बिलासपुर

सडक़ चौड़ीकरण के लिए हरे-भरे विशाल पेड़ों की बलि, तुरंत रोक लगाने की मांग
18-Jan-2021 2:11 PM 29
सडक़ चौड़ीकरण के लिए हरे-भरे विशाल पेड़ों की बलि, तुरंत रोक लगाने की मांग

   समाजसेवी व पर्यावरण प्रेमियों ने जिला प्रशासन को सौंपा ज्ञापन   

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 18 जनवरी।
विकास और यातायात व्यवस्था सुधारने के नाम पर शहर की एक और सडक़ से हरे-भरे बड़े वृक्षों की कटाई शुरू कर दी गई है। दयालबंद से शुरू की गई इस कार्रवाई पर रोक लगाने के लिये आज शहर के नागरिकों ने जिलाधीश के नाम पर ज्ञापन दिया। उन्होंने कई उदाहरण देकर बताया है कि इन पेड़ों को काटे बिना ही सडक़ चौड़ी की जा सकती है।

ज्ञात हो कि दयालबंद से जगमल चौक होते हुए लालखदान तक सडक़ को चौड़ा करने के लिये जिला प्रशासन द्वारा वर्षों से हरे-भरे पेड़ों को काटा जा रहा है। इनमें 50 से अधिक बड़े तथा 100 से अधिक मध्यम श्रेणी के पेड़ हैं। प्रशासन का तर्क है कि सडक़ को मध्य से 7-7 मीटर चौड़ा किया जायेगा, जिससे यातायात का दबाव कम होगा।

आज जिला प्रशासन को नागरिकों की ओर से सौंपे गये ज्ञापन में कहा गया कि ये वृक्ष शहर की धरोहर हैं और हरियाली को बचाए रखने में इनका अमूल्य योगदान है। सडक़ चौड़ीकरण कार्य इन्हें बगैर काटे भी किया जा सकता है क्योंकि वृक्ष सडक़ के मध्य से लगभग 7 मीटर की दूरी पर स्थित हैं। यदि सडक़ की चौड़ाई डिवाइडर के दोनों ओर 6-6 मीटर रखी जाए तो सभी वृक्षों को कटने से बचाया जा सकता है। ये वृक्ष फुटपाथ पर आ जाएंगे जो चलने वालों को छाया भी प्रदान करेंगे। सडक़ पर यातायात का दबाव भी बहुत कम है, इस दृष्टि से भी सडक़ की चौड़ाई एक मीटर कम रखने में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं आ सकता। लिंक रोड में भी यातायात दुरुस्त करने के नाम पर दर्जनों हरे-भरे विशाल पेड़ों को काट दिया गया था लेकिन इसका कोई लाभ नहीं हुआ।  शहर में ही ग्राम मोपका में सीपत की ओर सडक़ की चौड़ाई डिवाइडर के दोनों तरफ पांच 5 -5 मीटर है। वहां यातायात में व्यवधान नहीं होता जबकि इस मार्ग पर भारी वाहनों का अत्यधिक दबाव है। दिल्ली, कोलकाता जैसे बड़े शहरों में भी वृक्षों को बचाने के अनेक प्रयास करके उन्हें फुटपाथ पर रखा गया है और सडक़ों की चौड़ाई कम रखी गई है, जबकि वहां यातायात का दबाव हमारे यहां से कई गुना ज्यादा है। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में इन पेड़ों को बचाना एक बड़ा कदम होगा।  

ज्ञापन सौंपने के लिये बड़ी संख्या में पर्यावरण प्रेमी व समाजसेवी पहुंचे थे। ज्ञापन में इंजी. प्रथमेश मिश्र, नवनीत सिंह राठौर डॉ. देवेंद्र सिंह, आर्किटेक्ट देवाशीष घटक, निर्मल अग्रवाल सीए सत्यम आर्य, मनोज शुक्ला, आनंद अग्रवाल, एडवोकेट रणवीर सिंग मरहास, नवदीप सिंह अरोरा, सुबीर राय, जीशान खोखर आदि के हस्ताक्षर हैं। 

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