रायपुर

एम्स में श्रवण जांच शिविर, दूर दराज के रोगियों को परामर्श भी
04-Mar-2021 7:23 PM 34
  एम्स में श्रवण जांच शिविर, दूर दराज के रोगियों को परामर्श भी

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 4 मार्च। विश्व श्रवण दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, रायपुर के ईएनटी विभाग के तत्वावधान में एक दिवसीय हाइब्रिड सीएमई का आयोजन किया गया। इसमें देशभर के प्रमुख ईएनटी विशेषज्ञों ने नवजात बच्चों और व्यस्कों की निरंतर जांच की आवश्यकता बताते हुए कहा कि यदि समय पर सुनने की कम होती क्षमता को पहचान लिया जाए तो इसका प्रभावकारी इलाज संभव है। इसके लिए जिला स्तर पर सुविधाएं प्रदान करने और मेडिकल कालेजों में संपूर्ण इलाज की सुविधा प्रदान करने का सुझाव दिया गया।

सीएमई का उद्घाटन करते हुए एम्स के निदेशक और ईएनटी के विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) नितिन एम. नागरकर ने सभी राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थानों से मिलकर कार्य करने का आह्वान किया। उनका कहना था कि नीति निर्धारक और विभिन्न विभाग मिलकर यदि संयुक्त नीतियां बनाएं तो दुनिया की 15 प्रतिशत कम सुनने वाली जनसंख्या को प्रभावी इलाज प्रदान किया जा सकता है। उन्होंने इसके लिए सभी आयुवर्ग के लोगों की निरंतर जांच का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि यदि श्रवण क्षमता का सही समय पर इलाज नहीं किया जाए तो इसका व्यक्ति के ऊपर सामाजिक, आर्थिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ सकता है।

एम्स देवघर के निदेशक प्रो. सौरभ वार्ष्णेय ने कहा कि भारत में 90 करोड़ मोबाइल फोन उपलब्ध हैं और अधिकतर भारतीय डिजिटल साक्षर भी हैं। ऐसे में टेली ऑटोलॉजी का प्रयोग कर श्रवण क्षमता का उपचार करने का प्रयास किया जा सकता है। उन्होंने भारत के विस्तृत और दुर्गम भौगोलिक स्वरूप का जिक्र करते हुए कहा कि यहां हाइब्रिड मॉडल से ही इस चुनौती का मुकाबला किया जा सकता है।

एसोसिएट प्रोफेसर रूपा मेहता ने व्यस्कों खासकर पुलिस, ट्रैफिक पुलिस, खदानों में काम करने वालों को श्रवण क्षमता की निरंतर जांच कराने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि उम्र के प्रत्येक दशक के बाद श्रवण क्षमता की जांच करानी चाहिए और 50 वर्ष की आयु के बाद प्रत्येक तीन वर्ष में जांच अवश्य करवाई जाए।

एसोसिएट प्रोफेसर रिपु दमन अरोड़ा ने नवजातों की जन्म के बाद एक माह के अंदर श्रवण क्षमता की जांच कराने और इसके लिए आवश्यक इलाज की सुविधाओं पर प्रकाश डाला। डॉ. लोकेश कुमार सिंह ने कम श्रवण क्षमता की वजह से होने वाली मनोवैज्ञानिक समस्याओं के बारे में बताया।

इसमें मौलाना आजाद मेडिकल कालेज के डॉ. अरूण अग्रवाल, डॉ. सतीश सतपुते, एम्स रायपुर, डॉ. अमित गोयल, एम्स जोधपुर, डॉ. क्रांति भावना, एम्स पटना, डॉ. सी. प्रीतम, एम्स भुवनेश्वर और डॉ. राकेश कुमार, एम्स, दिल्ली ने भी प्रस्तुति दी। इसमें प्रो. आलोक अग्रवाल, डॉ. अजॉय बेहरा और मोनालीसा जाटी ने भी भाग लिया।

उप्र के रोगी ने कोक्लीयर इंप्लांट से पाई दोबारा सुनने की क्षमता

उत्तर प्रदेश के 25 वर्षीय पुरुष रोगी ने मलेरिया और टाइफाइड की वजह से अपने सुनने की क्षमता को खो दिया था। देशभर के प्रमुख निजी अस्पतालों में दिखाने के बाद भी कोई चिकित्सक उसके सुनने की क्षमता को दोबारा लौटाने का भरोसा नहीं दिला पाया। इसके बाद रोगी ने एम्स रायपुर के ईएनटी विभाग में संपर्क किया जहां प्रो. नागरकर के नेतृत्व में चिकित्सकों ने कोक्लीयर इंप्लांट लगाया। अब यह रोगी पूरी तरह से सुन सकता है। वह ईएनटी के चिकित्सकों का आभार प्रकट कर रहा है जिनकी वजह से उसे सुनने की क्षमता दोबारा मिल पाई।

ईएनटी कैंप में 40 रोगियों का हुआ चैकअप

एम्स के राम नगर स्थित अर्बन हैल्थ ट्रेनिंग सेंटर पर मंगलवार को विश्व श्रवण दिवस की पूर्व संध्या पर ईएनटी चैकअप कैंप आयोजित किया गया। इसमें 40 रोगियों के कान-नाक और गला का चैकअप कर उन्हें चिकित्सकीय परामर्श दिया गया। इस अवसर पर कान की निरंतर सफाई, नहाते समय सावधानी रखने और ईयरफोन की मदद से ज्यादा तेज संगीत न सुनने की सलाह दी गई। इसमें प्रो. नागरकर के निर्देशन में चिकित्सकों ने सभी का परीक्षण किया।

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