमें व पंचायत को मिली ही नहीं हम इसका विरोध करते है। यदि यह जमीन करीतगांव में आती है तो करीतगांव वाले रिकॉर्ड दिखा दे हम इस जमीन को छोड़ देंगे। पेड़ काटने की जानकारी फॉरेस्ट को है वह चुप हैं और कार्रवाई न कर  छुपते नजऱ आ रहे हैं। हमको जानकारी मिली कि यहां कुछ बन रहा है तो यहां आ कर देखें तो यहां कॉलम के लिए गड्ढा खोदा गया है। फिर दो दिन के बाद उस गड्ढे को भर दिया गया। वहीं करीतगांव के लोग बोल रहे हैं कि यह जमीन उनकी है तो खोदे गए गड्ढों को क्यों भरा गया और निर्माण कार्य क्यों नहीं किया गया यदि उनको अनुमति मिल चुकी है। (बाकी पेज 8 पर)

जनपद उपाध्यक्ष बकावंड रामानुज आचार्य ने बताया कि मालगांव से सहमति लेना या करीतगांव से पूछना है यह तो जनहित का कार्य है। यह जमीन किसकी है हमको जानकारी नहीं है। यह मालगांव की है कि जुनवानी की है या करीतगांव की। यहां के 4 पंचायत के किसानों की सहमति से यह बन रहा है। यह जमीन बीच में है, इसलिए बनाया जा रहा है। आज से 1 साल पहले जुनवानी और करीतगांव एक ही पंचायत हुआ करता था। एक पंचायत होने के कारण जुनवानी को लगता था कि जमीन उनकी है, उस हिसाब से इस जमीन में निर्माण कार्य कर रहे थे। करीतगांव में राजस्व जमीन वर्तमान में नहीं है। जनता के हित के लिए है। इसमें ना तो सरकार ना तो मालगांव ना ही किसी प्रकार से हितग्राही को आपत्ति होनी चाहिए। मैं सभी से निवेदन करुंगा आपसी समझौता से कार्य करें, ताकि किसी को परेशानी ना हो।

करीतगांव सरपंच गुनेश्वर बघेल ने बताया कि मालगांव की जमीन होती तो परमिशन हम लेते। हम तो नहीं जानते कि यह जमीन मालगांव में आती है। 50 वर्षों से यह जमीन ग्राम जुनवानी की है और 4 पंचायत के सहमति से यह बन रहा है। रिकॉर्ड तो हम नहीं देखे हैं हमें नहीं पता, लेकिन हम यह जानते हैं कि यह जमीन ग्राम जुनवानी के क्षेत्र में है। हम लोग धान खरीदी केंद्र बनाने के लिए गड्ढा किए थे लेकिन फॉरेस्ट के अधिकारी द्वारा मना किया गया। फॉरेस्ट वाले बोले कि अभी नहीं बनाओ, आप लोग लेटर दिए हैं आपको जब अनुमति मिल जाएगी तो बनाना विधायक से भी बात हुई है डीएफओ मैडम, विधायक महोदय से बात की है।

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